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Jan 3, 2011

ओ नीले पर्बतों की धारा-आदमी और इंसान १९६९

आज का पहला गीत पेश है फिल्म आदमी और इंसान से।
साहिर के लिखे बोलों पर तर्ज़ बनाई है रवि ने। आशा और
महेंद्र कपूर इसको गा रहे हैं धर्मेन्द्र और सायरा बानो के लिए ।



गीत के बोल:

ओ नीले पर्बतों की धारा
आयी ढूँढने किनारा, बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिये
कोई हमारा चाहिये

ओ नीले पर्बतों की धारा
आयी ढूँढने किनारा, बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिये
कोई हमारा चाहिये

ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला

फूल में जैसे फूल की खुशबू
दिल में है यूँ तेरा बसेरा
धरती से अम्बर तक फैला
चाहत की बाहों का घेरा

हो ओ ओ
ओ नीले पर्बतों की धारा
आयी ढूँढने किनारा, बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिये
कोई हमारा चाहिये

ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला

सूरज पीछे घूमे धरती
साँझ के पीछे घूमे सवेरा
जिस नाते ने इन को बाँधे
वो नाता है तेरा मेरा

हो ओ ओ
ओ नीले पर्बतों की धारा
आयी ढूँढने किनारा, बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिये
कोई हमारा चाहिये

ओ नीले पर्बतों की धारा
आयी ढूँढने किनारा, बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिये
कोई हमारा चाहिये

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Dec 21, 2009

ज़िन्दगी के रंग कई रे-आदमी और इंसान १९६९

आशा भोंसले का गाया एक गीत



गीत के बोल:


ज़िन्दगी के रंग कई रे साथी रे
ज़िन्दगी के रंग कई रे
ज़िन्दगी के रंग कई रे साथी रे
ज़िन्दगी के रंग कई रे

ज़िन्दगी दिलों को कभी जोडती भी है
ज़िन्दगी दिलों को कभी तोडती भी है
ज़िन्दगी दिलों को कभी तोडती भी है


ज़िन्दगी के रंग कई रे, साथी रे
ज़िन्दगी के रंग कई रे

ज़िन्दगी की राह में ख़ुशी के फूल भी
ज़िन्दगी की राह में ग़मों की धूल भी
ज़िन्दगी की राह में ग़मों की धूल भी

ज़िन्दगी के रंग कई रे, साथी रे
ज़िन्दगी के रंग कई रे

ज़िन्दगी कभी यकीन कभी गुमान है
हर क़दम पे तेरा मेरा इम्तहान है
हर क़दम पे तेरा मेरा इम्तहान है

ज़िन्दगी के रंग कई रे, साथी रे
ज़िन्दगी के रंग कई रे

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