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Sep 12, 2017

अजीब सानेहा-गमन १९७९

जो लीक पर चला करते हैं उन्हें धन ज्यादा मिलता है और जो
अलग हट के कुछ करने की कोशिश करते हैं उन्हें वाह वाह ही
ज्यादा मिला करती है. संगीतकार जयदेव के साथ भी ऐसा ही
कुछ था. उन्होंने कई प्रतिभाओं को मौके दिए. एक नाम उनमें
है-हरिहरन.

सुनते हैं शहरयार का लिखा एक गीत फिल्म गमन से. इसे सुन
कर आपको फिल्म हम दोनों का एक गीत याद आएगा-कभी खुद
पे कभी हालत पे रोना आया.




गीत के बोल:

अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो
मैं अपने साये से
मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो
मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो
अजीब सानेहा

हर एक नक़्श तमन्ना का हो गया धुंधला
हर एक नक़्श तमन्ना का हो गया धुंधला
हर एक ज़ख़्म मेरे दिल का भर गया यारो
हर एक ज़ख़्म मेरे दिल का भर गया यारो
अजीब सानेहा

भटक रही थी जो
भटक रही थी जो कश्ती वो ग़क़र-ए-आब हुई
चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया यारो
चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया यारो
अजीब सानेहा

वो कौन था
वो कौन था वो कहाँ का था क्या हुआ था उसे
सुना है आज कोई शख़्स मर गया यारो
सुना है आज कोई शख़्स मर गया यारो

अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो
मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो
अजीब सानेहा
……………………………………………………….
Ajeeb saneha-Gaman 1979

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Feb 28, 2015

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान-गमन १९८०

सार्थक सिनेमा जिसे कहते हैं उसमें से एक फिल्म-गमन. हालाँकि
फिल्म समस्या पूर्ती का कोई दावा नहीं करती मगर महानगरों की
कशमकश भरी, दो वक्त की रोटी की ज़द्दोज़हद वाली जिंदगी को बेपर्दा
ज़रूर करती है. गांव से शहर आये युवकों का क्या हाल होता है इसके
इर्द गिर्द कथानक घूमता है फिल्म का. गीत है सीने में जलन, आँखों
में तूफ़ान सा क्यूँ है. आज के समय में इसे प्रदूषण के हिसाब से सोचें
तो-आँखों में जलन सीने में तूफ़ान सा क्यूँ है-बेवजह की भाग दौड
सड़कों पे अनगिनत गाड़ियों की और उनसे उठने वाला धुआं, उडती
हुई धूल, ये सब शरीर पर अत्याचार करते हैं.

शहरयार का लिखा गीत जिससंगीत से संवारा है जयदेव ने, फिल्माया
गया है फारूक शेख पर और इसे गाया है सुरेश वाडकर ने. फिल्म में
इसे बैकग्राउंड स्कोर की तरह इस्तेमाल किया गया है. सुरेश वाडकर को
कुछ ऐसे ही गीतों ने पहचान दिलाई थी उस वक्त.



गीत के बोल:

सीने में जलन, आँखों में तूफ़ान सा क्यों है
इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है

दिल हैं तो धड़कने का बहाना कोई ढूंढें
पत्थर की तरह बेहिस-ओ-बेजान सा क्यों है

तनहाई की ये कौन सी, मंज़िल है रफीकों
ता-हद-ए-नजर एक बयाबान सा क्यों है

क्या कोई नयी बात नजर आती है हम में
आईना हमे देख के हैरान सा क्यों है

सीने में जलन, आँखों में तूफ़ान सा क्यों है
इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है
..............................................................................
Seene mein jalan aankhon mein toofan-Gaman 1980

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Dec 17, 2011

आपकी याद आती रही-गमन १९७८

देसी संगीत को मुख्यतः पांच श्रेणियों में बांटा जा सकता है- गौरवशाली,
समृद्ध,  अनगढ़, अल्हड और फूहड़. ये श्रेणियाँ मुझे इतने सालों के दौरान
हुए अनुभवों के आधार पर दिमाग में उपजी हैं. इन अनुभवों को बढाने में
कई संगीत प्रेमियों, संगीत समीक्षाकारों और संगीतकारों का योगदान रहा
है. संगीतकार जयदेव समृद्ध देसी संगीत के प्रतिनिधि हैं. उनके संगीत में
भारतीय उपमहाद्वीप की मिटटी और संस्कृति की खुशबू हमेशा आती रही.
उनके योगदान को भुलाया जाना संगीत रसिकों के लिए असंभव सा है.

उनके संगीत निर्देशन में सन १९८० में एक अल्बम आया था-फिल्म गमन
के गीतों का. गीत किसने गाया ये मायने बिलकुल भी नहीं रखता था
श्रोताओं के लिए क्यूंकि अधिकांश को ये नहीं मालूम था कि इस गीत को
छाया गांगुली नामक गायिका ने गाया है. ये शायद अब भी कईयों को
नहीं मालूम है. एक लीक से हट कर अच्छा गीत बनाया था जयदेव ने जो
ख़ासा लोकप्रिय हुआ था. महानगर में महत्वाकांक्षी युवकों की दो वक्त की
रोटी के लिए जारी जद्दो-जहद देखने लायक थी इस फिल्म में.


मखदूम मोइउद्दीन की रचना को स्वर दिया है छाया गांगुली ने जिन्होंने
हिंदी फिल्मों में बहुत ही कम गीत गाये हैं. गीत फिल्माया गया है हिंदी
सिनेमा की सबसे प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में से एक स्मिता पाटिल पर.

गौर तलब है जयदेव को इस फिल्म के संगीत के लिए राष्ट्रीय फिल्म
पुरस्कार प्रदान किया गया था और प्रस्तुत गीत के लिए छाया गांगुली को
भी पुरस्कर से नवाज़ा गया था.






गीत के बोल:

आपकी याद आती रही रात भर
चश्मे-नम मुस्कुराती रही रात भर
आपकी याद आती रही

रात भर दर्द की शाम जलती रही
रात भर दर्द की शाम जलती रही
गम की लौ थरथराती रही रात भर
गम की लौ थरथराती रही रात भर

आपकी याद आती रही

बांसुरी की सुरीली सुहानी सदा
बांसुरी की सुरीली सुहानी सदा
याद बन बन के आती रही रात भर
याद बन बन के आती रही रात भर

आपकी याद आती रही

याद की चांदनी दिल में उतरती रही
याद की चांदनी दिल में उतरती रही
चांदनी डगमगाती रही रात भर
चांदनी डगमगाती रही रात भर

आपकी याद आती रही

कोई दीवाना गलियों में फिरता रहा
कोई दीवाना गलियों में फिरता रहा
कोई आवाज़ आती रही रात भर
कोई आवाज़ आती रही रात भर

आपकी याद आती रही
..................................................
Aapki yaad aati rahi-Gaman 1978

Artist: Smita Patil

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