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Aug 31, 2017

हाय तबस्सुम तेरा-निशान १९६५

सन १९६५ की फिल्म निशान में संजीव कुमार और नाज़िमा की
जोड़ी है. संजीव कुमार की बतौर मुख्य नायक ये पहली फिल्म थी.
इस फिल्म से रफ़ी का गाया जो गीत आप सुन चुके हैं उसका अब
आशा वाला तर्जुमा सुनते हैं.

इसे भी जावेद अनवर ने लिखा है और धुन तैयार की है उषा खन्ना
ने.



गीत के बोल:

हाय तबस्सुम तेरा
हाय तबस्सुम तेरा
धूप खिल गई रात में
या बिजली गिरी बरसात में
हाय तबस्सुम तेरा
हाय तबस्सुम तेरा


हँसना तेरा दिलनशीं था
धोखा था फिर भी हसीं था
हँसना तेरा दिलनशीं था
समझी नज़र जिसको सहर
था एक झूठा सवेरा

हाय तबस्सुम तेरा
धूप खिल गई रात में
या बिजली गिरी बरसात में
हाय तबस्सुम तेरा
हाय तबस्सुम तेरा

आँखों में है वो ज़माना
धुंधला सा वो एक फ़साना
आँखों में है वो ज़माना
अब वो हँसी है गैर की
जिसपे कभी हक़ था मेरा

हाय तबस्सुम तेरा
धूप खिल गई रात में
या बिजली गिरी बरसात में
हाय तबस्सुम तेरा
हाय तबस्सुम तेरा
...................................................................
Haye tabassum tera(Asha)-Nishaan 1965

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Apr 24, 2015

तेरी निगाहों पे मर मर गए-शबनम १९६४

मुकेश के गाने गुनगुनाने वाले लोग आसानी से मिला करते
थे ओर्केस्ट्रा के कार्यक्रमों के ज़माने में. सरल होने की वजह
से उनके गीत बहुत से लोग गुनगुना लिया करते. ये गीत
मैंने कई ओर्केस्ट्रा कार्यक्रमों में सुना. गीत का मुखडा और
अंतरे दोनों आकर्षक हैं इस वजह से इसे सुनने में आनंद
आता है. एक कम जाने पहचाने गीतकार जावेद अनवर ने
इसके बोल लिखे हैं और धुन बनाई है उषा खन्ना ने. फिल्म
शबनम में महमूद प्रमुख कलाकार हैं. फिल्म के २-३ गीत
प्रसिद्ध हुए हैं. ये गीत भी प्रसिद्ध गीतों में से एक है, मान
लीजिए.



गीत के बोल:

तेरी निगाहों पे मर मर गये हम
बांकी अदाओं पे मर मर गये हम
क्या करें, क्या करें, क्या करें

जुल्फों में ले के काली रात चले
सारा जमाना लिये साथ चले
ऐसे में जीने का मज़ा है सनम
आँखों से तेरी मेरी बात चले
बेवफ़ा एक निगाह देख ले, देख भी ले

तेरी निगाहों पे मर मर गये हम

वल्लाह बेघर हूँ, बेनाम हूँ मैं
दिल ने जो भेजा वो सलाम हूँ मैं
साक़ी की जिसपे नज़र ना हुई
ऐसा ही प्यासा एक जाम हूँ मैं
बेवफ़ा एक निगाह देख ले, देख भी ले

तेरी निगाहों पे मर मर गये हम

तेरी अदा का तो जवाब नहीं
मेंरी वफ़ा का भी हिसाब नहीं
सूरत तुम्हारी बड़ी खूब सही
दिल तो हमारा भी खराब नहीं
बेवफ़ा एक निगाह देख ले, देख भी ले

तेरी निगाहों पे मर मर गये हम
बांकी अदाओं पे मर मर गये हम
क्या करें, क्या करें, क्या करें
…………………………………………
Teri nigahon pe-shabnam 1964

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Jan 1, 2010

निगाहों की जादूगरी-शबनम १९६४

इस गीत का विडियो कुछ समय पहले तक मैंने देखा यू ट्यूब पर।
ये है फिल्म शबनम से लता मंगेशकर का गाया हुआ गीत जो इस
फिल्म के गीतों में से सबसे ज्यादा पसंद आने वाला गीत है। किसी
ने एक बार पूछा कि मुझे गायिकाओं की आवाजें इतनी पसंद क्यूँ हैं,
इस पर मेरा जवाब था-ये कुदरती है, मैं पुरुष हूँ, इसलिए मुझे सबसे
ज्यादा स्त्री ध्वनियाँ पसंद हैं। वैसे सभी गायक गायिकाओं के गीत मैं
सुनता हूँ , इसमें नामचीन गायकों के नाम के अलावा गुमनाम से
कलाकारों के भी नाम हैं। उषा खन्ना की बढ़िया धुनों में इसकी
गिनती करता हूँ मैं।



गीत के बोल:

निगाहों की जादूगरी
अदाओं की ये दिलबरी
यूँ ही नहीं खुदा की कसम
कोई तो है मेरा भी सनम

निगाहों की जादूगरी
आ, आ आ आ आ आ आ आ

बहके कदम हैं मेरे तो बिन पिए
अरमान हैं मेरे, के जलते दिए
बहके कदम हैं मेरे तो बिन पिए
अरमान हैं मेरे, के जलते दिए
कहती है धड़कन के आएगा वो
तडपूं मैं हमेशा जिसके लिए

आ, आ आ आ आ आ आ आ

निगाहों की जादूगरी
अदाओं की ये दिलबरी
यूँ ही नहीं खुदा की कसम
कोई तो है मेरा भी सनम

निगाहों की जादूगरी

कोई तो जहाँ में दीवाना है मेरा
किसी के तो लैब पे फ़साना है मेरा
कोई तो जहाँ में दीवाना है मेरा
किसी के तो लैब पे फ़साना है मेरा
माने ना माने ज़माने की ख़ुशी
किसी के तो दिल में ठिकाना है मेरा

आ, आ आ आ आ आ आ आ

निगाहों की जादूगरी
अदाओं की ये दिलबरी
यूँ ही नहीं खुदा की कसम
कोई तो है मेरा भी सनम

निगाहों की जादूगरी

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Dec 30, 2009

ये तेरी सादगी ये तेरा बाँकपन-शबनम १९६४

महमूद के खाते में कई रोमांटिक गीत आये। इसमें से कुछ हास्य का
पुट लिए हुए थे तो कुछ गंभीर किस्म के रोमांटिक गीत। इस गीत को
सुनने में और देखने में थोडा अलग अनुभव होता है। गाने में जो भी
गंभीरता बाकी थी वो लोकप्रिय सवारी के आते ही गायब हो जाती है ।
लक्ष्मी नाम वाली अभिनेत्रियाँ बहुत सी हैं हिंदी फिल्मों में, अधिकतर
दक्षिण भारत से आई हुई। इस फिल्म में विजय लक्ष्मी नाम की अभिनेत्री
हैं जो परदे पर महमूद के साथ दिखाई दे रही हैं। गीत लिखा है जावेद अनवर
ने और इसकी धुन बनायीं है उषा खन्ना ने।
.........



गाने के बोल:

ये तेरी सादगी ये तेरा बाँकपन
ये तेरी सादगी ये तेरा बाँकपन
जान-ए-बहार जान-ए-चमन
जान-ए-बहार जान-ए-चमन, हाय
तौबा शिकन, तौबा शिकन, तौबा शिकन

चाल में शोखियाँ या नशीली बिजलियाँ
चाल में शोखियाँ या नशीली बिजलियाँ
हर तरफ़ ये शोर है गिर पड़ेगा आस्मां
पर तेरी ख़ामोशी, अल्लमा, अल्लमा

ये तेरी सादगी ये तेरा बाँकपन
जान-ए-बहार जान-ए-चमन, हाय
तौबा शिकन, तौबा शिकन, तौबा शिकन

यूँ ख़फ़ा न होइये सुर्ख गालों की क़सम
यूँ ख़फ़ा न होइये सुर्ख गालों की क़सम
प्यार होगा और दूना, और भी तडपेंगे हम
ये शरम ये हया, मर्हबा, मर्हबा

ये तेरी सादगी ये तेरा बाँकपन
जान-ए-बहार जान-ए-चमन, हाय
तौबा शिकन, तौबा शिकन, तौबा शिकन

तिरछी नज़रों से न देखो, आशिक़-ए-दिल्गीर को
तिरछी नज़रों से न देखो, आशिक़-ए-दिल्गीर को
कैसे तीर अँदाज़ हो, सीधा तो कर लो तीर को
ये गया दिल मेरा, अल्विदा, अल्विदा

ये तेरी सादगी ये तेरा बाँकपन
जान-ए-बहार जान-ए-चमन, हाय
तौबा शिकन, तौबा शिकन, तौबा शिकन

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Mar 18, 2009

अपने लिए जिए तो क्या जिए- बादल १९६६

फिल्म बादल एक सन १९६६ की फिल्म है जो कब आई कब गयी
शोध का विषय हो सकता है। ये रेडियो पर कभी कभार बजने वाला
गीत, मगर, किसी परिचय का मोहताज़ नहीं है। मन्ना डे के गाये
बढ़िया गीत हम इस ब्लॉग में शामिल करते रहेंगे। फिलहाल इस गीत
के प्रेरणादायक बोलों को सुनकर ऊर्जा महसूस कीजिये। गाने की धुन
बनायीं है उषा खन्ना ने। बोल लिखे हैं जावेद अनवर ने। गाने का दर्शन
वही है 'जियो तो दूसरों के लिए' और अपने जीवन को सार्थक बनाओ।
इसे साधु संत समय समय पर अलग अलग तरह से बतलाते सुनाई देते
हैं।




गाने के बोल:

खुदगर्ज़ दुनिया में ये, इनसान की पहचान है
जो पराई आग में जल जाये, वो इनसान है

अपने लिये जिये तो क्या जिये
अपने लिये जिये तो क्या जिये
तू जी, ऐ दिल, ज़माने के लिये
अपने लिये जिये तो क्या जिये

बाज़ार से ज़माने के,
कुछ भी न हम खरीदेंगे
बाज़ार से ज़माने के,
कुछ भी न हम खरीदेंगे
हाँ, बेचकर खुशी अपनी
लोगों के ग़म खरीदेंगे

बुझते दिये जलाने के लिये
बुझते दिये जलाने के लिये
तू जी, ऐ दिल, ज़माने के लिये
अपने लिये जिये तो क्या जिये

अपनी खुदी को जो समझा
उसने खुदा को पहचाना
अपनी खुदी को जो समझा
उसने खुदा को पहचाना
आज़ाद फ़ितरते इनसां
अन्दाज़ क्यों ग़ुलामाना

सर ये नहीं झुकाने के लिये
सर ये नहीं झुकाने के लिये
तू जी, ऐ दिल, ज़माने के लिये
अपने लिये जिये तो क्या जिये

हिम्मत बुलंद है अपनी
पत्थर सी जान रखते हैं
हिम्मत बुलंद है अपनी
पत्थर सी जान रखते हैं
कदमों तले ज़मीं तो क्या

हम आसमान रखते हैं
गिरते हुओं को उठाने के लिये
तू जी, ऐ दिल, ज़माने के लिये
अपने लिये जिये तो क्या जिये

चल आफ़ताब लेकर चल
चल महताब लेकर चल
चल आफ़ताब लेकर चल
चल महताब लेकर चल
तू अपनी एक ठोकर में
सौ इन्क़लाब लेकर चल

ज़ुल्म और सितम मिटाने के लिये
तू जी, ऐ दिल, ज़माने के लिये
अपने लिये जिये तो क्या जिये
अपने लिये जिये तो क्या जिये

नाकामियों से घबरा के
तुम क्यों उदास होते हो
मैं हमसफ़र तुम्हारा हूँ
तुम क्यों उदास होते हो
हँसते रहो, हँसाने के लिये
तू जी, ऐ दिल, ज़माने के लिये
अपने लिये जिये तो क्या जिये
अपने लिये जिये तो क्या जिये
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Apne liye jiye to kya jiye-Badal 1966

Artist: Sanjeev Kumar

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