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Dec 17, 2015

वादा कर ले साजना-हाथ की सफाई १९७४

हाथ की सफाई बहुत ज़रूरी है. गंदे हाथों से खाना खाने
से पेट की बीमारियाँ पनपती हैं.  आइये सुनें सन ७४ की
फिल्म हाथ की सफाई से एक गीत. गीत भी बहुत साफ़
है फिल्म के नाम की तरह और ये एक सदाबहार युगल
गीत है. नायक-नायिका की जोड़ी अनूठी है –विनोद खन्ना
और सिमी ग्रेवाल. ये जोड़ी शायद ही किसी और फिल्म में
आई हो. सिमी ग्रेवाल को कम से कम इस गीत के लिए
तो याद किया ही जायेगा. उन्हें हाई प्रोफाइल जनता ज्यादा
पहचानती है बजाये आम जनता के.

गीत गुलशन बावरा का है और संगीत कल्याणजी आनंदजी
का. लता और रफ़ी इसे गा रहे हैं.



गीत के बोल:

वादा कर ले साजना
तेरे बिन मैं ना रहू,
मेरे बिन तू ना रहे
हो के जुदा,
ये वादा रहा
ना होंगे जुदा,
ये वादा रहा

मैं धड़कन तू दिल है पिया,
मैं बाती तू मेरा दीया
हम प्यार की ज्योत जलाएँ
मैं राही मेरी मंज़िल है तू,
मैं हूँ लहर और साहिल है तू
जीवन भर साथ निभायें
वादा कर ले जान-ए-जां
तेरे बिन मैं ना रहूँ,
मेरे बिन तू ना रहे
हो के जुदा,
ये वादा रहा,
ना होंगे जुदा,
ये वादा रहा

जबसे मुझे तेरा प्यार मिला,
अपनी तो है बस यही दुआ
हर जनम यूँ मिल के रहेंगे
सुंदर सा हो अपना जहां,
प्यार अपना रहे सदा जवां
हम सुख दुःख मिल के सहेंगे

वादा कर ले जान-ए-जां
तेरे बिन मैं ना रहूँ,
मेरे बिन तू ना रहे
हो के जुदा,
ये वादा रहा,
ना होंगे जुदा,
ये वादा रहा
……………………………………………………………………
Wada kar le sajna-Hath ki safai 1974

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Dec 12, 2015

छोड़ो ये निगाहों का इशारा–इंकार १९७७

एक सवाल अक्सर दिमाग में कौंधा करता है-आखिर को जनता
रोमांटिक गीत क्यूँ सुनती है. इसका जवाब भी एक सवाल है-
रोमांटिक गीत बनाये क्यूँ जाते हैं. अरे भाई ये भी कोई बात हुई
रोमांस हुआ तो भावनाएं निकली शब्द निकले, गीत बने फिर
गाये जाने लगे. हिंदी के अलावा दूसरी भाषाओँ में भी रोमांटिक
गीत बनाये जाते हैं, जाते रहे हैं और आगे भी बनाये जायेंगे.
ये बात और है कि किसी किसी फिल्म में गीत ऐसे लगते हैं
जैसे सूटकेस में जबरन कपडे ठूंस दिए गए हों.

अर्नेस्ट हेमिंग्वे के प्रख्यात उपन्यास पर बनी आंग्ल भाषा की
फिल्म “ओल्ड मेन एंड द सी का ‘हिंदी तर्जुमा बनता तो उसमें
बुज़ुर्ग मछली पकड़ते पकड़ते ४-५ गीत ज़रूर गा लेते साथ में
मछलियाँ भी १-२ गीत गा लेतीं.

मशीन और इंसान के बीच का फर्क यही है-इंसान पप्पी और
झप्पी दोनों लेने में सक्षम है, मशीन नहीं. यहाँ हम रजनीकांत
वाली फिल्म के रोबोट की बात बिलकुल भी नहीं करेंगे. ये तो
वो फर्क है जो हमें सयानों ने बतलाया है. ये बात बिकुल तय
है कि गीतकारों ने प्रेमियों को नए शब्द और नए आयाम दिए
हैं इससे प्रेम में वैरायटी बढ़ जाती है. अपनी भावनाएं व्यक्त
करने के लिए नए शब्द और आइडियाज़ मिल जाते हैं. हर
किसी की शब्द सामर्थ्य और ज्ञान विकसित नहीं होता कि वो
कवी-कल्पना से सोच सके. अब इश्क कमीना-टीन कनस्तर क्या
आप और मैं सोच सकते थे, कतई नहीं. ये तो भला हो फिल्म
संगीत का जिसकी वजह से हमारी सोच और  लोच में आमूल
चूल बदलाव ला दिया है. पहले पानी टपकता था अब भावनाएं.

आज आपको मजरूह का लिखा हुआ एक उम्दा रोमांटिक युगल
गीत सुनवाते हैं. ये है फिल्म इनकार से. इनकार एक सस्पेंस
फिल्म है और इसमें गीत नहीं भी होते तो चलता, मगर मुझे
या आपको. अगर गीत नहीं होते तो जनता भी फिल्म बिना देखे
चलते बनती. विशेषकर वो जनता जो परदे के पास बैठा करती थी.
इस फिल्म में उनके लिए विशेषकर एक गीत रखा गया था-मूंगड़ा
कभी हमने भी उस क्लास में बैठ के ढेरों फ़िल्में देखी हैं. पूरी
फिल्म देखने के बाद गर्दन अकड जाया करती. सर उठा के चलना
पढता और देखने वालों को लगता –वाह क्या आत्मविश्वास है बन्दे
में. सीट से पर्दा ज़्यादातर सिनेमा हॉल में ऊंचा हुआ करता इसलिए
सर उठा के फ़िल्में देखनी पढ़ती थीं.

आशा भोंसले और किशोर कुमार के गाये इस गीत की तर्ज़ बनाई है
राजेश रोशन ने. विनोद खन्ना और विद्या सिन्हा पर इसे फिल्माया
गया है.



गीत के बोल:

छोड़ो ये निगाहों का इशारा
सौदा है ये ज़िन्दगी का यारा
सुनना है तुम्हारी जुबां से
के तुमको हमसे प्यार है
दिल से हो जब दिल की बातें यारा
दिलवाले को काफी है इशारा
जब कोई निगाहें झुका ले
तो समझो इकारार है

देखो जी अदाओं की पहेली ना बुझाओ
दीवाने को और भी दिवाना ना बनाओ
अरे इतना भी ना समझे हो के आशिक हमारे
वहीँ मेरे होंठों पे जो दिल में तुम्हारे
क्या है मेरे दिल में अभी से
ये कह देना दुश्वार है

धडकन भी हमारी क्या सुनाई नहीं देती
चेहरे की ये लाली क्या गवाही नहीं देती
अरे चेहरे की ये लाली, धड़कन के फसाने
मैं तो मानूं यार मेरा दिल नहींमाने
सुन लो फिर हमारी जुबां से
हमको तुमसे प्यार है
दिल से हो जब दिल की...
..............................................................................................
Chhodo ye nigahon ka ishara-Inkaar 1977

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Jun 27, 2015

हंस के पुकार के-परछाईयाँ १९७२

पोस्ट लिखते समय मैं एक गीत देख और सुन रहा
हूँ टी. वी. पर-जी क्लासिक चैनल पर आ रहे पंचम
पर विशेष कार्यक्रम में. गीत गा रहे हैं-सुदेश भोंसले.
वाद्य यंत्रों के अनूठे प्रयोग पर, पिछले कुछ समय से
इस कार्यक्रम में, काफी प्रकाश डाला गया है.

कार्यक्रम में भानु गुप्ता माउथ ऑर्गन पर शोले की एक
क्लिप बजा रहे हैं. कार्यक्रम खत्म होने का वक्त हो चला
है. माहौल ग़मगीन सा हो उठा है श्रोताओं के बीच.
शानदार कार्यक्रम था ये एक, आयोजकों को बधाई.

पंचम का संगीत पिछली सदी की सबसे बड़ी फिल्म-
शोले का हिस्सा है. फिल्म के संगीत चाहे वो गीत
हों या पार्श्व-संगीत के टुकड़े आज भी जनता-जनार्दन
को अचंभित करता है. निस्संदेह वो समय से आगे
का और अजब संगीत है.

आज उनका ७६ वां जन्मदिन है. पंचम भक्तों के लिए
ये दिन किसी त्यौहार से कम नहीं है. हर साल उन्हें
इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार रहता है.

पंचम के संगीत की धडकन वास्तव में किशोर कुमार
ही थे. किशोर के अवसान के बाद पंचम के संगीत
पर इसका असर स्पष्ट दिखा. किशोर जो अपने आप
में एक करिश्माई गायक थे, उनका साथ छूटना एक
बहुत बड़ी घटना रही उनके जीवन की.

बहुत सी ऐसी फ़िल्में रहीं जिनमें बढ़िया गीत होने के
बावजूद वे चली नहीं. शक्ति सामंत, रमेश तलवार और
गुलज़ार के अलावा उन्हें संगीत की समझ वाले फिल्म
निर्देशकों का लंबा साथ नहीं मिला. स्पष्ट भाषा में बोला
जाए तो हिट फ़िल्में बनाने वाले निर्देशकों का साथ उन्हें
नहीं प्राप्त हुआ. फिल्म उद्योग की केमिस्ट्री भी अजीब है.
इसे अच्छे अच्छे ज्ञानी नहीं समझ पाए आज तक. 

आज आपको एक ऐसा गीत सुनवाते हैं जिसमें पंचम के
संगीत की लगभग सारी खूबियाँ मौजूद हैं. लता-किशोर
की आवाजें हैं, मजरूह साहब के बोल हैं. विनोद खन्ना
और बिंदु पर इसे फिल्माया गया है. जनता कुछ भी कहे
इन दोनों की स्क्रीन प्रेजेंस ज़बरदस्त हुआ करती थी. एक
संयोग ये भी है-दोनों की मुस्कराहट आला दजे की है.
सन १९७२ की फिल का गीत है ये मगर आज भी ताज़ा
सा लगता है.




गीत के बोल:

हो, रैना अँधेरी है
आ जा सजनिया, मोरी चंदनिया रे

हंस के पुकार के,
हंस के पुकार के,
दो बोल प्यार के,
झूठो भी कह दे तो
सांच मोहे लागे रे
ऐसे से प्रीत लागी राम
हो, हंस के पुकार के,
दो बोल प्यार के,
झूठो भी कह दे तो
सांच मोहे लागे रे
ऐसे से प्रीत लागी राम
सच है सजनी प्यार का वादा
शाम ही से जले मोरा मनवा
गले से लग जा, तेरे बदन से
पाए ठंडक हमारो बदनवा
गरवा यूँ लागे जैसे कटारी लागे
झटके जो बैयाँ और मोहे प्यारी लागे
हूँ तेरे पीछे बदनाम

हो, हंस के पुकार के,
हंस के पुकार के
दो बोल प्यार के,
झूठो भी कह दे तो
सांच मोहे लागे रे
ऐसे से प्रीत लागी राम

आज मिले हो मोहे अकेले
अब चलेगा न कोई बहाना
हो थाम के बैयाँ मैं नहीं छोडूं
छूट जाए रे चाहे ज़माना
उलझा के अब तो नैना झुकाना नहीं
लाये न तू तो होश में भी आना नहीं
अब तो रे तू ही मोहे थाम

हंस के पुकार के,
हंस के पुकार के
दो बोल प्यार के,
झूठो भी कह दे तो
सांच मोहे लागे रे
ऐसे से प्रीत लागी राम
.............................................................................................
Hans ke pukar ke-Parchhaiyan 1972

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Aug 2, 2011

पुरवा सुहानी आई रे –पूरब और पश्चिम १९७०

पुरुष के समर्पण के चरम के बारे में 'पूरब और पश्चिम' फिल्म के
पिछले गीत में चर्चा हुई थी। इस फिल्म में नारी का इंतज़ार भी है।
गीत में दिखाई देने वाली देसी बाला फिल्म के नायक से मन ही मन
प्यार करती है। फिल्म का नायक विलायती बाला से प्रेम करता है। इस
प्रेम त्रिकोण में चौथा कोण प्रस्तुत गीत में प्रकट होकर मुखर होता है
जो ढोल बजा रहा है-नायक नंबर दो यानि विनोद खन्ना । वो देसी
बाला से प्रेम करता है। गीत का आकर्षण नायिका नंबर एक के चुस्त
कपडे और नायिका नंबर दो का आकर्षक नृत्य है।

इस खालिस देसी धुन को तैयार किया है कल्याणजी आनंदजी ने और गीत
में कहानी कही है इन्दीवर ने।






गीत के बोल:



कही न ऐसी सुबह देखी
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ जैसे बालक की मुस्कान या फिर दूर कहीं  मंदिर में आ आ आ आ आ
हलकी सी मुरली की तान गुरुबानी गुरुद्वारे में तो मस्जिद से उठती अजान
आत्मा और परमात्मा मिले जहाँ
यही है वो स्थान


ढोली ढोल बजाना
ताल से ताल मिलाना
ढोली ढोला ढोली ढोला
ढोली ढोल बजाना
ता ता थैया तक तक थैया
ताल से ताल मिलाना


पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
ऋतुओं की रानी आई रे पुरवा
मेरे रुके नहीं पांव
प्रीत पे जवानी छाई रे, पुरवा

पुरवा सुहानी आई रे पुरवा

मौसम का मुसाफिर खड़ा रस्ते में
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हो ओ मौसम का मुसाफिर खड़ा रस्ते में
उसके हाथों सब कुछ लुटा सस्ते में
छोटी सी उमरिया है
लंबी सी डगरिया रे
जीवन है परछाई रे, पुरवा

पुरवा सुहानी आई रे पुरवा

हो ढोली ढोल बजाना
हो ताल से ताल मिलाना

कर ले कर भी ले प्यार की पूजा
ना ना ना ना ना ना ना ना
हो, कर ले कर भी ले प्यार की पूजा
प्यार के रंग पे चढ़े न रंग दूजा
क्या ये कोई सपना है
मेरे लिए अपना है
बात मेरी बन आई रे पुरवा

पुरवा सुहानी आई रे पुरवा

हो मीरा सी दीवानी रे नाचे मस्तानी
मीरा सी दीवानी रे नाचे मस्तानी
होंठों पर हैं गम तो आँखों में पानी
घुँघरू दीवाने हुए
रिश्ते पुराने हुए
गीत में कहानी गाई रे पुरवा

पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
ऋतुओं की रानी आई रे पुरवा
मेरे रुके नहीं पांव
प्रीत पे जवानी छाई रे, पुरवा

पुरवा सुहानी आई रे पुरवा

हो ढोली ढोल बजाना
हो ताल से ताल मिलाना
ढोली ढोल बजाना
ताल से ताल मिलाना
...................................
Purwa suhani aayi re-Purab aur paschim 1970

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Jul 19, 2011

सुनो सुनो एक बात कहूँ -मेमसाब १९७१

नाव नायक नायिका के साथ घूम रही है या नायक नायिका नाव में बैठ
के घूम रहे हैं बूझिये इस गीत में.

विनोद खन्ना के साथ योगिता बाली हैं और दोनों स्टीमर में गीत गा
रहे हैं. यू ट्यूब के बहाने इस गीत को अरसे बाद सुनने का मौका मिल
गया. आत्मा राम की फिल्म है इसलिए संगीत ठीक ठाक है इसका.
गीत लिखा है वर्मा मालिक ने और धुन बनायीं है सोनिक ओमी ने.

इस गीत में जो तेरा-मेरा बोला जा रहा है वो आसानी से याद रह जाता है.
गीत कि खूबी ये है कि ये कई संगीतकारों कि याद दिला देता है, कभी
शंकर जयकिशन की, कभी आर डी बर्मन की तो कभी कल्याणजी आनंदजी
की, तो किसी जगह मदन मोहन की और जहाँ जगह बची है वहां वहां
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की.

गाना खत्म होते होते बोट का आकार बदल जाता है और वो छोटा जहाज बन
जाती है. फिल्मांकन बढ़िया जगहों पर हुआ लगता है इस गीत का.




गीत के बोल:

सुनो सुनो एक बात कहूँ
कहो जी पिया मैं सुनती हूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे

सुनो सुनो एक बात कहूँ
कहो जी पिया मैं सुनती हूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे

लहरों से है मिले किनारे
हो ओ, लहरों से है मिले किनारे
फूलों से भी मिले नज़ारे
किसी का कोई, किसी का कोई
मुझको तेरे सहारे
आ आ आ , बहता पानी है मेरा दामन
हो ओ ओ ,बहता पानी है मेरा दामन
छोडूं न मैं तेरा दामन
ऐसे मिलूँ मैं तुझ में ओ गोरी
जैसे पानी में चन्दन
जैसे हो पानी में चन्दन

यही तमन्ना करती हूँ
सदा मैं तेरे संग रहूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे

ये जो मेरा सारा जीवन
हो ओ ओ ये जो मेरा सारा जीवन
है गोरी ये तेरे अर्पण
तू ही तो मेरे प्यार की मूरत
मैं हूँ तेरा ही दर्पण
आ आ आ दिल मेरा तो है घबराया
हो ओ ओ दिल मेरा तो है घबराया
दुनिया से है मुझे दर आया
मैंने तो चलती आंधी में साजन
आशा का दीपक जलाया
आशा का दीप जलाया
इस दीपक से प्यार करूं
जनम जनम तक साथ रहूँ

कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे

सुनो सुनो एक बात कहूँ
कहो जी पिया मैं सुनती हूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे
....................................
Suno suno ek baat kahoon-Memsaab 1971

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Jul 17, 2011

रोज़ शाम आती थी-इम्तिहान १९७४

अभिनेत्री नूतन और तनूजा का कैरियर साठ के और सत्तर के दशक में
साथ साथ चला. नूतन ने तो जल्दी ही अपना ऊंचा मुकाम हासिल कर
लिया फिल्म जगत में मगर तनूजा को काफी संघर्ष के बावजूद, (यहाँ
संघर्ष का तात्पर्य अभिनय कला से हैं न कि फ़िल्में पाने के लिए संघर्ष
से) वो स्थान नहीं मिल पाया की उनकी किसी एक फिल्म को दर्शक
याद करें. प्रस्तुत गीत लिया गया है फिल्म इम्तिहान से जो सन १९७४
की फिल्म है. मजरूह के आकर्षक बोलों को स्वर दिया है लता मंगेशकर
ने. फिल्म में संगीत है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का. इस गीत में विनोद खन्ना
ने बेहतर अभिनय किया है. नायिका के कपडे कुछ अजीब से लगेंगे आपको
सन ७० के आस पास और बाद में कुछ एक फ़िल्में ऐसी आयीं जिनमें
नायकों और नायिकाओं की पोशाकें कुतूहल का विषय हुआ करती थीं.

गीत में कैमरे के साथ एक फ़िल्टर लगाया गया है जिससे सुनहरी धूप वाले
समय को भी शाम बना दिया गया है. ये करिश्मा पकड़ में आ जाता है
गीत के बीच में, जहाँ आधी धूप आधी छांव वाली कहानी दिखाई देती है.
ये होता है अन्तर शुरू होते समय. ऐसे कारनामे विडियो का मज़ा किरकिरा
कर देते हैं.




गीत के बोल:

ला ला ला ला ला ला ला ला ला
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी

डाली में ये किसका हाथ करे इशारे बुलाए मुझे
झूमती चंचल हवा छूके तन गुदगुदाए मुझे
हौले हौले धीरे धीरे कोई गीत मुझको सुनाए
प्रीत मन में जगाए
खुली आँख सपने दिखाए
दिखाए दिखाए दिखाए
खुली आँख सपने दिखाए

ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी

अरमानों का रंग है जहाँ पलकें उठाती हूँ मैं
हँस हँस के है देखती जो भी मूरत बनाती हूँ मैं
जैसे कोई मोहे छेड़े दिल खो और भी जाती हूँ मैं
जगमगाती हूँ मैं
दीवानी हुई जाती हूँ मैं
दीवानी दीवानी दीवानी
दीवानी हुई जाती हूँ मैं

ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
....................................
Roz shaam aati thi-Imtihaan 1974

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Jul 14, 2011

काम लेते नहीं बन्दूक से-कच्चे धागे १९७३

फिल्म कच्चे धागे का एक अलोकप्रिय लेकिन कर्णप्रिय सीमाओं के
भीतर बना हुआ गीत सुनवा रहे हैं आज. इसमें आप विनोद खन्ना को
देखेंगे मधुबाला के जैसी दिखने वाली नायिका सोना के साथ जो परदे
पर नाचती हुई गीत गा रही हैं.

डाकुओं पर बनी फिल्म में मुजरा या वैसा कोई गीत अवश्य ही
मिलता है. आजकल इसका नाम आईटम सोंग हो गया है जैसा कि
आपने देखा फिल्म चाईना गेट के गीत में-छम्मा छम्मा . फर्क इतना
आया है कि पहले ये गाने कम प्रसिद्द्ध तारिकाओं को दिए जाते थे
अब नामी गिरामी नायिकाओं को.




गीत के बोल :


आ आ आ आ आ आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हा आ आ आ आ आ आ आ

जा रे जा ओ दीवाने तू क्या जाने
अनजाने
बात करते हैं,
रे बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से

जा रे जा ओ दीवाने तू क्या जाने
अनजाने
बात करते हैं,
रे बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से

गोरी गोरी मोरी कलाई न मरोड़ो रे
रंगी बेरंगी मेरी चूड़ियाँ न तोड़ो रे
गोरी गोरी ओ हो हो,
कलाई मोरी ओ हो हो,
गोरी गोरी मोरी कलाई न मरोड़ो रे
रंगी बेरंगी मेरी चूड़ियाँ न तोड़ो रे
ओ हो हो,
कर मुझ से मोहब्बत लडाई न कर
चोट लग जाए
रे चोट लग जाए न भूल चूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से

बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से

आशिक की हलकी सी एक मुस्कान से
माशूक मारे जाते हैं जान से
आशिक की हलकी सी एक मुस्कान से
माशूक मारे जाते हैं जान से
हो हो हो
कोई जी में बसा हो तो फिर जी में
हूक उठती है
रे हूक उठती है कोयल की कूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से

बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से

आ आ आ आ आ आ आ आ

आँखों आँखों में मज़ा लेते हैं प्यार का
सर को झुका के दिल मांगते हैं यार का
आँखों आँखों में मज़ा लेते हैं प्यार का
सर को झुका के दिल मांगते हैं यार का
हो हो हो
जिद न कर सितमगर तू है बेखबर
टूट जाते हैं
रे टूट जाते हैं दिल इस सलूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से

बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
..........................
Kaam lete nahin bandook se-Kachche Dhaage 1973

 Artists: Vinod Khanna, Sona

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Jul 11, 2011

मेरे बचपन तू जा जा-कच्चे धागे १९७३

जनता बुढापे में जवानी के लौटने की ख्वाहिश रखती है, मगर इस गीत में
उलटा है. बचपन में जवानी के आने की इच्छा जाहिर की जा रही है. गीत
कन्याओं की भावनाओं को व्यक्त करने वाला है जिसमें ये खूबसूरत ख़याल भी
लाया गया है-किसी के साथ भाग जाऊं ?

गन्ने के खेत में ये गाना फिल्माया गया है. गन्ना है या मक्का, ध्यान से देख
कर मुझे भी बतलाइए . हिंदी फिल्मों में तरह तरह के खेतों में गीत फिल्माए
गए हैं. आगे आपको चने के खेत वाला गीत भी सुनवा देंगे जनाब.

आनंद बक्षी ने इस गीत को लिखा है और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की बनाई धुन पर
इसे गाया है लता मंगेशकर ने मौसमी चटर्जी के लिए .




गीत के बोल:

मेरे बचपन तू जा जा जवानी को ले आ
मेरे बचपन तू जा जा जवानी को ले आ
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
मेरे बचपन तू जा जा जवानी को ले आ
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता

आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ
बेरियाँ नू बेर लग गये वे तौबा
फूलों से झुक गईं डालियाँ
बेरियाँ नू बेर लग गये वे तौबा
फूलों से झुक गईं डालियाँ
जाने मेरे कानों में कब
पहनायेगी माँ बालियाँ
छाई काली घटा आई ठण्डी हवा
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता

लम्बी काली रातों में ऐसा
ना हो कभी मैं जाग जाऊँ
लम्बी काली रातों में ऐसा
ना हो कभी मैं जाग जाऊँ
किसी परदेसी के संग
चुपके से मैं भाग जाऊँ
बैरी जळी से जा इब देर ना लगा
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता

चोरी चोरी पनघट पे बातें
करती हैं बैरन सहेलियां , हो
चोरी चोरी पनघट पे बातें
करती हैं बैरन सहेलियां
जाने कब मेरा प्रीतम
बूझेगा मेरी प्रेम पहेलियाँ
उई माँ ये क्या हुआ
जैसे काँटा चुभ गया

जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
...........................
Mere bachpan too ja-Kachche Dhaage 1973

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Apr 28, 2011

थोडा सा एतबार कीजिये-चौकीदार १९७३

इस गीत को मैंने फिल्म की रिलीज़ के आस पास पहली बार
ध्यान से सुना था। इसके ध्वनि संयोजन ने मुझे आकृष्ट किया
था। उसके बाद १-२ बार और सुनाई दिया ये, फिर ऐसा लगा
जैसे इसको रेडियो वाले सुनना भूल गए हैं। ऐसा ही होता है
जब फिल्म फ्लॉप हो जाया करती है। लता मंगेशकर की आवाज़
के प्रयोग से कई मधुर गीत देने वाले संगीतकार मदन मोहन ने
आशा के लिए एक अच्छी धुन बनाई ज़रूर मगर वो समय के
प्रवाह के साथ गुम हो गई। इस गीत की छाप आपको संगीतकार
सोनिक ओमी के संगीत में आशा के गाये गीतों में मिलेगी।
विडियो देख कर आपको ज़रूर लगेगा कि ये गीत शायद किसी मुजरे
के लिए बनाया गया था और फिल्म दिया गया सहनायिका के एकल
नृत्य पर। नाचने वाली नायिका जयश्री टी हालाँकि एक आला दर्जे की
नर्तकी हैं मगर इस गीत के बोलों के साथ उनके नृत्य का मेल कुछ
तेल और पानी के असंभव से collodial suspension जैसा लगता है।
दूसरे "दिल भी पहलु से जुदा हो जाये" पंक्तियों के दौरान कौनसा दिल
व कौनसे पहलू से जुदा होने की बात की जा रही है समझ नहीं आई।

एक बात तो तय है जी, होटल के लाल कारपेट की अच्छी तरह से
सफाई हो गई होगी।



गीत के बोल:

थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये

थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
प्यार की आरजू है
प्यार की जुस्तजू है
प्यार की आरजू है
प्यार की जुस्तजू है
तो पहले अपने दिल को बेकरार कीजिये
अपने दिल को बेकरार कीजिये

हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये

जाने कब इश्क में क्या हो जाये
बन्दा बन्दे का खुदा हो जाये
आप भी यार के
आप भी यार के दर पे रह जाएँ
दिल भी पहलू से जुदा हो जाये
दिल भी पहलू से जुदा हो जाये
जो सच हो तो
जो सच हो तो फिर प्यार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये

थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये

दिल पे काबू ना हो तो
गैर के घर जाओ सनम
हो ओ ओ सनम जाओ जाओ सनम
दिल पे काबू ना हो तो
गैर के घर जाओ सनम

एक ही रात के वादे पे ना बहलाओ सनम
आँखें छू लो, आ आ आ आ
आँखें छू लो मगर हाथ से ना छूना बदन
खुद तडपाओ हमको भी तडपाओ सनम
हमको भी बेकरार कीजिये
हमको भी हमको भी
हमको भी बेकरार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये

थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये

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Dec 8, 2010

रुक जाना नहीं तू कहीं हार के-इम्तिहान १९७४

कहते है जीवन है तो संघर्ष है। संघर्ष किस रूप में होगा
ये कोई नहीं जानता। सभी प्राणियों को किसी न किसी
रूप में जूझना पढता है । आइये एक दास्तान पड़ें एक
कुत्ते की जिसने ऑंखें न होने के बावजूद हिम्मत नहीं
हारी। अरे इंसानों इसी से सबक ले लो तुम।

मौका है एक प्रेरणादायक गीत सुनने का। फिल्म
इम्तिहान से किशोर का गाया गीत सुना जाए आज ।
ये सभी को प्रेरित करता है आगे बढ़ने के लिए।

अंधे कुत्ते की अनोखी कहानी





गीत के बोल:

रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
काँटों पे चल के मिलेंगे साये बहार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही

सूरज देख रुक गया है तेरे आगे झुक गया है
जब कभी ऐसे कोई मस्ताना
निकले है अपनी धुन में दीवाना
शाम सुहानी बन जाते हैं दिन इंतज़ार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही

साथी न कारवां है ये तेरा इम्तिहां है
यूँ ही चला चल दिल के सहारे
करती है मंज़िल तुझको इशारे
देख कहीं कोई रोक नहीं ले तुझको पुकार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही

नैन आँसू जो लिये हैं ये राहों के दिये हैं
लोगों को उनका सब कुछ दे के
तू तो चला था सपने ही ले के
कोई नहीं तो तेरे अपने हैं सपने ये प्यार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही
...............................................

Ruk jaana nahin too kahin haar ke-Imtihaan 1974

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Nov 24, 2010

नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना -जेल यात्रा १९८१

एक गीत फिल्म जेल यात्रा से। उनींदे से विनोद खन्ना हडबडा के उठ
बैठते हैं जब कानों में नायिका रीना रॉय का गीत सुनाई पड़ता है। पूरे
गीत में वो हैरान से दिख रहे हैं। मजरूह के लिखे और लता मंगेशकर
के गाये गीत को संगीत में बांधा है राहुल देव बर्मन ने। इस गीत के बाद
आपको वो दो गीत सुनवायेंगे जो जेल यात्रा के इस गीत को सुनने के
बाद याद आते हैं।



गीत के बोल:

नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता

आज गले मिलके मर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता


नहीं लगता, लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता

आज गले मिलके मर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता

नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता

इसे कहाँ ले के जाऊं मैं
के दो घडी चैन पाऊँ मैं

शोला सा रंग है
जलता बुझता अंग है
तेरी लगी कैसी बुझाऊँ मैं
आज मिलन की ओढ़ लगा दे
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता

नहीं लगता लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता

पिया बाहर फिर से आई है
नई वजह फिर से लायी है
मैं फिर से खो गई
दीवानी सी हो गई
मुझा पकड़ हाय दुहाई है
यारों की बाहों में गिर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता

नहीं लगता लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता

आज गले मिलके मर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता

नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता

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Nov 22, 2010

दे दे दे दे दे दे ज़रा-बॉम्बे ४०५ मील .

एक अनार दो बीमार। इस श्रेणी में हम आपको पहला गीत सुनवा रहे हैं।
'विक्टोरिया नंबर २०३' वाले बृज सढाना साहब ने ही इस फिल्म का निर्देशन
किया था। एक मसाला फिल्म थी जिसके ज्यादा मात्रा मसालों से कुछ
दर्शकों को अपच हो गई। फिल्म की एडिटिंग में त्रुटियाँ थीं वरना इसको और
बेहतर बनाया जा सकता था। फिल्म का सशक्त पहलू इसके गीत हैं। संगीत
अच्छा है फिल्म का, लेकिन फिल्म के ना चलने की स्तिथि में अक्सर संगीत
भी डब्बे में बंद होकर रह जाता है। वैसा ही कुछ हुआ। खैर छोडिये ये सब और
गीत सुनिए जिसे परदे ओपर शत्रुघ्न और विनोद खन्ना गा रहे हैं जीनत अमान
के लिए । पार्श्व गायन किया है-किशोर कुमार और महेंद्र कपूर ने। इसके बोल है
इन्दीवर साहब के और धुन है कल्यानजी आनंदजी की। गीत की तुकबंदी एकदम
फिट किसम की है और तेज़ गति वाला ये गीत आपको अंत तक बंधे रखेगा।





गीत के बोल:

दे दे दे दे दे दे ज़रा
हमें दे दे ज़रा मंज़ूरी
दे दे दे दे दे दे ज़रा
साथ रहने की तू मंज़ूरी

तेरे लिए हम हैं ज़रूरी
हमारे लिए तू है ज़रूरी
तेरे लिए हम हैं ज़रूरी
हमारे लिए तू है ज़रूरी

बिन तेरे हम हैं अधूरे
बिन तेरे हम हैं अधूरे
ओये हम बिन तू है अधूरी

अरे दे दे दे, दे दे ज़रा मंज़ूरी
हमें दे दे ज़रा मंज़ूरी
तेरी तो हर शर्त करेंगे हम पूरी

पास तेरे वो चीज़ है जो भी देखे हो दीवाना
रंग भी सुन्दर, अंग भी सुन्दर
सुन्दरता का खज़ाना
तू है सुन्दरता का खज़ाना
रूप तिजोरी सौंप दे हमको
कर लेगा कोई चोरी, गोरी
कर लेगा कोई चोरी
सिवा हमारे सब लोगों को एक यही कमजोरी
गोरी, एक यही कमजोरी

अरे कह दे कह दे कह दे ज़रा
तेरी अब क्या है मजबूरी
तेरे लिए हम हैं ज़रूरी
हमारे लिए तू है ज़रूरी
ओ बिन तेरे हम हैं अधूरे
हम बिन तू है अधूरी

अरे दे दे दे, हमें दे दे ज़रा मंज़ूरी
तेरी तो हर शर्त करेंगे हम पूरी

तेरे हाथों में वो जादू
तेरी वो हस्ती है
तीनों दुनिया दे कर तू गर
मिल जाए सस्ती है
गर मिल जाए सस्ती है
तेरा हर गम बाटेंगे हम
हिस्सेदार बना ले
हमको हिस्सेदार बना ले
हमको अपना यार नहीं तो
पहरेदार बना ले,
अपना पहरेदार बना ले

अरे कर दें कर दें कर दें तेरा
हर सपना हम सिन्दूरी

तेरे लिए हम हैं ज़रूरी
हमारे लिए तू है ज़रूरी
बिन तेरे हम हैं अधूरे
हम बिन तू है अधूरी

अरे दे दे दे, हमें दे दे ज़रा मंज़ूरी
तेरी तो हर शर्त करेंगे हम पूरी

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Jun 14, 2010

कोई होता जिसको अपना-मेरे अपने १९७१

किशोर कुमार के गाये शानदार दर्द भरे गीतों में से एक है फिल्म
मेरे अपने का गीत, जो विनोद खन्ना पर फिल्माया गया है।

फिल्म मेरे अपने का निर्देशन गुलज़ार ने किया है। गीत उन्ही का लिखा
हुआ है और संगीत तैयार किया है सलिल चौधरी ने। सलिल शायद ये गीत
भी मुकेश से गवाना पसंद करते । फिल्म आनंद के लिए उन्होंने मुकेश की
आवाज़ को चुना था। खैर जो भी हुआ हो, किशोर का गाया ये गीत एक मील
का पत्थर बन गया।



गीत के बोल:

कोई होता जिसको अपना
हम अपना कह लेते यारों
पास नहीं तो दूर ही होता
लेकिन कोई मेरा अपना

कोई होता जिसको अपना
हम अपना कह लेते यारों
पास नहीं तो दूर ही होता
लेकिन कोई मेरा अपना

आँखों में नींद ना होती, आंसू ही तैरते रहते
ख्वाबों में जागते हम रात भर

आँखों में नींद ना होती, आंसू ही तैरते रहते
ख्वाबों में जागते हम रात भर

कोई तो गम अपनाता, कोई तो साथी होता

कोई होता जिसको अपना
हम अपना कह लेते यारों
पास नहीं तो दूर ही होता
लेकिन कोई मेरा अपना

भूला हुआ कोई वादा, बीती हुई कुछ यादें
तनहाई दोहराती हैं रात भर

भूला हुआ कोई वादा, बीती हुई कुछ यादें
तनहाई दोहराती हैं रात भर

कोई दिलासा होता, कोई तो अपना होता

कोई होता जिसको अपना
हम अपना कह लेते यारों
पास नहीं तो दूर ही होता
लेकिन कोई मेरा अपना
..................................
Koi hota jisko apna-Mere apne 1971

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Mar 1, 2010

होली में हौले हौले-इंसान १९८२

होली के अवसर पर हम वही गाने सुना करते हैं जो
ऑडियो कैसेट या सी डी पर उपलब्ध होते हैं। फिल्मों में
फ्लेश बैक में भी होली के गीत इस्तेमाल किये गए हैं।
नायिका होली के अवसर को याद कर रही है। एक छोटा
सा गीत है फिल्म इंसान से जिसे फिल्माया गया है रीना राय
और विनोद खन्ना पर। गायक हैं आशा रफी और शैलेन्द्र सिंह ।
गीत में जीतेंद्र और जयश्री टी भी नृत्य करते दिखाई देंगे। ये
लगभग नहीं के बराबर सुना हुआ गीत है ।



गीत के बोल:

ये रंग वो हैं जो ना मिटेंगे
हम ना रहे तो भी ये रहेंगे
ये रंग वो हैं जो ना मिटेंगे
हम ना रहे तो भी ये रहेंगे

काहे भिगोये जाते हो
आग लगाये जाते हो
काहे भिगोये जाते हो
आग लगाये जाते हो


फिर ना बुझेंगे ये शोले
ये शोले

होली में, हो हो होली में
होली में, हो हो होली में

होली में,
हौले हौले दिल डोले, हो होली में

गोरी ने घूंघट के पट खोले
होली में

होली में, हाँ हाँ होली में
होली में, हो हो होली में
होली में, हो हो होली में
होली में, हो हो होली में

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Nov 22, 2009

हो गए हम आपके कसम से-बॉम्बे ४०५ मील १९८०

'बॉम्बे ४०५ मील' एक मसाला फिल्म थी। इसके निर्माता
और निर्देशक थे-बृज जिन्होंने १९७२ की हिट फिल्म
विक्टोरिया नो २०३ बनायीं थी । बतौर निर्देशक उनकी
कुछ चर्चित फिल्में हैं-ये रात फिर ना आएगी(१९६६),
प्रोफ़ेसर प्यारेलाल (१९८१) और यकीन(१९६९)।
रहस्य और रोमांच शायद उनके पसंदीदा विषय थे ।
'बॉम्बे ४०५ मील' कुछ चोरों की कहानी है जो तरह तरह
की उलझनों में पड़कर एक बच्चे को, जिसे वे पैसे के लालच में
अगवा कर लाये थे, बचाने की कोशिश में लग जाते हैं। फिल्म
में मसाला कुछ ज्यादा ही हो गया था इसलिए शायद फिल्म ज्यादा
नहीं चली । इसके गीत अलबत्ता लोकप्रिय हुए । उन लोकप्रिय गीतों
में से एक है- हो गए हम आपके कसम से । ये जीनत अमन,
विनोद खन्ना और शत्रुघन सिन्हा पर फिल्माया गया है। ये है
'एक अनार दो बीमार की' श्रेणी का गाना जिसमे एक हिरोइन
और दो हीरो हैं ।



गाने के बोल:

हाँ, हो गए
अरे हो गए हम आपके कसम से
कसम से, कसम से, कसम से

हाँ,हो गए हम आपके कसम से
कसम से, कसम से, कसम से

बिना आपके कोई नहीं है अपना तो हमदम
साथ जियेंगे साथ मरेंगे वादा रहा सनम

हाँ,हो गए
हाँ,हो गए हम आपके कसम से
कसम से, कसम से, कसम से

सुन ऐ हसीं हमको था यकीन
कि होगी तू एक दिन हमारी
सुन ऐ हसीं हमको था यकीन
कि होगी तू एक दिन हमारी

झूठा जहाँ, नहीं टिकता वहां
जहाँ सच्ची हो यारों कि यारी

हाथ अग ले कोई तुझको किस्मे इतना दम
साथ जियेंगे साथ मरेंगे खाते हैं कसम

हो गए
हो गए हम आपके कसम से
कसम से, कसम से, कसम से

हो गए हम आपके कसम से
कसम से, कसम से, कसम से

तेरे लिए हीरे मोटी तो क्या
सितारों को भी तोड़ लाऊं
अरे, तेरे लिए हीरे मोटी तो क्या
सितारों को भी तोड़ लाऊं

सिवा प्यार के तेरे दीदार के
और कुछ भी न मैं तुझसे चाहूं

दुनिया का तुझे पता नहीं है
तू भोली है सनम
तुझे रानी बना के रखने को जहाँ कि दौलत है कम

हाँ,हो गए
अरे, हो गए हम आपके कसम से
कसम से, कसम से, कसम से

बिना आपके कोई नहीं है अपना तो हमदम
साथ जियेंगे साथ मरेंगे वादा रहा सनम

हो गए
are, हो गए हम आपके कसम से
कसम से, कसम से, कसम से

ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला......

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Oct 29, 2009

अजनबी कौन हो तुम-स्वीकार किया मैंने १९८३

उषा खन्ना ने सदा ही समय समय पर हिट गीत बना कर
श्रोताओं और संगीत विशेषज्ञों को अचंभित किया है। फ़िल्म सौतन (१९८०)
के बाद जो उनका एल्बम(एल्बम अर्थात फ़िल्म के पूरे गीत) हिट हुआ
और सराहा गया वो है स्वीकार किया मैंने(१९८३) । ऊर्जावान संगीत
निर्देशक हैं वे। उन्होंने सभी विधाओं पर अधिकार से दखल दिया और कामयाब भी
हुईं । आपको याद होगा फ़िल्म दादा का गीत-दिल के टुकड़े टुकड़े करके। येसुदास
को उतनी प्रसिद्धि रवीन्द्र जैन के बनाये ढेरों गीतों द्वारा नहीं मिली जितनी कि
केवल उषा खन्ना के बनाये फ़िल्म दादा के एक गीत से। उस गीत के लिए
येसुदास को पुरस्कार भी मिला। इधर उन्होंने लता मंगेशकर से एक शानदार
गीत गवाया है। इसके बोल नामचीन शायर निदा फाजली के हैं। शायद ये फ़िर
साबित हुआ है कि एक अच्छे गीत के लिए अच्छे बोल होना अति आवश्यक है।
यहाँ अच्छे गीत से तात्पर्य उन गीतों से है जो मर्म को चोट पहुँचने में सक्षम हों
और लंबे समय तक सुने जाने वाले हों। इस गीत में दो संजीदा कलाकार हैं।
शबाना आज़मी और विनोद मेहरा। विनोद मेहरा की खामोशी भी बहुत गहराई
लिए होती थी। कुछ ही ऐसे कलाकार हैं जिनको चुप देखना भी एक सुखद अनुभव
होता है।



गाने के बोल:

अजनबी कौन हो तुम, जबसे तुम्हें देखा है
सारी दुनिया मेरी आँखों में सिमट आई है

अजनबी कौन हो तुम, जबसे तुम्हें देखा है
सारी दुनिया मेरी आँखों में सिमट आई है

तुम तो हर गीत में शामिल थे, तरन्नुम की तरह
तुम मिले हो मुझे फूलों का तबस्सुम बन के
ऐसा लगता है के बरसों से, शमा आज आई है

अजनबी कौन हो तुम...

ख़्वाब का रँग हक़ीक़त में नज़र आया है
दिल में धड़कन की तरह कोई, उतर आया है
आज हर साँस में, शहनाई सी लहराई है

अजनबी कौन हो तुम...

कोई आहट सी, अंधेरों में चमक जाती है
रात आती है तो तन्हाई, महक जाती है
तुम मिले हो या, मोहब्बत ने ग़ज़ल गाई है

अजनबी कौन हो तुम...

..........................................
Ajnabi kaun ho tum-Sweekar Kiya Maine 1983

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