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Jan 4, 2018

झुम्मक झुम्मक चल मेरे हाथी-पूनम १९५२

झुम्मक झुम्मक और हाथी हिट्स के अंतर्गत सुनते हैं एक गीत
हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम युग से. फिल्म पूनम के लिए इसे
लिखा शैलेन्द्र ने और इसकी तर्ज़ बनाई शंकर जयकिशन ने.



गीत के बोल:

झुम्मक झुम्मक चल मेरे हाथी चल मेरे हाथी
झुम्मक झुम्मक चल मेरे हाथी चल मेरे हाथी
दूल्हा बन के गुड्डा निकला पीछे चले बाराती
दूल्हा बन के गुड्डा निकला पीछे चले भाराती
झुम्मक झुम्मक चल मेरे हाथी चल मेरे हाथी
झुम्मक झुम्मक चल मेरे हाथी चल मेरे हाथी

जल्दी-जल्दी चल मेरे भाई गुड़िया का घर दूर है
गुड़िया का घर दूर है
अपने संग तो बुड्ढा मामा चलने से मजबूर है
चलने से मजबूर है
गुड़िया का घर दूर है
गुड़िया का घर दूर है होए

झुम्मक झुम्मक चल मेरे हाथी चल मेरे हाथी
झुम्मक झुम्मक चल मेरे हाथी चल मेरे हाथी
दूल्हा बन के गुड्डा निकला पीछे चले पाराती
दूल्हा बन के गुड्डा निकला पीछे चले बाराती
झुम्मक झुम्मक चल मेरे हाथी चल मेरे हाथी

नीचे अपना दूल्हा राजा ऊपर चंदामामा जी
ऊपर चंदामामा जी
चन्दा नंगा लेटे है गुड्डा पहने है पजामा जी
पहने है पजामा जी
ऊपर चंदामामा जी ऊपर चंदामामा जी होए

झुम्मक झुम्मक चल मेरे हाथी चल मेरे हाथी
झुम्मक झुम्मक चल मेरे हाथी चल मेरे हाथी
दूल्हा बन के गुड्डा निकला पीछे चले बाराती
दूल्हा बन के गुड्डा निकला पीछे चले बाराती
झुम्मक झुम्मक चल मेरे हाथी चल मेरे हाथी

ऊपर झिलमिल झिलमिल तारे हम फुलझड़ी छुडावें जी
हम फुलझड़ी छुडावें जी
तारे हैं चुपचाप मगर हम इंग्लिश बैंड बजावें जी
इंग्लिश बैंड बजावें जी
इंग्लिश बैंड बजावें जी इंग्लिश बैंड बजावें जी होए

झुम्मक झुम्मक चल मेरे हाथी चल मेरे हाथी
झुम्मक झुम्मक चल मेरे हाथी चल मेरे हाथी
झुम्मक झुम्मक चल मेरे हाथी चल मेरे हाथी
झुम्मक झुम्मक झुम्मक झुम्मक
झुम्मक झुम्मक झुम्मक झुम्मक
झुम्मक झुम्मक झुम्मक झुम्मक
चल मेरे हाथी चल मेरे हाथी
…………………………………………………………………
Jhummak jhummak-Poonam 1952

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May 2, 2017

नाव चली-आशीर्वाद १९६८

फिल्म आशीर्वाद से एक अनूठा गीत रेलगाड़ी वाला आप
पहले सुन चुके हैं. अब सुनते हैं दूसरा गीत जिसके गायक,
गीतकार और संगीतकार वही हैं जो पिछले गीत में थे.

परदे पर इसे अशोक कुमार गा रहे हैं. मैराथॉन स्टाइल का
गीत २ मिनट में गा लिया गया है. ये है पुराने ज़माने का
रैप सोंग.



गीत के बोल:

नाव चली
नानी की नाव चली
नीना के नानी की नाव चली
लम्बे सफ़र पे

सामान घर से निकाले गये
नानी के घर से निकाले गये
इधर से उधर से निकाले गये
और नानी की नाव में डाले गये
क्या क्या डाले गये

एक छड़ी  एक घड़ी
एक झाड़ू  एक लाडू
एक सन्दुक  एक बन्दुक
एक तलवार  एक सलवार
एक घोड़े की जीन
एक ढोलक  एक बीन
एक घोड़े की नाल
एक जीवर का जाल
एक लह्सुन  एक आलू
एक तोता  एक भालू
एक डोरा  एक डोरी
एक बोरा  एक बोरी
एक डंडा  एक झंडा
एक हंडा  एक अंडा
एक केला  एक आम
एक पक्का  एक कच्चा
और
टोकरी में एक बिल्ली का बच्चा
म्याऊँ म्याऊँ म्याऊँ
फिर एक मगर ने पीछा किया
नानी की नाव का पीछा किया
नीना के नानी की नाव का पीछा किया
फिर क्या हुआ

चुपके से  पीछे से
ऊपर से  नीचे से
एक एक सामान खींच लिया
एक बिल्ली का बच्चा
एक केला  एक आम
एक पक्का  एक कच्चा
एक अंडा  एक हंडा
एक झंडा  एक डंडा
एक बोरी  एक बोरा
एक डोरी एक डोरा
एक तोता  एक भालू
एक लह्सुन  एक आलू
एक जीवर का जाल
एक घोड़े की नाल
एक ढोलक  एक बीन
एक घोड़े की जीन
एक तलवार  एक सलवार
एक बन्दूक एक संदूक
एक लाडू  एक साडू
एक छड़ी  एक घड़ी
मगर नानी क्या कर रही थी

नानी थी बिचारी बुड्ढी बहरी
नीना की नानी बुड्ढी बहरी
नानी की नींद थी इतनी गहरी
इतनी गहरी
कित्ती गहरी
नदिया से गहरी  दिन दोपहरी
रात की रानी  ठंडा पानी
गरम मसाला  पेट में ताला
साड़े सोला  पंद्रह एका पंद्रह
दूना तीस  तीया पैंतालिस
चौके साठ  पौना पच्चत्तर
छक्के नब्बे  साती पिचलन
आठी बीसन  नबर पचीसा
गले में रस्सा
हा हा हा
……………………………………
Naav chali-Aashirwad 1968

Artist: Ahok Kumar, Baby Sarika

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Apr 25, 2017

लल्ला लल्ला लोरी(मुकेश)-मुक्ति १९७७

वर्ज़न सोंग्स की श्रेणी में अगला प्रस्तुत है फिल्म मुक्ति से
ये एक लोरी गीत है जिसे गा कर बच्चे को सुलाने की एक
कोशिश हो रही है लेकिन बच्चा सो नहीं रहा है.

गीत दो संस्करण में उपलब्ध है-मुकेश और लता की आवाजों
में. मुकेश वाला संस्करण ज्यादा लोकप्रिय है. आनंद बक्षी ने
इसे लिखा है और फिल्म मुक्ति के लिए इसे संगीतबद्ध किया
है आर डी बर्मन ने. परदे पर दिखाई देने वाला बच्चा एक
लड़का है.



गीत के बोल:

लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  मुन्नी करे तमाशा

छोटी छोटी प्यारी प्यारी सुन्दर परियों जैसी है
किसी की नज़र ना लगे  मेरी मुन्नी ऐसी है
शहद से भी मीठी  दूध से भी गोरी
चुपके चुपके  चोरी चोरी  चोरी

लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  मुन्नी करे तमाशा
कारी रैना के माथे पे  चमके चाँद सी बिंदिया
मुन्नी के छोटे छोटे नैनों में खेले निंदिया
सपनों का पलना  आशाओं की डोरी
चुपके चुपके  चोरी चोरी  चोरी

लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  मुन्नी करे तमाशा
…………………………………………………….
Lalla lalla lori(Mukesh)-Mukt 1977

Artists: Shashi Kapoor, Vidya Sinha, Master Bittu

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Apr 21, 2017

पप्पा जल्दी आ जाना-तकदीर १९६७

कभी कभी कोई गाना याद आने का बहाना कुछ अलग ही होता
है. आज ब्रायन सिलास ला प्यानो पर बजाय एक इन्स्ट्रुमेन्टल
सुनते सुनते एक गीत याद आया जिसमें बच्चे प्यानो बजा रहे
हैं.

फिल्म तकदीर में कुछ कर्णप्रिय गीत हैं. इनमें से एक आप सुन
चुके हैं. आज आपको बच्चों पर फिल्माया गया गीत सुनवाते हैं
जिसमें अभिनेत्री शालिनी हैं. गौरतलब है फिल्म तकदीर एक
कोंकणी फिल्म निर्मोन का रिमेक है. यह कोंकणी फिल्म राष्ट्रीय
पुरस्कार प्राप्त फिल्म है.


गीत लता मंगेशकर और सुलक्षणा पंडित ने गाया है. आनंद बक्षी
के बोल हैं और लक्ष्मी प्यारे का संगीत.




गीत के बोल:

सात समुन्दर पार से गुड़ियों के बाजार से
सात समुन्दर पार से गुड़ियों के बाजार से
अच्छी सी गुडिया लाना
गुडिया चाहे ना लाना
पप्पा जल्दी आ जाना
पप्पा जल्दी आ जाना
सात समुन्दर पार से गुड़ियों के बाजार से
अच्छी सी गुडिया लाना
गुडिया चाहे ना लाना
पप्पा जल्दी आ जाना
पप्पा जल्दी आ जाना

तुम परदेस गए जब से बस ये हाल हुआ तब से
दिल दीवाना लगता है घर वीराना लगता है
झिलमिल चाँद सितारों ने दरवाजों दीवारों ने
सबने पूछा है हमसे कब जी छूटेगा गम से
कब जी छूटेगा गम से
कब होगा उनका आना
पप्पा जल्दी आ जाना
पप्पा जल्दी आ जाना

माँ भी लोरी नहीं गाती हमको नींद नहीं आती
खेल खिलौने टूट गए संगी साथी छूट गए
जेब हमारी खाली है और बासी दीवाली है
हम सबको ना तड़पाओ अपने घर वापस आओ
अपने घर वापस आओ
और कभी फिर ना जाना
पप्पा जल्दी आ जाना
पप्पा जल्दी आ जाना

खत ना समझो तार है ये कागज नहीं है प्यार है ये
दूरी और इतनी दूरी ऐसी भी क्या मजबूरी
तुम कोई नादान नहीं तुम इससे अनजान नहीं
इस जीवन के सपने हो एक तुम ही तो अपने हो
एक तुम्हीं तो अपने हो
सारा जग है बेगाना
पप्पा जल्दी आ जाना
पप्पा जल्दी आ जाना

सात समुन्दर पार से गुड़ियों के बाजार से
अच्छी सी गुडिया लाना
गुडिया चाहे ना लाना
पप्पा जल्दी आ जाना
पप्पा जल्दी आ जाना
……………………………………………………
Pappa jaldi aa jaana-Tadeer 1967

Artists: Shalini Mardolkar, unknown kids

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लल्ला लल्ला लोरी(लता)-मुक्ति १९७७

लता मंगेशकर का गाया एक गीत सुनते हैं फिल्म मुक्ति से
जो एक लोरीनुमा गीत है. इसके पहले अंतरे में दर्शन है
रो दूसरे अंतरे में इंतज़ार का दर्द.

आनंद बक्षी के बोल और आर डी बर्मन के संगीत वाला ये
गीत परदे पर विद्या सिन्हा गा रही हैं.



गीत के बोल:

लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  जीवन खेल तमाशा
लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  जीवन खेल तमाशा

आधी मुरझा जाती है  थोड़ी सी कलियाँ खिलती हैं
आधी मुरझा जाती है  थोड़ी सी कलियाँ खिलती हैं
सारी की सारी खुशियाँ  जीवन में किसको मिलती हैं
या टूटे पलना  या टूटे डोरी
चुपके चुपके चोरी चोरी  चोरी

लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  जीवन खेल तमाशा

लिख लेती लिखवा लेती मैं  आगे क्या है गाना
लिख लेती लिखवा लेती मैं  आगे क्या है गाना
लेकिन मैं क्या करती तेरे पापा को था जाना
मुझसे भी छिप कर  तुझसे भी चोरी
चुपके चुपके चोरी चोरी  चोरी

लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  जीवन खेल तमाशा
लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  जीवन खेल तमाशा
.......................................................
Lalla lalla lori(Lata)-Mukti 1977

Artists: Vidya Sinha,

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Apr 19, 2017

रोना कभी नहीं रोना-अपना देश १९७२

एक बाल गीत सुनते हैं. फिल्म का नाम है अपना देश.

फिल्म: अपना देश
वर्ष : १९७२
गीतकार: आनंद बक्षी
गायक: किशोर कुमार
संगीत: आर डी बर्मन



गीत के बोल:

रोना कभी नहीं रोना
चाहे टूट जाए कोई खिलौना
सोना चुपके से सोना
चाहे टूट जाए कोई सपना सलोना
रोना कभी नहीं रोना
चाहे टूट जाए कोई खिलौना

दुःख सुख की क्या बात है
क्या दिन है क्या रात है
आँसू भी मुस्कान बनें
यह तो अपने हाथ है
आशाओं की डोरी में सदा
तुम मन के फूल पिरोना
रोना कभी नहीं रोना
चाहे टूट जाए कोई खिलौना

देखो बच्चों बाग़ में
सब कलियाँ नहीं खिलतीं
दुनिया में इंसान को
सब चीज़ें नहीं मिलतीं
अपना नहीं तुम उसके लिए
जो अपना है नहीं खोना
रोना कभी नहीं धोना
चाहे टूट जाए कोई खिलौना

रंग से और न धाम से
जात से और न नाम से
इज़्ज़त मिलती है यहाँ
देखो अच्छे काम से
कोई काम बुरा तुम मत करना
बदनाम कभी नहीं होना
रोना कभी नहीं रोना
चाहे टूट जाए कोई खिलौना
………………………………………………
Rona kabhi nahin rona-Apna desh 1972

Artist: Rajesh Khanna, Unknown kids

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Jan 30, 2017

रे मामा रे मामा-अंदाज़ १९७१

सन १९७१ के इस बच्चों वाले गीत को देख कर अंदाजा लगाया
जा सकता है बच्चों को मनाना काफी टेढ़ी खीर है. आजकल के
युग के बच्चे तो खैर आसानी से बहलते नहीं हैं, वो अपनी ही
मर्ज़ी के मालिक हैं.

गीत शम्मी कपूर परदे पर गा रहे हैं और एक बच्ची भी साथ है
जिसका नाम मुझे मालूम नहीं. हसरत का गीत है और रफ़ी ने
इसे गाया है शंकर जयकिशन की धुन पर.




गीत के बोल:

सुन लो सुनाता हूँ तुमको कहानी
रूठो ना हमसे ओ गुड़ियों की रानी
रे मामा रे मामा रे
रे मामा रे मामा रे

ओ सुन लो सुनाता हूँ तुमको कहानी
रूठो ना हमसे ओ गुड़ियों की रानी
रे मामा रे मामा रे
रे मामा रे मामा रे


हम तो गए बाज़ार में लेने को आलू
हम तो गए बाज़ार में लेने को आलू
हम तो गए बाज़ार में लेने को आलू
आलू वालू कुछ न मिला पीछे पड़ा भालू

रे मामा रे मामा रे
रे मामा रे मामा रे

हम तो गए बाज़ार में लेने को लट्टू
हम तो गए बाज़ार में लेने को लट्टू
हम तो गए बाज़ार में लेने को लट्टू
लट्टू वट्टू कुछ न मिला पीछे पड़ा टट्टू

रे मामा रे मामा रे
रे मामा रे मामा रे

सुन लो सुनाता हूँ तुमको कहानी
रूठो ना हमसे ओ गुड़ियों की रानी
रे मामा रे मामा रे
रे मामा रे मामा रे

हम तो गए बाज़ार में लेने को रोटी
हम तो गए बाज़ार में लेने को रोटी
हम तो गए बाज़ार में लेने को रोटी
रोटी वोटी कुछ न मिली पीछे पड़ी मोटी

रे मामा रे मामा रे
रे मामा रे मामा रे

सुन लो सुनाता हूँ तुमको कहानी
रूठो ना हमसे ओ गुड़ियों की रानी
रे मामा रे मामा रे
रे मामा रे मामा रे
…………………………………………………
Re mama re mama re-Andaz 1971

Artist: Shammi Kapoor

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Jan 25, 2017

चंदा है तू मेरा सूरज है तू-आराधना १९६९

आपको एक बच्चों वाला गीत सुनवाया है आज. एक और सुनें.

ये गीत आराधना फिल्म से है जिसे आनंद बक्षी ने लिखा और
एस डी बर्मन ने संगीत में बाँधा. वीडियो से एक अंतरा गायब
है. उसके बोल मगर हम आपको यहाँ दिए दे रहे हैं.

इस गीत को अगर बिना विवरण सुन लिया जाए तो भी काम
चल सकता है. गीत की खूबसूरती और मधुरता का आनंद लिया
जाए. माँ-बेटे के स्नेह और लाड़ दुलार वाले गीतों में ये काफी
उच्च स्थान रखता है. गौरतलब है फिल्म आराधना के सारे
गाने हिट हैं. फिल्म में संगीतकार का गाया हुआ एक गीत
भी है जो फिल्म का शीर्षक गीत है उसे राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त
है.



गीत के बोल:

चंदा है तू  मेरा सूरज है तू
ओ मेरी आँखों का तारा है तू
चंदा है तू  मेरा सूरज है तू
ओ मेरी आँखों का तारा है तू
जीती हूँ मैं बस तुझे देखकर
इस टूटे दिल का सहारा है तू
चंदा है तू  मेरा सूरज है तू

तू खेले खेल कई  मेरा खिलौना है तू
तू खेले खेल कई  मेरा खिलौना है तू
जिससे बँधी हर आशा मेरी
मेरा वो सपना सलोना है तू
नन्हा सा है  कितना सुंदर है तू
छोटा सा है  कितना प्यारा है तू
चंदा है तू  मेरा सूरज है तू

मुन्ने तू खुश है बड़ा 
तेरे गुड्डे की शादी है आज
मुन्ने तू खुश है बड़ा 
तेरे गुड्डे की शादी है आज
मैं वारी रे  मैं बलिहारी रे
घूँघट में गुड़िया को आती है लाज
यूँ ही कभी होगी शादी तेरी
दूल्हा बनेगा कुंवारा है तू
चंदा है तू  मेरा सूरज है तू

पुरवाई वन में उड़े  पंछी चमन में उड़े
पुरवाई वन में उड़े  पंछी चमन में उड़े
राम करे कभी हो के बड़ा
तू बन के बादल गगन में उड़े
जो भी तुझे देखे वो ये कहे
किस माँ का ऐसा दुलारा है तू

चंदा है तू  मेरा सूरज है तू
ओ मेरी आँखों का तारा है तू
जीती हूँ मैं बस तुझे देखकर
इस टूटे दिल का सहारा है तू
चंदा है तू  मेरा सूरज है तू
………………………………………………..
Chanda hai too mera suraj hai too-Aradhana 1969

Artist: Sharmila Tagor

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है ना बोलो बोलो अंदाज़ १९७१

बच्चों वाला ये गीत बड़ों के कान खींचने वाला है. इसकी
एक पंक्ति का काफी इस्तेमाल सुना है मैंने-है ना बोलो बोलो
गीत रफ़ी संग सुमन कल्याणपुर और सुषमा श्रेष्ठ ने गाया
है. सुषमा श्रेष्ठ को हम आज पूर्णिमा के नाम से जानते हैं.
उनके साथ एक और आवाज़ है प्रतिभा की. प्रतिभा के बारे
में कोई अन्य जानकारी मुझे नहीं मिली.

हसरत जयपुरी ने इस रोचक गीत को लिखा है और इसके
संगीतकार हैं शंकर जयकिशन. समस्यापूर्ति वाला गीत है
और गीत की अंतिम पंक्ति तक आते आते सब उलझनें खत्म.

समय के हिसाब से एक सार्थक फिल्म है अंदाज़. इसका
प्रभाव जनमानस पर कितना पड़ा और पुनर्विवाह के प्रति
जनता के नज़रिए में क्या सकारात्मक परिवर्तन आया उस
पर चर्चा होनी चाहिए. इस मामले में आज भी समाज में
कुछ विशेष बदलाव नहीं हुए हैं.



गीत के बोल:

है ना बोलो बोलो
है ना बोलो बोलो
पापा को मम्मी से
मम्मी को पापा से
प्यार है प्यार है
है ना बोलो बोलो
है ना बोलो बोलो
पापा को मम्मी से
मम्मी को पापा से
प्यार है प्यार है

पापा मम्मी मिलते हैं
चुपके-चुपके हँसते हैं
पापा मम्मी मिलते हैं
चुपके-चुपके हँसते हैं
जाने क्या-क्या कहते हैं
बातें करते रहते हैं
है ना बोलो बोलो
है ना बोलो बोलो
पापा को मम्मी से
मम्मी को पापा से
प्यार है प्यार है

मम्मी तेरी अच्छी है
कितनी भोली-भाली है
पापा भी तो अच्छे हैं
कितने प्यारे-प्यारे हैं
मम्मी तेरी अच्छी है
कितनी भोली-भाली है
पापा भी तो अच्छे हैं
कितने प्यारे-प्यारे हैं

है ना बोलो बोलो
है ना बोलो बोलो
मुन्नी बोलो बोलो
दीपू बोलो बोलो
पापा को मम्मी से
मम्मी को पापा से
प्यार है प्यार है

पापा के मैं बोलूंगी
मम्मी को घर के आयें
मम्मी से बोलूँगा
साथ मुझे भी ले जाएँ
मम्मी बोलो बोलो
पापा बोलो बोलो
मम्मी बोलो बोलो
पापा बोलो बोलो
पापा को मम्मी से
मम्मी को पापा से
प्यार है प्यार है

है ना बोलो बोलो
है ना बोलो बोलो
पापा को दीपू से
मम्मी को मुन्नी से
प्यार है प्यार है
प्यार है प्यार है
……………………………………………………….
Hai na bolo bolo-Andaz 1971

Artists: Shammi Kapoor, Hema Malini, two kids

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Jan 21, 2017

चक्के में चक्का-ब्रह्मचारी १९६८

आइये एक बाल गीत सुनें. फिल्म ब्रह्मचारी अनाथ बच्चों
की कहानी है जिनका केयरटेकर नायक है. उसे इस काम
में क्या दिक्कतें आती हैं इस कहानी से समझा जा सकता
है. फ़िल्मी फार्मूले और मसाले भी हैं फिल्म में.

ब्रह्मचारी फिल्म का ये गीत बड़ौदा के एक पार्क में फिल्माया
गया है जिसमें एक खिलौना रेल लगी है. इसके अलावा भी
एक दो पार्कों में इसकी शूटिंग की गई है.

शैलेन्द्र के लिखे इस गीत की तर्ज़ बनाई शंकर जयकिशन
ने और इसे गाया है रफ़ी ने. ये एक फेमस बाल गीत है.
फिल्म का निर्देशन भप्पी सोनी ने और निर्माण जी पी सिप्पी
ने किया.




गीत के बोल:

चक्के में चक्का चक्के पे गाड़ी
गाड़ी में निकली अपनी सवारी
थोड़े अगाड़ी थोड़े पिछाड़ी
थोड़े अगाड़ी थोड़े पिछाड़ी
चक्के में चक्का चक्के पे गाड़ी
गाड़ी में निकली अपनी सवारी
थोड़े अगाड़ी थोड़े पिछाड़ी
थोड़े अगाड़ी थोड़े पिछाड़ी

चुन्नू छबीले मुन्नू हठीले
मखमल की टोपी छोटू रंगीले
चुन्नू छबीले मुन्नू हठीले
मखमल की टोपी छोटू रंगीले
लल्लू बटाटा लल्ली टमाटा
कामा बनेंगे गट्टू गठीले
पेट में इनकी लम्बी सी दाढ़ी

चक्के में चक्का चक्के पे गाड़ी
गाड़ी में निकली अपनी सवारी
थोड़े अगाड़ी थोड़े पिछाड़ी
थोड़े अगाड़ी थोड़े पिछाड़ी

उमर में कच्चे ये छोटे बच्चे
हैं भोले भाले हैं सीधे सच्चे
उमर में कच्चे ये छोटे बच्चे
हैं भोले भाले हैं सीधे सच्चे
ठानेंगे जो भी कर के रहेंगे
ये अपनी धुन के हैं पूरे पक्के
कोई ना समझे इनको अनाड़ी

चक्के में चक्का चक्के पे गाड़ी
गाड़ी में निकली अपनी सवारी
थोड़े अगाड़ी थोड़े पिछाड़ी
थोड़े अगाड़ी थोड़े पिछाड़ी

लम्बा सफ़र है टेढ़ी डगर है
मंज़िल है मुश्किल गिरने का डर है
लम्बा सफ़र है टेढ़ी डगर है
मंज़िल है मुश्किल गिरने का डर है
पर ना रुकेंगे चलते चलेंगे
ये सारी दुनिया अब अपना घर है
हार न मानेंगे ये खिलाड़ी

चक्के में चक्का चक्के पे गाड़ी
गाड़ी में निकली अपनी सवारी
थोड़े अगाड़ी थोड़े पिछाड़ी
थोड़े अगाड़ी थोड़े पिछाड़ी
……………………………………………………
Chakke mein chakka-Brahmchari 1968

Artists: Shammi Kapoor, kids

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Jan 2, 2017

लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा-मासूम १९८६

मासूम फिल्म से मासूम सा गीत सुनते हैं. बच्चों के गीतों से
कोई विशेष मतलब निकलने का कोई मतलब नहीं होता. ये
बस यूँ ही और कैसे भी लिखे जाते हैं. बड़ों के लिए बने हुए
गीतों में धोती फाड़ के रुमाल हो सकता है तो बच्चों वाले गीत
में रुमाल फाड़ के धोती बन सकती है.

गुलज़ार का लिखा और आर डी बर्मन द्वारा संगीतबद्ध गीत सुनते
हैं फिल्म मासूम से. वनिता मिश्रा, गुरप्रीत कौर और गौरी बापट
ने इस गीत को गाया है. जुगल हंसराज, उर्मिला मातोंडकर और
तीसरे बच्चे का नाम मुझ मालूम नहीं, परदे पर दिखलाई दे
रहे हैं.





गीत के बोल:

लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा
लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा
लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा

घोड़ा पहुंचा चौक में चौक में था नाई
घोड़े जी की नाई ने हज़ामत जो बनाई
चग-बग चग-बग चग-बग चग-बग
घोड़ा पहुंचा चौक में चौक में था नाई
घोड़े जी की नाई ने हज़ामत जो बनाई
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा

लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा

घोड़ा था घमंडी पहुंचा सब्जी मंडी
सब्जी मंडी बरफ़ पड़ी थी बरफ़ में लग गई ठंडी
चग-बग चग-बग चग-बग चग-बग
घोड़ा था घमंडी पहुंचा सब्जी मंडी
सब्जी मंडी बरफ़ पड़ी थी बरफ़ में लग गई ठंडी
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा

लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा

घोड़ा अपना तगड़ा है देखो कितनी चरबी है
चलता है महरौली में पर घोड़ा अपना अरबी है
चग-बग चग-बग चग-बग चग-बग
घोड़ा अपना तगड़ा है देखो कितनी चरबी है
चलता है महरौली में पर घोड़ा अपना अरबी है
बांह छुड़ा के दौड़ा घोड़ा दुम उठा के डौड़ा

लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा
...............................................................
Ladki ki kathi-Masoom 1982

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Nov 5, 2016

ओ नन्हें से फ़रिश्ते-एक फूल दो माली १९६९

फ़िल्मी दुनिया में परदे के पीछे की मजदूरी को छोड़ के
सब चीज़ें भव्य रूप में दिखाई देती हैं. फिल्मों के प्रीमियर,
प्रमोशन, ट्रेलर और पार्टियां, जन्मदिन, शादी-ब्याह इत्यादि.

परदे पर दिखलाये गए जन्मदिन समारोह भी भव्य होते हैं.
कंसेप्ट हैप्पी बर्थडे का है तो उसे भव्य दिखलाया जाना भी
ज़रूरी है. केक का होना आवश्यक है चाहे वो अंडे वाला हो
या बिना अंडे वाला.

हमारे देश में फिल्मों और क्रिकेट दो चीज़ों का बड़ा क्रेज है.
आज भरतीय टेस्ट टीम के कप्तान विराट कोहली का बर्थडे
है. उसके अलावा जेबा बख्तियार, दक्षिण के फिल्म निर्देशक
विजयकृष्णन हैं.

१ नवंबर ऐश्वर्य राय, २ नवंबर शाहरुख खान, ४ नवंबर
को तब्बू का जन्मदिन आता है. नवंबर में पैदा हुई कुछ और
फ़िल्मी हस्तियाँ हैं-जीनत अमान, जूही चावला, कमल हासन,
अनुष्का शेट्टी और यामी गौतम.

नवंबर के महीने में काफी ऐसी हस्तियाँ पैदा हुईं जो थोडा
अलग हट के हैं. कई नीति निर्धारक, समाज सेवी और नेता
इस महीने में पैदा हुए

आज आपको सुनवाते हैं फिल्म एक फूल दो माली से रफ़ी
का गया बच्चों वाला गीत. प्रेम धवन की रचना है और
रवि का संगीत.




गीत के बोल:

ओ नन्हें से फ़रिश्ते तुझसे ये कैसा नाता
कैसे ये दिल के रिश्ते ओ नन्हें से फ़रिश्ते
ओ नन्हें से फ़रिश्ते तुझसे ये कैसा नाता
कैसे ये दिल के रिश्ते ओ नन्हें से फ़रिश्ते
हैप्पी बर्थडे टू यू हैप्पी बर्थडे टू यू
हैप्पी बर्थडे टू यू

तुझे देखने को तरसे क्यूं हर घड़ी निगाहें
तुझे देखने को तरसे क्यूं हर घड़ी निगाहें
बेचैन सी रहती हैं तेरे लिये ये बाहें
मुझे खुद पता नहीं है मुझे तुझसे प्यार क्यूं है

ओ नन्हें से फ़रिश्ते तुझसे ये कैसा नाता
कैसे ये दिल के रिश्ते ओ नन्हें से फ़रिश्ते
हैप्पी बर्थडे टू यू हैप्पी बर्थडे टू यू
हैप्पी बर्थडे टू यू

नाज़ुक सा फूल है तू किसी और के चमन का
नाज़ुक सा फूल है तू किसी और के चमन का
खुशबू से तेरी महके क्यों बाग मेरे मन का
मेरी ज़िन्दगी में छाई तुझसे बहार क्यूं है

ओ नन्हें से फ़रिश्ते तुझसे ये कैसा नाता
कैसे ये दिल के रिश्ते ओ नन्हें से फ़रिश्ते
हैप्पी बर्थडे टू यू हैप्पी बर्थडे टू यू
हैप्पी बर्थडे टू यू

तू कुछ नहीं है मेरा फिर भी ये तड़प कैसी
तू कुछ नहीं है मेरा फिर भी ये तड़प कैसी
तुझे देखते ही खून में उठती है इक लहर सी
हर वक्त मुझको रहता तेरा इन्तज़ार क्यूं है

ओ नन्हें से फ़रिश्ते तुझसे ये कैसा नाता
कैसे ये दिल के रिश्ते ओ नन्हें से फ़रिश्ते
हैप्पी बर्थडे टू यू हैप्पी बर्थडे टू यू
हैप्पी बर्थडे टू यू
..............................................................
O nanhe se farishte-Ek phool do mali 1969

Artists: Sanjay Khan, Sadhna, Balraj Shani, Durga Khote

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Jun 3, 2015

चुन चुन करती आई चिड़िया-अब दिल्ली दूर नहीं १९५७

बच्चों वाले गाने या यूँ कहें बच्चों को लुभाने वाले गीत
बहुत से बने हैं हिंदी फिल्म जगत में. ये गीत ८० के
दशक तक तो लुभाते थे बच्चों को. आज के बच्चों का
टेस्ट बदल गया है, वे बड़ों के लिए बने गीतों से ही
प्रसन्न होते हैं.

प्रस्तुत गीत को खूब सुना गया है एक अरसे तक. बाल
दिवस पर आकाशवाणी के विभिन्न स्टेशन ऐसे गीत
बजाये करते. शैलेन्द्र का लिखा और दत्ताराम के संगीत
से निखरा ये गीत मोहम्मद रफ़ी ने गाया है. सन १९५७
की फिल्म ‘अब दिल्ली दूर नहीं’ फिल्म से ये गीत
आपके लिए आज चुना गया है.




गीत के बोल:

चुन चुन करती आई चिड़िया
दाल का दाना लाई चिड़िया
मोर भी आया, कौवा भी आया
चूहा भी आया, बन्दर भी आया
चुन चुन करती आई चिड़िया

भूख लगे तो चिड़िया रानी
मूँग की दाल पकाएगी
कौवा रोटी लाएगा
लाके उसे खिलाएगा
मोर भी आया, कौवा भी आया
चूहा भी आया, बन्दर भी आया

चलते चलते मिलेगा भालू
हम बोलेंगे नाचो कालू
मुन्ना ढोल बजाएगा
भालू नाच दिखाएगा
मोर भी आया, कौवा भी आया
चूहा भी आया, बन्दर भी आया

साथ हमारे चले बराती
मैं तो हूँ मुन्ने का हाथी
सीधे दिल्ली जाऊँगा
तेरी दुल्हनिया लाऊँगा
मोर भी आया, कौवा भी आया
चूहा भी आया, बन्दर भी आया
....................................................................
Chun chun karti aayi chidiya-Ab dilli door nahin 1957

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Nov 15, 2010

सु सु सु आ गया-तराजू

हिंदी फिल्म संगीत के खजाने में जीवन के लगभग सभी पहलुओं
पर गीत मिलेंगे। वैसे ही दिनचर्या के सभी हिस्सों को समय समय
पर गीतों के माध्यम से बतलाया गया है। चोली, गोली ठिठोली से
लगा कर खाजा पीजा तक सब कुछ उपलब्ध है। लघु शंका
निवृत्ति पर कोई गीत बना है कभी ? जी हाँ अवश्य बना है। फिल्म
तराजू जो सन १९९७ की फिल्म है उसमें एक गीत है जो बच्चे गा रहे
हैं। अब वो तो कहानी की डिमांड रही होगी वरना ऐसे ही थोड़े गीत
शामिल कर लिए जाते हैं किसी फिल्म में । गीत समीर का है और
धुन राजेश रोशन की। इस मधुर(?) गीत को गा रहे हैं कुमार सानू।



गीत के बोल:

सु सु सु आ गया मैं क्या करूं
सु सु सु आ गया मैं क्या करूं

सु सु सु आ गया मैं क्या करूं
सु सु सु आ गया मैं क्या करूं

हो आ ओ आ ऐ
जा के घर में कर के आ
हो आ ओ आ ऐ
मुझको पागल ना बना
हो आ ओ आ ऐ
जा के घर में कर के आ
हो आ ओ आ ऐ
मुझको पागल ना बना

सु सु सु आ गया मैं क्या करूं
सु सु सु आ गया मैं क्या करूं

सु सु सु आ गया मैं क्या करूं
सु सु सु आ गया मैं क्या करूं

हट

मैं सरकारी नौकर हूँ
मुझको जल्दी जाना है

छोडो मुझको जाने दो
कितना काम पटाना है

अरे तुम लोगों की ये मुश्किल
हल करने मैं आऊँगा
थोड़ी थोड़ी दूर शौचालय बनवाऊँगा

हो आ ओ आ ऐ
जा झाड़ी के पीछे जा
हो आ ओ आ ऐ
नन्हे मुन्ने ना शर्मा
हो आ ओ आ ऐ
जा झाड़ी के पीछे जा
हो आ ओ आ ऐ
नन्हे मुन्ने ना शर्मा

सु सु सु आ गया मैं क्या करूं
सु सु सु आ गया मैं क्या करूं

कोई हमको देखेगा
शर्म तो हमको आएगी
आँख मिलायेंगे कैसे
बदनामी हो जाएगी

अरे खड़ा हूँ मैं डंडा ले के
किसी को ना आने दूंगा
पास तुम्हारे ऐ बच्चों
किसी को ना जाने दूंगा

हो आ ओ आ ऐ
ऊपरवाले तू बचा
हो आ ओ आ ऐ
आ के मैं कहाँ फंसा
हो आ ओ आ ऐ
ऊपरवाले तू बचा
हो आ ओ आ ऐ
आ के मैं कहाँ फंसा

सु सु सु आ गया मैं क्या करूं
सु सु सु आ गया मैं क्या करूं

सु सु सु आ गया मैं क्या करूं
सु सु सु आ गया मैं क्या करूं

सु सु सु आ गया मैं क्या करूं
सु सु सु आ गया मैं क्या करूं

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Feb 21, 2010

रेल गाड़ी -आर्शीवाद १९६८

अशोक कुमार द्वारा गाया हुआ एक गीत । ये फिल्माया भी
उन्ही पे गया है। गीत लिखा है हरीन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने
और धुन बनाई है वसंत देसाई ने। फिल्म आशीर्वाद एक दिल
को छू लेने वाली फिल्म है। गुलज़ार ने फिल्म के संवाद लिखे थे
और निर्देशन किया था ऋषिकेश मुखर्जी ने। ये शुद्ध बच्चों
वाला गीत है, अब बच्चे चाहे छोटे हों या बड़े सभी को आनंदित
करने वाला है। इस गीत में बेबी सारिका आपको दिखाई दे जाएगी ।



गाने के बोल:

आओ बच्चों खेल दिखायें
छुक छुक करती रेल चलायें
सीटी दे कर सीट पे बैठो
एक दूजे की पीठ पे बैठो

आगे पीछे, पीछे आगे
लाइन से लेकिन कोई न भागे
सारी सीधी लाइन में चलना
आँखें दोनों मीचे रखना

बन्द आँखों से देखा जाये
आँख खुले तो कुछ ना पाये
आओ बच्चों रेल चलायें

सुनो रे बच्चों टिकट कटाओ
तुम लोग नहीं आओगे
तो रेलगाड़ी छूट जायेगी

यक ठ ण ण ण ण ण
यक ठ ण ण ण ण ण
भप भप भप भप
भप भप भप भप
भप भप भप भप
भप भप भप भप
भप भप भप भप

आओ सब लाइन में खड़े हो जाओ
मुन्नी तुम हो इंजिन
डब्बू तुम हो कोयले का डब्बा
चुन्नू मुन्नू लीला शीला
सोहन मोहन जादो माधो
सब पैसेंजर
सब पैसेंजर

यक ठ ण ण ण ण ण
यक ठ ण ण ण ण ण

रेडी, एक दो

रेल गाड़ी रेल गाड़ी

रेल गाड़ी रेल गाड़ी
छुक-छुक छुक-छुक
छुक-छुक छुक-छुक
बीच वाले स्टेशन बोलें
रुक रुक रुक रुक
रुक रुक रुक रुक
धड़क भड़क लोहे की सड़क
धड़क भड़क लोहे की सड़क
यहाँ से वहाँ वहाँ से यहाँ
यहाँ से वहाँ वहाँ से वहाँ
छुक छुक छुक छुक
छुक छुक छुक छुक
छुक छुक छुक छुक
छुक छुक छुक छुक

फुलाये छाती पार कर जाती
बालू रेत आलू के खेत
बाजरा धान बुड्ढा किसान
हरा मैदान मन्दिर मकान
चाय की दुकान

पुल पगडण्डी टीले पे झण्डी
पानी के कुण्ड पंछी के झुण्ड
झोपड़ी झाड़ी खेती बाड़ी
बादल धुआँ मोठ कुँवाँ
कुँवें के पीछे बाग़ बगीचे
धोबी का घाट मंगल की हाट
गाँव में मेला भीड़ झमेला
टूटी दिवार टट्टू सवार

रेल गाड़ी रेल गाड़ी
छुक छुक छुक छुक
छुक छुक छुक छुक
बीच वाले स्टेशन बोलें
रुक-रुक रुक-रुक रुक-रुक रुक-रुक


धरमपुर भरमपुर भरमपुर धरमपुर
मैंगलोर बैंगलोर बैंगलोर मैंगलोर
माण्डवा खंडवा खांडवा माण्डवा
रायपुर जयपुर जयपुर रायपुर
तालेगाँव मालेगाँव मालेगाँव तालेगाँव
बेल्लुर वेल्लुर वेल्लुर बेल्लुर
शोलापुर कोल्हापुर कोल्हापुर शोलापुर
हुक्कल डिण्डीगल डिण्डीगल हुक्कल
मस्लिपत्नम मस्लिपत्नम
ऊंगोल निथिगोल निथिगोल ऊंगोल
कोरेगाँव गोरेगाँव गोरेगाँव कोरेगाँव
ममदाबाद अमदाबाद अमदाबाद ममदाबाद
शोल्लुर कोन्नुर शोल्लुर कोन्नुर

छुक-छुक छुक
छुक-छुक छुक
बीच वाले स्टेशन बोलें
रुक रुक रुक रुक
रुक रुक रुक रुक
धड़क भड़क लोहे की सड़क
धड़क भड़क लोहे की सड़क
यहाँ से वहाँ वहाँ से यहाँ
यहाँ से वहाँ वहाँ से वहाँ
छुक छुक छुक छुक
छुक छुक छुक छुक
छुक छुक छुक छुक
छुक छुक छुक छुक

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Nov 16, 2009

नानी तेरी मोरनी को-मासूम १९६२

नाना नानी के ज़माने का गाना । यूँ कहिये संयुक्त परिवार के
युग का गीत। जब तीन पीढ़ियाँ एक साथ रहा करती थी। बच्चों
वाला ये गीत बेहद लोकप्रिय हुआ था। इसको हेमंत कुमार की पुत्री
रानू मुखर्जी ने गाया है। बोल शैलेन्द्र के हैं और धुन हेमंत कुमार
की। परदे पर बाल कलाकार हैं-हनी ईरानी।



गाने के बोल:

नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए
बाकी जो बचा था काले चोर ले गए
नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए
बाकी जो बचा था काले चोर ले गए

खाके पीके मोटे होके, चोर बैठे रेल में
चोरों वाला डिब्बा कट कर, पहुँचा सीधे जेल में
खाके पीके मोटे होके, चोर बैठे रेल में
चोरों वाला डिब्बा कट कर, पहुँचा सीधे जेल में

नानी तेरी मोरनी को ...

उन चोरों की खूब खबर ली, मोटे थानेदार ने
मोरों को भी खूब नचाया, जंगल की सरकार ने
उन चोरों की खूब खबर ली, मोटे थानेदार ने
मोरों को भी खूब नचाया, जंगल की सरकार ने

नानी तेरी मोरनी को ...

अच्छी नानी प्यारी नानी, रूसा-रूसी छोड़ दे
जल्दी से एक पैसा दे दे, तू कंजूसी छोड़ दे
अच्छी नानी प्यारी नानी, रूसा-रूसी छोड़ दे
जल्दी से एक पैसा दे दे, तू कंजूसी छोड़ दे

नानी तेरी मोरनी को ...
......................................................
Nani teri morni ko-Masoom 1962

Artist: Honey Irani

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Nov 15, 2009

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ झांकी- जागृति १९५४

कल बाल दिवस था । बाल दिवस पंडित जवाहरलाल नेहरू
के जन्मदिवस पर मनाया जाता है। इस अवसर पर एक बच्चों
वाला गीत पेश है। अभी मुझे सिर्फ़ कविवर प्रदीप का लिखा और
गाया फ़िल्म जागृति का गीत याद आ रहा है। इसकी धुन बनाई है
हेमंत कुमार ने।




गाने के बोल:

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झाँकी हिंदुस्तान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम,वंदे मातरम

उत्तर में रखवाली करता पर्वतराज विराट है
दक्षिण में चरणों को धोता सागर का सम्राट है
जमुना जी के तट को देखो गंगा का ये घाट है
बाट-बाट पे हाट-हाट में यहाँ निराला ठाठ है
देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की,
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम,वंदे मातरम

ये है अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे
इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे
ये प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे
कूद पड़ी थी यहाँ हज़ारों पद्मिनियाँ अंगारों पे
बोल रही है कण कण से कुरबानी राजस्थान की

देखो मुल्क मराठों का ये यहाँ शिवाजी डोला था
मुग़लों की ताकत को जिसने तलवारों पे तोला था
हर पावत पे आग लगी थी हर पत्थर एक शोला था
बोली हर-हर महादेव की बच्चा-बच्चा बोला था
यहाँ शिवाजी ने रखी थी लाज हमारी शान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम,वंदे मातरम

जलियाँ वाला बाग ये देखो यहाँ चली थी गोलियाँ
ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियाँ
एक तरफ़ बंदूकें दन दन एक तरफ़ थी टोलियाँ
मरनेवाले बोल रहे थे इनक़लाब की बोलियाँ
यहाँ लगा दी बहनों ने भी बाजी अपनी जान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम,वंदे मातरम

ये देखो बंगाल यहाँ का हर चप्पा हरियाला है
यहाँ का बच्चा-बच्चा अपने देश पे मरनेवाला है
ढाला है इसको बिजली ने भूचालों ने पाला है
मुट्ठी में तूफ़ान बंधा है और प्राण में ज्वाला है
जन्मभूमि है यही हमारे वीर सुभाष महान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम,वंदे मातरम
..................................................................................
Aao bachchon tumhen dikhayen-Jagriti1954

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