भरत व्यास रचित एक लोरी सुनते हैं फिल्म आधी रोटी से.
इस फिल्म से कुछ मधुर गीत आप सुन चुके हैं पहले. छोटे
बच्चे अपनी मर्जी से सोते हैं और अपनी मर्जी से उठ जाते हैं.
उनका नींद का सिस्टम अनूठा होता है. उन्हें सुलाना आसान
काम नहीं होता. छोटा कोमल सा दिमाग कभी लोरी के आनंद
से तो कभी कन्फ्यूज़न से थक कर सो जाता है.
सुनते हैं गीता दत्त के आवाज़ में ये गीत जिसे अविनाश व्यास
ने संगीत में बाँधा है.
गीत के बोल:
सो जा रे सो जा मेरे लाल सो जा
निंदिया की नगरी में खो जा
मेरे लाल सो जा
सो जा रे सो जा मेरे लाल सो जा
सोया है गगन सोया है पवन
सोया है गगन सोया है पवन
तू भी सो जा निर्धन के धन
सो जा
सो जा रे सो जा मेरे लाल सो जा
ना कोई रेशम झूल झुलाये
ना कोई पंखा डुलाए
सो जा कन्हैया तुझको तेरी
मैया की माता सुलाये
सो जा रे सो जा मेरे लाल सो जा
तू जो सोये संग संग तेरे
सोयेंगे दुखड़े हमारे
अपने दुलारे के मोहन मुखड़े
पे वार मैं नहा नख तारे
सो जा रे सो जा मेरे लाल सो जा.
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So ja re so ja mere laal-Aadhi roti 1957
सन १९५७ की फिल्म आधी रोटी का निर्देशन चंद्रकांत ने किया
था. इस फिल्म में रूप कुमार, मनोरमा, भगवान, अल नासिर,
उल्हास, प्रेम अदीब, डब्बू, और सुलोचना लटकर जैसे कलाकारों
ने काम किया.
फिल्म से अगला गीत सुनते हैं जिसे भरत व्यास ने लिखा है
और अविनाश व्यास ने संगीतबद्ध किया. गीता दत्त इस गीत की
गायिका हैं. फिल्म और उसके कलाकारों के बारे में हमने इसी
फिल्म के एक गीत पर चर्चा करते वक्त काफी प्रकाश डाला था.
वो पोस्ट देख लें एक बार.
गीत के बोल:
मैं गोरी गोरी गोरी छोरी
करती हूँ दिलों की चोरी
ज़रा बच के ज़रा हट के
फेंकूँगी नज़र की डोरी
मैं गोरी गोरी गोरी छोरी
करती हूँ दिलों की चोरी
ज़रा बच के ज़रा हट के
फेंकूँगी नज़र की डोरी
मेरी पतली कमर में कहाँ है तसर
मेरी तिरछी नज़र का जी देखो असर
उल्फत का ये शोला भडकता जिधर
लगे आग इधर लगे आग उधर
मैं गोरी गोरी गोरी छोरी
करती हूँ दिलों की चोरी
ज़रा बच के ज़रा हट के
फेंकूँगी नज़र की डोरी
एक शमा
एक शाम परवाने हज़ार
किससे किससे करूं मैं प्यार
कोई काला कोई गोरा
रंग रंगीला कोई छोरा
छोरे तेरी मोहब्बत मान गई
मेरे हुस्न की अब ये आन गई
झुकी झुकी ये नज़र पहचान गई
तेरे दिल में छुपा है वो जान गई
मैं गोरी गोरी गोरी छोरी
करती हूँ दिलों की चोरी
ज़रा बच के ज़रा हट के
फेंकूँगी नज़र की डोरी
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Main gori gori gori-Aadhi roti 1957
आज सुनते हैं सन ५७ की फिल्म आधी रोटी से अगला
गीत. यह एक युगल गीत है रफ़ी और गीता दत्त की
आवाजों में. इसके रचनाकार हैं भरत व्यास और इस गीत
को स्वरबद्ध किया है अविनाश व्यास ने. कवियों के पास
शब्दों की कोई कमी नहीं होती. इस गीत के शब्द थोड़े
अलग हैं और ऐसा लगता है मानो कोई गद्य को पद्य की
तरह गाया जा रहा हो. कुछ कुछ आधुनिक कविता सरीखा
है मगर शब्दों की जमावट गीत के पैरामीटर और मीटर
के बीच ही है. धुन अच्छी है और आपको अविनाश व्यास
का संगीत अधिकतर थोडा सोफ्ट किस्म का ही मिलेगा.
यह गीत भी ईश्वर से शिकायत वाला गीत है और इसमें
उसके दूसरे समर्थ बन्दों से मदद की गुहार की जा रही है.
गीत के बोल:
तेरी दुनिया में आ कर के भी
तेरी दुनिया न देख सके
हम अंधे, खुदा के तुम बंदे
मिटा दो ये दुखड़ा दिला दो
एक रोटी का टुकड़ा
एक रोटी का टुकड़ा
तेरी दुनिया में आ कर के भी
तेरी दुनिया न देख सके
हम अंधे, खुदा के तुम बंदे
मिटा दो ये दुखड़ा दिला दो
एक रोटी का टुकड़ा
एक रोटी का टुकड़ा
अपने हाथ से गढा रे खिलौना
फिर क्यूँ पालना भूल गए
अपने हाथ से गढा रे खिलौना
फिर क्यूँ पालना भूल गए
आँखें बना कर इस तरह से
ज्योत डालना भूल गए
भूल गए
तेरी दुनिया में आ कर के भी
तेरी दुनिया न देख सके
हम अंधे, खुदा के तुम बंदे
मिटा दो ये दुखड़ा दिला दो
एक रोटी का टुकड़ा
एक रोटी का टुकड़ा
लोग कहें अन्धों के आगे
हर दम यहाँ अँधेरा है
लोग कहें अन्धों के आगे
हर दम यहाँ अँधेरा है
पर इस अँधेरे ने भी देखो
हमसे मुखडा फेरा है
क्या जाने वो शाम के जिसने
देखा नहीं सवेरा है
क्या जाने वो शाम के जिसने
देखा नहीं सवेरा है
नहीं रौशनी देखी तो फिर
किसको कहे अँधेरा है
अँधेरा है
तेरी दुनिया में आ कर के भी
तेरी दुनिया न देख सके
हम अंधे, खुदा के तुम बंदे
मिटा दो ये दुखड़ा दिला दो
एक रोटी का टुकड़ा
एक रोटी का टुकड़ा
तेरी दुनिया में आ कर के भी
तेरी दुनिया न देख सके
हम अंधे, खुदा के तुम बंदे
मिटा दो ये दुखड़ा दिला दो
एक रोटी का टुकड़ा
एक रोटी का टुकड़ा
...............................................
Teri duniya mein aa kar ke-Aadhi Roti 1957
आपको दो फिल्मों से गीत सुनवाए हैं अभी तक जिनके नाम
में आधी शब्द आता है. ‘आधी रात’ और ‘आधी रात के बाद’.
आज सुनते हैं सन ५७ की फिल्म आधी रोटी से एक गीत.
कवि भारत व्यास वैसे तो साहित्यिक गीतों के लिए ज्यादा
जाने जाते हैं मगर उन्होंने कई हलके फुल्के गीत भी लिखे
हैं.
आज तो चमक दमक वाला ज़माना है मगर इस गीत से भी
पता चलता है कि चमक से पिछले युग में भी ऑंखें चुंधिया
जाया करती थीं. समय के साथ बहुत सी चीज़ें चिकनी हो
गयी हैं, कहीं कहीं की तो सड़कें भी ! मार्बल के बाद अब
ग्रेनाईट युग है जिसमें कुछ ज्यादा ही चिकनाई और चमक
देखने को मिलती है.
गाने में सयानों को नसीहत दी गयी है. हिंदी फ़िल्मी गीतों की
स्टडी की जाए तो आप इस निष्कर्ष पर पहुंचेंगे कि दिल की
चोरी लड़कियां ज्यादा किया करती हैं लड़कों के बनिस्बत. ये
पॉवर भी नारी को प्रदान कर रखी है ऊपर वाले ने.
इस गीत का वीडियो दुर्लभ है. गीत तो क्या फिल्म ही दुर्लभ है,
आपको देखने को मिल जाए तो खुशकिस्मत समझिए अपने
आप को. गीत में माउथ ऑर्गन का सुन्दर प्रयोग हुआ है. इस
फिल्म के कलाकारों के नाम इस प्रकार से हैं-रुप कुमार, मनोरमा,
अल नासिर, भगवान, उल्हास, सुलोचना, डब्बू और प्रेम अदीब.
गुज़रे ज़माने के इन कलाकारों में आप भगवान, मनोरमा, सुलोचना
और उल्हास को ज़रूर पहचानते होंगे. भगवान वही फिल्म अलबेला
वाले जिनकी डांस स्टाइल को महानायक बच्चन ने अपनाया है,
मनोरमा हैं फिल्म हाफ टिकट में मधुबाला की मौसी के किरदार
में, उल्हास हैं फिल्म गूँज उठी शहनाई में नायिका के पिता और
नायक के गुरु की भूमिका में, सुलोचना को आपने कई फिल्मों
में माँ के रोल में देखा होगा. निरुपा रॉय के माँ रूप में आगमन के
पहले तक शायद सबसे ज्यादा लोकप्रिय माँ के रोल सुलोचना ने
निभाए थे. फिल्म मुक़द्दर का सिकंदर में विनोद खन्ना की माँ की
भूमिका में वही हैं.
गीत के बोल:
मत प्यार में धोखा खाना
चिकना चिकना है ज़माना
बाबू रे फिसल न जाना
ओ मत प्यार में धोखा खाना
चिकना चिकना है ज़माना
बाबू रे फिसल न जाना
अरे फिसल न जाना बाबू
दिल पे रखना काबू
बाबू रे बाबू रे बाबू फिसल न जाना
उडती फिरती जादूगरनी छोरियां
चुपके चुपके दिल की करती चोरियां
हो उडती फिरती जादूगरनी छोरियां
चुपके चुपके दिल की करती चोरियां
दिल अपना इनसे बचाना
मत चोट जिगर पे खाना
बाबू रे, फिसल न जाना
अरे फिसल न जाना बाबू
दिल पे रखना काबू
बाबू रे बाबू रे बाबू फिसल न जाना
चल चल चल संभल के चल
चल चल चल संभल के
गलियां हैं प्यार की
नार है या धार है तलवार की
कानों में दो झूमती है बालियाँ
दिल फंसाने को है ये दो जालियां
कानों में दो झूमती है बालियाँ
दिल फंसाने को है ये दो जालियां
ये प्रेम का ताना बाना
मत चक्कर में आना
बाबू रे फिसल न जाना
फिसल न जाना बाबू
दिल पे रखना काबू
बाबू रे बाबू रे बाबू फिसल न जाना
मत प्यार में धोखा खाना
चिकना चिकना है ज़माना
बाबू रे फिसल न जाना
ओ फिसल न जाना बाबू
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Mat pyar mein dhokha khana-Aadhi Roti 1957