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Jan 14, 2016

मेरी जान मेरी जान कहना मानो--दो चोर १९७२

सुनिए फिल्म दो चोर से एक मधुर गीत। धर्मेन्द्र एक
समय बड़े हैंडसम व्यक्ति माने जाते थे और उनकी
गिनती दुनिया के सबसे खूबसूरत लोगों में होती थी.
फिल्मों में नायक पहले भी अपने कसरती बदन का
प्रदर्शन करते थे, धर्मेन्द्र उनमे से एक प्रमुख कलाकार
हैं।

बहुत कम गीत ही आपको ऐसे मिलेंगे जिसमे नायक
और नायिका की सेहत दुरुस्त मिले। इस फिल्म में हीरो
हीरोईन दोनों सेहतमंद हैं। वैसे दक्षिण भारत के नायक
नायिका उत्तर भारत के नायक नायिकाओं की अपेक्षा
ज्यादा सेहतमंद और खाते पीते घर के नज़र आते हैं.

गीत में नायक निवेदन कर रहा है या सलाह दे रहा है
ये गीत सुन के पता लगाइये. गीत मजरूह ने लिखा है
और इसकी धुन बनायीं है राहुल देव बर्मन ने. गायक
को आप पहचानते हैं-योड्लिंग के भारतीय महाराजा.

गीत के बहाने आपको बम्बई की चौपाटी की मैरीन ड्राइव
का खूबसूरत नज़ारा देखने को मिलेगा. धन्यवाद टूरिज़म
फ्रेंडली हिंदी सिनेमा. बिन घुँघरू के पायल नहीं बजा करती
है-इस गीत का सन्देश.



गीत के बोल:

मेरी जान मेरी जान कहना मानो
मेरी जान मेरी जान कहना मानो
हो दुश्मन है जहाँ रुत पहचानो
कटेगी न ये डगर बिना एक हमसफ़र
फिर क्यूँ बंदे को अपना ही जानो
मेरी जान मेरी जान कहना मानो

कोई भी गाडी दुनिया में
एक पहिये से नहीं चलती
चले नहीं जिंदगी बिन साथी के
देखो तुम्हारी पायल भी
घुँघरू से नहीं बजती
बजती हैं तालियाँ दो हाथों से
मेरे संग आ जाओ बुरा मत मानो
हो मेरी जान मेरी जान कहना मानो

मैं भी नहीं कुछ तुमसे कम
तुम जो नहीं रुकने वाले
ढंग मेरे हाथ में हैं और भी
तुमको हंसा के छोडूंगा
तोड़ के होंठों के ताले
समझ लो मैं हूँ सनम दिल का चोर भी
अपना जैसा मुझे भी जानो
हो मेरी जान मेरी जान कहना मानो
हो दुश्मन है जहाँ रुत पहचानो
कटेगी न ये डगर बिना एक हमसफ़र
फिर क्यूँ बंदे को अपना ही जानो
मेरी जान मेरी जान कहना मानो
………………………………………………………………
Mei jaan meri jaan kehna maano-Do chor 1972

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Nov 19, 2015

बेबी तू छोटी है-प्यार की कहानी १९७१

बॉलीवुड सभी प्रकार की कहानियां बना चुका है मसलन
बुखार की कहानी, बेकार की कहानी, अचार की कहानी,
और प्यार की कहानी.

सन १९७१ की फिल्म है प्यार की कहानी इसमें एक गीत
है जिसमें लड़कियां एक दूसरे से छेड़ छाड़ कर रही हैं.
नायिका का नाम है-बेबी. उस ये गा कर चिढाया जा रहा
है कि वो छोटी है. लंबी चोटी, शत्रण की गोटी जैसे शब्द
इस्तेमाल किये गए हैं गीत में जो इसे पारंपरिक सा बना
देते हैं. पर्वत पे बादल को जमाने वाले ये गीतकार हैं
आनंद बक्षी. संगीतकार हैं राहुल देव बर्मन.





गीत के बोल:

उमर है सतरा साल कितनी लंबी चोटी है
देखो मेरी आँख भी शतरंज की गोटी है
अरे, उमर है सतरा साल कितनी लंबी चोटी है
देखो मेरी आँख भी शतरंज की गोटी है
बेबी तू छोटी है, बेबी तू छोटी है
बेबी तू छोटी है, बेबी तू छोटी है

चोरी से तुम सब क्या बातें करते हो
मुझको बतलाओ क्यूँ मुझसे डरते हो, हाँ
खुद को तुम इतना खिलाडी न समझो
मुझको तुम इतना अनाड़ी न समझो
अच्छा ये बताओ प्यार क्या चीज़ होती है

बेबी तू छोटी है, बेबी तू छोटी है
बेबी तू छोटी है, बेबी तू छोटी है
उमर है सतरा साल कितनी लंबी चोटी है
देखो मेरी आँख भी शतरंज की गोटी है

कलियों को भंवरा क्यूँ चूमा करता है
पर्वत पे बादल क्यूँ झूमा करता है
बताओ, कैसे
मैं क्या जानूं ?
तुझपे भी जिस दिन जवानी आएगी
तेरी समझ में ये कहानी आएगी
हाँ, जागता है दर्द क्यूँ जब दुनिया सोती है

बेबी तू छोटी है, बेबी तू छोटी है
...............................................................................
Baby too chhoti hai-Pyar ki kahani 1971

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May 1, 2014

फिर कहीं कोई फूल खिला-अनुभव १९७२

मन्ना डे की गायकी बेजोड बेमिसाल है. जो कुछ बाकी
गायकों की गायकी के बाद सुनने की इच्छा होती है वो
हैं मन्ना डे के गाने. आवाज़ की परिपक्वता अपनी जगह
है और गायकी की गुणवत्ता अपनी जगह. गुणवत्ता के
मामले में उनके निकट कुछ ही गायक आ पाते थे.

आज सुनते हैं उनकी मख्खन सी मुलायम गायकी का
अंदाज़ फिल्म अनुभव से. कपिल कुमार के बोल और
कनु घोष का संगीत है. फिल्म के परदे के कलाकारों को
आप आसानी से पहचान जायेंगे.




गीत के बोल:

फिर कहीं कोई फूल खिला, चाहत ना कहो उसको
फिर कहीं कोई दीप जला, मंजिल ना कहो उसको
फिर कहीं कोई फूल खिला

मन का समुन्दर प्यासा हुआ क्यूँ किसी से मांगें दुआ
मन का समुन्दर प्यासा हुआ क्यूँ किसी से मांगें दुआ
लहरों का लगा जो मेला तूफ़ान न कहो उसको

फिर कहीं कोई फूल खिला

देखे सब वो सपने खुद ही सजाये जो हमने
दिल उनसे बहाल जाए तो राहत न कहो उसको

फिर कहीं कोई फूल खिला
.........................................................
Phir kahin koi phool-Anubhav 1972

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Jun 1, 2013

चाहे रहो दूर-दो चोर १९७२

चोर चोरनी वाले दृश्य फिल्मों में थोड़ी सी देर के लिए होते हैं.
यहाँ तो पूरी फिल्म इस थीम को समर्पित है. चोर चोरनी के
रोल में हैं धर्मेन्द्र और तनूजा. एक रोमांटिक गीत गा रहे हैं
चोर चोरनी. गीत में ‘दूर’ शब्द पर जोर दिया गया है जो थोडा
ध्यान आकर्षित करता है. आइये सुनें लता किशोर का गाया
मजरूह का लिखा और पंचम का संगीत से संवारा युगल गीत.


   
   

गीत के बोल:

चाहे रहो दूर चाहे रहो पास सुन लो मगर एक बात
एक डोर से बांधोगी सनम किसी दिन हमारे साथ
चाहे रहो दूर चाहे रहो पास सुन लो मगर एक बात
तुम इस गली तो मैं उस गली के आऊँ कभी न हाथ

चाहे रहो दूर चाहे रहो पास

मेरे पीछे पीछे चले तो हो बाबू पर ज़रा तिरछी है चाल
आशिक बनना जाओ कहीं सीखो तुम अभी दो चार साल
चाहत के काबिल बन जाओ फिर मैं करूंगी
फिर मैं करूंगी बात

चाहे रहो दूर चाहे रहो पास सुन लो मगर एक बात
एक डोर से बांधोगी सनम किसी दिन हमारे साथ
चाहे रहो दूर चाहे रहो पास सुन लो मगर एक बात
तुम इस गली तो मैं उस गली के आऊँ कभी न हाथ
चाहे रहो दूर चाहे रहो पास

ओ मेरी चंचल पवन बसंती करो नहीं यूँ बेकरार
इन बाहों में आना है तुमको आखिर जान-ए-बहार
दिल थामे आओगी फिर मैं पूछूँगा तुमसे
पूछूँगा तुमसे बात

चाहे रहो दूर चाहे रहो पास सुन लो मगर एक बात
एक डोर से बांधोगी सनम किसी दिन हमारे साथ
चाहे रहो दूर चाहे रहो पास सुन लो मगर एक बात
तुम इस गली तो मैं उस गली के आऊँ कभी न हाथ
चाहे रहो दूर चाहे रहो पास
....................................................
Chahe raho door-Do chor 1972

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Jul 17, 2011

रोज़ शाम आती थी-इम्तिहान १९७४

अभिनेत्री नूतन और तनूजा का कैरियर साठ के और सत्तर के दशक में
साथ साथ चला. नूतन ने तो जल्दी ही अपना ऊंचा मुकाम हासिल कर
लिया फिल्म जगत में मगर तनूजा को काफी संघर्ष के बावजूद, (यहाँ
संघर्ष का तात्पर्य अभिनय कला से हैं न कि फ़िल्में पाने के लिए संघर्ष
से) वो स्थान नहीं मिल पाया की उनकी किसी एक फिल्म को दर्शक
याद करें. प्रस्तुत गीत लिया गया है फिल्म इम्तिहान से जो सन १९७४
की फिल्म है. मजरूह के आकर्षक बोलों को स्वर दिया है लता मंगेशकर
ने. फिल्म में संगीत है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का. इस गीत में विनोद खन्ना
ने बेहतर अभिनय किया है. नायिका के कपडे कुछ अजीब से लगेंगे आपको
सन ७० के आस पास और बाद में कुछ एक फ़िल्में ऐसी आयीं जिनमें
नायकों और नायिकाओं की पोशाकें कुतूहल का विषय हुआ करती थीं.

गीत में कैमरे के साथ एक फ़िल्टर लगाया गया है जिससे सुनहरी धूप वाले
समय को भी शाम बना दिया गया है. ये करिश्मा पकड़ में आ जाता है
गीत के बीच में, जहाँ आधी धूप आधी छांव वाली कहानी दिखाई देती है.
ये होता है अन्तर शुरू होते समय. ऐसे कारनामे विडियो का मज़ा किरकिरा
कर देते हैं.




गीत के बोल:

ला ला ला ला ला ला ला ला ला
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी

डाली में ये किसका हाथ करे इशारे बुलाए मुझे
झूमती चंचल हवा छूके तन गुदगुदाए मुझे
हौले हौले धीरे धीरे कोई गीत मुझको सुनाए
प्रीत मन में जगाए
खुली आँख सपने दिखाए
दिखाए दिखाए दिखाए
खुली आँख सपने दिखाए

ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी

अरमानों का रंग है जहाँ पलकें उठाती हूँ मैं
हँस हँस के है देखती जो भी मूरत बनाती हूँ मैं
जैसे कोई मोहे छेड़े दिल खो और भी जाती हूँ मैं
जगमगाती हूँ मैं
दीवानी हुई जाती हूँ मैं
दीवानी दीवानी दीवानी
दीवानी हुई जाती हूँ मैं

ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
....................................
Roz shaam aati thi-Imtihaan 1974

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Jul 13, 2011

काहे को बुलाया मुझे बालमा-हमशक्ल १९७४

जैसे मोगली सीरियल के शीर्षक गीत "चड्डी पहन के फूल खिला है"
पसंद आने की कोई विशेष वजह नहीं है वैसे ही प्रस्तुत गीत के पसंद
आने के पीछे भी कोई ख़ास कारण नहीं है। इसको सुनते सुनते कान
पक गये हैं। आकर्षक धुन एकमात्र जायज़ वजह हो सकती है इस गीत
को इतनी बार सुन लिया है कि याद नहीं। इसकी शुरूआती "हाय हाय"
और "जा तोसे बोलूं ना, घूँघट खोलूं ना" बोल दिमाग में बैठ से गये हैं।

ये आकर्षक युगल गीत है राजेश खन्ना के डबल डोज़ वाली अर्थात डबल रोल
वाली फिल्म हमशकल से। इसका एक गीत आपको सुनवा चुके हैं पहले
जिसमें मौसमी चटर्जी थीं राजेश खन्ना के साथ और 'झूम ना झूम ना'
कर रही थीं।



गीत के बोल:

हाय हाय
काहे को बुलाया
काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से
काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से

राधा ने यही पूछा था एक दिन रूठ कर श्याम से
रूठ कर श्याम से

जा तोसे बोलूँ ना घूँघटा खोलूँ ना डोलूँ ना मैं संग तेरे
जा तोसे बोलूँ ना घूँघटा खोलूँ ना डोलूँ ना मैं संग तेरे
रोज़ जो तुम रूठोगी ऐसे गुज़रेंगे दिन मेरे कैसे
जीने नहीं देगा मुझे चार दिन प्यार आराम से
प्यार आराम से

काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से

काली घटाओं में, ठंडी हवाओं में, आओ कहें हाल दिल का
काली घटाओं में, ठंडी हवाओं में, आओ कहें हाल दिल का
ओ, प्यार में दिन तो ढल जाता है, रात का जादू चल जाता है
जिया लगता है धड़कने पिया, आजकल शाम से
आजकल शाम से

राधा ने यही पूछा था एक दिन रूठ कर श्याम से
रूठ कर श्याम से

तौबा मैं क्या करूँ
तौबा मैं क्या करूँ बदनामी से डरूँ
मोहे बड़ी लाज आए
हमने कोई की है चोरी, प्यार किया है हमने गोरी
लोगों से जो हम ऐसे डरने लगे तो गए काम से
तो गए काम से

काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से

राधा ने यही पूछा था एक दिन रूठ कर श्याम से
रूठ कर श्याम से
...................................
Kaahe ko bulaya-Humshakal 1974

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Nov 7, 2010

बेक़रार दिल तू गाये जा-दूर का राही १९७१

पिछले गीत में आपने किशोर कुमार को अभिनय करते देखा।
आइये अब उनका एक गीत भी सुन लेते हैं। ये उनके द्वारा
बनाई गई फिल्म 'दूर का राही' से है। इसे लिखा है ए. इरशाद
नाम के गीतकार ने और धुन बनाई है स्वयं किशोर कुमार ने।
इस गीत में किशोर का साथ दिया अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित ने
जिन्होंने एक डबिंग आर्टिस्ट की तरह काफी समय हिंदी फिल्म
संगीत क्षेत्र को अपनी सेवाएँ दीं। उसके बाद उन्होंने पार्श्वगायन
भी किया और कुछ अच्छे गीत भी उनके हिस्से में आये।
फिलहाल इस गीत में वो तनूजा के लिए पार्श्वगायन कर रही हैं।
प्यानो की ध्वनि मेसमेरायिज़ करती हुई सी प्रतीत होती है।

गीत फिल्माया गया है अशोक कुमार पर। अशोक कुमार भी
किशोर की आवाज़ के दीवानों में से एक थे। गीत पूरा सुनिए
ये एक सन्देश देता है। नैराश्य के भंवर में उलझे हुओं को एक
बार अवश्य सुनना चाहिए।



गीत के बोल:

बेक़रार दिल, तू गाये जा
खुशियों से भरे वो तराने
जिन्हें सुन के दुनिया झूम उठे
और झूम उठे दिल दीवाने

बेक़रार दिल, अरे तू गाये जा

राग हो कोई मिलन का,
सुख से भरी सरगम का
युग-युग के बंधन का,
साथ हो लाखों जनम का
ऐसे ही बहारें गाती रहें,
और सजते रहे वीराने

जिन्हें सुन के दुनिया झूम उठे
और झूम उठे दिल दीवाने

बेक़रार दिल, तू गाये जा
खुशियों से भरे वो तराने
जिन्हें सुन के दुनिया झूम उठे
और झूम उठे दिल दीवाने

बेक़रार दिल, तू गाये जा

रात यूँ ही थम जायेगी,
रुत ये हंसीं मुस्काएगी
बंधी कली खिल जायेगी,
और शबनम शरमायेगी
प्यार के हों ऐसे नगमे,
जो बन जायें अफ़साने

जिन्हें सुन के दुनिया झूम उठे
और झूम उठे दिल दीवाने

बेक़रार दिल, तू गाये जा

दर्द में डूबी धुन हो,
सीने में इक सुलगन हो
सांसों में हलकी चुभन हो,
सहमी हुई धड़कन हो
दोहराते रहें बस गीत नये,
दुनिया से रहें बेगाने

जिन्हें सुन के दुनिया झूम उठे
और झूम उठे दिल दीवाने

बेक़रार दिल, तू गाये जा
खुशियों से भरे वो तराने
जिन्हें सुन के दुनिया झूम उठे
और झूम उठे दिल......

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Feb 25, 2010

आ मेरे हमजोली आ-जीने की राह १९६९

जीने की राह फिल्म जो सन १९६९ में आई थी, में कुछ लोकप्रिय गीत हैं।
जी हाँ ये वही गीत हैं जिसके बोल इस प्रकार सुनाई देते हैं- मियाऊँ , मियाऊँ।
क्यूँ सुनाई देते हैं इसके लिए गीत सुनिए। जैसा की हिंदी गीतों में होता आया है
की नायक नायिका ख्यालों में खो जाते हैं, (क्यूँ ना हो ये सफल फार्मूला जो है फिल्मों
का) इस गीत में भी व्हील चेयर पर बैठी नायिका और भ्रमित, अचंभित सा बैठा नायक
दोनों गीत का आनंद लेते लेते खुद नाचने का आभास करने लगते हैं। नायिका का
केश विन्यास अनूठा है जिसको देख कर पगोडा की आकृति ध्यान में आती है।

गीत के अंत में बिना किसी दावा के जादुई छड़ी के असर से नायिका कुर्सी से उठ के
नाचने लगती है। किसी जगह पर एक संगीत प्रेमी ने लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल के
संगीत पर कटाक्ष करते हुए लिखा है कि उनके डांस संगीत में दवाई का असर है जिससे
अपाहिज व्यक्ति ठीक हो सकता है। संभव है ऐसा हो ! जब हिंदी फिल्मों का हीरो बिना
चूरन खाए ३०० फीट ऊंची दीवार फांद सकता है तो कुछ भी संभव है फिल्मों में । उसमे
लता, रफ़ी, आनंद बक्षी और लक्ष्मी प्यारे क्या कर लेंगे।



गीत के बोल

हो ओ, हो ओ ओ
हो ओ, हो ओ ओ

आ मेरे हमजोली आ
खेलें आँख मिचोली आ
गलियों में चौबारों में
बागों में बहारों में, हो
ओ मैं ढूँढू तू छुप जा

आ मेरे हमजोली आ
खेले आँख मिचोली आ
गलियों में चौबारों में
बागों में बहारों में, हो
मैं ढूँढू तू चुप जा

मैं आऊं
ना ना
मैं आऊं
ना ना ना
आऊँ
ना
मैं आऊं
आ जा

पीपल के ऊपर जा बैठा
चुप से मेरा साथी
धक् से लेकिन धड़क गया दिल
गिर गयी हाथ से लाठी
ओ पकड़ा गया
ओ पकड़ा गया

मैं आऊं
ना ना
मैं आऊं
ना ना ना
आऊं
ना
मैं आऊं
आ जा

पनघट के पीछे जा बैठी
ओ छुप के मेरी सजनिया
झन से लेकिन अनजाने में
झनक गयी पैजनिया
ओ पकड़ी गयी
ओ पकड़ी गयी

आ मेरे हमजोली आ
खेलें आँख मिचोली आ
गलियों में चौबारों में
बागों में बहारों में
हो
मैं ढूँढू तू चुप जा

मैं आऊं
ना ना
मैं आऊं
ना ना ना
आऊं
ना
मैं आऊं
आ जा

ओ मेरे नैनों से तू छुप सकता है
ओ मेरे रसिया
लेकिन मेरे मन से छुपना मुश्किल है
मन बसिया
ए पकड़ा गया
ओ पकड़ा गया

मैं आऊं
ना ना
मैं आऊं
ना ना ना
आऊं
ना
मैं आऊं
आ जा

काहे लुकछुप के खेल में छेड़े तू
प्रेम की बतियाँ
देख तमाशा देख रहीं हैं
सारे शहर की अँखियाँ
ए पकड़ी गयी
ओ पकड़ी गयी

आ मेरे हमजोली आ
खेले आँख मिचोली आ
गलियों में चौबारों में
बागों में बहारों में, हो

ओ मैं ढूंढूं तू छुप जा
आ मेरे हमजोली आ
खेले आँख मिचोली आ
गलियों में चौबारों में
बागों में बहारों में, हो

मैं ढूँढू तू चुप जा
मैं ढूँढू तू चुप जा
मैं ढूँढू तू चुप जा

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Jan 30, 2010

आओ ट्विस्ट करें -भूत बंगला १९६५

फिल्म भूत बंगला का गीत। महमूद की डायरेक्ट की हुई
एक महत्वकांक्षी फिल्म थी। उनके साथ दो हास्य कलाकार
और भी थे फिल्म में-मोहन चोटी और असित सेन। गीत में
आप युवा तनुजा को पहचानने की कोशिश कीजिये। उम्मीद है
इस पोस्ट को देख कर हमारे मित्र जो तनूजा भक्त हैं अवश्य
प्रसन्न होंगे। वे चुपचाप इस ब्लॉग पर नज़र मार जाते हैं
लेकिन टिप्पणी करने से बचते हैं।






गीत के बोल:

सुनो और गौर से सुनो
पहले तालियाँ तो बजाओ

आज रात का मैं आखरी गाना गा रहा हूँ
और गाने में ये कहना चाहता हूँ

दुनिया में खुश रहना है तो मानो मेरी बात
आओ ट्विस्ट करें , गा उठा मौसम

हे ऐ, आओ ट्विस्ट करें, ज़िन्दगी है यही
आओ ट्विस्ट करें, गा उठा मौसम
हे ऐ ऐ आओ ट्विस्ट करें , गा उठा मौसम

नाच उठी है, हे ए, जिंदगानी ओ मेरी जान
नाच उठी है जिंदगानी ओ मेरी जान

छम छमा छम, छम छमा छम
हा ऐ हाँ हाँ हाँ

आओ आओ आओ आओ ट्विस्ट करें , गा उठा मौसम
हे ऐ, आओ ट्विस्ट करें, ज़िन्दगी है यही

आओ ट्विस्ट करें , गा उठा मौसम
हे ऐ, आओ ट्विस्ट करें, ज़िन्दगी है यही

परवानों दिलवालों , हा आ आओ
मस्ती के साजों पे गा गा गाओ।

खुशियों को महफ़िल में ला लाओ
इतना सा कहना है आ आहा आओ

हे, तुई तुई तुई तुई तुई .....
what to do
what to do, ha ha
आओ
हे, ट्विस्ट करें, गा उठा मौसम

हे ऐ, आओ ट्विस्ट करें, ज़िन्दगी है यही
आओ ट्विस्ट करें , गा उठा मौसम
हे ऐ, आओ ट्विस्ट करें, ज़िन्दगी है यही

अरे क्या सोच रहे हो तुम लोग
तुम लोग रोना चाहते हो
नहीं
तुम लोग उदास रहना चाहते हो,
नहीं
तुम लोग हँसना चाहते हो
हाँ
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट
ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट ट्विस्ट

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Dec 12, 2009

बेर लेयो -पैसा या प्यार १९६९

हमने एक विषय पर ज्यादा प्रकाश नहीं डाला अभी तक-वो है
सब्जी फलों के ऊपर बने गीत। यू ट्यूब पर एक गीत में हीरो
हिरोइन को फलों के ढेर के इर्द गिर्द गाते देख मुझे ये गीत याद आया।
इसमे अभिनेत्री तनूजा चौपाटी पर बेर बेच रही हैं। फ़िर वही कहानी-
चौपाटी पर ऊँट। लगता है ये १९६९ से यहीं बैठे थे और १९७२ की
फ़िल्म सीता और गीता में भी इन्हीं ऊंटों ने अभिनय किया है।
गायिका हैं आशा भोंसले और संगीतकार हैं रवि। बेर बेचते बेचते
दूसरे शहरों की सैर भी हो गई। गरीबों का मेवा-ये नाम बेर का
कब से है ? मुझे इस प्रश्न के जवाब की तलाश है। इस गीत में
बम्बैया (मुम्बैया) भाषा का इस्तेमाल किया गया है -खाली पीली ।



गीत के बोल:

बेर ले लो बेर
बेर लेयो बेर लेयो बेर लेयो
हाँ

मेवा गरीबों का
ओ,तेरे मेरे नसीबों का
मेवा गरीबों का
ओ,तेरे मेरे नसीबों का

ये खट्टे खट्टे भी हैं
ये मीठे मीठे भी हैं
अरे इनके मज़ा है कई जात का

मेवा गरीबों का
ओ,तेरे मेरे नसीबों का

कच्चा भी काम है, पक्का भी काम का
इत्ता बड़ा साइज़ और इत्ते कम दाम का
कच्चा भी काम है, पक्का भी काम का
इत्ता बड़ा साइज़ और इत्ते कम दाम का

माल यहाँ रख प्यारे
इसे देख नहीं चख प्यारे
झिझक न, ओ राजा ले ले ले ले
झिझक न

बेर लेयो बेर लेयो बेर लेयो
हाँ

मेवा गरीबों का
ओ,तेरे मेरे नसीबों का
मेवा गरीबों का
ओ,तेरे मेरे नसीबों का

सात पैसे मोल कहूं इत्ते बड़े ढेर का
ले ले मेरे साब यहाँ काम नहीं देर का

सात पैसे मोल कहूं इत्ते बड़े ढेर का
ले ले मेरे साब यहाँ काम नहीं देर का

तू जो ले तो सत्त पैसा,
अरे मैं तुझको अत्थ पैसा
झिझक न ओ बाबू धीरे धीरे खिसक न

बेर लेयो बेर लेयो बेर लेयो
हाँ

मेवा गरीबों का
ओ,तेरे मेरे नसीबों का
मेवा गरीबों का
ओ,तेरे मेरे नसीबों का

रख मेरे बेर अरे तू तो बड़ा तेज़ है
ऐसे ले चला है जैसे जोरू का दहेज़ है
रख मेरे बेर अरे तू तो बड़ा तेज़ है
ऐसे ले चला है जैसे जोरू का दहेज़ है

आगे से हट जा रे, मार दूँगी पलट जा रे
चिपक न ओ यूँ ही खाली पीली चिपक न

बेर लेयो बेर लेयो बेर लेयो
हाँ

मेवा गरीबों का
ओ,तेरे मेरे नसीबों का
मेवा गरीबों का
ओ,तेरे मेरे नसीबों का

ये खट्टे खट्टे भी हैं
ये मीठे मीठे भी हैं
अरे इनके मज़ा है कई जात का

मेवा गरीबों का
ओ,तेरे मेरे नसीबों का

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Nov 21, 2009

शाम-ऐ-बहारां सुबह-ऐ-चमन - आजा सनम १९७५

१९७५ में श्वेत श्याम फ़िल्म देखना शायद दर्शकों के लिए अनूठा
अनुभव रहा होगा। कलर निर्माता के बजट से बाहर था या फ़िर
कोई और वजह ये गीत सुनने में भी ६० के दशक का मजा देता है।
इसमे फ़िर से एक बार हमारे परम मित्र की पसंदीदा हिरोइन तनूजा हैं।
उन्हें फिरोज खान और तनूजा की जोड़ी की बी ग्रेड फ़िल्में बहुत पसंद हैं।
उनकी पसंद पर कभी कभी मुझे दाद देने की इच्छा भी होती है। उदाहरण के
लिए यह गीत जो निहायती रोमांटिक गीत है। इसको शायद ही किसी
संगीत भक्त ने रेडियो के अलावा कहीं सुना होगा। इसकी धुन बनाई है
उषा खन्ना ने और गायक हैं रफ़ी। इस गीत में जो भी अभिनय की कोशिश
करी गई है वो फिरोज खान द्वारा है। गीत लिखा है इन्दीवर ने।

फ़िल्म कब बनी, कब रिलीज़ हुई इसपर किसी को रिसर्च करना हो तो
एक और तनूजा भक्त के ब्लॉग पर नज़र मार ले।



गीत के बोल:

शाम-ऐ-बहारां सुबह-ऐ-चमन
शाम-ऐ-बहारां सुबह-ऐ-चमन

तू मेरे ख्वाबों की प्यारी दुल्हन
तू मेरे ख्वाबों की प्यारी दुल्हन

शाम-ऐ-बहारां सुबह-ऐ-चमन
शाम-ऐ-बहारां सुबह-ऐ-चमन

तुझसे नज़र मेरी टकरा गई
तुझसे नज़र मेरी टकरा गई
जन्नत बरु-ऐ-ज़मीन आ गई
दिल के अंधेरों में फूटी किरण
दिल के अंधेरों में फूटी किरण

शाम-ऐ-बहारां सुबह-ऐ-चमन
शाम-ऐ-बहारां सुबह-ऐ-चमन
तू मेरे ख्वाबों की प्यारी दुल्हन

शाम-ऐ-बहारां सुबह-ऐ-चमन

दिल छीनती है तेरी हर अदा
दिल छीनती है तेरी हर अदा
मासूम शोखी में डूबी हया
क्या सादगी है ये क्या बांकपन
क्या सादगी है ये क्या बांकपन

शाम-ऐ-बहारां सुबह-ऐ-चमन
शाम-ऐ-बहारां सुबह-ऐ-चमन
तू मेरे ख्वाबों की प्यारी दुल्हन

शाम-ऐ-बहारां सुबह-ऐ-चमन

तेरे लिए कितना बेचैन था
तेरे लिए कितना बेचैन था
मुझपर खुदा को तरस आ गया
काम आ गई मेरे दिल की लगन
काम आ गई मेरे दिल की लगन

शाम-ऐ-बहारां सुबह-ऐ-चमन
शाम-ऐ-बहारां सुबह-ऐ-चमन
तू मेरे ख्वाबों की प्यारी दुल्हन
तू मेरे ख्वाबों की प्यारी दुल्हन
शाम-ऐ-बहारां सुबह-ऐ-चमन
शाम-ऐ-बहारां सुबह-ऐ-चमन

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यारी हो गई यार से-दो चोर १९७२

अभी आपने पिछली पोस्ट में एक सज्जन के बारे में पढ़ा कि
उनको तनूजा बेहद प्रतिभाशाली अभिनेत्री नज़र आती हैं। मेरा
ऐसा मानना है की जब तनूजा ने माँ की या अन्य चरित्र भूमिकाएं
करना शुरू की तब जाके वो अभिनय में परिपक्व हुयीं । इसका
सबसे अच्छा उदाहरण है फ़िल्म कामचोर जिसमे उन्होंने हीरो की
भाभी की भूमिका निभाई थी। एक बात तो तय है कि उनकी मुस्कान
मनमोहक है।

धर्मेन्द्र और तनूजा अभिनीत फ़िल्म दो चोर का गीत -यारी हो गई यार से
मुझे बेहद पसंद है। अभिनय के लिए नहीं, बल्कि इसकी धुन और बोल थोड़े
अलग से हैं इसलिए। इस गीत में तनूजा लता मंगेशकर के गाये गीत पर
अपने होंठ भी ढंग से नहीं हिला पा रही है। उसके अलावा हीरो हिरोइन की
एक्टिंग आप इस गाने में न भी देखें तो कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।

इस गीत को भी मजरूह साहब ने लिखा है और धुन बनाई है राहुल देव बर्मन ने।
इसके बोल समझने में शुरू शुरू में मुझे कठिनाई आई बावजूद इसके कि मैंने
सदाअत हसन मंटो की कहानियाँ बहुत पढ़ीं । क्लिष्ट और दिमाग कि बत्ती गुल
करने वाली भाषा मुझे हमेशा से प्रभावित करती रही । जिन लोगों को मजरूह की
भाषा और अभिव्यक्ति पर तनिक भी संदेह हो वो इस गीत को अवश्य ध्यान से सुने
एक बार।



गाने के बोल:

यारी हो गई
हाँ, यारी हो गई

यारी हो गई यार से लक तुन तुनु
यारी हो गई यार से लक तुन तुनु
प्यार को काम क्या झूठे संसार से

हो, यारी हो गई यार से लक तुन तुनु
हाँ, यारी हो गई यार से लक तुन तुनु
प्यार को काम क्या झूठे संसार से
हाँ, यारी हो गई यार से लक तुन तुनु
हो, यारी हो गई यार से लक तुन तुनु

ओस में भीगे भीगे आकाश के तले
जाने हम जल जाना लग दर यार के सीने से
हो चूर थकन से होके जब साँस न चले
हमको जीवन मिल जाता है ज़हर के पीने से

जीते हैं प्यार से मरते हैं प्यार से

यारी हो गई यार से लक तुन तुनु
यार से लक तुन तुनु

धरम सदा अपना तो हँसना बोलना
लुकना छिपना हम क्या जानें हम ओत में अंचल की
हो, करम अपना तो खुल के डोलना
लहराती बैयाँ है और ये ताल है पायल की
गूंजती हर गली प्रेम झंकार से

यारी हो गई यार से लक तुन तुनु
हो,यारी हो गई यार से लक तुन तुनु
प्यार को काम क्या झूठे संसार से

यारी हो गई यार से लक तुन तुनु

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Oct 22, 2009

ओ मेरे दिल के चैन- मेरे जीवन साथी १९७२

राजेश खन्ना और तनूजा अभिनीत फ़िल्म मेरे जीवन साथी
का एक गीत पेश है जो बेहद लोकप्रिय गीत है। इस फ़िल्म में
किशोर कुमार के बहुत से गीत हैं। संगीत राहुल देव बर्मन का है।
बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे हैं । गिटार और संतूर का
अनूठा संगम है इस गाने में। गायक स्वर है किशोर कुमार का.



गाने के बोल:

ओ मेरे दिल के चैन
ओ मेरे दिल के चैन
चैन आए मेरे दिल को, दुआ कीजिये

ओ मेरे दिल के चैन
ओ मेरे दिल के चैन
चैन आए मेरे दिल को, दुआ कीजिये

अपना ही साया देख के तुम
जाने जहाँ शर्मा गए
अभी तो ये पहली मंजिल है
तुम तो अभी से घबरा गए

मेरा क्या होगा सोचो तो ज़रा
हाय, ऐसे न आहें भरा कीजिये

ओ मेरे दिल के चैन
ओ मेरे दिल के चैन
चैन आए मेरे दिल को दुआ कीजिये

आपका अरमान आपका नाम
मेरा तराना और नहीं
इन झुकती पलकों के सिवा
दिल का ठिकाना और नहीं

जंचता ही नहीं आँखों में कोई
दिल तुमको ही चाहे तो क्या कीजिये

ओ मेरे दिल के चैन
ओ मेरे दिल के चैन
चैन आए मेरे दिल को दुआ कीजिये

यूँ तो अकेला भी अक्सर
गिर के संभल सकता हूँ मैं
तुम जो पकड़ लो हाथ मेरा
दुनिया बादल सकता हूँ मैं

माँगा है तुम्हे दुनिया के लिए
अब ख़ुद ही सनम फ़ैसला कीजिये

ओ मेरे दिल के चैन
ओ मेरे दिल के चैन
चैन आए मेरे दिल को दुआ कीजिये

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Jul 21, 2009

कोई चुपके से आके-अनुभव

आज गायिका गीता दत्त की पुण्य तिथि है। तो आज हम संगीत प्रेमी लोग
गीता दत्त के गाये कुछ गानों के बारे में बात करेंगे ।

बात ऐसी है कि अगर गानों में आत्मा होती हो तो वो गीता दत्त के
गाये गानों में अवश्य ही होती होगी. इस गाने को जितनी बार भी सुनो
जी नहीं भरता। एक गज़ब की कशिश है गीता की आवाज़ में।
फ़िल्म का नाम अनुभव है। गीता दत्त के आखिरी कुछ नग्मों में से एक है ये।
एक अबुझ प्यास का भाव है आवाज़ में। अगर गीता की ज़िन्दगी का
घटनाक्रम सही चला होता तो हम लोगों को आज गीता के गीतों का
बड़ा खजाना मिला होता। लेकिन जो हम सोचते हैं या चाहते हैं वैसा
हमेशा होता नहीं । कुल १२०० के लगभग गीता के गाये हिन्दी नग्मों
में बहुत से संगीत रसिकों की पहुँच के बहार हैं.

गीतकार : कपिल कुमार
संगीतकार : कनु रॉय

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May 1, 2009

काली पलक तेरी गोरी-दो चोर १९७२

फिल्म दो चोर से एक मधुर युगल गीत। नयी पीड़ी के
दर्शकों की बल्ले बल्ले। फिल्मों में नायक पहले भी अपने
कसरती बदन का प्रदर्शन करते थे, धर्मेन्द्र उनमे से
एक प्रमुख कलाकार हैं। बहुत कम गीत ऐसे मिलेंगे
जिसमे नायक और नायिका की सेहत दुरुस्त मिले। इस
गीत में हीरो हिरोइन दोनों सेहतमंद हैं। पं. शिव कुमार शर्मा
का बजाय गया संतूर इस गीत की विशेषता है।



गीत के बोल:

हे हे ,हूँ हूँ
हूँ हूँ

काली पलक तेरी गोरी, खुलने लगी है थोड़ी-थोड़ी
एक चोरनी एक चोर के घर करने चली है चोरी, हो चोरी


काली पलक पिया मोरी, खुलने लगी है थोड़ी-थोड़ी
एक चोरनी एक चोर के घर करने चली है चोरी, हो चोरी
काली पलक पिया मोरी

आएगी बाँध के पायल, तू होंठ दबाए, बदन को चुराए
नाज़ुक क़मर से लगाए, अदा की कटारी ज़ालिमाँ
फेरेगी धीरे-धीरे, तू मेरे गले पर, ये बाँहों के ख़ंज़र
जाएगी दिल मेरा लेकर, समझ के अनाड़ी बालमा
रोज़ रात को यूँ ही बाँधेगी लटों की डोरी, हो डोरी

काली पलक तेरी गोरी

न तो मैं डोर से बाँधूं, ना जाल बिछाऊँ, न तीर चलाऊँ
नाज़ुक क़मर से लगाऊँ, छुरी न कटारी साजना, ओ सजना
मैं तो तेरा दिल लूँगी, तुझसे छुपा के, नज़र को बचा के
अरे यूँ ही ज़रा मुस्करा के, कहूँगी अनाड़ी साजना,
रोज़ रात को तेरे घर होगी तेरी चोरी, हो चोरी

काली पलक पिया मोरी खुलने लगी है थोड़ी-थोड़ी
एक चोरनी एक चोर के घर करने चली है चोरी, हो चोरी
काली पलक तेरी गोरी

अच्छी हुई मेरी चोरी, के एक दिल खोया, तो एक दिल पाया
ऐसे कोई पास आया, कि आ गया लुटने का मज़ा
अच्छी तेरी मेरी जोड़ी, के लुट गए दोनों, तो बस गए दोनों
हँस के लिपट गए दोनों, हुआ जब वादा प्यार का
रोज़ रात को मिलेंगे, चंदा और चकोरी, ओ चकोरी

काली पलक तेरी गोरी खुलने लगी है थोड़ी-थोड़ी
एक चोरनी एक चोर के घर करने चली है चोरी

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