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Dec 15, 2015

चल चल चल रे-सबसे बड़ा सुख १९७२

जब जब पुरानी गलियों से गुजरने का मौका मिलता है
तो रोमांच के साथ एक टीस सी भी उभर आती है. खैर
रोमांच की बात की जाये जो होता ही है. पुराने साथी
मिलते हैं, पुरानी यादें ताज़ा हो जाती हैं. उस समय पता
चलता है आप समय के कितने पड़ावों को पार कर चुके
हैं या दूसरे शब्दों में कहें-आपके जीवन सफर के रील
घूम सी जाती है ऐसे वक्त.

बरसों पहले इनॉक डेनिएल्स/सुनील गांगुली के गिटार के
इन्स्ट्रुमेन्टल बजा करते थे आकाशवाणी पर. उनमें से
एक जिसकी धुन सदैव अक्र्सष्ट किया करती थी वो है-
फिल्म सबसे बड़ा सुख का गीत-चल चल रे –मन्ना डे
का गाया हुआ. आज आपको वही गीत सुनवाते हैं जो
शायद ब्लॉग मित्रों में से सफ़ेद बालों वाले तो पहचान
ही लेंगे. जैसे अंग्रेजी में नाउन के प्रकार में एब्स-ट्रैक्ट
नाउन होता है वैसा ही कुछ सलिल चौधरी का संगीत
है, ऐसा होने के बावजूद ये आपको चमत्कृत करता है
समय समय पर.



गीत के बोल:

चल चल चला रे
प्याए मन मेरे मुझे अब न छल रे
ख्वाबों में उलझे तू ये न समझे
ख्वाबों में उलझे तू ये न समझे
कहाँ है कहाँ है कहाँ है
तेरा सबसे बड़ा सुख
तेरा सबसे बड़ा सुख
तेरा सबसे बड़ा सुख

जग है बड़ा अलबेला
लगा है यहाँ एक मेला
जग है बड़ा अलबेला
लगा है यहाँ एक मेला
संभल संभल कर यहाँ से निकल
ना मैला हो आँचल

चल चल चल रे
प्याए मन मेरे मुझे अब न छल रे
ख्वाबों में उलझे तू ये न समझे
ख्वाबों में उलझे तू ये न समझे
कहाँ है कहाँ है कहाँ है
तेरा सबसे बड़ा सुख
तेरा सबसे बड़ा सुख
तेरा सबसे बड़ा सुख


सपनों के लेकर झूले कितने यहाँ पथ भूले
सपनों के लेकर झूले कितने यहाँ पथ भूले
डगर डगर पे है ताशों का नगर
ठहर न मन चंचल

चल चल चल रे
प्याए मन मेरे मुझे अब न छल रे
ख्वाबों में उलझे तू ये न समझे
ख्वाबों में उलझे तू ये न समझे
कहाँ है कहाँ है कहाँ है
तेरा सबसे बड़ा सुख
तेरा सबसे बड़ा सुख
तेरा सबसे बड़ा सुख
..................................................
Chal chal chal re-Sabse bada such 1972

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Jan 10, 2010

छोड़ चली घर तेरा -मेरे भैया १९७२

१९७२ से ही एक और गीत। ये गीत एक "Tear Jerker " है ।
योगेश के लिखे गीत को संगीतबद्ध किया है सलिल चौधरी ने।
गीत गा रही हैं लता मंगेशकर और जो नायिका परदे पर
दिखाई दे रही हैं उनका नाम नाज़िमा है। नाज़िमा कई फिल्मों में
सहायक अभिनेत्री की भूमिका कर चुकी हैं। अनीता गुहा दूसरा जाना
पहचाना चेहरा है इस गीत में। फिल्म में विजय अरोरा भाई की
भूमिका में हैं जिसकी बहिन की शादी हो रही है इस गीत में।
बच्चों के पिता की भूमिका में जो कलाकार हैं उनका नाम है
बिपिन गुप्ता जिन्होंने अधिकतर फिल्मों में पिता की भूमिका
ही निभाई है। ये एक ऐसा कम सुना हुआ गीत है जो प्रशंसा
का हकदार है ।



गीत के बोल:

छोड़ चली घर तेरा बाबुल
पिया के घर जाना,बाबुल
पिया के घर जाना
छोड़ चली घर तेरा
हम्म ........
छोड़ चली घर तेरा

बचपन, मेरा बचपन
तेरे द्वारे आ के खेला
बचपन, मेरा बचपन
तेरे द्वारे आ के खेला
चितवन, मान की चितवन
देखे बीती यादों का मेला
चल दी मैं तो जैसे पंछी
कर जाए रैन बसेरा
छोड़ चली घर तेरा

छोड़ चली घर तेरा बाबुल
पिया के घर जाना,बाबुल
पिया के घर जाना
छोड़ चली घर तेरा

अँखियाँ, गीली अँखियाँ
रिमझिम रिमझिम नीर बहती
अँखियाँ, गीली अँखियाँ
रिमझिम रिमझिम नीर बहती
सखियाँ प्यारी सखियाँ
चलते चलते गले लगाती
तन के पास उजाला देखे
मन के पास अँधेरा
छोड़ चली घर तेरा

छोड़ चली घर तेरा बाबुल
पिया के घर जाना,बाबुल
पिया के घर जाना
छोड़ चली घर तेरा

मैया तुलसी मैया
कैसे होगी संध्या बाती
मैया तुलसी मैया
कैसे होगी संध्या बाती
भैया मेरे भैया
कैसे तुझको मैं समझती
जाने तेरे इस जीवन में
कब हो नया सवेरा
छोड़ चली घर तेरा

छोड़ चली घर तेरा बाबुल
पिया के घर जाना,बाबुल
पिया के घर जाना
छोड़ चली घर तेरा

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