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Dec 1, 2010

चलो चलें माँ- जागृति १९५४

फिल्म जागृति से तीन गीत आपको सुनवाए जा चुके हैं, देशभक्ति
और उज्जवल देश की कामनाओं से भरपूर गीत। अब सुनिए माँ से
गुज़ारिश करता एक बच्चा क्या कह रहा है। आशा भोंसले की
आवाज़ में ये गीत कुछ कुछ कहानी की तरह लगता है। बोल
कविवर प्रदीप के हैं और संगीत हेमंत कुमार का। कुछ महान
संगीतप्रेमियों के पास संगीतकार रवि की आवाज़ में गाया गया
यही गीत उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि रवि ने हेमंत कुमार के
साथ सहायक के रूप में कुछ समय काम किया था। भारतीय संस्कृति
की जड़ से जुडी हुई है फिल्म जागृति शायद इसी वजह से इसे स्कूल
के बच्चों को दिखाया जाता है। फिल्म और फिल्म के गीत काफी
प्रेरणादायक और उत्साहवर्धक हैं।



गीत के बोल:

चलो चलें माँ
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छाओं में
चलो चले माँ

हो राहें इशारे रेशमी घटाओं में
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छाओं में
चलो चलें माँ

आओ चलें हम एक साथ वहाँ
दुःख ना जहाँ कोई ग़म ना जहाँ
आओ चलें हम एक साथ वहाँ
दुःख ना जहाँ कोई ग़म ना जहाँ
आज है निमंत्रण सन सन हवाओं में
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छाओं में
चलो चलें माँ

रहना मेरे संग माँ हरदम
ऐसा ना हो के बिछड़ जाएँ हम
रहना मेरे संग माँ हरदम
ऐसा ना हो के बिछड़ जाएँ हम
घूमना है हमको दूर की दिशाओं में
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छांव में
चलो चलें माँ

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Nov 15, 2009

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ झांकी- जागृति १९५४

कल बाल दिवस था । बाल दिवस पंडित जवाहरलाल नेहरू
के जन्मदिवस पर मनाया जाता है। इस अवसर पर एक बच्चों
वाला गीत पेश है। अभी मुझे सिर्फ़ कविवर प्रदीप का लिखा और
गाया फ़िल्म जागृति का गीत याद आ रहा है। इसकी धुन बनाई है
हेमंत कुमार ने।




गाने के बोल:

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झाँकी हिंदुस्तान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम,वंदे मातरम

उत्तर में रखवाली करता पर्वतराज विराट है
दक्षिण में चरणों को धोता सागर का सम्राट है
जमुना जी के तट को देखो गंगा का ये घाट है
बाट-बाट पे हाट-हाट में यहाँ निराला ठाठ है
देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की,
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम,वंदे मातरम

ये है अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे
इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे
ये प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे
कूद पड़ी थी यहाँ हज़ारों पद्मिनियाँ अंगारों पे
बोल रही है कण कण से कुरबानी राजस्थान की

देखो मुल्क मराठों का ये यहाँ शिवाजी डोला था
मुग़लों की ताकत को जिसने तलवारों पे तोला था
हर पावत पे आग लगी थी हर पत्थर एक शोला था
बोली हर-हर महादेव की बच्चा-बच्चा बोला था
यहाँ शिवाजी ने रखी थी लाज हमारी शान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम,वंदे मातरम

जलियाँ वाला बाग ये देखो यहाँ चली थी गोलियाँ
ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियाँ
एक तरफ़ बंदूकें दन दन एक तरफ़ थी टोलियाँ
मरनेवाले बोल रहे थे इनक़लाब की बोलियाँ
यहाँ लगा दी बहनों ने भी बाजी अपनी जान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम,वंदे मातरम

ये देखो बंगाल यहाँ का हर चप्पा हरियाला है
यहाँ का बच्चा-बच्चा अपने देश पे मरनेवाला है
ढाला है इसको बिजली ने भूचालों ने पाला है
मुट्ठी में तूफ़ान बंधा है और प्राण में ज्वाला है
जन्मभूमि है यही हमारे वीर सुभाष महान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम,वंदे मातरम
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Aao bachchon tumhen dikhayen-Jagriti1954

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Jul 10, 2009

दे दी हमें आजादी - जागृति १९५४

भारतीय स्वंत्रता संग्राम में अहम् भूमिका निभाने वाले
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को समर्पित ये गीत लिखा है
कवि प्रदीप ने। धुन तैयार की है हेमंत कुमार ने ।
स्वर है आशा भोंसले का । बच्चे के ऊपर आशा भोंसले की
आवाज़ जंचती है इस गाने में। ये बच्चा बहुत सी फिल्मों में
आया श्वेत श्याम के ज़माने में, इसका नाम मुझे अभी याद
नहीं आ रहा।



गाने के बोल:

दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
आँधी में भी जलती रही गाँधी तेरी मशाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
दे दी ...

धरती पे लड़ी तूने अजब ढंग की लड़ाई
दागी न कहीं तोप न बंदूक चलाई
दुश्मन के किले पर भी न की तूने चढ़ाई
वाह रे फ़कीर खूब करामात दिखाई
चुटकी में दुश्मनों को दिया देश से निकाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
दे दी ...
रघुपति राघव राजा राम

शतरंज बिछा कर यहाँ बैठा था ज़माना
लगता था मुश्किल है फ़िरंगी को हराना
टक्कर थी बड़े ज़ोर की दुश्मन भी था ताना
पर तू भी था बापू बड़ा उस्ताद पुराना
मारा वो कस के दांव के उलटी सभी की चाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
दे दी ...
रघुपति राघव राजा राम

जब जब तेरा बिगुल बजा जवान चल पड़े
मज़दूर चल पड़े थे और किसान चल पड़े
हिंदू और मुसलमान, सिख पठान चल पड़े
कदमों में तेरी कोटि कोटि प्राण चल पड़े
फूलों की सेज छोड़ के दौड़े जवाहरलाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
दे दी ...
रघुपति राघव राजा राम

मन में थी अहिंसा की लगन तन पे लंगोटी
लाखों में घूमता था लिये सत्य की सोंटी
वैसे तो देखने में थी हस्ती तेरी छोटी
लेकिन तुझे झुकती थी हिमालय की भी चोटी
दुनिया में भी बापू तू था इन्सान बेमिसाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
दे दी ...
रघुपति राघव राजा राम
जग में जिया है कोई तो बापू तू ही जिया
तूने वतन की राह में सब कुछ लुटा दिया
माँगा न कोई तख्त न कोई ताज भी लिया
अमृत दिया तो ठीक मगर खुद ज़हर पिया
जिस दिन तेरी चिता जली, रोया था महाकाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
रघुपति राघव राजा राम

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Mar 25, 2009

हम लाये हैं तूफ़ान से कश्ती- जागृति १९५५

अभि भट्टाचार्य ने बहुत सी फिल्मो में शिक्षक की भूमिका निभाई है।
उनको अक्सर गंभीर भूमिकाएं दी जाती रही। ये १५ अगस्त और
२६ जनवरी पर बजने वाला नियमित गीत है। इसकी धुन बनाई है
हेमंत कुमार ने और इसके बोल लिखे हैं कवि प्रदीप ने फ़िल्म जागृति
बेहद चर्चित फ़िल्म रही है। इस गीत को देश भक्ति गीत का दर्जा दिया
गया है।



गाने के बोल:

पासे सभी उलट गए दुश्मन की चाल के
अक्षर सभी पलट गए भारत के भाल के
मंज़िल पे आया मुल्क हर बला को टाल के
सदियों के बाद फिर उड़े बादल गुलाल के

हम लाए हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के
हम लाए हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के

तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के

हम लाए हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के

देखो कहीं बरबाद ना होए ये बगीचा
देखो कहीं बरबाद ना होए ये बगीचा
इसको हृदय के खून से बापू ने है सींचा
रक्खा है ये चिराग़ शहीदों ने बाल के,
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के

दुनिया के दांव-पेंच से रखना ना वास्ता
दुनिया के दांव-पेंच से रखना ना वास्ता
मंज़िल तुम्हारी दूर है लम्बा है रास्ता
भटका ना दे कोई तुम्हें धोखे में डाल के,
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के

हम लाए हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के

ऐटम बमों के जोर पे ऐंठी है ये दुनिया
बारूद के इक ढेर पे बैठी है ये दुनिया
ऐटम बमों के जोर पे ऐंठी है ये दुनिया
बारूद के इक ढेर पे बैठी है ये दुनिया
तुम हर कदम उठाना ज़रा देख भाल के,
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के

हम लाए हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के

आराम की तुम भूल भुलैया में ना भूलो
सपनों के हिंडोलों पे मगन हो के ना झूलो
आराम की तुम भूल भुलय्या में ना भूलो
सपनों के हिंडोलों पे मगन हो के ना झूलो
अब वक़्त आ गया है मेरे हँसते हुए फूलों
उठो छलाँग मार के आकाश को छू लो
आकाश को छू लो
तुम गाड़ दो गगन पे तिरंगा उछाल के,
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के

हम लाए हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के
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Ham laaye hain toofan se-Jagriti 1955

Artist: Abhi Bhattacharya

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