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Aug 2, 2020

गुनगुन गुंजन करता भंवरा-हर हर महादेव १९५०

आज हिंदी सिनेमा जगत की जिन हस्तियों के जन्मदिन हैं
उनमें से एक हैं गीतकार रमेश शास्त्री. उनका लिखा बरसात
फिल्म का गीत आप सुन चुके हैं. एक गीत हमने सन १९५०
की फिल्म हर हर महादेव से भी सुनवाया है आपको पहले.

आज सुनते हैं हर हर महादेव फिल्म से एक और गीत जिसे
गीता दत्त ने गाया है. संगीत अविनाश व्यास का है.




गीत के बोल:

गुन गुनगुन गुन गुनगुन गुंजन करता भंवरा
तुम कौन संदेशा लाये
गुन गुनगुन गुन गुनगुन गुंजन करता भंवरा
तुम कौन संदेशा लाये
प्रेम मंतर चुपके से कह दो जो प्रीतम कहलाये
तुम कौन संदेशा लाये

इन नैनों में चैन नहीं है
इन नैनों में चैन नहीं है
सबके दिल कोई बैन नहीं है
हार उन्हीं के लिए रंक ने फूलन घेर बिछाए
तुम कौन संदेशा लाये

गुन गुनगुन गुन गुनगुन गुंजन करता भंवरा
तुम कौन संदेशा लाये

मेरा मन डोले रे डोले
ओ मेरा मन डोले रे डोले
वो क्या बोले रे बोले
मेरा मन डोले रे डोले
वो क्या बोले रे बोले
मैं उनके मन भाई हूँ
मैं उनके मन भाई हूँ क्या यही गीत तू गाये
तुम कौन संदेशा लाये

गुन गुनगुन गुन गुनगुन गुंजन करता भंवरा
तुम कौन संदेशा लाये
तुम कौन संदेशा लाये
तुम कौन संदेशा लाये
………………………………………………..
Gungun gunjan karta bhanwra-Har Har Mahadev 1950

Artist: Nirupa Roy

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Jul 20, 2019

सो जा रे मेरे लाल सो जा-आधी रोटी १९५७

भरत व्यास रचित एक लोरी सुनते हैं फिल्म आधी रोटी से.
इस फिल्म से कुछ मधुर गीत आप सुन चुके हैं पहले. छोटे
बच्चे अपनी मर्जी से सोते हैं और अपनी मर्जी से उठ जाते हैं.
उनका नींद का सिस्टम अनूठा होता है. उन्हें सुलाना आसान
काम नहीं होता. छोटा कोमल सा दिमाग कभी लोरी के आनंद
से तो कभी कन्फ्यूज़न से थक कर सो जाता है.

सुनते हैं गीता दत्त के आवाज़ में ये गीत जिसे अविनाश व्यास
ने संगीत में बाँधा है.



गीत के बोल:

सो जा रे सो जा मेरे लाल सो जा
निंदिया की नगरी में खो जा
मेरे लाल सो जा
सो जा रे सो जा मेरे लाल सो जा
सोया है गगन सोया है पवन
सोया है गगन सोया है पवन
तू भी सो जा निर्धन के धन
सो जा
सो जा रे सो जा मेरे लाल सो जा

ना कोई रेशम झूल झुलाये
ना कोई पंखा डुलाए
सो जा कन्हैया तुझको तेरी
मैया की माता सुलाये
सो जा रे सो जा मेरे लाल सो जा

तू जो सोये संग संग तेरे
सोयेंगे दुखड़े हमारे
अपने दुलारे के मोहन मुखड़े
पे वार मैं नहा नख तारे

सो जा रे सो जा मेरे लाल सो जा.
……………………………………………………………….
So ja re so ja mere laal-Aadhi roti 1957

Artist: Sulochana

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Sep 13, 2018

कंकड़ कंकड़ से मैं पूछूँ-हर हर महादेव १९५०

आज गणेश चतुर्थी के अवसर पर सुनते हैं एक महादेव भजन.

त्रिलोक कपूर और निरुपा राय अभिनीत इस फिल्म में संगीत
अविनाश व्यास का है. प्रस्तुत गीत रमेश शास्त्री का लिखा हुआ
है.




गीत के बोल:

कंकड़ कंकड़ से मैं पूछूँ
शंकर मेरा कहाँ है कोई बताये
कंकड़ कंकड़ से मैं पूछूँ
शंकर मेरा कहाँ है कोई बताये
शिखर शिखर से पूछ रही हूँ
शंकर मेरा कहाँ है
गौरीवर गंगाधर हर हर
शंकर मेरा कहाँ है कोई बताये

लहर लहर लहराती गंगे तू क्यों गाती गाने
शिव जी हम से रूठ गए हैं क्या ये बात न जाने
रो रो नयन गवाएँ कोई बताये

कंकड़ कंकड़ से मैं पूछूँ
शंकर मेरा कहाँ है कोई बताये

ओ नील गगन की चंद्रकला
ओ नील गगन की चंद्रकला
कोई बताये

हौले हौले चल फणीधर मैं भी तेरे संग चलूँ
तू लिपटेगा गले श्याम के मैं चरणों में रह लूँ
मेरा धन्य जीवन हो जाये
कोई बताये कोई बताये
…………………………………………………..
Kankad kankad se main poochhoon-Har Har Mahadev 1950

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Nov 3, 2017

मैं गोरी गोरी गोरी-आधी रोटी १९५७

सन १९५७ की फिल्म आधी रोटी का निर्देशन चंद्रकांत ने किया
था. इस फिल्म में रूप कुमार, मनोरमा, भगवान, अल नासिर,
उल्हास, प्रेम अदीब, डब्बू, और सुलोचना लटकर जैसे कलाकारों
ने काम किया.

फिल्म से अगला गीत सुनते हैं जिसे भरत व्यास ने लिखा है
और अविनाश व्यास ने संगीतबद्ध किया. गीता दत्त इस गीत की
गायिका हैं. फिल्म और उसके कलाकारों के बारे में हमने इसी
फिल्म के एक गीत पर चर्चा करते वक्त काफी प्रकाश डाला था.
वो पोस्ट देख लें एक बार.




गीत के बोल:

मैं गोरी गोरी गोरी छोरी
करती हूँ दिलों की चोरी
ज़रा बच के ज़रा हट के
फेंकूँगी नज़र की डोरी
मैं गोरी गोरी गोरी छोरी
करती हूँ दिलों की चोरी
ज़रा बच के ज़रा हट के
फेंकूँगी नज़र की डोरी

मेरी पतली कमर में कहाँ है तसर
मेरी तिरछी नज़र का जी देखो असर
उल्फत का ये शोला भडकता जिधर
लगे आग इधर लगे आग उधर

मैं गोरी गोरी गोरी छोरी
करती हूँ दिलों की चोरी
ज़रा बच के ज़रा हट के
फेंकूँगी नज़र की डोरी

एक शमा
एक शाम परवाने हज़ार
किससे किससे करूं मैं प्यार
कोई काला कोई गोरा
रंग रंगीला कोई छोरा
छोरे तेरी मोहब्बत मान गई
मेरे हुस्न की अब ये आन गई
झुकी झुकी ये नज़र पहचान गई
तेरे दिल में छुपा है वो जान गई

मैं गोरी गोरी गोरी छोरी
करती हूँ दिलों की चोरी
ज़रा बच के ज़रा हट के
फेंकूँगी नज़र की डोरी
...............................................................
Main gori gori gori-Aadhi roti 1957

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Jun 3, 2017

मेरी गागर में सागर-जगद्गुरु शंकराचार्य १९५५

आपको अविनाश व्यास के संगीत वाले गीत कुछ गीत
हमें सुनवाए हैं. सोफ्ट किस्म का संगीत देने वाले व्यास
ने सभी प्रकार के गीत रचे हैं मगर उनके संगीत में शोर
नाम का एलिमेन्ट आपको नज़र नहीं आएगा.

सन १९५५ की फिल्म जगद्गुरु शंकराचार्य से एक गीत
आपको सुनवाते हैं जिसे भरत व्यास ने लिखा है और
गीता दत्त ने गाया है. इस फिल्म के प्रमुख सितारे हैं
अभी भट्टाचार्य और सुलोचना चटर्जी.



गीत के बोल:

मेरी गागर में सागर है रूप का
सहा जाए न मौसम ये धूप का
मेरी सासू बड़ी है क्रूर
उम्र है छोटी और पनघट दूर
पांव मेरे थक थक जायें
पांव मेरे थक थक जायें

मेरी गागर में सागर है रूप का
सहा जाए न मौसम ये धूप का
मेरी सासू बड़ी है क्रूर
उम्र है छोटी और पनघट दूर
पांव मेरे थक थक जायें
पांव मेरे थक थक जायें

ओ बलखाये कमर शरमाये नज़र
लहराए री बाली उमरिया
ओ कभी इधर उधर चले हवा फर फर
जाए उड़ उड़ मेरी चुनरिया
जाए उड़ उड़ मेरी चुनरिया

जब बाजी रे छम छम पायल
लोग कहते हैं क्या
कहते हैं हुए हम घायल
देख दुनिया के ये रंग ढंग
दिया रे दिया मैं तो हुई तंग
कलेजा करे धक् धक् धक्
कलेजा करे धक् धक् धक्
..................................................................
Meri gagar mein-Jagadguru Shankaracharya 1955

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Sep 9, 2016

जिंदगी हसीन है-अधिकार १९५४

आइये सुनें सन १९५४ की फिल्म अधिकार से एक मधुर गीत
आशा भोंसले की आवाज़ में. रजा मेहँदी अली खान के लिखे
गीत की धुन बनाई है अविनाश व्यास ने.

फिल्म अधिकार किशोर कुमार भक्त बहुत पसंद करते हैं. इस
फिल्म में अविनाश व्यास का संगीत है और किशोर कुमार के 
भक्त संगीत पर बात ज्यादा नहीं किया करते हैं. अगर फिल्म
में एस डी बर्मन का संगीत होता तो खूब चर्चे होते फिल्म के
गानों के.

अविनाश व्यास कभी सुर्ख़ियों में बने संगीतकार नहीं रहे. वे
निरंतर अपना काम करते रहे, अच्छी धुनें बनाते रहे और जो
सॉफ्ट संगीत पसंद करता है उसे व्यास के संगीत की कद्र है.
गीत उषा किरण और किशोर कुमार पर फिल्माया गया है. 



गीत के बोल:

जिंदगी हसीन है ये जिंदगी हसीन है
जिंदगी से प्यार कर
मैं हूँ तेरी जिंदगी
मुझपे ऐतबार कर
मुझपे ऐतबार कर

जिंदगी हसीन है ये जिंदगी हसीन है
जिंदगी से प्यार कर
मैं हूँ तेरी जिंदगी
मुझपे ऐतबार कर
मुझपे ऐतबार कर

कितनी हसीं है देख ले उजड़े चमन की ये कली
कितनी हसीं है देख ले उजड़े चमन की ये कली
मेरे चमन में आ घुली तेरे चमन के ये कली
चाहती हूँ मैं इसे तू भी इसको प्यार कर
मुझपे ऐतबार कर
मुझपे ऐतबार कर

जिंदगी हसीन है ये जिंदगी हसीन है
जिंदगी से प्यार कर मैं हूँ तेरी जिंदगी
मुझपे ऐतबार कर
मुझपे ऐतबार कर

तू तो मेरे साजन की एक छोटी सी तस्वीर है
तू आँखों की रौशनी तू मेरी तकदीर है
प्रीत मेरी बार बार कहती है पुकार कर
मुझपे ऐतबार कर
मुझपे ऐतबार कर

जिंदगी हसीन है ये जिंदगी हसीन है
जिंदगी से प्यार कर मैं हूँ तेरी जिंदगी
मुझपे ऐतबार कर
मुझपे ऐतबार कर

मैंने तुम्हारे प्यार को आज आजमा लिया
हँसते एक राज़ को सीने में छिपा लिया
तुम ना गले लगा सके मैंने गले लगा लिया
तुम ना गले लगा सके मैंने गले लगा लिया
मेरी जीत हो गयी आज तुमसे हार कर
मुझपे ऐतबार कर मुझपे ऐतबार कर

जिंदगी हसीन है ये जिंदगी हसीन है
जिंदगी से प्यार कर मैं हूँ तेरी जिंदगी
मुझपे ऐतबार कर
मुझपे ऐतबार कर
जिंदगी हसीन है ये जिंदगी हसीन है.
…………………………………………………………
Zindagi haseen hai-Adhikar 1954

Artists: Kishore, Kumar, Usha Kiran

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May 28, 2016

जय भारती वंदे भारती-जगदगुरु शंकराचार्य १९५५

आपको काफी दुर्लभ गीत सुनवा चुके हैं और सुनवाते
रहेंगे आज बहुत दिनों के बाद फिर से एक अनजान
सा गीत सुनते हैं. इसका बहुत कुछ अनजान सा
नहीं है. फिल्म का नाम है जगदगुरु शंकराचार्य. ये
सन १९५५ की फिल्म है. आजादी के आठ साल बाद
की. फिल्म के निर्देशक शेख फत्तेलाल हैं और इसमें
संगीत है अविनाश व्यास का. गीत लिखे हैं भरत
व्यास ने. व्यास-व्यास का ये कॉम्बीनेशन कुछ गीतों
में है. फिल्म में अभि भट्टाचार्य और सुलोचना चटर्जी
प्रमुख कलाकार हैं. इसे गाया है लता मंगेशकर ने.
भारत की भूमि की इस गीत में भूरि भूरि प्रशंसा की
गई है. पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक फिल्मों के
संगीत क्षेत्र में दो मील के स्तंभ हैं-श्रीनाथ त्रिपाठी और
अविनाश व्यास.



गीत के बोल:

जय भारती वंदे भारती
सर पे हिमालय का छत्र है
चरणों में नदिया एकत्र है
हाथों में वेदों के पत्र हैं
देश नहीं ऐसा अन्यत्र है

सर पे हिमालय का छत्र है
चरणों में नदिया एकत्र है
हाथों में वेदों के पत्र हैं
देश नहीं ऐसा अन्यत्र है
जय भारती वंदे भारती
जय भारती वंदे भारती

धुंए से पवन से व्योम से
घर घर में होता जहाँ होम है
धुंए से पवन से व्योम से
घर घर में होता जहाँ होम है
पुलकित हमारे रोम रोम हैं
पुलकित हमारे रोम रोम हैं
आदि अनादि शब्द ओम है
जय भारती वंदे भारती
वंदे मातरम
जय भारती वंदे भारती
वंदे मातरम

जिस भूमि पे जनम लिया राम ने
गीता सुनाई जहाँ श्याम ने
गीता सुनाई जहाँ श्याम ने
पावन बनाया चारों धाम ने
पावन बनाया चारों धाम ने
स्वर्ग भी न आये जिस के सामने
वंदे मातरम
वंदे मातरम
वंदे मातरम
वंदे मातरम
...............................................................
Jai Bharti Vande Bharti-Jagadguru Shankaracharya 1955

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Dec 7, 2015

दिल में हमारे कौन समाया-अधिकार १९५४

सन १९५४ की फिल्म अधिकार मोहन सहगल निर्देशित फिल्म
है. इसमें किशोर कुमार, उषा किरण प्रमुख कलाकार हैं. गुज़रे
ज़माने की यशोधरा काटजू भी इसमें हैं. यहाँ गुज़रे ज़माने से
तात्पर्य सन १९५० के पहले के ज़माने से है.

मोहन सहगल ब्रिटिश अविभाजित भारत में सन १९२२ वर्ष में
जालंधर, पंजाब में पैदा हुए थे. मोहन सहगल ने लगभग हर दौर
में लोकप्रिय और हिट फ़िल्में बनाईं. जैसे कि-नई दिल्ली(१९५६),
देवर(१९६६), साजन(१९६९), सावन भादो(१९७०), रजा जानी(१९७२),
और कर्त्तव्य(१९७९). ये उन फिल्मोंके नाम हैं जिनका निर्देशन
मोहन सहगल ने किया उसके अलावा वे एक निर्माता, लेखक और
अन्य भूमिकाओं में भी जुड़े रहे फिल्मों से.

प्रस्तुत गीत राजा मेहँदी अली खान द्वारा लिखा हुआ है और इस
गीत की तर्ज़ बनाई है अविनाश व्यास ने. गीत गाया है किशोर और
आशा ने.



गीत के बोल:

दिल में हमारे कौन समाया
खुद ही समझ लो मैं क्या बोलूं
किसने मुझे दीवाना बनाया
खुद ही समझ लो मैं क्या बोलूं
दिल में हमारे कौन समाया
खुद ही समझ लो मैं क्या बोलूं
किसने मुझे दीवाना बनाया
खुद ही समझ लो मैं क्या बोलूं

मेरी नज़र से मिलते ही क्यूँ
तेरी नज़र झुक जाती है
मेरी नज़र से मिलते ही क्यूँ
तेरी नज़र झुक जाती है
ओ हो, तेरी नज़र से शरमा कर
कुछ कहने से रुक जाती है
हमसे ये कहना चाहती हैं क्या
खुद ही समझ लो मैं क्या बोलूं

दिल में हमारे कौन समाया
खुद ही समझ लो मैं क्या बोलूं
किसने मुझे दीवाना बनाया
खुद ही समझ लो मैं क्या बोलूं

देख के हमको झूम रही हैं
देखो इन नज़रों को
देख के हमको झूम रही हैं
देखो इन नज़रों को, ओ हो
सामने हो जब सूरत तुम्हारी
देखे कौन बहारों को
ऐसी रुत का क्या है इशारा
खुद ही समझ लो मैं क्या बोलूं

दिल में हमारे कौन समाया
खुद ही समझ लो मैं क्या बोलूं
किसने मुझे दीवाना बनाया
खुद ही समझ लो मैं क्या बोलूं
दिल में हमारे कौन समाया
खुद ही समझ लो मैं क्या बोलूं
किसने मुझे दीवाना बनाया
खुद ही समझ लो मैं क्या बोलूं.
…………………………………………………………………………..
Dil mein hamare kaun samaya-Adhikar 1954

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Aug 1, 2015

तेरी दुनिया में आ कर के भी-आधी रोटी १९५७

आज सुनते हैं सन ५७ की फिल्म आधी रोटी से अगला
गीत. यह एक युगल गीत है रफ़ी और गीता दत्त की
आवाजों में. इसके रचनाकार हैं भरत व्यास और इस गीत
को स्वरबद्ध किया है अविनाश व्यास ने. कवियों के पास
शब्दों की कोई कमी नहीं होती. इस गीत के शब्द थोड़े
अलग हैं और ऐसा लगता है मानो कोई गद्य को पद्य की
तरह गाया जा रहा हो. कुछ कुछ आधुनिक कविता सरीखा
है मगर शब्दों की जमावट गीत के पैरामीटर और मीटर
के बीच ही है. धुन अच्छी है और आपको अविनाश व्यास
का संगीत अधिकतर थोडा सोफ्ट किस्म का ही मिलेगा.
यह गीत भी ईश्वर से शिकायत वाला गीत है और इसमें
उसके दूसरे समर्थ बन्दों से मदद की गुहार की जा रही है.




गीत के बोल:
    
तेरी दुनिया में आ कर के भी
तेरी दुनिया न देख सके
हम अंधे, खुदा के तुम बंदे
मिटा दो ये दुखड़ा दिला दो
एक रोटी का टुकड़ा
एक रोटी का टुकड़ा

तेरी दुनिया में आ कर के भी
तेरी दुनिया न देख सके
हम अंधे, खुदा के तुम बंदे
मिटा दो ये दुखड़ा दिला दो
एक रोटी का टुकड़ा
एक रोटी का टुकड़ा


अपने हाथ से गढा रे खिलौना
फिर क्यूँ पालना भूल गए
अपने हाथ से गढा रे खिलौना
फिर क्यूँ पालना भूल गए
आँखें बना कर इस तरह से
ज्योत डालना भूल गए
भूल गए

तेरी दुनिया में आ कर के भी
तेरी दुनिया न देख सके
हम अंधे, खुदा के तुम बंदे
मिटा दो ये दुखड़ा दिला दो
एक रोटी का टुकड़ा
एक रोटी का टुकड़ा


लोग कहें अन्धों के आगे
हर दम यहाँ अँधेरा है
लोग कहें अन्धों के आगे
हर दम यहाँ अँधेरा है
पर इस अँधेरे ने भी देखो
हमसे मुखडा फेरा है
क्या जाने वो शाम के जिसने
देखा नहीं सवेरा है
क्या जाने वो शाम के जिसने
देखा नहीं सवेरा है
नहीं रौशनी देखी तो फिर
किसको कहे अँधेरा है
अँधेरा है

तेरी दुनिया में आ कर के भी
तेरी दुनिया न देख सके
हम अंधे, खुदा के तुम बंदे
मिटा दो ये दुखड़ा दिला दो
एक रोटी का टुकड़ा
एक रोटी का टुकड़ा

तेरी दुनिया में आ कर के भी
तेरी दुनिया न देख सके
हम अंधे, खुदा के तुम बंदे
मिटा दो ये दुखड़ा दिला दो
एक रोटी का टुकड़ा
एक रोटी का टुकड़ा
...............................................
Teri duniya mein aa kar ke-Aadhi Roti 1957

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Jul 12, 2015

मत प्यार में धोखा खाना-आधी रोटी १९५७


आपको दो फिल्मों से गीत सुनवाए हैं अभी तक जिनके नाम
में आधी शब्द आता है. ‘आधी रात’ और ‘आधी रात के बाद’.
आज सुनते हैं सन ५७ की फिल्म आधी रोटी से एक गीत.
कवि भारत व्यास वैसे तो साहित्यिक गीतों के लिए ज्यादा
जाने जाते हैं मगर उन्होंने कई हलके फुल्के गीत भी लिखे
हैं.

आज तो चमक दमक वाला ज़माना है मगर इस गीत से भी
पता चलता है कि चमक से पिछले युग में भी ऑंखें चुंधिया
जाया करती थीं. समय के साथ बहुत सी चीज़ें चिकनी हो
गयी हैं, कहीं कहीं की तो सड़कें भी ! मार्बल के बाद अब
ग्रेनाईट युग है जिसमें कुछ ज्यादा ही चिकनाई और चमक
देखने को मिलती है.

गाने में सयानों को नसीहत दी गयी है. हिंदी फ़िल्मी गीतों की 
स्टडी की जाए तो आप इस निष्कर्ष पर पहुंचेंगे कि दिल की
चोरी लड़कियां ज्यादा किया करती हैं लड़कों के बनिस्बत. ये
पॉवर भी नारी को प्रदान कर रखी है ऊपर वाले ने.

इस गीत का वीडियो दुर्लभ है. गीत तो क्या फिल्म ही दुर्लभ है,
आपको देखने को मिल जाए तो खुशकिस्मत समझिए अपने
आप को.  गीत में माउथ ऑर्गन का सुन्दर प्रयोग हुआ है.  इस
फिल्म के कलाकारों के नाम इस प्रकार से हैं-रुप कुमार, मनोरमा,
अल नासिर, भगवान, उल्हास, सुलोचना, डब्बू  और प्रेम अदीब.

गुज़रे ज़माने के इन कलाकारों में आप भगवान, मनोरमा, सुलोचना
और उल्हास को ज़रूर पहचानते होंगे. भगवान वही फिल्म अलबेला
वाले जिनकी डांस स्टाइल को महानायक बच्चन ने अपनाया है,
मनोरमा हैं फिल्म हाफ टिकट में मधुबाला की मौसी के किरदार
में, उल्हास हैं फिल्म गूँज उठी शहनाई में नायिका के पिता और
नायक के गुरु की भूमिका में,  सुलोचना को आपने कई फिल्मों
में माँ के रोल में देखा होगा. निरुपा रॉय के माँ रूप में आगमन के
पहले तक शायद सबसे ज्यादा लोकप्रिय माँ के रोल सुलोचना ने
निभाए थे. फिल्म मुक़द्दर का सिकंदर में विनोद खन्ना की माँ की
भूमिका में वही हैं. 




गीत के बोल:

मत प्यार में धोखा खाना
चिकना चिकना है ज़माना
बाबू रे फिसल न जाना

ओ मत प्यार में धोखा खाना
चिकना चिकना है ज़माना
बाबू रे फिसल न जाना
अरे फिसल न जाना बाबू
दिल पे रखना काबू
बाबू रे बाबू रे बाबू फिसल न जाना

उडती फिरती जादूगरनी छोरियां
चुपके चुपके दिल की करती चोरियां
हो उडती फिरती जादूगरनी छोरियां
चुपके चुपके दिल की करती चोरियां
दिल अपना इनसे बचाना
मत चोट जिगर पे खाना
बाबू रे, फिसल न जाना
अरे फिसल न जाना बाबू
दिल पे रखना काबू
बाबू रे बाबू रे बाबू फिसल न जाना

चल चल चल संभल के चल
चल चल चल संभल के
गलियां हैं प्यार की
नार है या धार है तलवार की
कानों में दो झूमती है बालियाँ
दिल फंसाने को है ये दो जालियां
कानों में दो झूमती है बालियाँ
दिल फंसाने को है ये दो जालियां
ये प्रेम का ताना बाना
मत चक्कर में आना
बाबू रे फिसल न जाना
फिसल न जाना बाबू
दिल पे रखना काबू
बाबू रे बाबू रे बाबू फिसल न जाना

मत प्यार में धोखा खाना
चिकना चिकना है ज़माना
बाबू रे फिसल न जाना
ओ फिसल न जाना बाबू
……………………………………………………..
Mat pyar mein dhokha khana-Aadhi Roti 1957

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Mar 9, 2015

जागो हे महाकाल-जगदगुरु शंकराचार्य १९५५

एक धार्मिक गीत सुना जाये। बहुत दिन हो गये कोई भजन या
भक्ति गीत सुने हुए। प्रस्तुत गीत है फिल्म जगदगुरु शंकराचार्य से
जो सन १९५५ की फिल्म है। फिल्म के गीत भरत व्यास के लिखे
हुए हैं और संगीत है अविनाश व्यास का। गीत गाया है रफ़ी ने जिनकी
आवाज़ में बहुत से लोकप्रिय फ़िल्मी भजन उपलब्ध हैं।

कुदरती तौर पर रफ़ी की आवाज़ में भजन अच्छे लगते हैं। ये भी एक
कम सुना हुआ लेकिन कर्णप्रिय धुन वाला भजन है।

भगवान  आशुतोष दयालु हैं, औघड़दानी हैं, भक्तों पर शीघ्र ही प्रसन्न
हो जाते हैं.  ओम नमः शिवाय




गीत के बोल:

जागो रे, जागो
जागो हे महाकाल, जागो जीवन आधार,
भस्म करो पापी के पाप को,
धरती पुकारे प्रभु आपको ।

जागो हे महाकाल, जागो जीवन आधार,
भस्म करो पापी के पाप को,
धरती पुकारे प्रभु आपको ।
धरती पुकारे प्रभु आपको ।

तुम को जगा रहा नीला गगन ।
नीला नीला गगन ।
तुम को जगाये प्रभु पूरा पवन ॥
प्रभु पूरा पवन ॥
तांडव पे नृत्य करो
तांडव पे नृत्य करो, डमरू पे ताल दो ।
तांडव पे नृत्य करो, डमरू पे ताल दो ।
तीसरे नयन की आज ज्वाला निकाल दो ॥
फूंक दो, फूंक दो
फूंक दो यह कष्टों की कालिमा ।
भर दो कानो में नई लालिमा ॥
नई लालिमा ॥

जागो रे, जागो
जागो रे, जागो

जागो हे महा काल, जागो जीवन आधार,
भस्म करो पापी के पाप को,
धरती पुकारे प्रभु आपको ।
धरती पुकारे प्रभु आपको ।
......................................................
Jaago he Mahakal-Jagadguru Shankaracharya 1955

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Mar 4, 2010

माटी कहे कुमार से-अधिकार १९५४

पानी केरा बुदबुदा, अस मानुस की जात
कितना सही कहा है मनुष्य के बारे में। इसके आगे की
पंक्तियाँ कुछ यूँ हैं-

देखत ही छुप जाएगा , ज्यों सारा परभात

ये कबीर वचनामृत है। उन्ही का एक दोहा और है-

माटी कहे कुमार से, तू क्या रोंदे मोहे |
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदूंगी तोहे


इस दोहे पर आधारित कुछ फ़िल्मी गीत और गैर फ़िल्मी गीत
मुझे बेहद पसंद हैं। आपके लिए पेश है अविनाश व्यास का
संगीत के संवारा एक गीत फिल्म अधिकार से जो सन १९५४ की
फिल्म है। इस गीत में मुख्य स्वर है शंकर दासगुप्ता का। आदमी की
औकात बतलाता ये गीत मेले के सारे तमाशे भी दिखलाता चलता है।
सुन्दर गीत की रचना के लिए अविनाश व्यास को शत शत नमन।



गीत के बोल:

माटी कहे कुमार से, तू क्या रोंदे मोहे |
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदूंगी तोहे

हरिओम, हरिओम
हरिओम, हरिओम

माटी में मिल जाना रे भाई
माटी में मिल जाना
माटी में मिल जाना रे भाई
माटी में मिल जाना
माटी में मिल जाना रे भाई
माटी में मिल जाना

हे, दो दिन के जग के मेले में
आज रहे कल जाना
कल जाना
माटी में मिल जाना रे भाई
माटी में मिल जाना
माटी में मिल जाना रे भाई
माटी में मिल जाना

ए बाबूजी,बाबूजी,बाबूजी,बाबूजी,बाबूजी,बाबूजी,
ए बाबू टोपीवाला
ओ भैया पगड़ी वाला
ले लो ये मेरी कंठी माला रे
ले लो ये मेरी कंठी माला
ले लो ये मेरी कंठी माला रे
ले लो ये मेरी कंठी माला

मेरी माला में छिप जाए
सब गड़बड़ घोटाला
सेठ साहब को मिले सेठानी
और लल्ली को लाला

ओ बाबू टोपीवाला
ओ भैया पगड़ी वाला

हे, वही सुखी है जिसने प्यारे
फेरा मन का जाना
फेरा मन का जाना

माटी में मिल जाना रे भाई
माटी में मिल जाना
माटी में मिल जाना रे भाई
माटी में मिल जाना

मेरा पान बनारस वाला
हल्का कत्था चूना
जी, हल्का कत्था चूना
जिसने खा ली एक गिलौरी
छैला बन गया जूना
ए जी, छैला बन गया जूना
सौंफ सुपारी ख़ुशबू ठंडक
काला पीला चूना
मोगा, मंडवा, मकई, बनारस
बंगला देसी, पूना
लोगे कौन नमूना बाबू
लोगे कौन नमूना
ओये, लोगे कौन नमूना बाबू
लोगे कौन नमूना

हे हे हे हे हे हे हे हे
भांति भांति के लोग लगाते
डेरा नया पुराना
डेरा नया पुराना

माटी में मिल जाना रे भाई
माटी में मिल जाना
माटी में मिल जाना रे भाई
माटी में मिल जाना

हे, चले आओ,चले आओ चले आओ चले आओ
चके वाले चले आओ
रूपये वाले चले आओ
पैसे वाले चले आओ

मेरी प्यारी दुकान सबसे न्यारी दुकान
मेरी प्यारी दुकान सबसे न्यारी दुकान
देखो देखो नाच रहा है
ये अलबेला बन्दर
ये अलबेला बन्दर
जाने किसी का जीव समाया
कठपुतली के अन्दर
कठपुतली के अन्दर
नाचे राजा, ओ नाचे रानी
नाचे मस्त कलंदर

हे हे हे हे हे हे हे हे
नचा रहा है नचाने वाला
सबको नाच लुभावना
सबको नाच लुभावना

माटी में मिल जाना रे भाई
माटी में मिल जाना
माटी में मिल जाना रे भाई
माटी में मिल जाना
माटी में मिल जाना

हे हे हे हे

माटी में मिल जाना रे भाई
माटी में मिल जाना
माटी में मिल जाना रे भाई
माटी में मिल जाना
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Maati kahe kumhar se-Adhikar 1954

Artist: Unknown

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Jan 6, 2010

पिंजरे के पंछी रे, तेरा दर्द न जाने-नागमणि १९५७

ये पत्थर का देश हैं पगले, कोई ना तेरा होय। इन पंक्तियों को
दुविधा और कशमकश के प्रसंगों में आत्मसात करने की असफल
कोशिश करता हूँ मैं । कवि प्रदीप का लिखा ये गीत सन १९५७ से
निरंतर कहीं ना कहीं बजता सुनाई दे जाता है। कभी मंदिर में तो
कभी किसी सामाजिक कार्यक्रम में। इस गीत के अनुसार ही मैंने भी
यही अनुभव किया है कि अपनी व्यथा अपने मन तक ही सीमित
रखने में ज्यादा लाभ है। कविवर प्रदीप ने स्वयं इस गीत को गाया है
और इसकी धुन बनाई है गुजरती मूल के प्रतिभाशाली संगीतकार
अविनाश व्यास ने।

..........



गाने के बोल:

पिंजरे के पंछी रे, तेरा दर्द ना जाने कोए
तेरा दर्द ना जाने कोए

बाहर से तो खामोश रहे तू
बाहर से तो खामोश रहे तू
भीतर भीतर रोये रे,
ए ए ए , भीतर भीतर रोये
तेरा दर्द ना जाने कोए

कह ना सके तू, अपनी कहानी
तेरी भी पंछी, क्या ज़िंदगानी रे
कह ना सके तू, अपनी कहानी
तेरी भी पंछी, क्या ज़िंदगानी रे
विधि ने तेरी कथा लिखी, आँसू में कलम डुबोए
तेरा दर्द ना जाने कोए
तेरा दर्द ना जाने कोए

चुपके चुपके, रोने वाले
रखना छिपा के, दिल के छाले रे
चुपके चुपके, रोने वाले
रखना छिपा के, दिल के छाले रे
ये पत्थर का देश हैं पगले, कोई ना तेरा होय
तेरा दर्द ना जाने कोए
तेरा दर्द ना जाने कोए
........................................................
Pinjre ke panchhi re-Naagmani 1957

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Jul 15, 2009

तेरे द्वार खड़ा भगवान-वामन अवतार १९५५

१९५५ की फ़िल्म वामन अवतार का एक गीत।
इसके रचयिता और गायक गीतकार प्रदीप हैं।
संगीत है अविनाश व्यास का जो गुजराती मूल के
प्रतिभाशाली संगीतकार हैं। ये एक प्रेरणादायक गीत है
और अक्सर इसको धार्मिक स्थलों पर या धार्मिक आयोजनों
पर सुना जा सकता है। आकाशवाणी के कार्यक्रम जो भक्ति
संगीत पर आधारित होते हैं उनमे ये अक्सर बजा करता है।



गाने के बोल:

तेरे द्वार खड़ा भगवान, हो
तेरे द्वार खड़ा भगवान भगत भर दे रे झोली
तेरे द्वार खड़ा भगवान भगत भर दे रे झोली

तेरा होगा बड़ा एहसान
कि जुग-जुग तेरी रहेगी शान
भगत भर दे रे झोली
तेरे द्वार खड़ा भगवान भगत भर दे रे झोली
ओ, भगत भर दे रे झोली

डोल उठी है सारी धरती देख रे, डोला गगन है सारा
डोल उठी है सारी धरती देख रे, डोला गगन है सारा
भीख माँगने आया तेरे घर, जगत का पालनहारा रे
जगत का पालनहारा

मैं आज तेरा मेहमान,
कर ले रे मुझसे ज़रा पहचान
भगत भर दे रे झोली

तेरे द्वार खड़ा भगवान भगत भर दे रे झोली
ओ, भगत भर दे रे झोली

आज लुटा दे रे सरबस अपना मान ले कहना मेरा
आज लुटा दे रे सरबस अपना मान ले कहना मेरा
मिट जायेगा पल में तेरा जनम-जनम का फेरा रे
जनम-जनम का फेरा

तू छोड़ सकल अभिमान,
अमर कर ले रे तू अपना दान
भगत भर दे रे झोली

तेरे द्वार खड़ा भगवान भगत भर दे रे झोली
ओ भगत भर दे रे झोली

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