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Jan 29, 2020

कोई नहीं है-पत्थर के सनम १९६७

फिल्म उद्योग में हर प्रमुख संगीतकार, सिवाए नैयर के,
ने लता मंगेशकर के लिए स्पेशल गाने बनाये. इनमें
सी रामचंद्र और अनिल बिश्वास ऐसे हैं जिन्होंने कम
शोर वाले या यूँ कहें कम वाद्य यंत्रों वाली मधुर रचनाएँ
बनाईं. उसके बाद आता है नौशाद, एस डी बर्मन और
मदन मोहन का नाम जिन्होंने कम और ज्यादा संगीत
दोनों तरह की धुनें बनाई लता के गाये गानों के लिए.

शंकर जयकिशन के गीतों में ओर्केस्ट्रा लबालब होता था.
अधिकाँश गीतों के शुरू में भारी संगीत होता और बाद में
गीत सिंपल सा सुनाई देता. उनके गीतों में से संगीत
के टुकड़ों का अलग समझ पाना संभव नहीं होता. हम
कई जगह पर सुन चुके हैं और पढ़ चुके हैं कि ६० के
दशक में पदार्पण करने वाली लक्ष्मी प्यारे की जोड़ी भी
शंकर जयकिशन की बड़ी फैन रही है. उन्होंने भी उसी
लबालब संगीत वाली परिपाटी को आगे बढ़ाते हुए जो
गाने बनाये उसमें पूरे गानों में संगीत लबालब नज़र
आने लगा.

सुनते हैं मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा और लक्ष्मी प्यारे
द्वारा संगीतबद्ध गीत लाता मंगेशकर की आवाज़ में.



गीत के बोल:

कोई नहीं है फिर भी है मुझको
कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार
हो ओ ओ कोई नहीं हैं फिर भी हैं मुझको
क्या जाने किस का इंतज़ार
हो ओ ओ ये भी ना जानूं लहरा के आँचल
किसको बुलाये बार बार

सोचूँ ये हैं उंगलियाँ किसके प्यार की
गालों को छुए जो डाली बहार की
छुये जो डाली बहार की
सोचूँ ये हैं उंगलिया किसके प्यार की
गालों को छुए जो डाली बहार की
कौन है ए हवा ए बहार

कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार
क्या जाने किसका इंतज़ार

पानी में छबि मैं देखूं खड़ी खड़ी
बालों में सजा के कलियाँ बड़ी बड़ी
सजा के कलियाँ बड़ी बड़ी हो ओ ओ ओ ओ
पानी में छबि मैं देखूं खड़ी खड़ी
फिर बनूँ आप ही बेकरार

कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार
क्या जाने किसका इंतज़ार

वादी में निशान मेरे ही पांव के
फूलों पे हैं रंग मेरी ही छांव के
हैं रंग मेरी ही छांव के हो ओ ओ ओ ओ
वादी में निशान मेरे ही पांव के
फिर भी क्यूँ आये ना ऐतबार

कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार
हो ओ ओ ओ ओ ये भी ना जानूं लहरा के आँचल
किसको बुलाये बार बार
क्या जाने किसका इंतज़ार
क्या जाने किसका इंतज़ार
……………………………………………
Koi nahin hai-Patthar ke sanam 1967

Artist: Waheeda Rehman

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Jan 13, 2020

ए दुश्मन जान-पत्थर के सनम १९६७

नाईट सूट पहनने की आदत हमारे देश की जनता
को अभी भी नहीं है. कुरता पाजामा भी एक प्रकार
का नाईट सूट ही है. इसे दिन में भी पहना जा
सकता है. फिल्मों ने नाईट सूट को काफी लोकप्रिय
कराया है. जैसे मोगली सीरियल ने चड्डी को कराया
और जिसे देखो आज चड्डी पहने मोबाइल काण में
लगा के सड़क पर चहलकदमी करने लगता है. चड्डी
को तो एक देवांग पटेल के गाये बोनी एम के गाने
की पैरोडी ने भी लोकप्रिय कराया है.

कुरता पाजामा पहनने वाले ज्यादा स्मार्ट होते हैं या
कुरता पाजामा पहनने से आदमी ज्यादा स्मार्ट हो
जाता है, मुझे समझ नहीं आया अभी तक. नेता
कुरता पाजामा पहन के ही पब्लिक को क्यूतिया
बना रहे हैं सालों से.

आपने हाइवे पर कर्मचारियों को कपड़ों के ऊपर
जैकेट पहने देखा होगा. उसकी डिजाईन इसी गीत
से प्रेरित है शायद.

कुछ नैयर के गीत और कुछ पश्चिमी एशिया का
संगीत सुन कर लक्ष्मी प्यारे ने इस धुन की रचना
की होगी ऐसा मेरा अनुमान है. मजरूह का गीत है
और इसे आशा भोंसले गा रही हैं.



गीत के बोल:

आ ये बहार
हां
ये समा आ

ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
ये बहार
गालों पे लट हां बेकरार
गोरा बदन हां प्यार प्यार
तुझको पुकारे तू नहीं सुनता
क्या करूं अल्लाह हा आ

छांव भी जो सनम तेरी
छांव भी जो सनम तेरी
मिल गई मेरी छांव से
डाली बदन की हुई हरी
खिल गई मैं अदाओं से
देखो मेरी अंगड़ाईयाँ आ

ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
ये बहार
गालों पे लट हां बेकरार
गोरा बदन हां प्यार प्यार
तुझको पुकारे तू नहीं सुनता
क्या करूं अल्लाह हा आ

आ जा आ जा मत देर कर
आ जा आ जा मत देर कर
मस्ती है अभी चाल में
आया भी मेरी जां तू अगर
आते आते कई साल में
तब तक जियूँगी कहाँ आ

ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
ये बहार
गालों पे लट हां बेकरार
गोरा बदन हां प्यार प्यार
तुझको पुकारे तू नहीं सुनता
क्या करूं अल्लाह हा आ

ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
..................................................................
Ae dushman jaan-Patthar ke sanam 1967

Artists: Mumtaz, Manoj Kumar

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Dec 31, 2016

महबूब मेरे महबूब मेरे-पत्थर के सनम १९६७

आपको फिल्म स्टोन के सनम से तीन गीत सुनवाए हैं अभी तक.
अब सुनते हैं चौथा गीत. ये एक बेहद लोकप्रिय युगल गीत है.
इस आज की युवा पीढ़ी भी सुनती है. चुम्बकीय प्रभाव वाला
गीत है ये.

मजरूह सुल्तानपुरी ने इसे लिखा है और लक्ष्मी प्यारे ने धुन
तैयार की है.




गीत के बोल:

महबूब मेरे महबूब मेरे
महबूब मेरे महबूब मेरे
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है
जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं है

महबूब मेरे महबूब मेरे
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है
जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं है
महबूब मेरे

तू हो तो बढ़ जाती है क़ीमत मौसम की
तू हो तो बढ़ जाती है क़ीमत मौसम की
ये जो तेरी आँखें हैं शोला शबनम सी
यहीं मरना भी है मुझको मुझे जीना भी यहीं है

महबूब मेरे महबूब मेरे
महबूब मेरे महबूब मेरे
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है
जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं है
महबूब मेरे


अरमाँ किसको जन्नत की रंगीं गलियों का
अरमाँ किसको जन्नत की रंगीं गलियों का
मुझको तेरा दामन है बिस्तर कलियों का
जहाँ पर हैं तेरी बाँहें मेरी जन्नत भी वहीं है

महबूब मेरे महबूब मेरे
महबूब मेरे महबूब मेरे
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है
जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं है
महबूब मेरे

रख दे मुझको तू अपना दीवाना कर के
रख दे मुझको तू अपना दीवाना कर के
नज़दीक आ जा फिर देखूँ तुझको जी भर के
मेरे जैसे होंगे लाखों कोई भी तुझसा नहीं है

महबूब मेरे
हो महबूब मेरे
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है
जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं है
महबूब मेरे
......................................................................
Mehboob mere-Patthar ke sanam 1967

Artists: Manoj Kumar, Waheeda Rehman

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Jun 30, 2016

बता दूं क्या लाना-पत्थर के सनम १९६७

शब्दों के हिसाब से शायद ये फिल्म का सबसे बड़ा गीत है.
लता मंगेशकर का गाया और वहीदा रहमान पर फिल्माया
गया ये गीत आज भी सुनने में वही पुराना वाला आनंद ही
देता है. मजरूह सुल्तानपुरी ने इसे लिखा है और संगीतकार
हैं लक्ष्मी प्यारे.

पैसे बचाने के क्या क्या आइडिया दे रही है प्रेमिका प्रेमी को.
ऐसी गर्ल फ्रेंड जिसे मिल जाए वो धन्य हो जाए.

ऐ. ऐ. नडियाडवाला प्रोडक्शनस बैनर के निर्माण में राजा नवाथे
ने इस फिल्म का निर्देशन किया था. राजा नवाथे की फ़िल्में हैं
आह, बसंत बहार, गुमनाम, मनचली इत्यादि. उनकी फिल्मों का
संगीत पक्ष मजबूत रहा. फिल्म आह भले ज्यादा ना चली हो
उसमें कुछ टॉप क्लास गीत मौजूद हैं. पत्थर के सनम फिल्म
तो काफी चली और इसका संगीत बेहद लोकप्रिय. फिल्म का
शीर्षक गीत जो रफ़ी का गाया हुआ है, सबसे ज्यादा लोकप्रिय है.




गीत के बोल:

बता दूं क्या लाना तुम लौट के आ जाना
ये छोटा सा नजराना पिया याद रखोगे के भूल जाओगे
याद रखोगे के भूल जाओगे
बता दूं क्या लाना तुम लौट के आ जाना
ये छोटा सा नजराना पिया याद रखोगे के भूल जाओगे
याद रखोगे के भूल जाओगे

सजते हैं जो तन पे हमारे
सजते हैं जो तन पे हमारे वो हैं पिया नैन तुम्हारे
है लट जो माथे पे आई सी चूड़ी है मेरी कलाई की
पलट के जब आना ये लट ये नज़र लाना
ये छोटा सा नजराना पिया याद रखोगे के भूल जाओगे
याद रखोगे के भूल जाओगे

चाहत से ये मांग भरूंगी
चाहत से ये मांग भरूंगी बिंदिया का मैं चाह करूंगी
माथे पे लागे सुहानी सी होंठों पे तेरे निशानी सी
बालमवा जब आना बिंदिया तुम्हीं बन जाना
ये छोटा सा नजराना पिया याद रखोगे के भूल जाओगे
याद रखोगे के भूल जाओगे

आँखों में चाँद बन के उभरना
आँखों में चाँद बन के उभरना देखो बलम देर ना करना
रहता है दिल में तुम्हारा दिल डरता है फिर भी हमारा दिल
बहुत ना तरसाना तुम लौट के आ जाना
ये छोटा सा नजराना पिया याद रखोगे के भूल जाओगे
याद रखोगे के भूल जाओगे


बता दूं क्या लाना तुम लौट के आ जाना
ये छोटा सा नजराना पिया याद रखोगे के भूल जाओगे
याद रखोगे के भूल जाओगे
…………………………………………………..
Bata doon kya laana-Patthar ke sanam 1967

Artists-Manoj Kumar, Waheeda Rehman

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May 22, 2015

तौबा ये मतवाली चाल-पत्थर के सनम १९६७

अपने ज़माने का फुलतू टपोरी गीत मगर इसमें भी ग्रेस है.
ये ज़बरदस्त हिट गीत रहा है और इसने मजनुओं को इतना
रिझाया था एक वक्त मानो इसके अलावा कोई बेहतर विकल्प
ही न हो इश्क की पींगे चढाने का.  बेचारे फिसड्डी किस्म के
आशिकों को इस गीत के इस्तेमाल के पहले किसी उर्दू के
जानकार से शब्दों का अर्थ पूछना पढता है. आप मजरूह साहब
के गीत को ऐसा वैसा समझने की भूल न कर लें. वे इतनी
गुंजाइश ज़रूर छोड़ते हैं पढ़ाई में पिछडों के लिए कि वे भाषा
सीखें और पढ़े लिखे तरीके से प्रेम करें. वैसे इश्क निहायत ही
बेवकूफ, अंधा, गंवार और उल्लू होता है उसे पढ़ाई लिखाई से
कोई मतलब नहीं होता. इश्क का रसायन शास्त्र अलग किस्म
से चलता है, उसमें न पीरियोडिक टेबल होता है न ही अटॉमिक
वेट वगैरह. उसकी अपनी क्रियाएँ होती हैं, अपने कैटेलिस्ट होते
हैं. ये मैं नहीं, जो बुद्धिजीवी कह गए हैं उसका सार बतला रहा
हूँ इधर.

आपको ऊपर के पैरेग्राफ में कुछ समझ आया ? नहीं न, मुझे
भी नहीं आया. कोई बात नहीं गीत सुन लेते हैं बस. वो क्या
है लाइनें भरना ज़रूरी है थोड़ी पोस्ट को बड़ा करने के लिए और
गूगल भाई एंड कंपनी कंटेंट को तवज्जो देता है, कंटेंट कुछ भी
हो.

इसे मुकेश गा रहे हैं नायक मनोज कुमार के लिए. इस गीत में
फ़िल्मी नायक दो नायिकाओं से इश्क फरमाते नज़र आयेंगे
आपको. इस हिसाब से ये हैवी ड्यूटी गीत हो गया न मुकेश साहब
का. एक साथ दो दो !




गीत के बोल:

तौबा ये मतवाली चाल, झुक जाए फूलों की डाल
चाँद और सूरज आकर माँगें, तुझसे रँग-ए-जमाल
हसीना तेरी मिसाल कहाँ

सितम ये अदाओं की रानाइयाँ हैं
कयामत है क्या तेरी अँगड़ाइयाँ हैं
बहार-ए-चमन हो, घटा हो धनक हो
ये सब तेरी सूरत की परछाईयाँ हैं
के तन से, उड़ता गुलाल कहाँ

तौबा ये मतवाली चाल

हूँ मैं भी दीवानों का इक शाहज़ादा
तुझे देखकर हो गया कुछ ज़्यादा
ख़ुदा के लिए मत बुरा मान जाना
ये लब छू लिये हैं यूँ ही बे-इरादा
नशे में इतना ख़याल कहाँ

तौबा ये मतवाली चाल

यही दिल में है तेरे नज़दीक आ के
मिलूँ तेरे पलकों पे पलके झुका के
जो तुझसा हसीं सामने हो तो कैसे
चला जाऊँ पहलू में दिल को दबा के
कि मेरी इतनी मजाल कहाँ

तौबा ये मतवाली चाल, झुक जाए फूलों की डाल
चाँद और सूरज आकर माँगें, तुझसे रँग-ए-जमाल
हसीना तेरी मिसाल कहाँ
तौबा ये मतवाली चाल
………………………………………………………………..
Tauba ye matwali chaal-Patthar ke sanam 1967

Artists: Manoj Kumar, Waheeda rehman, Mumtaz

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Jul 7, 2009

पत्थर के सनम, तुझे हमने-पत्थर के सनम १९६७

'पत्थर दिल' उपमा का इस्तेमाल बहुत हुआ है। पूरा सनम
पत्थर का हो गया है इस गीत में। सर्वाधिक लोकप्रिय गीतों
में से एक है हमारा आज का गीत फ़िल्म पत्थर के सनम से।
प्यानो पर बैठ के नायक अपनी नायिका की ओर मुखातिब है ।

प्रेम त्रिकोण में उलझी जिंदगियां क्या कर रही हैं आइये देखें इस
गीत में। गीत के बोल मजरूह सुल्तानपुरी के हैं और इसका संगीत
लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल ने तैयार किया है। ये एक सदाबहार गीत
है और आज भी प्रासंगिक है. इसके बोल इतने शानदार हैं कि
इन्हें किसी भी मौसम किसी भी मौके पर इस्तेमाल किया जा
सकता है. आज के प्रेमियों में भी ये गीत लोकप्रिय है, हाँ उतना
नहीं जितना आज से बीस साल पहले था.



गाने के बोल:

पत्थर के सनम, तुझे हमने, मुहब्बत का ख़ुदा जाना
बड़ी भूल हुई, अरे हमने, ये क्या समझा ये क्या जाना

चेहरा तेरा दिल में लिये, चलते चले अंगारों पे
तू हो कहीं, सजदे किये, हमने तेरे रुख़सारों पे
हम सा न हो, कोई दीवाना,

पत्थर के सनम...

सोचा न था बढ़ जाएंगी, तनहाइयां जब रातों की
रस्ता हमें दिखलाएंगी, शमा-ए-वफ़ा इन आँखों की
ठोकर लगी, फिर पहचाना,

पत्थर के सनम...

ऐ काश के, होती ख़बर, तूने किसे ठुकराया है
शीशा नहीं, सागर नहीं, मंदिर-सा इक दिल ढाया है
सारा जहाँ , है वीराना,

पत्थर के सनम...
..........................................................................
Patthar ke sanam(title)-Patthar ke sanam  1967

Artists: Manoj Kumar, Waheeda Rehman, Mumtaz,  

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