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Feb 3, 2015

मिला गए नैन-आरजू १९५०

आपको एक सुधा मल्होत्रा का गीत सुनवाया था ३-४ दिन
पहले. आइये सुनते हैं उनकी आवाज़ में एक और मधुर
गीत जिसे अनिल बिश्वास ने संगीतबद्ध किया है. बोल
मजरूह सुल्तानपुरी के हैं. मजरूह साहब ने ज़रूर ये गीत
मलीहाबाद जा के लिखा होगा इसमें मलीहाबादी दशहरी
आम की मिठास जो है.

गीत शशिकला पर फिल्माया गया है और फिल्म का
नाम आरजू है जिसके गीतों ने अपने ज़माने में धूम मचा
दी थी. गीत में आपको कामिनी कौशल के भी दर्शन
हो जायेंगे थोड़ी देर के लिए.

प्रस्तुत गीत सुधा मल्होत्रा द्वारा हिंदी फिल्मों के लिए रेकोर्ड
किया जाने वाला पहला गीत है. अनिल बिश्वास को भी श्रेय
जाता है उभरती हुई प्रतिभाओं को अवसर दिलाने का.




गीत के बोल:

मिला गए नैन मिला गए नैन
जिनको जिया तरसे चुपके चुपके मेरी नज़र से
मिला गए नैन मिला गए नैन

सब के दीप बुझा कर साजन तेरे दीप जलाऊँ
तेरे दीप जलाऊँ
सब के दीप बुझा कर साजन तेरे दीप जलाऊँ
तेरे दीप जलाऊँ
आज बड़े अरमानों से मैं दिल के द्वार सजाऊँ
दिल के द्वार सजाऊँ
न फिर जाना आ के तुम इस दर से चुपके चुपके
आ के तुम इस दर से चुपके चुपके मेरी नज़र से
मेरी नज़र से
मिला गए नैन मिला गए नैन

क्या बतलाऊँ रंग जिया के सुध ही नहीं तन मन की
क्या बतलाऊँ रंग जिया के सुध ही नहीं तन मन की
आज मेरे अरमानों पर छाई है घटा सावन की
छाई है घटा सावन की
यूँ ही रिमझिम दिल की घटा बरसे चुपके चुपके
दिल की घटा बरसे चुपके चुपके
मेरी नज़र से
मिला गए नैन मिला गए नैन
……………………………………
Mila gaye nain-Arzoo 1950

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Nov 17, 2010

बदनाम ना हो जाए-शहीद १९४८

कामिनी कौशल के नाम से एक फिल्म और याद आ गई जी।
उसका भी एक गीत सुन लो जी। इस फिल्म का नाम 'शहीद' है
जी।

फिल्म शहीद(१९४८) के दो गीत बेहद लोकप्रिय हुए । ये गीत
उनमे से एक है और सुरिंदर कौर का गाया हुआ है। सुरिंदर कौर
पंजाबी मूल की प्रसिद्ध गायिका हैं। उस समय पंजाब के कई कलाकार
फिल्म उद्योग में हुआ करते थे विशेषकर संगीत के क्षेत्र में और इनमे
गीतकार, गायक, गायिका और संगीतकार बहुत से थे पंजाबी मूल के।
यहाँ पंजाब मूल से तात्पर्य अविभाजित भारत के पंजाब से हैं। आपको
उस दौर की पाकिस्तानी फिल्मों में भी इसी स्टाइल का संगीत मिलेगा।

ये गीत कमर ज़लालाबदी का लिखा हुआ है और संगीतकार हैं गुलाम हैदर
जिनका नाम बहुत अदब से लिया जाता रहा है संगीत के क्षेत्र में। गीत
लोकप्रिय ज़रूर है मगर बहुत कम लोगों को ये जानकारी होगी कि ये कमर
ज़लालाबदी की कलम से निकला है।



गीत के बोल:

बदनाम ना हो जाए,
बदनाम ना हो जाए मोहब्बत का फ़साना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

बदनाम ना हो जाए,
बदनाम ना हो जाए मोहब्बत का फ़साना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

दुनिया में मोहब्बत की यही रीत है ऐ दिल
दुनिया में मोहब्बत की यही रीत है ऐ दिल
ये ही रीत है ऐ दिल
ये ही रीत है ऐ दिल
जल जाना मगर होंठों पे फ़रियाद ना लाना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

बदनाम ना हो जाए,
बदनाम ना हो जाए मोहब्बत का फ़साना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

कह दे ना कहीं आँख मेरे दिल की कहानी
कह दे ना कहीं आँख मेरे दिल की कहानी
मेरे दिल की कहानी
मेरे दिल की कहानी
ऐ दिल तेरी धड़कन कहीं सुन ले ना ज़माना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

बदनाम ना हो जाए,
बदनाम ना हो जाए मोहब्बत का फ़साना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

ऐ जान-ए-मोहब्बत यही बस मेरी दुआ है
ऐ जान-ए-मोहब्बत यही बस मेरी दुआ है
यही बस मेरी दुआ है
यही बस मेरी दुआ है
हो जाये तेरे साथ मेरी जान भी रवाना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

बदनाम ना हो जाए,
बदनाम ना हो जाए मोहब्बत का फ़साना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

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Nov 14, 2010

कौन सी है चीज़ जो यहाँ-जैसे को तैसा १९७३

बाल दिवस के अवसर पर एक गीत पेश है ७० के दशक से।

फिल्म उद्योग ने पारंपरिक दिखने वाली माँ से लेकर
आधुनिक दिखने वाली माँ देखी है पिछले ७०-७५ सालों
में, जबसे हिंदी चलचित्र निर्माण प्रारंभ हुआ। माँ के पॉवर
को सभी बॉलीवुडियों ने माना और महसूस किया ।

एक गीत सुना जाए फिल्म जैसे को तैसा से, जो माँ की
महिमा का बखान कर रहा है। आनंद बक्षी इसके रचयिता
हैं और इसे गा रहे हैं किशोर और आशा। संगीत पंचम का है।
परदे पर जीतेंद्र और अनजान अभिनेत्री दिखाई देंगे आपको
साथ में माँ के रोल में हैं पुराने ज़माने की नामचीन अभिनेत्री
कामिनी कौशल।

इस विषय पर विस्तृत चर्चा की जाएगी आगे, तब तक सुनते
और देखते रहिये मधुर गीत।



गीत के बोल:

हो, कौनसी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती
कौनसी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती

कौनसी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती
माँ नहीं मिलती

याद किसी को हो तो
ऐसी बात सुनाएँ
जिसमे कहीं ना कहीं
माँ का नाम ना आये

दुनिया में कोई ऐसी दास्तां नहीं मिलती
हो, सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती

कौनसी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती
हाँ, माँ नहीं मिलती

जिनकी माँ होती है
खुशकिस्मत होते हैं
जिनकी माँ नहीं होती
जीवन भर रोते हैं
हो ओ ओ ओ ओ ,
जिनकी माँ होती है
खुशकिस्मत होते हैं
जिनकी माँ नहीं होती
जीवन भर रोते हैं

जिस्म उन्हें मिलते हैं लेकिन
जान नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती
हाँ, माँ नहीं मिलती

मंदिर पे भी ऐ मन
कुछ राही नहीं रुकते
ईश्वर के आगे भी
कितने सर नहीं झुकते

माँ को जो ना माने वो जुबां नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती

कौनसी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती
हाँ, माँ नहीं मिलती
हाँ, माँ नहीं मिलती

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Feb 15, 2010

दिल ले के भागा-नदिया के पार १९४८

ढिंढोरा जरूर पीटना चाहिए। बिना ढिंढोरा पीटे किसी को पता नहीं
चल पाता आप क्या हैं। इंटरनेट पर मेरी मुलाकात ऐसे कई धुरंधरों
से हुई जो एक विशेष गायिका के ८-१० गीतों को जाना करते थे। धीरे
धीरे खुद के प्रयासों और दूसरों की सहायता से आज वो उस विशेष
गायिका के 'प्रमाण पत्र प्राप्त भक्त' हो गए हैं। अभी सुना है कि उन
धुरंधरों में से एक ने वेब साईट बनाई है उस विशेष गायिका के लिए ।
सराहनीय कार्य है, क्यूंकि वो गायिका उपेक्षित सी ही रही प्रतिभावान
होने के बावजूद । टेकनोलोजी बहुत तेज़ है इन्टरनेट की और वो किसी
भी चम्पू को सुपर स्टार बना सकती है, शर्त ये है आपके साथ ४-५
समर्पित चम्पू होने चाहिए जो आपकी हर बात में हाँ मिलाएं और
आपकी जबरिया तारीफ़ करते रहें और आपके पक्ष में माहौल बनाये।
मगर जब ये सुपर-भक्त अति पर आ जाते हैं तो बोर करने लगते हैं।
उनके हाल चाल पूछो तो वो अपने पसंदीदा गायक/गायिका के गुणगान
करने लग जाते हैं। बाकी का किस्सा फिर कभी .......

चलिए एक पुराने ज़माने से एक गीत सुना जाए । फिल्म नदिया के पार
से एक कालजयी रचना जो संगीतकार सी रामचंद्र के खजाने से है। ये गीत
बेहद प्रसिद्ध रहा अपने ज़माने में, और इसकी धुन आकर्षक है। इसे गाया है
ललिता देउलकर ने । इस गीत को लिखने वाले शख्स हैं मोती B.A. ।



गीत के बोल:

दिल ले के भगा दगा दे के भागा
कैसे बेदर्दी से दिल मेरा लागा

दिल ले के भगा दगा दे के भागा
कैसे बेदर्दी से दिल मेरा लागा


चोरी चोरी दिल को चुराया मैं जानी ना
चोरी चोरी दिल को चुराया मैं जानी ना

मीठी मीठी बातों में जिया भरमाया मैं जानी ना
मीठी मीठी बातों में जिया भरमाया मैं जानी ना

बातें बनायी आँखें मिलाई
भोले भाले दिल को फंसाये लियो जाए
हाय हाय
भोले भाले दिल को फंसाये लियो जाए
ललचाये तरसाए
कलियों का रस ले कर भंवरा रे भागा
कैसे बेदर्दी से दिल मेरा लागा

दिल ले के भागा दगा दे के भागा
कैसे बेदर्दी से दिल मेरा लागा

लाख कहा दिल ने तो फिर भी मैं मानी ना
लाख कहा दिल ने तो फिर भी मैं मानी ना

काहू से भी दिल ना लगाना मैं मानी ना
काहू से भी दिल ना लगाना मैं मानी ना

ऐसी जवानी अंधी दीवानी
ठोकर पे ठोकर लगाए चली जाए
हाय रे..
ठोकर पे ठोकर लगाए चली जाए
तडपाये, जिया जाए हाय हाय जाने ना
आँखें चुरा के वो अपने से भागे

कैसे बेदर्दी से दिल मेरा लागा

दिल ले के भागा दगा दे के भागा
कैसे बेदर्दी से दिल मेरा लागा

पहली नज़र में हुई मैं दीवानी
पहली नज़र में हुई मैं दीवानी

लड़ गए नैना हो गयी ये नादानी
लड़ गए नैना हो गयी ये नादानी

अब तो इन आँखों से बहता है पानी
पापी मोरा जियरा पिया को बुलाये
हाय हाय..

पापी मोरा जियरा पिया को बुलाये
पछताए घबराए हाय हाय जाने ना
ऐसी मुसीबत में छोड़ के भागा
कैसे बेदर्दी से दिल मेरा लागा

दिल ले के भगा दगा दे के भागा
कैसे बेदर्दी से दिल मेरा लागा

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Dec 5, 2009

आ हा हा हा जवानी-बड़े सरकार १९५७

ये उन मधुर और कम सुने गए गीतों में से एक है जिसको
मैं अक्सर सुना करता हूँ। इसके बोल साहिर लुधियानवी द्वारा
लिखे गए हैं। साहिर के गीत, लगभग सारे ही, मैंने बहुत ध्यान
से सुने हैं। ये एक सरल गीत है मगर फिल्मी गीतकार और
फिल्मी साहित्यकार के नज़रिए में क्या फर्क है ये जानने के लिए
आइये इस गीत पर गौर किया जाए। सामान्यतः रुत 'बदल जाती' है
इस गीत में 'फ़िर गई' है। इस गीत में चाल लचकती है और मन
ताल देता है। आम तौर पर गीतकार कमर को लचका के , बल
खिला के और चाल को लहरा के या बदल के काम चला लिया
करते हैं। साहिर ने तुकबंदी में ज़रा भी कंजूसी नहीं की है। जहाँ
उर्दू का शब्द फिट हुआ , कर दिया और जहाँ हिन्दी के शब्द की
ज़रूरत पड़ी, लगा दिया। लाज और रिवाज का संगम आपको
साहिर के लेखन में जरूर मिलेगा।

हिरोइन इतनी गदगद है इस गाने में कि सिंचाई वाले पानी के पाईप
को तलवार की भांति घुमाना चालू कर देती है। इन मोहतरमा का
नाम है कामिनी कौशल।



गीत के बोल:


आ हा हा हा
आ हा हा हा जवानी
झूमती है
दुल्हन बन के
जी बन ठन के
न जाने किसके सपनों में

आ हा हा हा जवानी
झूमती है
दुल्हन बन के
जी बन ठन के
न जाने किसके सपनों में

रुत फिरी गुलशन खिले
बन गए नए सिलसिले

रुत फिरी गुलशन खिले
बन गए नए सिलसिले

लचके चाल मन देवे ताल
कहूं क्या मैं हाल क्या है

आ हा हा हा जवानी
झूमती है
दुल्हन बन के
जी बन ठन के
न जाने किसके सपनों में
आ हा हा हा

बज उठीं शहनाइयां
सज गई तनहाइयाँ
बज उठीं शहनाइयां
सज गई तनहाइयाँ
ख़ुद से आज मुझे आए लाज
सखी ये रिवाज़ क्या है

आ हा हा हा जवानी
झूमती है
दुल्हन बन के
जी बन ठन के
न जाने किसके सपनों में
आ हा हा हा

कौन ये मुझे भा गया
किस पे जी मेरा आ गया
कौन ये मुझे भा गया
किस पे जी मेरा आ गया
दिल का साज़ करे जिसपे नाज़
वो अजीब राज़ क्या है

आ हा हा हा जवानी
झूमती है
दुल्हन बन के
जी बन ठन के
न जाने किसके सपनों में
आ हा हा हा

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Nov 11, 2009

मोरे राजा हो ले चल-नदिया के पार १९४८

सदाबहार और हमेशा जवान-ये तमगा रेडियो सीलोन ने यूँ ही नहीं दिया
पुराने गीतों को । ये पुराने ज़माने का एक प्रसिद्ध गीत है। आजतक जितने
भी गीत नदिया और उसके पार जाने की थीम पर बने हैं उनमे ये सबसे
अलग अनूठा है। इसमे युवा दिलीप कुमार और कामिनी कौशल की जोड़ी है।
ललिता देउलकर के साथ आवाज़ है मोहम्मद रफी की और इस मधुर गीत
की धुन बनाई है सी. रामचंद्र ने। आपको ध्यान हो की नदिया के पार नाम से
एक फ़िल्म १९८० में भी आई थी जिसमे रवीन्द्र जैन का संगीत है और उस
फ़िल्म का गाने बहुत बजे थे।

इस गीत की तारीफ़ में कसीदे काढने वाले दुर्लभ हैं। पहली बात तो
सी रामचंद्र के संगीत की तारीफ़ करने वाले ही कम हैं। जो हैं उनको इस गाने
में रफी की आवाज़ सुनाई देती है, ललिता देउलकर कौन है, उनको पता ही
नहीं चलता। ऐसे ऐसे हैं संगीत के जानकर और समीक्षक। वो लिखेंगे तो यूँ
लिख्नेगे- ललिता देउलकर उस समय की गायिकाओं के अंदाज़ में गा रही हैं।
ऐसी टिप्पणी वे लेखक करते हैं जिन्होंने ललिता देउलकर के दूसरे गीत नहीं
सुने हैं। गाने को तो सारे पुरूष गायक सहगल के अंदाज़ में गाने की कोशिश
करते थे, चाहे पतली आवाज़ वाले गायक हों या मोटी आवाज़ वाले। महिला
गायिकाएं नूरजहाँ की आवाज़ में गाने की कोशिश करती या यूँ कहिये संगीतकार
उनसे ऐसा करने को कहते थे । इस मुद्दे पर चर्चा जारी रहेगी, पढ़ते रहिये ये ब्लॉग ।



गाने के बोल:

हा हा हा, हा हा हा हा हा हा
मोरे राजा हो
ओ, मोरे राजा हो, ले चल नदिया के पार
मोरे राजा हो, ले चल नदिया के पार
मोरे राजा हो, ले चल नदिया के पार
मोरी रानी हो, तुम्ही मोरी प्राण आधार
मोरी रानी हो, तुम्ही मोरी प्राण आधार

तूने ऐसा जादू डारा बिक गई तेरे हाथ
तूने ऐसा जादू डारा बिक गई तेरे हाथ
जन्म जन्म तक संग रहूंगी
जन्म जन्म तक संग रहूंगी कभी न छोडूं साथ
मोरे राजा हो, हमको तू देहो न बिसार
मोरी रानी हो, तुम्ही मोरी प्राण आधार

मोरे राजा हो ले चल नदिया के पार
मोरी रानी हो तुम्ही मोरी प्राण आधार

प्यार की मीठी बातों में साजनवा मैं गई हार
प्यार की मीठी बातों में साजनवा मैं गई हार
प्यारी तेरी आंखों में मैं,
प्यारी तेरी आंखों में, मैं भूल गया संसार
मेरी आंखों में झूली है सुरतिया तोहार
मेरी साँसों में, गूंजे है नाम तोहार

मोरे राजा हो, ले चल नदिया के पार
मोरी रानी हो, तुम्ही मोरी प्राण आधार

मैं तो प्रीत निभाऊं बलमा तुम भी प्रीत निभाना
मैं तो प्रीत निभाऊं बलमा तुम भी प्रीत निभाना
साथ साथ ही हम तुम दोनों
साथ साथ ही हम तुम दोनों गायें मस्त तराना

मोरे राजा हो ले चल नदिया के पार
मोरी रानी हो तुम्ही मोरी प्राण आधार


हो ओ ओ ओ , ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ , ओ ओ ओ ओ
हा हा हा, हा हा हा हा हा हा
हो ओ ओ ओ , ओ ओ ओ ओ
.........................................................
More raja ho le chal-Nadiya ke paar 1948

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