तेरी निगाहों पे मर मर गए-शबनम १९६४
थे ओर्केस्ट्रा के कार्यक्रमों के ज़माने में. सरल होने की वजह
से उनके गीत बहुत से लोग गुनगुना लिया करते. ये गीत
मैंने कई ओर्केस्ट्रा कार्यक्रमों में सुना. गीत का मुखडा और
अंतरे दोनों आकर्षक हैं इस वजह से इसे सुनने में आनंद
आता है. एक कम जाने पहचाने गीतकार जावेद अनवर ने
इसके बोल लिखे हैं और धुन बनाई है उषा खन्ना ने. फिल्म
शबनम में महमूद प्रमुख कलाकार हैं. फिल्म के २-३ गीत
प्रसिद्ध हुए हैं. ये गीत भी प्रसिद्ध गीतों में से एक है, मान
लीजिए.
गीत के बोल:
तेरी निगाहों पे मर मर गये हम
बांकी अदाओं पे मर मर गये हम
क्या करें, क्या करें, क्या करें
जुल्फों में ले के काली रात चले
सारा जमाना लिये साथ चले
ऐसे में जीने का मज़ा है सनम
आँखों से तेरी मेरी बात चले
बेवफ़ा एक निगाह देख ले, देख भी ले
तेरी निगाहों पे मर मर गये हम
वल्लाह बेघर हूँ, बेनाम हूँ मैं
दिल ने जो भेजा वो सलाम हूँ मैं
साक़ी की जिसपे नज़र ना हुई
ऐसा ही प्यासा एक जाम हूँ मैं
बेवफ़ा एक निगाह देख ले, देख भी ले
तेरी निगाहों पे मर मर गये हम
तेरी अदा का तो जवाब नहीं
मेंरी वफ़ा का भी हिसाब नहीं
सूरत तुम्हारी बड़ी खूब सही
दिल तो हमारा भी खराब नहीं
बेवफ़ा एक निगाह देख ले, देख भी ले
तेरी निगाहों पे मर मर गये हम
बांकी अदाओं पे मर मर गये हम
क्या करें, क्या करें, क्या करें
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Teri nigahon pe-shabnam 1964
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