Showing posts with label Safar. Show all posts
Showing posts with label Safar. Show all posts

Dec 16, 2017

जीवन से भरी तेरी आँखें-सफ़र १९७०

जीवन जीने की प्रेरणा कहीं से भी और किसी भी चीज़ से ली
जा सकती है. इस गीत के बोलों पर ध्यान दिया जाए तो यही
बात उजागर होती है. इन्दीवर के इस खूबसूरत गीत के नयी
पीढ़ी में भी दीवाने बहुत हैं. फिल्म सफर के सभी गीत श्रवणीय
हैं और लोकप्रिय हैं. एक ऐसा एल्बम है जिसके सभी गीत
समान रूप से लोकप्रिय हैं.

प्रेरणादायी गीत में नायिका के सौंदर्य की प्रशंसा भी कर दी गयी
है. इन्दीवर ने ऐसा ही एक गीत सरस्वती चंद्र के लिए लिखा था
जो पूर्णतः प्रशंसा को समर्पित था. उसमें भी तरह तरह की उपमाओं
और दोसों का प्रयोग हुआ है.



गीत के बोल:

जीवन से भरी तेरी आँखें
मजबूर करें जीने के लिए
सागर भी तरसते रहते हैं
तेरे रूप का रस पीने के लिए

तस्वीर बनाये क्या कोई
क्या कोई लिखे तुझपे कविता
रंगों छंदों में समायेगी
किस तरह से इतनी सुंदरता
इक धड़कन है तू दिल के लिए
एक जान है तू जीने के लिए
जीवन से भरी टेरी आँखें

मधुबन की सुगंध है साँसों में
बाहों में कमल की कोमलता
किरणों का तेज है चेहरे पे
हिरणों की है तुझमें चंचलता
आँचल का तेरे है तार बहुत
कोई चाक जिगर सीने के लिए
जीवन से भरी तेरी आँखें
.............................................................
Jeevan se bhari teri aankhen-Safar 1970

Artists: Rajesh Khanna, Sharmila Tagore

Read more...

Mar 6, 2017

जिन्दगी का सफ़र-सफ़र १९७०

१९७० की फिल्म सफर का कथानक बाकी फिल्मों से अलग है.
फिल्मों के कथानक अलग होने में फिल्म का अंत एक बड़ी
भूमिका निभाता है. अमूमन तीन तरीके के अंत हमें देखने को
मिलते हैं-सुखान्त, दुखांत और कन्फ्यूजांत. तीसरे किस्म के
अंत में दर्शक समझ नहीं पाता हँसे कि रोये इसलिए वर्गीकरण
इस प्रकार से किया गया है.

जीवन दर्शन पर इन्दीवर का ये गीत लोकप्रिय है और इस फिल्म
के सभी गीत हिट हुए थे मन्ना डे के गाये गीत को मिला कर.
फिल्म में संगीत कल्याणजी आनंदजी का है. 



गीत के बोल:

जिन्दगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
जिन्दगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
है ये कैसी डगर चलते हैं सब मगर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं

जिन्दगी को बहुत प्यार हमने दिया
मौत से भी मोहब्बत निभायेंगे हम
रोते-रोते जमाने में आये मगर
हंसते हंसते जमाने से जायेंगे हम
जायेंगे पर किधर है किसे ये खबर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं

ऐसे जीवन भी हैं जो जिए ही नहीं
जिनको जीने से पहले ही मौत आ गयी
फूल ऐसे भी हैं जो खिले ही नहीं
जिनको खिलने से पहले खिजां खा गई
है परेशान नजर थक गए चारागर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं

जिन्दगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
..........................................................
Zindagi ka safar-Safar 1970

Artist: Rajesh Khanna, Sharmila Tagore

Read more...

Jan 9, 2017

जो तुमको हो पसंद-सफ़र १९७०

मुकेश का गाया इन्दीवर का लिखा गीत. संगीतकार हैं
कल्याणजी आनंदजी. फिल्म में मुकेश का गाया एकमात्र
गीत. फ़िरोज़ खान और शर्मिला पर फिल्माया गया है.




गीत के बोल:

जो तुमको हो पसंद वही बात कहेंगे
तुम दिन को अगर रात कहो  रात कहेंगे

देते ना आप साथ तो  मर जाते हम कभी के
पूरे हुए हैं आप से  अरमां जिन्दगी के
हम ज़िन्दगी को आपकी सौगात कहेंगे
तुम दिन को अगर रात कहो  रात कहेंगे

चाहेंगे  निभाएँगे  सराहेंगे आप ही को
आँखों में नम हैं जब तक  देखेंगे आप ही को
अपनी जुबां से आपके जज़्बात कहेंगे
तुम दिन को अगर रात कहो  रात कहेंगे
……………………………………………………
Jo tumko ho pasand wahi baat-Safar 1970

Read more...

Sep 16, 2016

नदियाँ चले चले रे धारा-सफ़र १९७०

७० के दशक के पूर्वार्ध में बनी फिल्मों में दार्शनिक, आशावादी
और प्रेरणादायी गीत शामिल किये जाते थे. हर फिल्म में तो
नहीं मगर हर तीसरी चौथी फिल्म में एक गीत ऐसा मिल जाता
था जिसमें कोई सन्देश होता था आम जनता के लिए.

फिल्म सफर में ये गीत नायक पर नहीं फिल्माया गया है. कहानी
के अनुसार गाने वाला नायक को गीत के माध्यम से एक सन्देश
दे रहा है. गौरतलब है जीवन के फलसफे पर नायक द्वारा भी
एक गीत गाया जाता है फिल्म में. इन्दीवर का लिखा गीत मन्ना डे
गा रहे हैं. संगीत कल्याणजी आनंदजी का है.



गीत के बोल:

नदिया चले चले रे धारा
चंदा चले चले रे तारा
तुझको चलना होगा
तुझको चलना होगा

जीवन कहीं भी ठहरता नहीं हैं
आँधी से तूफां से डरता नहीं हैं
तू ना चलेगा तो चल देंगी राहें
मंज़िल को तरसेगी तेरी निगाहें
तुझको चलना होगा
तुझको चलना होगा

पार हुआ वो रहा जो सफ़र में
जो भी रुका घिर गया वो भंवर में
नाव तो क्या बह जाये किनारा
बड़ी ही तेज समय की हैं धारा
तुझको चलना होगा
तुझको चलना होगा
……………………………………………….
Nadiya chale chale re dhara-Safar 1970

Read more...

Feb 14, 2016

हम थे जिनके सहारे-सफ़र १९७०

कुछ फिल्मों का कथानक समझने के लिए आपको सजग रहना
पड़ता है. मिथुन अभिनीत एक्शन फ़िल्में देखते देखते सरसरी
निगाह से फिल्म देखने की आदत पड गई, इसके चलते एक
बार सिनेमा हाल में फिल्म सफर देखने का सौभाग्य मिला, उसे
भी हमने चाय पीते, समोसे खाते, पोपकोर्न चबाते हुए देखा.
फलस्वरूप फिल्म की कहानी हमारी समझ के बाहर हो गयी.

फिल्म में नायक परेशां क्यूँ है, समझने के लिए इसे दोबारा
वी सी आर नमक उपकरण की मदद लेना पड़ी. ये ८० के दशक
के पूर्वार्ध की बात है.

फिल्म से आज आपको टॉप क्लास गीत सुनवाते हैं लता मंगेशकर
का गाया हुआ. फिल्म की नायिका हैं शर्मिला टैगोर. फिल्म का
निर्माण किया था मुशीर आलम और मोहम्मद रियाज़ ने. इसके
निर्देशक थे असित सेन.



गीत के बोल:

हम थे जिनके सहारे, वो हुए ना हमारे
डूबी जब दिल की नैय्या, सामने थे किनारे
हम थे जिनके सहारे, वो हुए ना हमारे
डूबी जब दिल की नैय्या, सामने थे किनारे
हम थे जिनके सहारे

क्या मुहब्बत के वादे, क्या वफ़ा के इरादे
रेत की है दीवारें, जो भी चाहे गिरा दे
जो भी चाहे गिरा दे

हम थे जिनके सहारे, वो हुए ना हमारे

है सभी कुछ जहां में, दोस्ती है वफ़ा है
अपनी ये कम नसीबी, हमको ना कुछ भी मिला है
हमको ना कुछ भी मिला है

हम थे जिनके सहारे, वो हुए ना हमारे

यूँ तो दुनिया बसेगी, तन्हाई फिर भी डसेगी
जो ज़िन्दगी में कमी थी, वो कमी तो रहेगी
वो कमी तो रहेगी

हम थे जिनके सहारे, वो हुए ना हमारे
डूबी जब दिल की नैय्या, सामने थे किनारे
हम थे जिनके सहारे, वो हुए ना हमारे
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
Hum the jinke sahare-Safar 1970

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP