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Dec 15, 2017

करा ले साफ़ करा ले-कैद १९७५

किसी भी संस्कृति में कुछ सेन्स वाली कृतियाँ होती हैं तो कई
सेन्सलेस कृतियाँ भी होती हैं. आदमी की अपने को पहचानने
वाली प्रवृत्ति के चलते वो अपने शरीर के सभी पुर्जों को पहचानने
की कोशिश करता है. इसी उपक्रम में उसने कब कान खुजाना
और उससे मैल निकालना शुरू किया ये शोध का विषय हो
सकता है. उसके लिए साधन भी जुटा लिए उसने. हाट बाजार
या मेले में लगने वाले बाजारों में आज भी आपको इसके लिए
बनाये गए औज़ार मिल जायेंगे. एक सेट आता है जिसमें जीभ,
दांत और कान साफ़ करने के औजार होते हैं और ये सेट
ताम्बे का बना होता है.

वैसे आधुनिक आयुष विज्ञानं या अंग्रेजी दवाई पद्धति अनुसार
कान साफ़ करने के ज़रूरत नहीं होती. वो जो मैल नाम का
कुछ कुछ होता है वो दरअसल वैक्स होता है जो कान के परदे
को सुरक्षा प्रदान करने का सामान होता है उसके अलावा परदे
के लिए डैम्पिंग का कार्य भी करता है. ये जब ज्यादा बन जाता
है तो अपने आप बाहर आ जाता है.




गीत के बोल:

करा ले साफ़ करा ले
मेरी जान साफ़ करा ले

..................................................................
Kara le saaf kara le-Qaid 1975

Artists: Mehmood, Jayshri T

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Aug 1, 2017

हम काले हैं तो क्या हुआ-गुमनाम १९६५

महमूद पर फिल्माया गया ये गीत बेहद लोकप्रिय हुआ
था अपने समय में. हैदराबादी अंदाज़ में गाया गया ये
गीत अनूठा है और इसी से प्रेरित हो कर देशप्रेमी फिल्म
में भी ऐसा ही एक गीत रखा गया था.

एक ज़माना था जब महमूद का कद समकालीन नायकों
के बराबर हुआ करता था. उनके लिए फिल्मों में विशेष
भूमिका लिखी जाती थी और उन्हें नायक के बराबर या
नायक से ज्यादा मेहनताना मिला करता था. ऐसा हमने
जगह जगह पढ़ा है और यह कितना सत्य है ये तो बता
पाना मुश्किल काम है.

महमूद को पार्श्व गायन के काफी अवसर मिले हैं हिंदी
फिल्मों में. इस गाने के मूल गायक हैं रफ़ी और साथ
में महमूद की आवाज़ में भी कुछ शब्द हैं. शैलेन्द्र के
लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है शंकर जयकिशन ने.




गीत के बोल:

ख़्यालों में ख़्यालों में
ख़्यालों में ख़्यालों में
जय हंगामा
कहाँ भाग रही तुमें
या अल्लाह काले से डर गए क्या

हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं
हम तेरे तेरे तेरे चाहने वाले हैं
हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं

ये गोरे गालाँ तन्दाना
ये रेशमी बालाँ तन्दाना
ये सोला सालाँ तन्दाना
हाय तेरे ख़यालाँ तन्दाना
हम तेरे तेरे तेरे चाहने वाले हैं
हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं

तुम किधर को जाताईं तन्दाना
क्यूँ पास न आताईं तन्दाना
क्या मार ये बाताँ तन्दाना
दिल तोड़ ये घाताँ तन्दाना
हम तेरे तेरे तेरे चाहने वाले हैं
हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं

आँखां नारंगी की फाँकाँ
बाताँ ज्यूँ सारंगी
चालाँ जैसे मस्त शराबी
हालत रंग-बिरंगी

हम माना ग़रीब हैं तन्दाना
सूरत से अजीब हैं तन्दाना
पर फिर भी नसीब हैं तन्दाना
के तेरे करीब हैं तन्दाना
हम तेरे तेरे तेरे चाहने वाले हैं
हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं
………………………………………………..
Ham kale hain to kya hua-Gumnaam 1965

Artist: Mehmood

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Jul 4, 2016

सुल्तानों का सुल्तान-अलबेला १९७१

शंकर जयकिशन ने किशोर कुमार के लिए काफी गीत बनाये.
उतने नहीं जितने रफ़ी के लिए बनाये, लेकिन बनाये ज़रूर
और उनमें से बहुत से उल्लेखनीय हैं. आज सुनते हैं फिल्म
अलबेला का शीर्षक गीत. वैसे अलबेला शब्द किशोर के दूसरे
गीत में भी आया है जिसे हम आपको सुनवा चुके हैं पहले. 

ए शमशीर निर्देशित इस फिल्म में काफी सारे हास्य कलाकार हैं.
ऐसा लगता है मानो ये फिल्म हास्य कलाकारों को सम्मान देने
हेतु ही बनायीं गयी हो. धुमाल, मोहन चोटी, राजेन्द्रनाथ, मुकरी,
ब्रह्मचारी, असित सेन, जॉनी व्हिस्की, आई एस जौहर के अलावा
इस फिल्म में लीला मिश्रा, दिलीप दत्त, ललिता कुमारी, नम्रता,
अचला सचदेव और रमेश देव जैसे कलाकार मौजूद हैं.

शमशीर ने काफी फिल्मों का निर्देशन किया जिसमें से अधिकाँश
पीरियड फ़िल्में, ऐतिहासिक या फंतासी किस्म की रहीं. अलबेला
उनके निर्देशन वाली आखिरी फिल्म थी. शंकर जयकिशन ने एक
इसी फिल्म के लिए संगीत दिया इसके अलावा शमशीर ने जिनकी
सेवाएं लीं संगीत के लिए वे हैं रोबिन बैनर्जी, सर्दुल क्वात्रा और
उषा खन्ना.

इस गीत को गीत लिखा है हसरत जयपुरी ने.

   


गीत के बोल:

सुल्तानों का सुल्तान
मैं हूँ अलबेला मैं हूँ अलबेला
मैं हूँ अलबेला मैं हूँ अलबेला
राजाओं का राजा मैं दिल का महाराजा
हर जलवे से मैं खेला जी खेला जी खेला
मैं हूँ अलबेला मैं हूँ अलबेला
मैं हूँ अलबेला मैं हूँ अलबेला
राजाओं का राजा मैं दिल का महाराजा
हर जलवे से मैं खेला जी खेला जी खेला
मैं हूँ अलबेला मैं हूँ अलबेला

ओ चुलबुली गुजरिया मुझसे मिला नजरिया
ओ चुलबुली गुजरिया मुझसे मिला नजरिया
ओ मेरे दिल की रानी तेरा हूँ मैं सांवारिया
ए जान तू हमारी ओ फुलझड़ी कुंवारी
तू गोपी और मैं छैला जी छैला जी छैला
मैं हूँ अलबेला मैं हूँ अलबेला
मैं हूँ अलबेला मैं हूँ अलबेला

बेगम ज़मीला बेगम जपता हूँ नाम हर दम
दिल का गुलाब ले ले मैं तेरा जान-ए-आलम
बेगम ज़मीला बेगम जपता हूँ नाम हर दम
दिल का गुलाब ले ले मैं तेरा जान-ए-आलम
मैं तुझको चाहता हूँ तेरी कसम फ़िदा हूँ
मैं मजनू और तू लैला जी लैला जी लैला
मैं हूँ अलबेला मैं हूँ अलबेला
मैं हूँ अलबेला मैं हूँ अलबेला

नखरा तेरा निराला डालूँ गरम मसाला
नखरा तेरा निराला डालूँ गरम मसाला
ऐसा दिखाया ठुमका ठुमके ने मार डाला
है खूब अपनी जोड़ी जैसे चंदा और चकोरी
तू नहला और मैं दहला जी दहला जी दहला
मैं हूँ अलबेला मैं हूँ अलबेला
मैं हूँ अलबेला मैं हूँ अलबेला
राजाओं का राजा मैं दिल का महाराजा
हर जलवे से मैं खेला जी खेला जी खेला
मैं हूँ अलबेला मैं हूँ अलबेला
मैं हूँ अलबेला मैं हूँ अलबेला
…………………………………………………..
Sultanona ka sultan-Albela 1971

Artist-Mehmood

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Oct 2, 2015

आ री आ जा निंदिया-कुंवारा बाप १९७४

किसी दर्दीले गीत का पैरामीटर शायद ये होता है कितने
लोग उसे देख सिनेमा हॉल में आंसू टपकते हैं. स्क्रीन पर
गुब्बारे के आकार के आंसू देख के जनता के भी ५०-१००
ग्राम आंसू निकल ही आते हैं.

प्रस्तुत गीत ऐसा ही एक गीत है जिसमें रिलीज़ के वक्त
मैंने कईयों को हॉल में आंसू बहते देखा था. आज भी टी
वी स्क्रीन प् ही सही जब भी ये गीत बजता है कईयों के
मन को दुखी अवश्य करता है. कहने को ये लोरी जैसा
गीत है मगर इसकी धुन दर्दीली है. मजरूह के गीत की
धुन बनायीं है राजेश रोशन ने.




गीत के बोल:

आ री आ  जा
निंदिया तू ले चल कहीं
उड़नखटोले में
दूर दूर दूर  यहाँ से दूर

मेरा तो ये जीवन तमाम
मेरे यार भरा दुःख से
पर मुझको जहां में मिला
सुख कौन बड़ा तुझसे
तेरे लिए मेरी जान
ज़हर हज़ार मैं पी लूँगा
तज दूंगा दुनिया
एक तेरे संग जी लूँगा
ओ नज़र के नूर
आ री आ  जा
निंदिया तू ले चल कहीं
उड़नखटोले में
दूर दूर दूर  यहाँ से दूर

ये सच है कि मैं अगर
सुख चैन तेरा चाहूँ
तेरी दुनिया से मैं फिर कहीं
अब दूर चला जाऊं
नहीं मेरे डैडी
ऐसी बात फिर से न कहना
रहेगा न जब तू
फिर मुझको भी नहीं रहना
न जा तू हमसे दूर
आ री आ  जा
निंदिया तू ले चल कहीं
उड़नखटोले में
दूर दूर दूर  यहाँ से दूर
…………………………………………………
Aa ri aa ja nindiya-Kunwara Baap 1974

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Apr 24, 2015

तेरी निगाहों पे मर मर गए-शबनम १९६४

मुकेश के गाने गुनगुनाने वाले लोग आसानी से मिला करते
थे ओर्केस्ट्रा के कार्यक्रमों के ज़माने में. सरल होने की वजह
से उनके गीत बहुत से लोग गुनगुना लिया करते. ये गीत
मैंने कई ओर्केस्ट्रा कार्यक्रमों में सुना. गीत का मुखडा और
अंतरे दोनों आकर्षक हैं इस वजह से इसे सुनने में आनंद
आता है. एक कम जाने पहचाने गीतकार जावेद अनवर ने
इसके बोल लिखे हैं और धुन बनाई है उषा खन्ना ने. फिल्म
शबनम में महमूद प्रमुख कलाकार हैं. फिल्म के २-३ गीत
प्रसिद्ध हुए हैं. ये गीत भी प्रसिद्ध गीतों में से एक है, मान
लीजिए.



गीत के बोल:

तेरी निगाहों पे मर मर गये हम
बांकी अदाओं पे मर मर गये हम
क्या करें, क्या करें, क्या करें

जुल्फों में ले के काली रात चले
सारा जमाना लिये साथ चले
ऐसे में जीने का मज़ा है सनम
आँखों से तेरी मेरी बात चले
बेवफ़ा एक निगाह देख ले, देख भी ले

तेरी निगाहों पे मर मर गये हम

वल्लाह बेघर हूँ, बेनाम हूँ मैं
दिल ने जो भेजा वो सलाम हूँ मैं
साक़ी की जिसपे नज़र ना हुई
ऐसा ही प्यासा एक जाम हूँ मैं
बेवफ़ा एक निगाह देख ले, देख भी ले

तेरी निगाहों पे मर मर गये हम

तेरी अदा का तो जवाब नहीं
मेंरी वफ़ा का भी हिसाब नहीं
सूरत तुम्हारी बड़ी खूब सही
दिल तो हमारा भी खराब नहीं
बेवफ़ा एक निगाह देख ले, देख भी ले

तेरी निगाहों पे मर मर गये हम
बांकी अदाओं पे मर मर गये हम
क्या करें, क्या करें, क्या करें
…………………………………………
Teri nigahon pe-shabnam 1964

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Apr 20, 2015

मुत्थु कुलिक्का वारीगला-अनुभवी राजा अनुभवी १९६७

आज स्वाद बदलने के लिए आपको एक तमिल गाना दिखाते
और सुनाते हैं जो फिल्म-अनुभवी राजा अनुभवी से लिया
गया है. ये सन १९६७ की फिल्म है और गीत में जो कलाकार
आपको दिखाई देंगे वे हैं-नागेश और मनोरमा दोनों कलाकारों
के नाम १००० के लगभग फिल्मों में काम करने का रेकोर्ड है.
मनोरमा का चेहरा जाना पहचाना है और आपने उनको एक
न एक बार किसी डब की हुई  फिल्म में अवश्य देखा होगा.

कहते हैं और भी गम हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा, वैसे ही
संगीत के मामले में बहुत कुछ है ऐसा जो हिंदी फिल्म और
हिंदी फिल्म संगीत के बाहर भी बढ़िया है और रहेगा , बस
उस तक पहुँच नहीं है हमारी. गीत गाया है टी एम् एस उर्फ
टीम एम् सौंदरराजन और एल आर ईश्वरी ने. संगीत दिया है
एम् एस विश्वनाथन ने जो एक दिग्गज संगीतकार हैं दक्षिण के.
गीत के बोल है-मुत्थु कुलिक्का वारीगला. बाकी के तमिल भाई
बतलायें.



इस  गीत का हिंदी संस्करण भी सुनवायेंगे साथ ही जो इस गाने
की पैरोडी  जैसा है और मूल गाने से दोयम दर्जे का. महमूद इस
हिंदी गाने में नागेश की नक़ल करते नज़र आते हैं मगर मूल गीत
वाला मज़ा नहीं है. हिंदी गीत के गायक हैं-आशा भोंसले और महमूद.
फिल्म का नाम है दो फूल. संगीतकार हैं आर डी बर्मन. गीत
फिल्माया गया है महमूद और भारती पर. गीत के बोल मजरूह
साहब ने कैसे लिखे ये जानने की मेरी इच्छा है.



हिंदी गीत के बोल:



गीत के बोल:

मुत्थकोड़ी कवाडी हडा, मुत्थकोड़ी कवाडी हडा
अइयो,  मुत्थकोड़ी कवाडी हडा, मुत्थकोड़ी कवाडी हडा
अइयो रे प्यार में जो ना करना चाहा
वो भी मुझे करना पड़ा
हा आ हा आ
मुत्थकोड़ी कवाडी हडा, मुत्थकोड़ी कवाडी हडा
अइयो रे प्यार में जो ना करना चाहा
वो भी मुझे करना पड़ा
अइयोडा अइयो अइयो
मुत्थकोड़ी कवाडी हडा,
अम्मै मुत्थकोड़ी कवाडी हडा

कहता था चाहूँ तुझको जी से
तू तो घबराता है अभी से
अम्मै अम्मै
गले लग जा रे फिर दिखा दूं
अच्छा हाँ
धरती ऊपर है स्वर्ग नीचे
ऊई माँ थोडा तो दुनिया से डर ले
येंडे कर ले येंडे  कर ले
ना माने बेदर्दी अइयोडा
अइयोडा  अइयो अइयो,
मुत्थकोड़ी कवाडी हडा,
अम्मै मुत्थकोड़ी कवाडी हडा
अइयो रे प्यार में जो ना करना चाहां
वो भी मुझे करना पड़ा
अइयो अम्मा
मुत्थकोड़ी कवाडी हडा,
अम्मै मुत्थकोड़ी कवाडी हडा

कर देता है रे मुझे बेकल
कल कल कल कल कल
सीने से गिर के तेरा आँचल
ला हा ला ला हा ला हा ला हा
डगमग चल के न गिर पडूं मैं
फिर क्या
मतवाले मुझको थाम के चल
अम्मा सीना ताने बांहे ताने
ऐसी ये मस्तानी डोले
डोले जैसा दारु का घड़ा
अइयो अम्मा
मुत्थकोड़ी कवाडी हडा,
अम्मो मुत्थकोड़ी कवाडी हडा
अइयो रे प्यार में जो ना करना चाहा
वो भी मुझे करना पड़ा
अइयोडा अम्मै
मुत्थकोड़ी कवाडी हडा,
अम्मा मुत्थकोड़ी कवाडी हडा
अइयो रे प्यार में जो ना करना चाहा
वो भी मुझे करना पड़ा
अइयोडा अइयो अइयो
मुत्थकोड़ी कवाडी हडा,
अम्मै मुत्थकोड़ी कवाडी हडा
अइयो, मुत्थकोड़ी कवाडी हडा,
अइयोडा अम्मै मुत्थकोड़ी कवाडी हडा
अम्मा मुत्थकोड़ी कवाडी हडा
अम्मै मुत्थकोड़ी कवाडी हडा
मुत्थकोड़ी कवाडी हडा
.................................
Muttha kodi kawadi hada-Do Phool 1973

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Dec 22, 2014

ऐ मेरे दिल मत कर किसी पे-अलबेला १९७१

किशोर कुमार का गीत सुने कई दिन हो गए हमें इस ब्लॉग पर.
आज सुनते हैं एक उपदेशात्मक गीत फिल्म अलबेला से. सन
१९७१ की फिल्म अलबेला में महमूद नायक हैं. गीत उन्हीं के
ऊपर फिल्माया गया है.

हास्य कलाकारों ने जब भी संजीदा किरदार निभाने की कोशिश
की, जनता ने उनको अस्वीकार किया. फिल्म उद्योग में एक बार
कोई ठप्पा लग जाये तो उससे पीछा छुडाना मुश्किल होता है.
फिल्म अलबेला मधुर संगीत के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर टिकी
नहीं. गीत ऐसा सुनाई देता है मानो महमूद अपनी व्यथा गा रहे
हों. उस समय का गीत है जब शंकर और जयकिशन अलग अलग
संगीत दे रहे थे. ये धुन जयकिशन की बनाई हुई है.




गीत के बोल:

ऐ मेरे दिल मत कर किसी पे ऐतबार
हर कदम पे हैं धोखे हज़ार
ऐ मेरे दिल मत कर किसी पे ऐतबार
हर कदम पे हैं धोखे हज़ार
ऐ मेरे दिल मत कर किसी पे ऐतबार

अलबेले आज़ाद परिंदे
मस्ती में तू गाता चल
पी ली खा ले प्यार का दाना
झूम झूम लहराता चल
अरे पी ली खा ले प्यार का दाना
झूम झूम लहराता चल

ऐ मेरे दिल मत कर किसी पे ऐतबार
हर कदम पे हैं धोखे हज़ार
ऐ मेरे दिल मत कर किसी पे ऐतबार
हर कदम पे हैं धोखे हज़ार
ऐ मेरे दिल

निर्धन की कोई बात न पूछे
दौलत के सब बंदे हैं
मनमानी करते हैं
ज़ालिम ऑंखें रख कर अंधे हैं
मनमानी करते हैं
ज़ालिम ऑंखें रख कर अंधे हैं

ऐ मेरे दिल मत कर किसी पे ऐतबार
हर कदम पे हैं धोखे हज़ार
ऐ मेरे दिल मत कर किसी पे ऐतबार
हर कदम पे हैं धोखे हज़ार
ऐ मेरे दिल
………………………………………………………..
Ae mere dil-Albela 1971

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Jul 17, 2011

बहारों थाम लो अब दिल-नमस्ते जी १९६५

जी एस कोहली एक गुणी संगीतकार थे. वे ओ पी नय्यर के सहायक
भी रहे. उनके संगीत में कहीं कहीं ओ पी नय्यर के संगीत की छाप
सुनाई पढ़ती. इस गीत में मगर आप पाएंगे कि शैली कल्याणजी आनंदजी
की शैली के नज़दीक है. घंटियों की टुनटुनाहट के साथ गीत शुरू होता है.

बतौर स्वतंत्र संगीत निर्देशक उन्होंने कई फिल्मों में संगीत दिया. नमस्ते जी
फिल्म भी एक है जिनमें उनके संगीतबद्ध गीत हैं. महमूद और अमिता पर
फिल्माए गए इस युगल गीत को लिखा अनजान ने, गाया है मुकेश और
लता मंगेशकर ने.

नायिका अमिता कुछ अच्छी 'ऐ' ग्रेड फ़िल्में करने के बाद 'बी' ग्रेड फिल्मों
में दिखाई देने लगीं और धीमे धीमे फ़िल्मी दुनिया से गायब सी हो गयीं.

फिल्म नमस्ते जी को भी बी या सी ग्रेड फिल्मों में गिना जाता है. फिल्म का
ये सबसे लोकप्रिय गीत है जो यहाँ प्रस्तुत है.





गीत के बोल:


बहारों थाम लो अब दिल मेरा महबूब आता है
हो शरारत कर न नाज़ुक दिल शरम से डूब जाता है

बहारों थाम लो अब दिल

क़हर अंदाज़ हैं तेरे, क़यामत हैं तेरी बातें
हो ओ ओ ओ
हो मेरी तो जान ले लेंगी ये बातें ये मुलाक़ातें
मुलाक़ातें
सनम शरमाए जब ऐसे मज़ा कुछ और आता है
हो शरारत कर न नाज़ुक दिल शरम से डूब जाता है

बहारों थाम लो अब दिल

लबों पर ये हँसी क़ातिल ग़ज़ब जादू निगाहों में
हो ओ ओ ओ
हो क़सम तुझको मोहब्बत की मचल न ऐसे राहों में
ऐसे राहों में
मचल जाता है दिल जब रू-ब-रू दिलदार आता है
हो शरारत कर न नाज़ुक दिल शरम से डूब जाता है

बहारों थाम लो अब दिल
..............................................
Baharon tham lo ab dil-Namaste ji 1965

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Jul 15, 2011

राजा बना मेरा छैला कैसा -गरम मसाला १९७२

काफी मसालेदार गीतों से भरपूर थी फिल्म गरम मसाला।
इस नाम से दो फ़िल्में बन चुकी हैं। एक तो कुछ साल पहले
ही आई थी। बहुत से कलाकारों की भीड़ वाला ये गीत काफी
मनोरंजक है। कैमरा ऐसे कोण पे ज्यादा घूमा है कि सिनेमा
हाल के आगे की बेंच वाले दर्शकों को इसे देखने में ज्यादा आनंद
आया होगा। गीत में अरुणा ईरानी, बिंदु, महमूद, जीवन
और टुनटुन ऐसे कलाकार हैं जिन्हें आप आसानी से पहचान
जायेंगे। गीत मजरूह का लिखा हुआ है इसलिए इसपर सरसरी
तौर पर निगाह फेर लेने की गलती ना करें, इसे ध्यान से
एक बार अवश्य सुनें। आशा भोंसले के गाये इस गीत की
तर्ज़ बनाई है राहुल देव बर्मन ने । इस गरम मसाले (गीत)
को पचाने(समझने) में आपको थोडा वक्त ज़रूर लगेगा.



गीत के बोल:

हा ली हा ली
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
आओ गोरी गोरी बैयाँ वारो
ले ले के बलैयां, हा
सदके हो के डारो
आंचरवा की छैयां
झिलमिल झिलमिल
राजा बना
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
आओ गोरी गोरी बैयाँ वारो
ले ले के बलैयां रे

रहे सदा राजा के पास हीरा मोती घूंघरा
क्या हुआ जो ये रूप का लालची है ज़रा
हा हा
रहे सदा राजा के पास हीरा मोती घूंघरा
क्या हुआ जो ये रूप का लालची है ज़रा
अरे ऐसे देखे मोहे जैसे मोरा सैयां
दैया, दैया

राजा बना
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
आओ गोरी गोरी बैयाँ वारो
ले ले के बलैयां रे

ऐसा भोला ऐसा नादान देखा नहीं, हां, कहीं
आगे है कौन पीछे है कौन जानता ही नहीं
हा हा
ऐसा भोला ऐसा नादान देखा नहीं, हां, कहीं
आगे है कौन पीछे है कौन जानता भी नहीं
इसी से मैं आई दौडी पैयां सैयां
छम छम छम छम

राजा बना रे रे
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
आओ गोरी गोरी बैयाँ वारो
ले ले के बलैयां रे

राजा का तो नौकर भी है कैसा प्यारा, हा, प्यारा
ऐसा कई घंटे से चूर बैठा है बेचारा, हा हा
राजा का तो नौकर भी है कैसा प्यारा, हा, प्यारा
ऐसा कई घंटे से चूर बैठा है बेचारा, हा हा
अरे इसके बजे बारह, दुआ करो कोई
ढम ढम ढम ढम

राजा बना
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
आओ गोरी गोरी बैयाँ वारो
ले ले के बलैयां रे
सदके हो के डारो
आंचरवा की छैयां
झिलमिल झिलमिल

राजा बना
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ
.......................................
Raaja bana mora chhaila kaisa-Garam Masala 1972

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Jun 9, 2011

मैं रंगीला प्यार का राही-छोटी बहन १९५९

आइये एक हास्य गीत सुनें। गाने के बोल ज्यादा मजाकिया नहीं हैं
मगर ये फिल्माया गया है महमूद और शुभा खोटे की प्रसिद्ध जोड़ी पर।
फिल्म छोटी बहन के २ गीत आप सुन चुके हैं इस ब्लॉग पर। ये तीसरा
गीत है। गीत गाया है सुबीर सेन और लता मंगेशकर ने। इस गीत
को सुबीर जैसा गा रहे हैं वैसे ही बोल लिखने का प्रयास कर रहा हूँ।
भूल चूक लेनी देनी। हर दूसरा बंगाली गायक उन दिनों हेमंत कुमार
का दूर का रिश्तेदार सुनाई पढता। तांगा बहुत दिन से ना सड़क पे दिखा
और ना ही किसी बम्बैया गीत में, सो आज देख लेते हैं । उम्मीद है
इस गीत पर घोड़े ने भी खुश हो कर कुछ आवाजें ज़रूर निकाली होंगी।
ताँगे के नीचे लगी घंटी की आवाज़ तक सुना दी गई है गीत में।




गीत के बोल:

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

तेरे लिए ही संभाल के रखा था
प्यार भरा ये दिल
तेरे इशारों पे चलता रहेगा
ओ मेरे कातिल

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा

हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा

तेरी राह पर जो मैं रुक गया
मुझे रही ना अपनी खबर
तेरी राह पर जो मैं रुक गया
मुझे रही ना अपनी खबर
मेरे साथ चल मेरे हमसफ़र
अब तेरी मेरी एक डगर
मेरे साथ चल मेरे हमसफ़र
अब तेरी मेरी एक डगर
अब तेरी मेरी एक डगर

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

जो आज है वो कभी ना था
ये चमन पे उजला निखर
जो आज है वो कभी ना था
ये चमन पे उजला निखर
ये रंग है मेरे प्यार का
जो खिला है बन के बाहर
ये रंग है मेरे प्यार का
जो खिला है बन के बाहर
जो खिला है बन के बाहर

तेरे लिए ही संभाल के रखा था
प्यार भरा ये दिल
तेरे इशारों पे चलता रहेगा
ओ मेरे कातिल

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

फुर्र्र्र या हा
ऐ हा हा हा हा हा
.................................
Main rangeela pyar ka raahi-Chhoti behan 1959

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Nov 5, 2010

दीप दीवाली के झूठे-जुगनू १९७३

एक और दीपावली गीत हाज़िर है। मैंने सोचा एक श्वेत श्याम युग
का हो गया तो एक रंगीन युग से भी होना चाहिए। ये सन १९७३ की
फिल्म जुगनू से है जिसे धर्मेन्द्र और महमूद पर फिल्माया गया है।
गीत लिखा है आनंद बक्षी ने और धुन बनाई है सचिन देव बर्मन ने।
गायक कलाकार को तो आप पहचान ही गए होंगे। पिछले गीत में
आतिशबाजी की कमी थी जो इसमें पूरी हो गई है।

संकल्पना अच्छी है इस गीत में। कोई भी त्यौहार अनाथालय के बच्चों
के संग मनाते हुए हिंदी फिल्म के हीरो को शायद एक आध ही फिल्म
में मैंने और देखा है।



गीत के बोल:

आ हा, हा हा, आ जा
रिम पा पा पा
रिम पा पा पा
रिम पा पा पा
रिम पा पा पा

ओ रुम पा पा पा
ओ रुम पा पा पा
ओ रुम पा पा पा
ओ रुम पा पा पा
ओ रुम पा पा पा
ओ रुम पा पा पा पा पा पा

छोटे छोटे नन्न्हें मुन्ने प्यारे प्यारे रे
बच्चे सच्चे जग के उजियारे रे
दीप दीवाले के झूठे, आ हा
रात चले सुबह टूटे

छोटे छोटे नन्हे मुन्ने प्याले प्याले रे
बच्चे सच्चे जग के उजियारे रे
दीप दीवाली के झूठे, आ हा
रात चले सुबह टूटे

इनके आगे, रंग फ्हीके
सब नज़र आते हैं
चाँद तारे, आ हा
इनसे ही सारे, आ हा
रौशनी पाते हैं
इनको देखें देख के झूमें
बाग़ की डाली डाली
फूल बहारों के झूठे, आ हा
आज खिले और कल टूटे

छोटे छोटे नन्हे मुन्ने प्यारे प्यारे रे
बच्चे सच्चे जग के उजियारे रे
दीप दीवाली के झूठे, आ हा

अरे वाह रे पांडू
साथ चलें सुबह छूटे

अक्कड़ बक्कड़ बम्बई बो
बिल्ली नंबर पूरे सौ
सौ में लग गया धागा
चोर निकाल कर भागा
चिड़िया खंडे रानी बोले
चाँय चीं चम् ,हा हा
हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा

ये हंसें तो हंस पड़ें सब
रोयें तो सब रोयें
इनकी खातिर हम आप जागें
चैन से ये सोयें
आदमी की, ज़िन्दगी का
ये है सच्चा सहारा
और सहारे सब झूठे, आ हा
आज मिलें और कल टूटे

छोटे छोटे नन्हे मुन्ने प्यारे प्यारे रे
बच्चे सच्चे जग के उजियारे रे
दीप दीवाली के झूठे
रात जले सुबह टूटे
दीप दीवाली के झूठे
रात जले सुबह टूटे

रिम पा पा पा
रिम पा पा पा
रिम पा पा पा
रिम पा पा पा
रिम पा पा पा
रिम पा पा पा, पा

रिम पा पा पा
रिम पा पा पा
रिम पा पा पा
रिम पा पा पा
रिम पा पा पा
रिम पा पा पा, पा

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Feb 1, 2010

धड़कने लगता है मेरा दिल-दिल तेरा दीवाना १९६२

शब्दों में और उनके प्रयोगों में फर्क होता है । ये उसकी समझ में
आता है जिसने उन शब्दों का उचित प्रयोग किया हो । एक अंग्रेजी का
शब्द है demeanor. एक महाशय ने शशि कपूर पर फिल्माए
गए गीत के लिए इस शब्द का प्रयोग किया तो समझ नहीं आया
कि वे शशि कपूर के लिए या उनके साथ बलखाती नायिका के लिए
इस शब्द का प्रयोग कर रहे हैं। ऐसे में तमाशा क्या होता है कि,
२-३ चम्पू आके भड भड तालियाँ बजाने लगते हैं और कह उठते हैं
वाह वाह । चम्पू गण आपस में मिल बाँट के एक दूसरे की तारीफ़
किया करते हैं। चार चंपुओं की 'हुआं हुआं' सुन के बाकी के अम्पू चम्पू
भी उनके सुर में रेंकना शुरू कर देते हैं।

इस शब्द के अच्छे प्रयोग का एक उदाहरण दे रहा हूँ। शम्मी कपूर
और महमूद दोनों के लिए इसको आप प्रयोग कर सकते हैं। फिल्म
का नाम है "दिल तेरा दीवाना" गायक हैं रफ़ी और इस गीत की धुन
बनाई है शंकर जयकिशन की जोड़ी ने। गीत लिखा है हसरत ने।



गीत के बोल:

भों भों , भो , भों भों

धड़कने लगता है मेरा दिल तेरे नाम से
धड़कने लगता है मेरा दिल तेरे नाम से
ऐसा लगता है के अब हम गए काम से
धड़कने लगता है मेरा दिल तेरे नाम से
ऐसा लगता है के अब हम गए काम से

भो , भों भों, भो , भों
मेरे दिल में जबसे टूटा तेरे नैन का तीर
दिल में रहकर बन गया वो तो तेरी ही तस्वीर
नींद नहीं आती हे मुझको आराम से
ऐसा लगता है के अब हम गए काम से

धड़कने लगता है मेरा दिल तेरे नाम से
ऐसा लगता है के अब हम गए काम से

भो , भों भों, भो , भों भों

तेरी बातें, तेरे किस्से रहते हैं हर दम
महफ़िल हो या वीराना या कोई मौसम
डरते नहीं हैं हम इह्स्क के अंजाम से
ऐसा लगता है के अब हम गए काम से

धड़कने लगता है मेरा दिल तेरे नाम से
ऐसा लगता है के अब हम गए काम से
ध ध ध धड़कने लगता है मेरा दिल तेरे नाम से
.................................
Dhadakne lagta hai mera dil-Dil tera deewana 1962

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Jan 30, 2010

आओ ट्विस्ट करें -भूत बंगला १९६५

फिल्म भूत बंगला का गीत। महमूद की डायरेक्ट की हुई
एक महत्वकांक्षी फिल्म थी। उनके साथ दो हास्य कलाकार
और भी थे फिल्म में-मोहन चोटी और असित सेन। गीत में
आप युवा तनुजा को पहचानने की कोशिश कीजिये। उम्मीद है
इस पोस्ट को देख कर हमारे मित्र जो तनूजा भक्त हैं अवश्य
प्रसन्न होंगे। वे चुपचाप इस ब्लॉग पर नज़र मार जाते हैं
लेकिन टिप्पणी करने से बचते हैं।






गीत के बोल:

सुनो और गौर से सुनो
पहले तालियाँ तो बजाओ

आज रात का मैं आखरी गाना गा रहा हूँ
और गाने में ये कहना चाहता हूँ

दुनिया में खुश रहना है तो मानो मेरी बात
आओ ट्विस्ट करें , गा उठा मौसम

हे ऐ, आओ ट्विस्ट करें, ज़िन्दगी है यही
आओ ट्विस्ट करें, गा उठा मौसम
हे ऐ ऐ आओ ट्विस्ट करें , गा उठा मौसम

नाच उठी है, हे ए, जिंदगानी ओ मेरी जान
नाच उठी है जिंदगानी ओ मेरी जान

छम छमा छम, छम छमा छम
हा ऐ हाँ हाँ हाँ

आओ आओ आओ आओ ट्विस्ट करें , गा उठा मौसम
हे ऐ, आओ ट्विस्ट करें, ज़िन्दगी है यही

आओ ट्विस्ट करें , गा उठा मौसम
हे ऐ, आओ ट्विस्ट करें, ज़िन्दगी है यही

परवानों दिलवालों , हा आ आओ
मस्ती के साजों पे गा गा गाओ।

खुशियों को महफ़िल में ला लाओ
इतना सा कहना है आ आहा आओ

हे, तुई तुई तुई तुई तुई .....
what to do
what to do, ha ha
आओ
हे, ट्विस्ट करें, गा उठा मौसम

हे ऐ, आओ ट्विस्ट करें, ज़िन्दगी है यही
आओ ट्विस्ट करें , गा उठा मौसम
हे ऐ, आओ ट्विस्ट करें, ज़िन्दगी है यही

अरे क्या सोच रहे हो तुम लोग
तुम लोग रोना चाहते हो
नहीं
तुम लोग उदास रहना चाहते हो,
नहीं
तुम लोग हँसना चाहते हो
हाँ
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट

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Jan 4, 2010

ख़ाली डब्बा ख़ाली बोतल ले ले -नीलकमल १९६८

आज एक खाद्य पदार्थ का पैकेट देख कर मुझे कुछ याद आया।
हुआ यूँ उस पर अगमार्क का लेबल लगा था। लेबल के बावजूद
मुझसे रहा नहीं गया और पदार्थ की गुणवत्ता पर मैंने दुकानदार
से सवाल पूछ लिए। दुकानदार मुस्कुरा कर रह गया और थोड़ी
देर बाद आधुनिक दर्शनवाद के कुछ जुमले सुनाने लगा- जैसे-
आदमी का कोई भरोसा नहीं, वस्तु को क्या कहें। हम भी वापरते
हैं उपरवाले का नाम लेकर। इस गीत में पंक्तियाँ हैं-"खाली की
गारंटी दूंगा , भरे हुए की क्या गारंटी" ।

उसके अलावा जब भी गरम मसाला खरीदना होता है ये गाना अवश्य
याद आ जाता है फिल्म नीलकमल का। फिल्म में ये गीत महमूद पर
फिल्माया गया है और इस गीत को गा रहे हैं मन्ना डे जिन्होंने
महमूद के लिए कई हास्य गीत गाये हैं। फिल्म में घर जमाई बने
महमूद ऊँट के ऊपर अपनी कबाड़ की दुकान सजा के निकल पढ़ते हैं
ये गीत गाते हुए। गीत लिखा है साहिर लुधियानवी ने जिन्होंने गीत के
बहाने जो कटाक्ष किये हैं वो आज भी प्रासंगिक हैं।




गीत के बोल:

खाली डब्बा, खाली बोतल
खाली डब्बा, खाली बोतल

खाली दबा खाली बोतल ले ले मेरे यार
खाली से मत नफरत करना खाली सब संसार
खाली दबा खाली बोतल लेले मेरे यार
खाली से मत नफरत करना खाली सब संसार

बड़ा बड़ा सर खाली डब्बा
बाद बड़ा तन खाली बोतल
बड़ा बड़ा सर खाली डब्बा
बड़ा बड़ा तन खाली बोतल
वो भी आधे खाली निकले
जिनपे लगा था भरे का लेबल
वो भी आधे खाली निकले
जिनपे लगा था भरे का लेबल
हो, ओ ,हमने इस दुनिया के दिल में झाँका है सौ बार
ले, खाली डब्बा खाली बोतल ले ले मेरे यार
खाली से मत नफरत करना खाली सब संसार

खाली की गारंटी दूंगा
भरे हुए की क्या गारंटी
खाली की गारंटी दूंगा
भरे हुए की क्या गारंटी
शहद में गुड़ के मेल का डर है
घी के अन्दर तेल का डर है
तम्बाखू में भात का खतरा
सेंट में झूठी बास का खतरा
मक्खन में चर्बी की मिलावट
केसर में कागज़ की चिलावट
मिर्ची में ईंटों की घिसाई
आटे में पत्थर की पिसाई
व्हिस्की अन्दर टिंकचर घुलता
रबड़ी बीच बलोटिंग तुलता
क्या जाने किस चीज़ में क्या हो
गरम मसाला लीद भरा हो

खाली की गारंटी दूंगा
भरे हुए की क्या गारंटी
क्यूँ दुविधा में पड़ा है प्यारे
झाड दे पौकेट खोल दे अंटी
क्यूँ दुविधा में पड़ा है प्यारे
झाड दे पौकेट खोल दे अंटी
हो, छान पीस कर खुद भर लेना
आ आ आ, आ आ आ, आ आ आ
छान पीस कर खुद भर लेना
जो कुछ हो सर्कार
ले ले, खाली डब्बा खाली बोतल ले ले मेरे यार
खाली से मत नफरत करना खाली सब संसार
खाली डब्बा, ओ मेरी भाभी
खाली बोतल, ओ लाला
खाली डब्बा खाली बोतल ले ले मेरे यार
खाली से मत नफरत करना खाली सब संसार

खाली डब्बा , खाली बोतल

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Dec 12, 2009

निर त त ढंग -चंदन का पलना १९६७

शास्त्रीय संगीत का इस्तेमाल हिन्दी फिल्मों में कई बार हास्य कलाकारों
के ऊपर फिल्माए गए गीतों में किया गया है। तोड़ी और टांग तोड़ी की सीमाओं
के बीच झूलते ये गीत आम श्रोता को आनंदित करते हैं। शुद्ध शास्त्रीय संगीत
प्रेमियों को कैसा लगता है ये सब सुनकर, अंदाज़ा लगना मुश्किल है। आम श्रोता
तो छोटी मोटी तान सुनकर ही वाह वाह करने पर तुल जाता है। ये गीत मन्ना डे
और रफ़ी की जुगलबंदी है। आनंद उठाइए। संगीत है राहुल देव बर्मन का।

फ़िल्म में ये गीत महमूद और धुमाल पर फिल्माया गया है। इस फ़िल्म में
महमूद ने एक बंगाली युवक की भूमिका निभाई है। इस गीत के बोल लिखना
मेरे बस के बाहर है, धन्यवाद् :P गाने के अंत में विलायती युवती सी दिखती हुईं
मुमताज़ प्रकट होती हैं और वो भी इस संगीतमय कसरत में शामिल हो जाती हैं।
गीत के बोल किसी बुन्दादीन महाराज ने लिखे हैं।

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Nov 4, 2009

जब बाहों में जुगनू -जुगनू १९७३

इस गाने को मजमे और मेले में बहुत बजते सुना।
इसलिए ये याद सा हो गया। इसमे जयश्री टी नाम की
एक कलाकार हैं जो गज़ब की नर्तकी हैं । हाथी पर
महमूद सवार हैं और जो कलाकार ड्रम में बंद हैं वो हैं
धर्मेन्द्र । जुगनू फ़िल्म काफ़ी चली और इसके गीत भी बहुत
बजे। संगीत एस डी बर्मन का है। आवाज़ लता मंगेशकर की और
बोल लिखे हैं आनंद बक्षी ने। इस गाने में बारात से तात्पर्य
क्या है आपको मालूम है ;)



गीत के बोल:


चले आना
चले आना पीपल नीचे पिया मुलाक़ात को
चले आना पीपल नीचे पिया मुलाक़ात को
जब बाहों में जुगनू चमके आधी रात को
जब बाहों में जुगनू चमके आधी रात को
जब बाहों में जुगनू.......

ला ला ला ला ला, ला ला ला ला ला

तारों की है छाँव रखना धीरे धीरे पांव
बैरी जाग न जाएगा

तारों की है छाओं रखना धीरे धीरे पांव
बैरी जाग न जाएगा

चोरी चोरी कहना सुनना सैयां दिल की बात को
चोरी चोरी कहना सुनना सैयां दिल की बात को

जब बाहों में जुगनू
जब बाहों में जुगनू चमके आधी रात को
जब बाहों में जुगनू चमके आधी रात को
ओ, जब बाहों में जुगनू ...........

रखना ये ख्याल तेरे आगे पीछे जाल
ऊपर नीछे दिल का हाल
छुपके आना ठीक बारह बजे जुम्मे रात को
छुपके आना ठीक बारह बजे जुम्मे रात को

जब बाहों में जुगनू
जब बाहों में जुगनू चमके आधी रात को
जब बाहों में जुगनू चमके आधी रात को
ओ, जब बाहों में जुगनू ...........

दूल्हा राजा देख तू अकेला बस एक
तेरे दुश्मन अनेक
दूल्हा राजा देख तू अकेला बस एक
तेरे दुश्मन अनेक

धोखा देके तू निकल आना बारात को
धोखा देके तू निकल आना बारात को

जब बाहों में जुगनू

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Oct 27, 2009

प्यार की आग में- जिद्दी १९६४

इस कठिन गाने को केवल मन्ना डे ही गा सकते थे ।
इतने उतार चढाव और हास्य भरा ये गीत बेहद अनूठा है ।
महमूद पर फिल्माया गया ये गीत फ़िल्म जिद्दी से है ।
उन दिनों में फिल्मों में कॉमेडियन कि ख़ास भूमिका
हुआ करती थी और कई फिल्मों में आपको आधे घंटे से
लेकर एक घंटे का मसाला हास्य कलाकार पर मिल जाएगा.
महमूद ५ स्टार कॉमेडियन माने जाते थे अपने ज़माने में ।
गाने की पृष्ठभूमि ऐसी है कि लड़की का बाप शादी के बाद
भी पति पत्नी को मिलने नहीं देता । पति की विरह वेदना
गाने के जरिये निकलती है । इसमे वाद्य यन्त्र भी विरह वेदना
पीड़ित सुनाई पड़ते हैं। संगीत है सचिन देव बर्मन का
और बोल लिखे हैं हसरत जयपुरी ने।



गाने के बोल:

दुनिया बनानेवाले सुन ले मेरी कहानी
रोये मेरी मोहब्बत, तड़पे मेरी जवानी

प्यार की आग में तनबदन जल गया
प्यार की आग में तनबदन जल गया
जाने फिर क्यूँ जलाती है दुनिया मुझे
जाने फिर क्यूँ जलाती है दुनिया मुझे

प्यार की आग में तनबदन जल गया

में तो रोता फिरूं बादलों की तरह
ठंढी आहें भरूं पागलों की तरह
में तो रोता फिरूं बादलों की तरह
अरे, मैं तो हो हो हो रोता फिरू, ऊं ऊं ऊं
में तो रोता फिरूं बादलों की तरह
ठंढी आहे भरूं पागलों की तरह
जाने फिर क्यूँ, फिर क्यूँ
जाने फिर क्यूँ रुलाती है दुनिया मुझे

प्यार की आग में तन बदन जल गया
प्यार की आग में तन बदन जल गया

बात जब मैं करुँ मुहँ से निकले धुआं
जल गया, जल गया, मेरे दिल का जहाँ
बात जब मैं करुँ मुहँ से निकले धुआं
आह, फुयीं.....
जल गया, जल गया, मेरे दिल का जहाँ
जाने फिर क्यूँ, फिर क्यूँ
जाने फिर क्यूँ सताती है दुनिया मुझे

प्यार की आग में तनबदन जल गया
प्यार की आग में तनबदन जल गया

इश्क मुझको नचाता रहा है सदा
क्या क्या सपने दिखता रहा है सदा
इश्क मुझको नचाता रहा है सदा
इश्क मुझको नचाता रहा है सदा
क्या क्या सपने दिखता रहा है सदा
जाने फिर क्यूँ, फिर क्यूँ
जाने फिर क्यूँ नचाती है दुनिया मुझे
प्यार की आग मैं तन बदन जल गया
प्यार की आग में तनबदन जल गया
प्यार की आग में तनबदन जल गया
तनबदन जल गया
तनबदन जल गया
तनबदन जल गया
.......................................................................
Pyar ki aag mein-Ziddi 1964

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Oct 26, 2009

झूम ले ऐ मतवाले दिल - पिंजरे के पंछी १९६६

एक फ़िल्म है १९६६ की जो शायद कुछ ही फ़िल्म प्रेमियों
ने देखि हो वो है पिंजरे के पंछी । इसमे बलराज सहनी और
मीना कुमारी मुख्य भूमिकाओं में हैं। इस गाने में अलबत्ता
महमूद नज़र आयेंगे। पाश्चात्य प्रभाव वाला ये गाना गाया
है आशा भोंसले ने और इसकी धुन बनाई है सलिल चौधरी
ने। ये एक गुम सा और बहुत ही कम सुना हुआ गीत है। इसको
भी सुनिए।



गाने के बोल:

झूम ले, झूम ले
झूम ले ऐ मतवाले दिल
झूम ले ऐ मतवाले दिल

फ़िर से रंगीन रात आई
फ़िर से सजी महफिल

झूम ले ऐ मतवाले दिल
झूम ले ऐ मतवाले दिल

फ़िर से रंगीन रात आई
फ़िर से सजी महफिल

मुस्कुराते प्यार के नाम
आयेंगे फ़िर जाम पे जाम

फ़िर कहेगा दिल से दिल

झूम ले, झूम ले
झूम ले ऐ मतवाले दिल
झूम ले ऐ मतवाले दिल


छुपने वाले सामने आ
हमसे नज़रें तो मिला
छुपने वाले सामने आ
हमसे नज़रें तो मिला

मिलने जो आए उनसे तो मिल

झूम ले, झूम ले
झूम ले ऐ मतवाले दिल
झूम ले ऐ मतवाले दिल

फ़िर से रंगीन रात आई
फ़िर से सजी महफिल

झूम ले, झूम ले
झूम ले ऐ मतवाले दिल

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Jul 5, 2009

जागो सोनेवालों-भूत बंगला १९६५

महमूद एक स्थापित हास्य कलाकार थे। उन्होंने कुछ
फ़िल्में भी बनाई। जितनी भी बनाई उन सबमे उन्होंने
अभिनय किया। ये फ़िल्म उन्होंने १९६५ में बनाई और
इसमे आर डी बर्मन को एक बार फ़िर मौका दिया संगीत
देने का. फ़िल्म में गीत हसरत जयपुरी के हैं। ये एक
प्रेरणादायक गीत है हसरत की कलम से निकला हुआ।




गाने के बोल:

जागो सोने वालों सुनो मेरी कहानी -२
क्या अमीरी क्या ग़रीबी भूलो बातें पुरानी

जागो सोने वालों ...

टूटा जो आज दिल का वो साज़ रोने लगा एक बदनसीब
हँसने लगे दुनिया के लोग कोई हुआ बर्बाद

जागो सोने वालों ...

ये ऊँच नीच दुनिया के बीच आख़िर ये क्यों बोलो कोई
जो है भला वो क्यों बुरा हम तो न समझे ये राज़

जागो सोने वालों ...

आपस में ग़म बाँटें जो हम फिर न रहें ऐसे सितम
कहने को इंसान हैं वो इन्सानियत कहाँ है

जागो सोने वालों ...

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