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Mar 12, 2018

प्यार करता जा-भूत बंगला १९६५

फिल्म संसार के अपने नियम कायदे हैं. एक बार किसी चीज
का लेबल लग जाए तो ऐसी चिपकता है बिना गोंद-कतीरे के,
उसे छुडाना मुश्किल हो जाता है.

मन्ना डे के साथ कम ही संगीतकार गंभीरता से पेश आये हैं.
अधिकाँश ने उनसे हास्य गीत ज्यादा गवाए सिंवाए एक जोड़ी
के-शंकर जयकिशन. मेरे हिसाब से सबसे ज्यादा बढ़िया गीत
अगर किसी ने मन्ना डे को दिए हैं तो वे शंकर जयकिशन ही
हैं. उसके बाद आप एस एन त्रिपाठी को याद कर लीजिए.

कुछ इक्का दुक्का सामान्य गीत जो अन्य संगीतकारों ने उनसे
गवाए उनमें से एक आज सुनते हैं. फिल्म है भूत बंगला जो
सन १९६५ की फिल्म है जिसमें महमूद नायक हैं.

गीत हसरत जयपुरी का है और संगीत आर डी बर्मन का. गीत
की मुखड़े वाली पंक्तियाँ इको वाले अंदाज़ में दोहराई गई हैं. गीत
उपदेशात्मक किस्म का है.




गीत के बोल:

प्यार करता जा प्यार करता जा
दिल कहता है दिल कहता है
कांटों में भी गुल खिला
कांटों में भी गुल खिला
हे हे हे हे
प्यार करता जा प्यार करता जा
दिल कहता है दिल कहता है
कांटों में भी गुल खिला
कांटों में भी गुल खिला
हे हे हे हे
प्यार करता जा

हम नौजवां मस्ती भरे
धरती पे हम आसमान हैं
सब झूमने वाले
कौन है क्या किसे है खबर
पहले तो हम इंसान हैं
हम हिम्मत वाले
हे हे हे हे

प्यार करता जा प्यार करता जा
दिल कहता है दिल कहता है
कांटों में भी गुल खिला
कांटों में भी गुल खिला
हे हे हे हे
प्यार करता जा

छोटा बड़ा कोई भी हो
अपने लिए सभी एक हैं
ये प्यार धरम है
सबसे गल्ले मिल के चलो
जग बेवफा सभी नेक हैं
ये प्यार का रंग है
हे हे हे हे

प्यार करता जा प्यार करता जा
दिल कहता है दिल कहता है
कांटों में भी गुल खिला
कांटों में भी गुल खिला
हे हे हे हे
प्यार करता जा

दिल की अगन बढ़ती रहे
जलते रहें मीठी आग में
हम प्यार के राही
गुंचा-ए-दिल खिल ही गया
है वो असर मेरे राग में
दिल दिल से मिले हैं
हे हे हे हे

प्यार करता जा प्यार करता जा
दिल कहता है दिल कहता है
कांटों में भी गुल खिला
कांटों में भी गुल खिला
हे हे हे हे
प्यार करता जा
प्यार करता जा
प्यार करता जा
………………………………………………………..
Pyar karta ja-Bhoot bangle 1955

Artists: Mehmood, Tanuja

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Jan 30, 2010

आओ ट्विस्ट करें -भूत बंगला १९६५

फिल्म भूत बंगला का गीत। महमूद की डायरेक्ट की हुई
एक महत्वकांक्षी फिल्म थी। उनके साथ दो हास्य कलाकार
और भी थे फिल्म में-मोहन चोटी और असित सेन। गीत में
आप युवा तनुजा को पहचानने की कोशिश कीजिये। उम्मीद है
इस पोस्ट को देख कर हमारे मित्र जो तनूजा भक्त हैं अवश्य
प्रसन्न होंगे। वे चुपचाप इस ब्लॉग पर नज़र मार जाते हैं
लेकिन टिप्पणी करने से बचते हैं।






गीत के बोल:

सुनो और गौर से सुनो
पहले तालियाँ तो बजाओ

आज रात का मैं आखरी गाना गा रहा हूँ
और गाने में ये कहना चाहता हूँ

दुनिया में खुश रहना है तो मानो मेरी बात
आओ ट्विस्ट करें , गा उठा मौसम

हे ऐ, आओ ट्विस्ट करें, ज़िन्दगी है यही
आओ ट्विस्ट करें, गा उठा मौसम
हे ऐ ऐ आओ ट्विस्ट करें , गा उठा मौसम

नाच उठी है, हे ए, जिंदगानी ओ मेरी जान
नाच उठी है जिंदगानी ओ मेरी जान

छम छमा छम, छम छमा छम
हा ऐ हाँ हाँ हाँ

आओ आओ आओ आओ ट्विस्ट करें , गा उठा मौसम
हे ऐ, आओ ट्विस्ट करें, ज़िन्दगी है यही

आओ ट्विस्ट करें , गा उठा मौसम
हे ऐ, आओ ट्विस्ट करें, ज़िन्दगी है यही

परवानों दिलवालों , हा आ आओ
मस्ती के साजों पे गा गा गाओ।

खुशियों को महफ़िल में ला लाओ
इतना सा कहना है आ आहा आओ

हे, तुई तुई तुई तुई तुई .....
what to do
what to do, ha ha
आओ
हे, ट्विस्ट करें, गा उठा मौसम

हे ऐ, आओ ट्विस्ट करें, ज़िन्दगी है यही
आओ ट्विस्ट करें , गा उठा मौसम
हे ऐ, आओ ट्विस्ट करें, ज़िन्दगी है यही

अरे क्या सोच रहे हो तुम लोग
तुम लोग रोना चाहते हो
नहीं
तुम लोग उदास रहना चाहते हो,
नहीं
तुम लोग हँसना चाहते हो
हाँ
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट

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Jul 5, 2009

जागो सोनेवालों-भूत बंगला १९६५

महमूद एक स्थापित हास्य कलाकार थे। उन्होंने कुछ
फ़िल्में भी बनाई। जितनी भी बनाई उन सबमे उन्होंने
अभिनय किया। ये फ़िल्म उन्होंने १९६५ में बनाई और
इसमे आर डी बर्मन को एक बार फ़िर मौका दिया संगीत
देने का. फ़िल्म में गीत हसरत जयपुरी के हैं। ये एक
प्रेरणादायक गीत है हसरत की कलम से निकला हुआ।




गाने के बोल:

जागो सोने वालों सुनो मेरी कहानी -२
क्या अमीरी क्या ग़रीबी भूलो बातें पुरानी

जागो सोने वालों ...

टूटा जो आज दिल का वो साज़ रोने लगा एक बदनसीब
हँसने लगे दुनिया के लोग कोई हुआ बर्बाद

जागो सोने वालों ...

ये ऊँच नीच दुनिया के बीच आख़िर ये क्यों बोलो कोई
जो है भला वो क्यों बुरा हम तो न समझे ये राज़

जागो सोने वालों ...

आपस में ग़म बाँटें जो हम फिर न रहें ऐसे सितम
कहने को इंसान हैं वो इन्सानियत कहाँ है

जागो सोने वालों ...

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