सुनते हैं रफ़ी की आवाज़ में एक दिलकश नगमा फिल्म
भीगी रात से. फिल्म में प्रदीप कुमार और मीना कुमारी
प्रमुख कलाकार हैं.
फिल्म के गीत लिखे हैं मजरूह सुल्तानपुरी ने और संगीत
तैयार किया है रोशन ने. यही कोम्बिनेशन फिल्म आरती
में भी था और फिल्म ज्यादा चली थी. फिल्म भीगी रात
के फिल्म अलबत्ता लोकप्रिय रहे. ये फिल्म का सबसे ज्यादा
चर्चित गीत है. गौरतलब है फिल्म आरती श्वेत श्याम है और
फिल्म भीगी रात रंगीन.
गीत के बोल:
दिल जो ना कह सका
वोही राज़-ए-दिल कहने की रात आई
दिल जो ना कह सका
तौबा ये किस ने अंजुमन सजा के
टुकड़े किये हैं गुंचा-ए-वफ़ा के
टुकड़े किये हैं गुंचा-ए-वफ़ा के
उछालो गुलों के टुकड़े
के रंगीन फ़िज़ाओं में रहने की रात आई
दिल जो ना कह सका
चलिये मुबारक ये जश्न दोस्ती का
दामन तो थामा आप ने किसी का
दामन तो थामा आप ने किसी का
हमें तो खुशी यही है
तुम्हें भी किसी को अपना कहने की रात आई
दिल जो ना कह सका
सागर उठाओ दिल का किस को ग़म है
आज दिल की क़ीमत जाम से भी कम है
आज दिल की क़ीमत जाम से भी कम है
पियो चाहे खून-ए-दिल हो
के पीते पिलाते ही रहने की रात आई
दिल जो ना कह सका
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Dil jo na keh sakh-Bheegi raat 1965
इसके मुखड़े के बोल पढ़ के तीन देवियाँ के गाने की
गलतफ़हमी हो जाती है। वो गीत रफ़ी का गाया एकल
गीत था जबकि प्रस्तुत गीत सुमन और रफ़ी का गाया
युगल गीत है। कालिदास के निर्देशन में बनी फिल्म
भीगी रात का संगीत अच्छा है। हमारी कोशिश है
की आपको पहले कम प्रचलित और कम सुने गए गीत
सुनवाए जाएँ ताकि आपको कुछ अतिरिक्त जानकारी मिलती
रहे। रईसी वाला गीत है। नायक नायिका कार में बैठ
के घूमने निकले है और गीत भी गाते हैं। गीत के
नीचे आपको एक कमेन्ट मिलेगा-grossly underrated for
obvious reasons- इस तरह की टिप्पणियों से अर्थ निकलना
बड़ी टेढ़ी खीर होता है। या तो लिखने वाला ये कहना
चाहता है कि रफ़ी और सुमन के गाये युगल गीत लता-रफ़ी
के गाये युगल गीतों की तुलना में कमतर आंके जाते हैं
या उसका इशारा दूसरे संगीतकारों और रोशन के
संगीत में तुलना से है। फिलहाल सम्भावना पहले कारण
की ज्यादा नज़र आ रही है। सुमन को प्रथम श्रेणी की
गायिका मानने से कई संगीत प्रेमी इनकार जो करते हैं
सीधी वजह उनकी आवाज़ लता की आवाज़ के सबसे निकट
होना। खैर ये तुलना वुलना का चक्कर छोड़ें और सुनें इस
मधुर गीत को।
भीगी रात के पिछले गीत में नायिका रूठी हुई थी। इसमें थोड़ी
खुश नज़र आ रही है और कुछ खिसियाने अंदाज़ में नायक के
साथ गीत गाना शुरू करती हैं-जैसे कहना चाह रही हों-"शर्म से
यहीं गड़ जाएँ ना कहीं हम" !!
गीतकेबोल:
ऐसे तो ना देखिये के बहक जाएँ कहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम
अंगडाई सी लेती है जो ख़ुशबू भरी जुल्फें
ख़ुशबू भरी जुल्फें
गिरती हैं तेरे सुर्ख लबों पर तेरी जुल्फें
लबों पर तेरी जुल्फें
जुल्फें ना तेरी चूम लें
जुल्फें ना तेरी चूम लें ऐ माहजबीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
सुन सुन के तेरी बात नशा छाने लगा है
नशा छाने लगा है
खुद अपने भी प्यार तो कुछ आने लगा है
है ऐ ऐ, आने लगा है।
रखना है कहीं पाँव तो
रखना है कहीं पाँव तो रखते हैं कहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम
भीगा सा ये रुख-ए-नाज़ ये हल्का सा पसीना
ये हल्का सा पसीना
हाय
ये नाचती आँखों के भंवर दिल का सफीना
दिल का सफीना
सोचा है के अब डूब के
सोचा है के अब डूब के रह जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
हं हं हं हं हं हं हं
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Aise to na dekhiye ke behak jayen-Bheegi Raat 1965
रोशन ने अपने कैरियर के उत्तरार्ध में गीत की ध्वनियों में हल्का ईको प्रभाव का काफी प्रयोग किया। ये अक्सर गायक की आवाज़ के लिए प्रयोग में लायी जाती। कुछ गीतों में वाद्य यन्त्र के साथ भी इसका प्रयोग हुआ है मगर सुनने वाले का ध्यान वाद्य यन्त्र के साथ हुए खिलवाड़ पर कम जाता है इसलिए उसको अभी नज़रअंदाज़ कर के चलते हैं।
रफ़ी के गाये रोमांटिक गीतों के सृजन कर्ताओं में केवल ओ पी नय्यर और शंकर जयकिशन ही नहीं बल्कि रोशन भी शामिल हैं। ये गीत लिखा है मजरूह ने और इसे रुपहले परदे पर गा रहे हैं प्रदीप कुमार । साथ में जो अभिनेत्री हैं वो मीना कुमारी हैं।
गीत के बोल:
मोहब्बत से देखा खफा हो गए हैं हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
अदाओं में थी सादगी अब से पहले हो ओ ओ, अदाओं में थी सादगी अब से पहले वल्लाह कहाँ रंग थे ये सुनहरे रुपहले हो ओ ओ नज़र मिलते ही नज़र मिलते ही क्या से क्या हो गए हैं हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
किसी मोड़ पे बन के सूरज निकलना हो ओ ओ, किसी मोड़ पे बन के सूरज निकलना तौबा कहीं धुप में चाँदनी बन के चलाना हो ओ ओ जिधर देखो जलवा जिधर देखो जलवानुमां हो गए हैं हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
यहाँ तो लगा दिल पे एक ज़ख्म गहरा हो ओ ओ, यहाँ तो लगा दिल पे एक ज़ख्म गहरा हाय वहां सिर्फ उनका ये अंदाज़ ठहरा हो ओ ओ खता कर के भी खता कर के भी बे-खता हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं ........................................................ Mohabbat se dekha khafa ho gaye-Bheegi Raat 1965