September 5, 2016

तेरे ख्यालों में-मेरी सूरत तेरी आँखें १९६३

पिछला गीत आपने सुना था १९५१ से. अब सुनते हैं सन १९६३
से एक गीत. एस डी बर्मन का संगीत १९६३ तक परिपक्व हो
चुका था, उन्होंने अपनी शैली बना ली थी जिससे वे अलग से
पहचान में आने लगे.

गीत है फिल्म मेरी सूरत तेरी आँखों से जिसे आशा पारेख पर
फिल्माया गया है. शैलेन्द्र ने गीत लिखा है और आवाज़ एक
बार फिर से लता मंगेशकर की है. गीत काफी लोकप्रिय है.

फिल्म के नायक अशोक कुमार हैं. कथानक के अनुसार उन्हें
खूब काली सूरत का व्यक्ति बताया गया है जिसके केवल दांत
चमकते हैं, लेकिन वो एक संगीत में दक्ष कलाकार है. नायिका
उस पर मोहित है उसके संगीत पर ये तो जिन्होंने फिल्म देखी
है उन्हें मालूम है. केवल गीत देख के अनुमान लगाइए क्या
वजह है.

नायक नायिका के गीत से प्रसन्न हो कर सितार बजने लगता
है. हाँ, बांसुरी कौन बजा रहा है वो दिखाई नहीं दे रहा है स्क्रीन
पर. एस डी बर्मन की टीम में हरिप्रसाद चौरसिया बांसुरी बजाया
करते थे और शिव कुमार शर्मा संतूर. सितार किसने बजाया है
मालूम नहीं.



गीत के बोल:

तेरे ख़यालों में तेरे ही ख़्वाबों में
दिन जाए रैना जाए रे
जाने ना तू साँवरिया
तेरे ख़यालों में तेरे ही ख़्वाबों में
दिन जाए रैना जाए रे
जाने ना तू साँवरिया

फूलों के मौसम ने कोयल की पंचम ने
रंगीन सपने जगाए
फूलों के मौसम ने कोयल की पंचम ने
रंगीन सपने जगाए
तरसे बहरों को तेरे नज़ारों को
दिल की कली खिल ना पाए रे
जाने ना तू साँवरिया

तेरे ख़यालों में तेरे ही ख़्वाबों में
दिन जाए रैना जाए रे
जाने ना तू साँवरिया

पास जो आती हूँ कुछ कहने जाती हूँ
मेरी ज़ुबाँ लड़खड़ाए
पास जो आती हूँ कुछ कहने जाती हूँ
मेरी ज़ुबाँ लड़खड़ाए
बेबस बेचारी मैं अपने से हारी मैं
पछताऊँ नेहा लगाए रे
जाने ना तू साँवरिया

तेरे ख़यालों में तेरे ही ख़्वाबों में
दिन जाए रैना जाए रे
जाने ना तू साँवरिया


कितने बहानों से दिलकश तरानों से
आवाज़ तेरी बुलाए
कितने बहानों से दिलकश तरानों से
आवाज़ तेरी बुलाए
छुपने छुपाने में यूँ आने-जाने में
ये आग बढ़ती ही जाए रे
जाने ना तू साँवरिया

तेरे ख़यालों में तेरे ही ख़्वाबों में
दिन जाए रैना जाए रे
जाने ना तू साँवरिया
जाने ना तू साँवरिया
.....................................................................
Tere khayalon mein-Meri soorat teri aankhen 1963

Artists: Asha Parekh, Ashok Kumar

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