तू इस तरह से-आप तो ऐसे ना थे ३-१९८०
संगीत. यहाँ गौर करें लोक-प्रिय जो लोक को प्रिय हो या आम जनता
को प्रिय हो. दोनों शब्द मिल के बना देते हैं ‘फेमस’. संगीत केवल
किसी खास वर्ग या तबके के लिए नहीं बना, ये तो हर प्राणी के लिए
है. कौन कैसे जज्ब करता है इसे इस बात पर निर्भर करती है पसंद
नापसंद.
हिंदी फिल्म संगीत के खजाने में पॉपुलर सोंग बहुतेरे हैं. ये वे गीत हैं
जो लोकप्रिय हुए और जिनको किसी समीक्षक की वाह वाह की ज़रूरत
नहीं है. ऐसी बातें इसलिए कभी कभी सुनाना पढ़ती है क्यूंकि
कई संगीत भक्त तो उषा खन्ना के संगीत को पूरी तरह से नज़रअंदाज़
कर के चलते हैं. जिस संगीतकार ने ३०-३५ वर्ष फिल्म उद्योग में
गुज़ारे हों और एक से बढ़ कर एक हिट गीत दिए हों समय समय पर
उसे हम कैसे भुला सकते हैं या इग्नोर कर सकते हैं. उषा खन्ना ने
लगभग हर उस गायक के लिए हिट गीत बनाये हैं जिन्होंने उनके
संगीत निर्देशन में गाया है चाहे वो रफ़ी हों, येसुदास हों या हेमलता.
प्रस्तुत गीत को लिखा है निदा फाज़ली ने और इसे गाया है हेमलता ने.
गीत के बोल:
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
जहाँ भी जाऊँ ये लगता है तेरी महफ़िल है
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
ये आसमान ये बादल ये रास्ते ये हवा
ये आसमान ये बादल ये रास्ते ये हवा
हर एक चीज़ हैं अपनी जगह ठिकाने से
कई दिनों से शिकायत नहीं ज़माने से
ये ज़िन्दगी है सफ़र, तू सफ़र की मंज़िल है
जहाँ भी जाऊँ ये लगता है तेरी महफ़िल है
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
हर एक फूल किसी याद सा महकता है
हर एक फूल किसी याद सा महकता है
तेरे ख़याल से जागी हुई फिजायें है
ये सब्ज़ पेड़ हैं या प्यार की दुआएं है
तू पास हो के नहीं फिर भी तू मुक़ाबिल है
जहाँ भी जाऊँ ये लगता है तेरी महफ़िल है
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
हर एक शय है मोहब्बत के नूर से रोशन
हर एक शय है मोहब्बत के नूर से रोशन
ये रोशनी जो ना हो ज़िन्दगी अधूरी है
राह-ए-वफ़ा में कोई हमसफ़र ज़रूरी है
ये रास्ता कहीं तन्हा कटे तो मुश्किल है
जहाँ भी जाऊँ ये लगता है तेरी महफ़िल है
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
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Too is tarah se-Aap to aise na tha 1980
Artist-Ranjeeta

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