जिन्दगी का सफ़र-सफ़र १९७०
फिल्मों के कथानक अलग होने में फिल्म का अंत एक बड़ी
भूमिका निभाता है. अमूमन तीन तरीके के अंत हमें देखने को
मिलते हैं-सुखान्त, दुखांत और कन्फ्यूजांत. तीसरे किस्म के
अंत में दर्शक समझ नहीं पाता हँसे कि रोये इसलिए वर्गीकरण
इस प्रकार से किया गया है.
जीवन दर्शन पर इन्दीवर का ये गीत लोकप्रिय है और इस फिल्म
के सभी गीत हिट हुए थे मन्ना डे के गाये गीत को मिला कर.
फिल्म में संगीत कल्याणजी आनंदजी का है.
गीत के बोल:
जिन्दगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
जिन्दगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
है ये कैसी डगर चलते हैं सब मगर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
जिन्दगी को बहुत प्यार हमने दिया
मौत से भी मोहब्बत निभायेंगे हम
रोते-रोते जमाने में आये मगर
हंसते हंसते जमाने से जायेंगे हम
जायेंगे पर किधर है किसे ये खबर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
ऐसे जीवन भी हैं जो जिए ही नहीं
जिनको जीने से पहले ही मौत आ गयी
फूल ऐसे भी हैं जो खिले ही नहीं
जिनको खिलने से पहले खिजां खा गई
है परेशान नजर थक गए चारागर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
जिन्दगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
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Zindagi ka safar-Safar 1970
Artist: Rajesh Khanna, Sharmila Tagore

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