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Jan 17, 2019

मुझे देखो हसरत की तसवीर हूँ मैं-बाज़ १९५३

तलत महमूद के अधिकाँश गीत कलेक्टर्स आइटम होते
हैं. ये बात पुराने संगीत के रसिकों से बेहतर कौन समझ
सकता है.

नैयर के संगीत में तलत महमूद के गाये गीत रेयर की
श्रेणी में आते हैं. इसके अलावा सोने की चिड़िया में
तलत के गाये गाने हैं. कुल जमा तीन फ़िल्मी गाने याद
आते हैं.

ये उम्दा गीत मजरूह सुल्तानपुरी की कलम से निकला है.
वीडियो गाने में एक अंतरा कम है नंबर दो वाला.





गीत के बोल:

मुझे देखो हसरत की तसवीर हूँ मैं
मुझे देखो हसरत की तसवीर हूँ मैं
जो बन बन के बिगड़ी वो तक़दीर हूँ मैं
मुझे देखो हसरत की तसवीर हूँ मैं

गिरा जो ज़मीं पर मैं हूँ इक वो आँसू
मैं हूँ इक वो आँसू
गिरा जो ज़मीं पर मैं हूँ इक वो आँसू
मैं हूँ इक वो आँसू
मिली ख़ाक़ में ऐसी तदबीर हूँ मैं
जो बन बन के बिगड़ी वो तक़दीर हूँ मैं

मुझे देखो हसरत की तसवीर हूँ मैं

नहाया हुआ हूँ खुद अपने लहू में
खुद अपने लहू में
नहाया हुआ हूँ खुद अपने लहू में
खुद अपने लहू में
मगर फिर भी बेरंग तसवीर हूँ मैं
जो बन बन के बिगड़ी वो तक़दीर हूँ मैं

मुझे देखो हसरत की तसवीर हूँ मैं

चला मैं तो अहले वतन खुश रहो तुम
रहो खुश रहो तुम
चला मैं तो अहल-ए-वतन खुश रहो तुम
रहो खुश रहो तुम
न बैठा निशाने पे वो तीर हूँ मैं
जो बन बन के बिगड़ी वो तक़दीर हूँ मैं

मुझे देखो हसरत की तसवीर हूँ मैं
………………………………………………….
Mujhe dekho hasrat ki tasveer-Baaz 1953

Artist: Guru Dutt

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Jan 12, 2019

ए दिल ए दीवाने-बाज़ १९५३

सन १९५३ की फिल्म बाज़ से एक गीत सुनते हैं. फिल्म का
नाम बाज़ की जगह चील होता तब भी क्या ये चलती. नाम
में क्या है, कहानी में दम होना चाहिए. असल बात तो ये हैं
फिल्म बनाने वालों में से अधिकाँश को मालूम नहीं होता कौन
सी फिल्म हिट होगी और क्यूँ. वैसे इस फिल्म का नाम १९५३
की सबसे ज्यादा कमाई वाली फिल्मों में नहीं है.

फिल्म का नाम अलग हो तो पहले ये देखना होता है कि
फिल्म किसने बनाई कहीं वो किसी ज़माने में मिटटी का तेल
तो नहीं बेचता था, पैसे इकट्ठे हो गए तो फिल्म बना डाली.
फिल्म लाइन में पैसा लगाने वाले फाइनेंसर की भी बहुत
चलती है और कभी कभी उसके आगे निर्माता और निर्देशक
दोनों सायलेंसर हो जाते हैं.

फिल्म बाज़ एच जी फिल्म्स द्वारा निर्मित फिल्म है जिसका
निर्देशन गुरु दत्त ने किया है. उन्होंने खुद एक्टिंग भी की है.

महा-फिल्म शोले को शुरू में जनता ने खारिज कर दिया था.
क्या हुआ उसके बाद, शादी के रिसेप्शन में गाने की जगह
डायलॉग बजते मिलते थे-कितने आदमी थे, सूरमा भोपाली के
डायलॉग या ‘सुअर के बच्चों’. गब्बर का ये हाथ मुझे दे दे
ठाकुर. यह पहली ऐसी हिंदी फिल्म बनी जिसके संवादों का
बाकायदा एल पी रिकॉर्ड रिलीज़ हुआ. बॉलीवुड के इतिहास में
कहा जाने लगा-शोले के पहले और शोले के बाद. वैसे एक
बार और सिप्पी टीम को धन्यवाद देना चाहूँगा इस फिल्म
के लिए. फिल्म के टाइटल म्यूज़िक के लिए आर डी बर्मन
को भी.

फिल्म के नाम का क्या है. कुत्ते को प्यास क्यूँ लगी रख लो.
पैसे आने चाहिए बस. दर्शन, आकर्षण, प्रदर्शन गया भाड़ में.
सालों से जनता बेवकूफ बनती आ रही है इन फ़िल्मी सितारों
के चक्कर में. दरअसल हम इन्हें अपना आइडल मान लेते हैं.
इस देश में भगवान की पूजा के बाद शायद इन्हीं की पूजा
सबसे ज्यादा होती है.

सुनते हैं गीत जिसे लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और जिसकी
धुन तैयार की है ओ पी नैयर ने. इसे गीता दत्त ने गाया है.





गीत के बोल:

ए दिल ए दीवाने
ए दिल ए दीवाने
ए दिल ए दीवाने
आग लगा ली क्यूँ दामन में
ओ ज़ालिम चाहत के बहाने
ए दिल ए दीवाने

जुर्म नहीं था दिल का लगाना
समझा कब नादान ज़माना
जुर्म नहीं था दिल का लगाना
समझा कब नादान ज़माना
एक नज़र और कितनी बातें
एक नज़र और कितनी बातें
एक खामोशी लाख फ़साने

ए दिल ए दीवाने
आग लगा ली क्यूँ दामन में
ओ ज़ालिम चाहत के बहाने
ए दिल ए दीवाने

ये तो नहीं है तेरी मंज़िल
दूर बहुत है अपना साहिल
ये तो नहीं है तेरी मंज़िल
दूर बहुत है अपना साहिल
अरमानों की नाज़ुक कश्ती
अरमानों की नाज़ुक कश्ती
लगी है तूफ़ां से टकराने

ए दिल ए दीवाने
आग लगा ली क्यूँ दामन में
ओ ज़ालिम चाहत के बहाने
ए दिल ए दीवाने
…………………………………………………
Ae dil ae dil deewane-Baaz 1953

Artist: Geeta Bali

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Jan 26, 2018

ऐ वतन के नौजवान–बाज़ १९५३

सन १९५३ की फिल्म बाज़ से एक संदेशात्मक गीत सुनते हैं.
ये देश के नौजवानों से कुछ कह रहा है. गीत ६५ साल पहले
का है मगर इसके बोल आज भी प्रासंगिक हैं.

आज का नौजवान सोशल मीडिया के भंवरजाल और इलेक्ट्रोनिक
मीडिया के फीलगुड मायाजाल में उलझता जा रहा है और समाज
और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी भूलता जा रहा है उसे इस गीत
को सुन कर मनन अवश्य करना चाहिए.

बोल मजरूह सुल्तानपुरी के हैं और संगीत ओ पी नैयर का. इसे
गीता दत्त ने गाया है.



गीत के बोल:

ओ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ
हर ज़बां रुकी रुकी हर नज़र झुकी झुकी
क्या यही है ज़िंदगी क्या यही है ज़िंदगी

ऐ वतन के नौजवान जाग और जगा के चल
ऐ वतन के नौजवान जाग और जगा के चल
जाग और जगा के चल
ज़ुल्म जिस कदर बढ़े और सर उठा के चल
और सर उठा के चल
आ आ आ आ आ

कांपे है तेरी नज़र उनके दिल में चोर है
उन में बल है तेरे भी बाज़ुओं ज़ोर है
कांपे है तेरी नज़र उनके दिल में चोर है
उन में बल है तेरे भी बाज़ुओं ज़ोर है
ज़ालिमों का हर गुरूर ख़ाक में मिला के चल

ऐ वतन के नौजवान जाग और जगा के चल
जाग और जगा के चल
ज़ुल्म जिस कदर बढ़े और सर उठा के चल
और सर उठा के चल
आ आ आ आ आ

क्या समंदरों का शोर और भँवर की चाल क्या
तेरे आगे सर उठाए मौज की मजाल क्या
क्या समंदरों का शोर और भँवर की चाल क्या
तेरे आगे सर उठाए मौज की मजाल क्या
खोल ज़िंदगी की नाव बादबां उड़ा के चल

ऐ वतन के नौजवान जाग और जगा के चल
जाग और जगा के चल
ज़ुल्म जिस कदर बढ़े और सर उठा के चल
और सर उठा के चल
आ आ आ आ आ

कारवां वतन का आज डाकुओं में घिर गया
ज़ुल्म के अंधेरे में आ रही है इक सदा
कारवां वतन का आज डाकुओं में घिर गया
ज़ुल्म के अंधेरे में आ रही है इक सदा
इंतक़ाम की मशाल हाथ में जला के चल
इंतक़ाम आ आ आ आ आ आ
इंतक़ाम आ आ आ आ आ आ
इंतक़ाम आ आ आ आ आ आ
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Ae watan ke naujawanon-Baaz 1953

Artist: Geeta Bali

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