आज तुमसे दूर हो कर-एक रात १९६७
श्रेणी में अगला गीत प्रस्तुत है फिल्म एक रात से मुकेश का
गाया हुआ गीत. संयोग से इसे लिखा भी अनजान ने है.
फिल्म का निर्देशन राजनाथ ने किया है और इसमें शेख मुख़्तार,
सिमी ग्रेवाल, मदन पुरी, सैमसन, श्यामा, लक्ष्मी छाया, रवि कुमार
और डेविड जैसे कलाकार हैं. निर्माण किसी ईस्ट एंड वेस्ट फिल्म्स
ने किया जिसने दो फ़िल्में बना के शायद फिल्म निर्माण से तौबा
कर ली. पहली फिल्म थी-खूनी खज़ाना जो १९६५ में आई थी.
यह गीत शायद रवि कुमार नामक कलाकार पर फिल्माया गया है.
गीत के दूसरे अंतरे में जो मोहतरमा प्रकट होती हैं गीत में वे फिल्म
की नायिका हैं-सिमी ग्रेवाल. संभावनाओं की बात करें तो डेविड हो
नहीं सकते क्यूंकि उनका कद कम और सर पर बाल नहीं के बराबर
हैं, शेख मुख्तार लंबी कद काठी के पहलवानी इंसान थे.
उषा खन्ना चौंकाने वाली संगीत निर्देशक हैं. इस गीत पर गौर
फ़रमाया जाए तो लगेगा कल्याणजी आनंदजी की कोई धुन है. उषा
अपने संगीत में हमेशा बदलाव करती आयीं मगर ये सब झमेला
८० के दशक में कम हो गया और वे काफी हद तक प्रिडिकटेबल
हो गयीं. गीत आज भी चाव से सुना जाता है और उसकी वजह
है इसका दर्द भरा होना और आम आदमी इसे अपने करीब महसूस
करता है.
गीत के बोल:
आज तुमसे दूर हो कर ऐसे रोया मेरा प्यार
आज तुमसे दूर हो कर ऐसे रोया मेरा प्यार
चाँद रोया साथ मेरे रात रोई बार बार
चाँद रोया साथ मेरे रात रोई बार बार
कुछ तुम्हारी बंदिशें हैं कुछ हैं मेरे दायरे
जब मुक़द्दर ही बने दुश्मन तो कोई क्या करे
हाय कोई क्या करे
इस मुकद्दर पर किसी का क्या है आखिर इख्तियार
चाँद रोया साथ मेरे रात रोयी बार बार
चाँद रोया साथ मेरे रात रोयी बार बार
हर तमन्ना से जुदा मैं हर खुशी से दूर हूँ
जी रहा हूँ क्यूंकि जीने के लिये मजबूर हूँ
हाय मैं मजबूर हूँ
मुझको मरने भी न देगा ये तुम्हारा इन्तज़ार
चाँद रोया साथ मेरे रात रोई बार बार
चाँद रोया साथ मेरे रात रोई बार बार
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Aaj tumse door ho kar -Ek raat 1967
Artists-Ravi Kumar, Simi Grewal

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