नदिया किनारे-अभिमान १९७३
की. बरसों हो गए इसके बारे में पूछते पूछते ज्ञानियों से, कोई
कहे “हे राय” कोई बतलावे “हे राई” कोई कहे “हेर आई”
“हे जीरा” सुनने को मेरे कान तरस गए इसके बाद तो.
राई का मतबल तो सीधा जो मैंने समझा वो है-मसाले में प्रयुक्त
होने वाला गोल काले रंग का दाना जो छौक लगाने या अचार
बनाने में प्रयोग होता है.
अब राई तो कंगना में आने से रही. नायिका पानी भरने गयी
नदी तट पर. एक बार तो वो ‘हे राय’ कहते हुए घड़े को माथे
से लगाती है, मानो कोई राय साहब का भजन गा रही हो.
हेर के ढेर सारे अर्थ हैं-आसुरी माया, किरीट, खोज तलाश, ढूँढना,
आखेट और हल्दी. इधर गीतकार का अभिप्राय किस अर्थ से है
समझें थोडा. लता मंगेशकर उसको “हेर आये” जैसा गा रही हैं.
एक दो बार “हे राये” सुनाई देता है. हो सकता है “हेर आये”
सही शब्द हों. ये हेर वही शब्द है जो हेर-फेर में प्रयुक्त होता
है. राई का एक अर्थ राजसी बताया गया है.
पाठकों से विनती है इस मामले में मेरी मदद करें. विशेषकर
मजरूह साहब के भक्तों से उम्मीद है मदद की. मुझ अज्ञानी
को एनलाईटन करें.
गीत के बोल:
हे, नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
ऐसे उलझ गए, अनाड़ी सजना
ऐसे उलझ गए, अनाड़ी सजना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
काहे पनघट ऊपर, गई थी चल के अकेली
मारे हँस हँस ताना, सारी सखियाँ सहेली
गोरी और जाओ न मानो कहना
गोरी और जाओ न मानो कहना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
अब खड़ी खड़ी सोचूँ
खड़ी खड़ी सोचूँ
देखी है सास ननदिया
सब का करी हो बहाना
अब तो सूनी कलाई
लई के चोरी चोरी जाना
भारी पड़ा रे पिया से मिलना
भारी पड़ा रे पिया से मिलना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
ऐसे उलझ गए, अनाड़ी सजना
ऐसे उलझ गए, अनाड़ी सजना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
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Nadiya Kinare-Abhimaan 1973

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