Dec 31, 2016

महबूब मेरे महबूब मेरे-पत्थर के सनम १९६७

आपको फिल्म स्टोन के सनम से तीन गीत सुनवाए हैं अभी तक.
अब सुनते हैं चौथा गीत. ये एक बेहद लोकप्रिय युगल गीत है.
इस आज की युवा पीढ़ी भी सुनती है. चुम्बकीय प्रभाव वाला
गीत है ये.

मजरूह सुल्तानपुरी ने इसे लिखा है और लक्ष्मी प्यारे ने धुन
तैयार की है.




गीत के बोल:

महबूब मेरे महबूब मेरे
महबूब मेरे महबूब मेरे
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है
जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं है

महबूब मेरे महबूब मेरे
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है
जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं है
महबूब मेरे

तू हो तो बढ़ जाती है क़ीमत मौसम की
तू हो तो बढ़ जाती है क़ीमत मौसम की
ये जो तेरी आँखें हैं शोला शबनम सी
यहीं मरना भी है मुझको मुझे जीना भी यहीं है

महबूब मेरे महबूब मेरे
महबूब मेरे महबूब मेरे
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है
जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं है
महबूब मेरे


अरमाँ किसको जन्नत की रंगीं गलियों का
अरमाँ किसको जन्नत की रंगीं गलियों का
मुझको तेरा दामन है बिस्तर कलियों का
जहाँ पर हैं तेरी बाँहें मेरी जन्नत भी वहीं है

महबूब मेरे महबूब मेरे
महबूब मेरे महबूब मेरे
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है
जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं है
महबूब मेरे

रख दे मुझको तू अपना दीवाना कर के
रख दे मुझको तू अपना दीवाना कर के
नज़दीक आ जा फिर देखूँ तुझको जी भर के
मेरे जैसे होंगे लाखों कोई भी तुझसा नहीं है

महबूब मेरे
हो महबूब मेरे
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है
जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं है
महबूब मेरे
......................................................................
Mehboob mere-Patthar ke sanam 1967

Artists: Manoj Kumar, Waheeda Rehman

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