Showing posts with label Paying Guest. Show all posts
Showing posts with label Paying Guest. Show all posts

Jul 7, 2017

ओ निगाहे मस्ताना-पेइंग गेस्ट १९५७

ये है म्यूजिकल ऊं हूँ, हूँ हूँ हिट गीत. फिल्म का नाम है
पेइंग गेस्ट. देव आनंद और नूतन अभिनीत इस फिल्म के
गीत लाजवाब हैं. लाजवाब होने की बराबर वजहें हैं-एक तो
गीत के बोल बढ़िया हैं और धुनें भी एक से बढ़ कर एक
हैं.

फिल्म का निर्देशन सुबोध मुखर्जी ने किया था और निर्माण
संस्था का नाम है फिल्मिस्तान. फिल्मिस्तान की सन १९५७
में अभिमान, बड़े सरकार, चम्पाकली, पेइंग गेस्ट, तुमसा नहीं
देखा और जामन फ़िल्में आयीं. चम्पाकली का लता का
गया एक गीत काफी लोकप्रिय हुआ. फिल्म तुमसा नहीं देखा
फिल्म के गाने भी खूब चले.



गीत के बोल:

ओ निगाह-ए-मस्ताना
देख समां है सुहाना
तीर दिल पे चला के
आ ज़रा झुक जाना
ओ निगाह-ए-मस्ताना
देख समां है सुहाना
तीर दिल पे चला के
आ ज़रा झुक जाना
ओ निगाह-ए-मस्ताना

कोई देखे नशीले आँखें मल मल के
दिल कैसे बने न दीवाना
शम्मा करे है इशारे जब जल जल के
कहो क्या करे परवाना
ओ निगाह-ए-मस्ताना
देख समां है सुहाना
तीर दिल पे चला के
आ ज़रा झुक जाना
ओ निगाह-ए-मस्ताना

दामन न बचाना मेरे हाथों से
शरमा के गले से लग जाना
जले चाँद सितारे जिन बातों से
सुन जा वही अफ़साना
ओ निगाह-ए-मस्ताना
देख समां है सुहाना
तीर दिल पे चला के
आ ज़रा झुक जाना
ओ निगाह-ए-मस्ताना

बस्ती के दियों को बुझ जाने दे
लहरा के न रुक रुक जाना
चाहत का लबों पे नाम आने दे
यही प्यार का है ज़माना

ओ निगाह-ए-मस्ताना
देख समां है सुहाना
तीर दिल पे चला के
आ ज़रा झुक जाना
ओ निगाह-ए-मस्ताना
………………………………………………
O nigah-e-mastana-Paying guest 1957

Artists: Dev Anand, Nutan

Read more...

Jun 25, 2017

चाँद फ़िर निकला-पेइंग गेस्ट १९५७

चाँद शब्द से शुरू होने वाला एक खूबसूरत गीत सुनते और
देखते हैं फिल्म पेइंग गेस्ट से. फिल्म की कहानी का जो
पेइंग गेस्ट है वो कुछ भी पे नहीं करता है, हाँ परिभाषा
अनुसार वो पेइंग गेस्ट कहलाता है. फिल्म से ये तो पता
चलता है कि ये कंसेप्ट पुराना है. पहले की बम्बई और
आज की मुंबई में ये बरसों से चलन में है. दूसरे शहरों
में भी ये शुरू हो चुका है. एक कमरे में भेड़ बकरियों जैसे
लोगों को भर लो और उन्हें कहो- पेइंग गेस्ट. परिभाषा
और कंसेप्ट दोनों का कचरा हो गया है.

गीत की तरफ लौटते हैं. नायिका उसी फक्कड नायक का
इंतज़ार कर रही है और काफी रिच किस्म का गीत गा
रही है. कुछ फटीचरों की किस्मत काफी बुलंद होती है.
उन्हें काम धंधा मिले ना मिले खूबसूरत लड़की अवश्य
मिल जाती है प्रेम का राग अलापने के लिए.

ऐसी किस्मत वालों को देख के अधिकांश के सुलगते हुए
सीनों से धुंआ सा उठता है. आधुनिक युग में दिल की
जगह दूसरे क्षेत्र ने ले ली है. गीत मजरूह सुल्तानपुरी का
है और संगीत एस डी बर्मन का. लता मंगेशकर ने इसे
गाया है.



गीत के बोल:

चाँद फिर निकला  मगर तुम न आये
जला फिर मेरा दिल  करुँ क्या मैं हाय
चाँद फिर निकला

ये रात कहती है वो दिन गये तेरे
ये जानता है दिल के तुम नहीं मेरे
ये रात कहती है वो दिन गये तेरे
ये जानता है दिल के तुम नहीं मेरे
खड़ी मैं हूँ फिर भी निगाहें बिछाये
मैं क्या करूँ हाय के तुम याद आये
चाँद फिर निकला

सुलगते सीने से धुंआ सा उठता है
लो अब चले आओ के दम घुटता हैं
सुलगते सीने से धुंआ सा उठता है
लो अब चले आओ के दम घुटता हैं
जला गये तन को बहारों के साये
मैं क्या करुँ हाय के तुम याद आये

चाँद फिर निकला  मगर तुम न आये
जला फिर मेरा दिल  करुँ क्या मैं हाय
चाँद फिर निकला
……………………………………………………….
Chand fir nikla-Paying guest 1957

Artists: Nutan

Read more...

Jan 27, 2017

हाय हाय हाय ये निगाहें-पेइंग गेस्ट १९५७

मदिरा जिसे हम अलग अलग नामों से पुकारते हैं और आम कंज्यूमर
जिसे दारू कहता है आवश्यक तत्व रहा है और रहेगा किसी भी कथानक
का, फ़िल्मी हो या सामाजिक या व्यक्तिगत ही हो. बहानेबाजी के श्रेष्ठ
उदाहरण दारू के सन्दर्भ में ही सुनाई देते हैं.

दारू अपना असर ज़रूर दिखलाती है, आदमी को औकात पर ला देती है.
फिल्मों में कई ऐसे प्रसंग आये हैं जब नायक ने पहली बार पी हो और
बाद में या तो प्रवचन दिए हों या कोई गीत गाया हो. वैसे भी हिंदी
फिल्म का नायक विद्वान होता है, बिना उँगलियाँ हिलाए ही वो गिटार,
सितार, एकोर्डियन, प्यानो सब कुछ बजा सकता है. इसी तरह ही वो
किसी भी विषय पर साधिकार अपना वक्तव्य दे सकता है जिसमें प्रेम,
प्यार, मोहब्बत प्रधान विषय है. विषय शब्द का एक दूसरा अर्थ भी है,
आप जानते हैं.

देव आनंद अभिनय के अलावा एक और चीज़ के मास्टर थे-योग के.
उनके सदाबहार युवा रहने के पीछे का राज़ यही है. अपने समकालीन दो
अन्य बड़े अभिनेताओं की तुलना में वे सोबर नज़र आये भले ही किसी
फिल्म में उन्होंने किसी गुंडे मवाली की भूमिका निभाई हो. याद हो
अगर आपको बनारसी बाबू फिल्म.

मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे गीत को परदे पर देव आनंद एक पार्टी में
गा रहे हैं. किशोर कुमार ने पार्श्व गायन किया है जो एक समय खुद के
ऊपर फिल्माए या फिर केवल देव आनंद के ऊपर फिल्माए गए गीत ही
गाया करते थे.



गीत के बोल:

शमा जलती है जले
रात ढलती है ढाले
छोड़ के ऐसी महफ़िल
हम नहीं जाने वाले

हाय हाय हाय ये निगाहें
हाय हाय हाय ये निगाहें
कर दे शराबी जिसे चाहें  जिसे चाहें
मैं तो मैं तो भूल गया राहें

रात हसीं  है जवाँ हैं नज़ारे
झूम चले हम दिल के सहारे
रात हसीं  है जवाँ हैं नज़ारे
झूम चले हम दिल के सहारे
आज कोई हमको न पुकारे
रोकती है मेरी राहें
मय की बोतल जैसी बाहें
हाय हाय ये निगाहें
हाय हाय हाय ये निगाहें
कर दे शराबी जिसे चाहें  जिसे चाहें
मैं तो मैं तो भूल गया राहें

यूँ जो समा बहका बहका हो
हम भी ज़रा बहकें तो मज़ा हो
यूँ जो समा बहका बहका हो
हम भी ज़रा बहकें तो मज़ा हो
आँख पिये और दिल को नशा हो
ये इशारे  ये अदाएँ
मय की बोतल जैसी बाहें

हाय हाय ये निगाहें
हाय हाय हाय ये निगाहें
कर दे शराबी जिसे चाहें  जिसे चाहें
मैं तो मैं तो भूल गया राहें


हाय हाय हाय हाय

याद नहीं
याद नहीं मेरा प्यार यहीं है
या मेरी मंजिल और कहीं है
याद नहीं मेरा प्यार यहीं है
या मेरी मंजिल और कहीं है
देखो मुझे कुछ होश नहीं है
तौबा तौबा ये निगाहें
मय की बोतल जैसी बाहें

हाय हाय ये निगाहें
हाय हाय हाय ये निगाहें
कर दे शराबी जिसे चाहें  जिसे चाहें
मैं तो मैं तो भूल गया राहें
........................................................
Haye haye ye nigahen-Paying guest 1957

Artists; Dev Anand,

Read more...

Feb 19, 2010

ओ निगाहें मस्ताना-पेइंग गेस्ट १९५७

फिल्म पेईंग गेस्ट से एक और कर्णप्रिय गीत जो किशोर और आशा
की आवाजों में है। गीत लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने। इसे फिल्माया
गया है देव आनंद और नूतन पर। फिल्म सन १९५७ में आई थी।



गाने के बोल:

ओ निगाहें मस्ताना
देख समाँ है सुहाना
तीर दिल पे चला के
हाँ, ज़रा झुक जाना
ओ हो,

ओ निगाहें मस्ताना
देख समाँ है सुहाना
तीर दिल पे चला के
हाँ, ज़रा झुक जाना
ओ हो,

ओ निगाहें मस्ताना

कोई देखे नशीले आँखें मल मल के
दिल कैसे बने न दीवाना
शम्मा करे है इशारे जब जल जल के
कहो क्या करे परवाना
कोई देखे नशीले आँखें मल मल के
दिल कैसे बने न दीवाना
शम्मा करे है इशारे जब जल जल के
कहो क्या करे परवाना
ओ हो

ओ निगाहें मस्ताना
देख समाँ है सुहाना
तीर दिल पे चला के
हाँ, ज़रा झुक जाना
ओ हो,

ओ निगाहें मस्ताना
देख समाँ है सुहाना
तीर दिल पे चला के
हाँ, ज़रा झुक जाना
ओ हो,

ओ निगाहें मस्ताना

दामन न बचाना मेरे हाथों से
शरमा के गले से लग जाना
जले चाँद सितारे जिन बातों से
सुन जा वही अफ़साना
दामन न बचाना मेरे हाथों से
शरमा के गले से लग जाना
जले चाँद सितारे जिन बातों से
सुन जा वही अफ़साना
ओ हो

ओ निगाहें मस्ताना
देख समाँ है सुहाना
तीर दिल पे चला के
हाँ, ज़रा झुक जाना
ओ हो,

ओ निगाहें मस्ताना

बस्ती के दियों को बुझ जाने दे
लहरा के न रुक रुक जाना
चाहत का लबों पे नाम आने दे
यही प्यार का है ज़माना
बस्ती के दियों को बुझ जाने दे
लहरा के न रुक रुक जाना
चाहत का लबों पे नाम आने दे
यही प्यार का है ज़माना
ओ हो

ओ निगाहें मस्ताना
देख समाँ है सुहाना
तीर दिल पे चला के
हाँ, ज़रा झुक जाना
ओ हो,

ओ निगाहें मस्ताना

Read more...

Jan 24, 2010

छोड़ दो आँचल ज़माना क्या कहेगा-पेइंग गेस्ट १९५७

फ़िल्म - पेइंग गेस्ट
वर्ष: १९५७
गीत - मजरूह सुल्तानपुरी
संगीत - एस डी बर्मन
गायक - किशोर कुमार, आशा भोंसले
कलाकार- देव आनंद, नूतन
...........



गाने के बोल:

आ, छोड़ दो आंचल ज़माना क्या कहेगा
हो, ओ ओ,छोड़ दो आंचल ज़माना क्या कहेगा
हा हा हा , इन अदाओं का ज़माना भी हैं दीवाना
दीवाना क्या कहेगा
हो ओ ओ , छोड़ दो आंचल ज़माना क्या कहेगा
हा हा हा , इन अदाओं का ज़माना भी हैं दीवाना
दीवाना क्या कहेगा
हा हा हा ,छोड़ दो आंचल ज़माना क्या कहेगा


मैं चली,
मैं चली अब खूब छेड़ो, प्यार के अफ़साने
कुछ मौसम हैं दीवाना कुछ तुम भी हो दीवाने
मैं चली अब खूब छेड़ो, प्यार के अफ़साने
कुछ मौसम हैं दीवाना कुछ तुम भी हो दीवाने

ज़रा सुनना, जान-ए-तमन्ना
ओ, ज़रा सुनना, जान-ए-तमन्ना
इतना तो सोचिये मौसम सुहाना क्या कहेगा

हो ओ ओ , छोड़ दो आंचल ज़माना क्या कहेगा
हा हा हा , इन अदाओं का ज़माना भी हैं दीवाना
दीवाना क्या कहेगा

हा हा हा ,छोड़ दो आंचल ज़माना क्या कहेगा

हो हो हो हो हो हो
हा हा हा हा
हो हो हो हो हो हो
हा हा हा हा
हो हो हो हो हो हो
हं हं हं हं

यूँ न देखो जाग जाए प्यार की अंगड़ाई
ये रस्ता ये तनहाई लो दिल ने ठोकर खाई
यूँ न देखो जाग जाए प्यार की अंगड़ाई
ये रस्ता ये तनहाई लो दिल ने ठोकर खाई
यही दिन हैं मस्ती के सिन हैं
यही दिन हैं मस्ती के सिन हैं
किसको ये होश है अपना बेगाना क्या कहेगा

हो ओ ओ , छोड़ दो आंचल ज़माना क्या कहेगा
हा हा हा , इन अदाओं का ज़माना भी हैं दीवाना
दीवाना क्या कहेगा

हा हा हा ,छोड़ दो आंचल ज़माना क्या कहेगा

ये बहारें ये फुवारें ये बरसता सावन
थर थर काँपे हैं तन मन मेरी बैयाँ धर लो साजन
ये बहारें ये फुवारें ये बरसता सावन
थर थर काँपे हैं तन मन मेरी बैयाँ धर लो साजन
अजी आना दिल में समाना
अजी आना दिल में समाना
एक दिल एक जान हैं हम तुम, ज़माना क्या कहेगा

हा हा हा , छोड़ दो आंचल ज़माना क्या कहेगा
हा हा हा , इन अदाओं का ज़माना भी हैं दीवाना
दीवाना क्या कहेगा
ज़माना क्या कहेगा
दीवाना क्या कहेगा

Read more...

Mar 12, 2009

माना जनाब ने पुकारा नहीं-पेइंग गेस्ट १९५७

साईकिल पर आशिकी फरमाते आपने श्वेत श्याम के युग के
नायकों को देखा होगा। फिल्म में नायक एक फटीचर सा वकील
है जो नायिका के यहाँ बतौर पेईंग गेस्ट रह रहा है और किराया देने
में भी असमर्थ है। उसकी एक अहम् उपलब्धि है नायिका से इश्क
फरमाना।

शेरवानी पहने हुए नायक नवाबी दौर के मजनू सा नायिका के
इर्द गिर्द मंडराते हुए एक मधुर गीत गा रहा है । गाना रोचक है और
बार बार देखने योग्य है। कलाकार हैं नूतन और देव आनंद। मजरूह
के लिखे, एस डी बर्मन के संगीतबद्ध किये बोलों को गा रहे हैं किशोर
कुमार।




गाने के बोल:

माना जनाब ने पुकारा नहीं
क्या मेरा साथ भी गवारा नहीं
मुफ़्त में बन के, चल दिये तनके,
वल्ला जवाब तुम्हारा नहीं

माना जनाब ने पुकारा नहीं
क्या मेरा साथ भी गवारा नहीं
मुफ़्त में बन के, चल दिये तनके,
वल्ला जवाब तुम्हारा नहीं


माना जनाब ने पुकारा नहीं

यारों का चलन है गुलामी
देतें हैं हसीनों को सलामी
यारों का चलन है गुलामी
देतें हैं हसीनों को सलामी
गुस्सा ना कीजिये जाने भी दीजिये
बन्दगी तो बन्दगी तो लीजिये साहब

माना जनाब ने पुकारा नहीं

टूटा फूटा दिल ये हमारा,
जैसा भी है अब है तुम्हारा
टूटा फूटा दिल ये हमारा,
जैसा भी है अब है तुम्हारा
इधर देखिये, नज़र फेरिये
दिल्लगी ना दिल्लगी ना कीजिये साहब

माना जनाब ने पुकारा नहीं

माशा अल्ला कहना तो माना
बन गया बिगड़ा ज़माना
माशा अल्ला कहना तो माना
बन गया बिगड़ा ज़माना
तुमको हँसा दिया, प्यार सिखा दिया
तुमको हँसा दिया, प्यार सिखा दिया
शुक्रिया तो शुक्रिया तो कीजिये साहब

माना जनाब ने पुकारा नहीं,
क्या मेरा साथ भी गवारा नहीं
मुफ़्त में बन के, चल दिये तनके,
वल्ला जवाब तुम्हारा नहीं हाय
वल्ला जवाब तुम्हारा नहीं हाय
वल्ला जवाब तुम्हारा नहीं हाय
............................................................
Mana janaab ne pukar nahin-Paying Guest 1957

Artists: Dev Anand, Nutan

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP