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May 2, 2018

अंखियों के नूर-बड़े सरकार १९५७

फिल्म बड़े सरकार किशोर साहू निर्देशित फिल्म है जिसमें
किशोर साहू और कामिनी कौशल प्रमुख कलाकार हैं. फिल्म
में गीता दत्त, आशा भोंसले और रफ़ी के गाये गीत हैं.

सामान्य चेहरे मोहरे वाले नायकों में हम किशोर साहू को
भी गिन सकते हैं. उन्होएँ एक्टिंग और निर्देशन दोनों विधाओं
पर तबियत से हाथ साफ़ किया. बतौर निर्देशक वे ज्यादा
सफल रहे.

उनके निर्देशन वाली फ़िल्में हैं कुंवारा बाप, राजा, शरारत,
साजन, सिन्दूर, नदिया के पार, सावन आया रे, काली घटा,
हैमलेट, मयूरपंख, किस्मत का खेल, बड़े सरकार, दिल अपना
और प्रीत परायी, घर बसा के देखो, गृहस्थी, पूनम की रात,
हरे कांच की चूडियाँ, पुष्पांजलि और धुंए की लकीर. इनमें
से सावन आया रे तक की फ़िल्में ४० के दशक की हैं. १९४८
की नदिया के पार और १९६० की दिल पाना और प्रीत पराई
बड़ी म्यूजिकल हिट फ़िल्में रहीं.



गीत के बोल:

अंखियों के नूर
प्यार में तेरे सैयां जिया मजबूर
बोल मेरा क्या कसूर
मेरी अंखियों के नूर
प्यार में तेरे सैयां जिया मजबूर
बोल मेरा क्या कसूर

दिल तोड़ देना था तो
दिल को लुभाया क्यूँ
तूने मेरे सोये हुए
प्यार को जगाया क्यूँ
दिल तोड़ देना था तो
दिल को लुभाया क्यूँ
तूने मेरे सोये हुए
प्यार को जगाया क्यूँ
ओ ओ ओ ओ ओ ओ 
तू ही था भरोसा मेरा
तू ही था गुरूर
बोल मेरा क्या कसूर
मेरी अंखियों के नूर
प्यार में तेरे सैयां जिया मजबूर
बोल मेरा क्या कसूर

सब से छिपाए हुए
दुःख तेरे प्यार का
खोयी खोयी फिरती हूँ
मैं सपने को हार के
सब से छिपाए हुए
दुःख तेरे प्यार का
खोयी खोयी फिरती हूँ
मैं सपने को हार के
कुछ तो बता जा
काहे मुझसे है दूर
बोल मेरा क्या कसूर

मेरी अंखियों के नूर
प्यार में तेरे सैयां जिया मजबूर
बोल मेरा क्या कसूर
...........................................................................
Ankhiyon ke noor-Bade sarkar 1957

Artists: Kamini Kaushal, Kishore Sahu

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Dec 5, 2009

आ हा हा हा जवानी-बड़े सरकार १९५७

ये उन मधुर और कम सुने गए गीतों में से एक है जिसको
मैं अक्सर सुना करता हूँ। इसके बोल साहिर लुधियानवी द्वारा
लिखे गए हैं। साहिर के गीत, लगभग सारे ही, मैंने बहुत ध्यान
से सुने हैं। ये एक सरल गीत है मगर फिल्मी गीतकार और
फिल्मी साहित्यकार के नज़रिए में क्या फर्क है ये जानने के लिए
आइये इस गीत पर गौर किया जाए। सामान्यतः रुत 'बदल जाती' है
इस गीत में 'फ़िर गई' है। इस गीत में चाल लचकती है और मन
ताल देता है। आम तौर पर गीतकार कमर को लचका के , बल
खिला के और चाल को लहरा के या बदल के काम चला लिया
करते हैं। साहिर ने तुकबंदी में ज़रा भी कंजूसी नहीं की है। जहाँ
उर्दू का शब्द फिट हुआ , कर दिया और जहाँ हिन्दी के शब्द की
ज़रूरत पड़ी, लगा दिया। लाज और रिवाज का संगम आपको
साहिर के लेखन में जरूर मिलेगा।

हिरोइन इतनी गदगद है इस गाने में कि सिंचाई वाले पानी के पाईप
को तलवार की भांति घुमाना चालू कर देती है। इन मोहतरमा का
नाम है कामिनी कौशल।



गीत के बोल:


आ हा हा हा
आ हा हा हा जवानी
झूमती है
दुल्हन बन के
जी बन ठन के
न जाने किसके सपनों में

आ हा हा हा जवानी
झूमती है
दुल्हन बन के
जी बन ठन के
न जाने किसके सपनों में

रुत फिरी गुलशन खिले
बन गए नए सिलसिले

रुत फिरी गुलशन खिले
बन गए नए सिलसिले

लचके चाल मन देवे ताल
कहूं क्या मैं हाल क्या है

आ हा हा हा जवानी
झूमती है
दुल्हन बन के
जी बन ठन के
न जाने किसके सपनों में
आ हा हा हा

बज उठीं शहनाइयां
सज गई तनहाइयाँ
बज उठीं शहनाइयां
सज गई तनहाइयाँ
ख़ुद से आज मुझे आए लाज
सखी ये रिवाज़ क्या है

आ हा हा हा जवानी
झूमती है
दुल्हन बन के
जी बन ठन के
न जाने किसके सपनों में
आ हा हा हा

कौन ये मुझे भा गया
किस पे जी मेरा आ गया
कौन ये मुझे भा गया
किस पे जी मेरा आ गया
दिल का साज़ करे जिसपे नाज़
वो अजीब राज़ क्या है

आ हा हा हा जवानी
झूमती है
दुल्हन बन के
जी बन ठन के
न जाने किसके सपनों में
आ हा हा हा

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