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Jan 23, 2020

मुझे गले से लगा लो-आज और कल १९६३

गले से लगा लो हिट्स के अंतर्गत एक गीत पेश है
फिल्म आज और कल से. एक लोकप्रिय गीत हमराही
फिल्म से आप शायद आपने नहीं सुना है उसे भी हम
जल्द सुनवायेंगे.

गले लगना और गले पड़ना दो संभावित केटेगरी हो
सकती हैं गले से सम्बंधित गानों के लिए. गले लगना
एक सहज प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसका जानवर भी
इस्तेमाल किया करते हैं. ढेर सारी क्रियाओं का संगम
प्रक्रिया कहलाता है.

गीत एक बार फिर से साहिर लुधियानवी का है और
इसका संगीत तैयार किया है रवि ने. आशा भोंसले इस
गीत की गायिका हैं साथ में रफ़ी की आवाज़ भी है.




गीत के बोल:

मुझे गले से लगा लो बहुत उदास हूँ मैं
गमे जहां से छुड़ा लो बहुत उदास हूँ मैं
मुझे गले से लगा लो

नज़र में तीर से चुभते है अब नज़रो से
मैं थक गई हूँ सभी टूट के सहारों से
अब और बोझ न डालो बहुत उदास हूँ मैं
गमे जहां से छुड़ा लो बहुत उदास हूँ मैं
मुझे गले से लगा लो

बहुत सही ग़म-ए-दुनिया मगर उदास न हो
बहुत सही ग़म-ए-दुनिया मगर उदास न हो
करीब है शब-ए-ग़म की सहर उदास न हो
बहुत सही ग़म-ए-दुनिया

सितम के हाथ की तलवार टूट जाएगी
ये ऊँच नीच की दीवार टूट जाएगी
तुझे कसम है मेरी हमसफ़र उदास न हो
तुझे कसम है मेरी हमसफ़र उदास न हो
बहुत सही ग़म-ए-दुनिया

ना जाने कब ये तरीका ये तौर बदलेगा
सितम का ग़म का मुसीबत का दौर बदलेगा
मुझे जहां से उठा लो बहुत उदास हूँ मैं
गमे जहां से छुड़ा लो बहुत उदास हूँ मैं

बहुत सही ग़म-ए-दुनिया मगर उदास न हो
करीब है शब-ए-ग़म की सहर उदास न हो
बहुत सही ग़म-ए-दुनिया
…………………………………………….
Mujhe gale se laga lo-Aaj aur Kal 1963

Artist: Nanda, Sunil Dutt

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Jan 14, 2020

ये वादियाँ ये फ़िज़ायें-आज और कल १९६३

खामोशियाँ की सदाएं भी बुलाया करती हैं. अक्सर
ये ज्यादा गहरी होती हैं अगर ध्यान से सुनने वाला
हो. फिल्म ख़ामोशी(१९९८) तो इसी बात को समर्पित
फिल्म है.

सुनते हैं फिल्म आज और कल से लोकप्रिय गीत
जिसे साहिर लुधियानवी ने लिखा है और जिसका
संगीत रवि ने तैयार किया है. इसे मोहम्मद रफ़ी
ने गाया है.

गीत को जिस श्रेणी में आप चाहें फिट कर सकते हैं-
पहाड़ हिट्स, नदी हिट्स, व्हील चेयर हिट्स, डिज़ाईन
वाला स्वेटर हिट्स, बाग-बगीचा हिट्स, झरना हिट्स
और ना सूझे तो सुनील दत्त हिट्स और नंदा हिट्स
में तो गिना जाता ही है ये.




गीत के बोल:

ये वादियाँ ये फिजायें बुला रही हैं तुम्हें
ये वादियाँ ये फिजायें बुला रही हैं तुम्हें
खामोशियों की सदाएं बुला रही है तुम्हें
ये वादियाँ ये फिजायें बुला रही हैं तुम्हें

तरस हैं जवां फूल होंठ छूने को
तरस हैं जवां फूल होंठ छूने को
मचल मचल के हवाएं बुला रहीं हैं तुम्हें
मचल मचल के हवाएं बुला रहीं हैं तुम्हें
खामोशियों की सदाएं बुला रही है तुम्हें
ये वादियाँ ये फिजायें बुला रही हैं तुम्हें

तुम्हारी ज़ुल्फों से खुशबू की भीख लेने को
तुम्हारी ज़ुल्फों से खुशबू की भीख लेने को
झुकी झुकी सी घटायें बुला रही है तुम्हें
झुकी झुकी सी घटायें बुला रही है तुम्हें
खामोशियों की सदाएं बुला रही है तुम्हें
ये वादियाँ ये फिजायें बुला रही हैं तुम्हें

हसीन चम्पई पैरों को जब से देखा है
हसीन चम्पई पैरों को जब से देखा है
नदी की मस्त अदायें बुला रही है तुम्हें
नदी की मस्त अदायें बुला रही है तुम्हें
खामोशियों की सदाएं बुला रही है तुम्हें
ये वादियाँ ये फिजायें बुला रही हैं तुम्हें

मेरा कहा न सुनो इनकी बात तो सुन लो
मेरा कहा न सुनो इनकी बात तो सुन लो
हर एक दिल की दुआयें बुला रही है तुम्हें
हर एक दिल की दुआयें बुला रही है तुम्हें
खामोशियों की सदाएं बुला रही है तुम्हें
ये वादियाँ ये फिजायें बुला रही हैं तुम्हें
……………………………………………….
Ye wadiyan ye fizayen bula rahi-Aaj aur Kal 1963

Artist: Sunil Dutt, Nanda

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Mar 6, 2010

इतनी हसीं इतनी जवां रात-आज और कल १९६३

भूत, भविष्य और वर्तमान वाले नामों से एक और है-आज और कल।
बूझते रहिये कौनसा कल। एक बात ज़रूर है इसका ये गीत कल भी
बजता था और आज भी बजता है। एक रोमांटिक किस्म का गीत है ये
जिसे साहिर ने लिखा है और परदे पर सुनील दत्त इसको नंदा के लिए
गा रहे हैं। इसके संगीतकार रवि हैं और ये फिल्म सन १९६३ में आई थी।
गाने का की-वर्ड है "क्या" जो गीत में कई बार सुनाई देता है। glad, gladder
और gladdest के स्केल पर सुनी दत्त gladder दिखलाई देते हैं। फिल्मांकन
बढ़िया है इस गीत का और आपको नायिका की शक्ल पहचानने में कठिनाई
का अनुभव हो सकता है।



गीत के बोल:

इतनी हसीं इतनी जवां रात क्या करें
इतनी हसीं इतनी जवां रात क्या करें
जागे हैं कुछ अजीब से जज़्बात क्या करें
इतनी हसीं इतनी जवां रात क्या करें

पेड़ों के बाजुओं में लचकती है चांदनी
पेड़ों के बाजुओं में लचकती है चांदनी
बेचैन हो रहीं हैं ख़यालात क्या करें
बेचैन हो रहीं हैं ख़यालात क्या करें
जागे हैं कुछ अजीब से जज़्बात क्या करें
इतनी हसीं इतनी जवां रात क्या करें

साँसों में घुल रही है किसी सांस की महक
साँसों में घुल रही है किसी सांस की महक
दामन को छू रहा है कोई हाथ क्या करें
दामन को छू रहा है कोई हाथ क्या करें
जागे हैं कुछ अजीब से जज़्बात क्या करें
इतनी हसीं इतनी जवां रात क्या करें

शायद तुम्हारे आने से ये भेद खुल सके
शायद तुम्हारे आने से ये भेद खुल सके
हैरान हैं की आज नयी बात क्या करें
हैरान हैं की आज नयी बात क्या करें
जागे हैं कुछ अजीब से जज़्बात क्या करें
इतनी हसीं इतनी जवां रात क्या करें

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