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Aug 30, 2017

कई दिन से सावन बरसता-समाज १९५४

कई दिन से सावन बरस रहा है रिमझिम रिमझिम मगर इस
बार सावन कुछ रूठा रूठा सा रहा और भादो के महीने में भी
थोडा रूठा ही रहा.

सुनते हैं सन १९५४ की फिल्म समाज से एक युगल गीत जिसे
आशा भोंसले संग शैलेश ने गाया है. मजरूह के लिखे गीत की
तर्ज़ बनायीं है अरुण कुमार मुखर्जी ने. ये शैलेश वही हैं जिन्होंने
फिल्म आग में शमशाद बेगम के साथ युगल गीत गाया है-देख
चाँद की ओर.




गीत के बोल:

कई दिन से सावन बरसता है रिमझिम रिमझिम
कई दिन से सावन बरसता है रिमझिम रिमझिम
हवा झूमती है घटा गा रही है
अब ऐसे में भी तुम ना आये तो देखो देखो
अब ऐसे में भी तुम ना आये तो देखो देखो
नज़र रुठने की क़सम खा रही है

कई दिन से सावन बरसता है रिमझिम रिमझिम

फँसा कौन ये बिजलियों की अदा से
फँसा कौन ये बिजलियों की अदा से
बरसने लगे किसके आँसू घटा से-2
बरसने लगे किसके आँसू घटा से
आशा:
यही पूछती है  मेरे दिल की धड़कन धड़कन
यही पूछती है  मेरे दिल की धड़कन धड़कन
मगर कुछ बताते हया आ रही है

कई दिन से सावन बरसता है रिमझिम रिमझिम

उधर तू है और मैं इधर हूँ तो क्या है
कहीं फूल से उसकी ख़ुशबू जुदा है
उधर तू है और मैं इधर हूँ तो क्या है
कहीं फूल से उसकी ख़ुशबू जुदा है

ये माना के ऐसी नहीं कोई दूरी-दूरी
ये माना के ऐसी नहीं कोई दूरी-दूरी
पर इतनी भी दूरी सितम ढा रही है

कई दिन से सावन बरसता है रिमझिम रिमझिम
हवा झूमती है घटा गा रही है
कई दिन से सावन बरसता है रिमझिम रिमझिम
……………………………………………………………….
Kai din se sawan-Samaj 1954

Artists: Ashok Kumar, Usha Kiran

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Apr 3, 2010

गोरे गोरे हाथों में मेहँदी-परिणीता १९५३

मधुर गीत हो तो गुड्डे गुडिया का खेल आनंददायक
बन जाता है। इस गीत को ही लीजिये जो सन १९५३ की
फिल्म परिणीता से है। भारत व्यास के गीत को संगीत
से संवारा है अरुण कुमार मुखर्जी ने। आशा भोंसले की
आवाज़ वाले इस गीत को फिल्माया गया है मीना कुमारी
पर। गीत में अशोक कुमार भी दिखलाई पड़ेंगे।

शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय के १९१३ में लिखे उपन्यास पर
आधारित फिल्म उपन्यास का ईमानदार फ़िल्मी रूपांतरण
कहा जा सकता है। इस फिल्म के लिए निर्देशक बिमल रॉय
और मीना कुमारी को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और अभिनेत्री
के फिल्म फैयर पुरस्कार प्राप्त हुए।



गीत के बोल:

गोरे गोरे हाथों में मेहँदी रचा के
नैनों में कजरा डाल के
चलो दुल्हनिया पिया से मिलने
छोटा सा घूंघट निकाल के
छोटा सा घूंघट निकाल के

गोरे गोरे हाथों में मेहँदी रचा के
नैनों में कजरा डाल के
चलो दुल्हनिया पिया से मिलने
छोटा सा घूंघट निकाल के
छोटा सा घूंघट निकाल के

जा के अब ससुराल में रहना
सास ससुर की सेवा करना
जब तक बहे ना कुछ भी ना कहना
आंसू को रखना संभाल के
चलो दुल्हनिया पिया से मिलने
छोटा सा घूंघट निकाल के
छोटा सा घूंघट निकाल के

गोरे गोरे हाथों में मेहंदी रचा के
नैनों में कजरा डाल के
चलो दुल्हनिया पिया से मिलने
छोटा सा घूंघट निकाल के
छोटा सा घूंघट निकाल के

हो ओ ओ
हंसती रहोगी तुम प्रीतम के नाम से
प्रीतम के नाम से जी
प्रीतम के नाम से
थक के जो आये वो दिन भर के काम से
दिन भर के काम से जी
दिन भर के काम से
पंखा झलोगी
पंखा झलोगी तो सोये आराम से
सपनों में उनके धीरे से आना
मोती की लड़ियाँ डाल के
चलो दुल्हनिया पिया से मिलने
छोटा सा घूंघट निकाल के
छोटा सा घूंघट निकाल के

हो पिया के संग सखी मीठी मीठी बोलना
मीठी मीठी बोलना जी
मीठी मीठी बोलना
हो
नयन गोरी धीरे धीरे डोलना
धीरे धीरे डोलना जी
धीरे धीरे डोलना
गुस्सा करें वो जुबान नहीं खोलना
गुस्सा करें वो जुबान नहीं खोलना
मन के मंदिर में रखना
नैनों के दीपक उजाल के
चलो दुल्हनिया पिया से मिलने
छोटा सा घूंघट निकाल के
छोटा सा घूंघट निकाल के

गोरे गोरे हाथों में मेहँदी रचा के
नैनों में कजरा डाल के
चलो दुल्हनिया पिया से मिलने
छोटा सा घूंघट निकाल के
छोटा सा घूंघट निकाल के

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