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Jul 25, 2017

मनमानी से हरगिज़ ना डरो-मनपसंद १९८०

फिल्म मनपसंद के बहाने एक गंभीर कलाकार से हिंदी सिनेमा
के दर्शकों का परिचय हुआ-गिरीश कर्नाड. फिल्म में देव आनंद
और टीना मुनीम मुख्य कलाकार हैं और गिरीश कर्नाड ने इस
फिल्म में नायक के मित्र की भूमिका निभाई है.

फिल्म से एक गीत सुनते हैं किशोर का गाया हुआ जिसे लिखा
है अमित खन्ना ने और इसकी धुन तैयार की राजेश रोशन ने.
गीत में शादी ना करने के कई बढ़िया कारण बतलाये जा रहे हैं.



गीत के बोल:

मनमानी से हरगिज़ ना डरो
कभी शादी ना करो
मन मानी से हरगिज़ ना डरो
कभी शादी ना करो

अरे मरज़ी है आज कहीं बाहर खाना खायें
वो कहेगी नहीं साहब ठीक आठ बजे
घर वापस आ जायें

किताब लिये हाथ में आप चैन से बैठे हैं
मेमसाब पूछेंगी क्यों जी हमसे रूठे हैं

कभी किसी भी नारी से कर लो दो बातें
वो कहेंगी क्या इन्हीं से होती हैं छुप के मुलाक़ातें

अरे तौबा बेवक़ूफ़ी की है शादी इन्तहा
अरे औरत अपना सोचे औरों की नहीं परवाह
क्यों ठीक नहीं कहा मैने
जो जी मैं आये वो करो कभी शादी ना करो

मनमानी से हरगिज़ ना डरो
कभी शादी हां कभी शादी

ज़रा सोचिये
आराम से आप ये जीवन जी रहे हैं
पसंद का खा रहे पसंद का पी रहे हैं
अच्छा भला घर है आप का
लेकिन क्या करें
आप से जुदा हैं शौक वो गम साहब का
आते ही कहें सुनिए जी हर चीज़ को बदलो
पहले परदे फिर सोफा फिर अपना हुलिया बदलो
अजी माना तन्हाई से कभी दिल घबराएगा
जीवनसाथी की ज़रूरत महसूस कराएगा
लेकिन इस घबराहट में जो शादी कर बैठे
वो उम्र भर पछतायेगा
जीते जी अरे भाई ना मरो
कभी शादी ना करो
मनमानी से हरगिज़ ना डरो
कभी शादी ओ कभी शादी हां कभी शादी
ना बाबा ना
……………………………………………………
Manmani se hargiz na daro-Manpasand 1980

Artists: Dev Anand, Girish Karnad

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May 21, 2017

होंठों पे गीत जागे-मनपसंद १९८०

किसी को अप्रत्याशित खुशी क्विंटलों में, टनों में मिल जाए
तो उसका क्या हाल होगा. वो बिना पंख लगाये जेट प्लेन
से भी ऊंचा उड़ जायेगा बिना हीलियम के गुब्बारे के.

गीत सुनते हैं फिल्म मनपसंद से लता मंगेशकर का गाया
हुआ. अमित खन्ना के बोल हैं और राजेश रोशन का संगीत.

परदे पर आपको जो मुख्य कलाकार दिखेंगे वो हैं-देव आनंद,
टीना मुनीम और लीला मिश्रा.



गीत के बोल:

होंठों पे गीत जागे
मन कहीं दूर भागे
खुशी मिल कैसी
पंख बिना उडूं
रोके से ना रुकूं
खुशी मिली ऐसी
होंठों पे गीत जागे
मन कहीं दूर भागे
खुशी मिल कैसी
पंख बिना उडूं
रोके से ना रुकूं
खुशी मिली ऐसी

मैं हूँ गगन पे सितारे ज़मीन पर
रंग बिरंगा है हर नज़ारा
साँसों की तारें गाने लगी हैं
धडकन बनी हैं बहती धारा
होंठों पे गीत जागे
मन कहीं दूर भागे
खुशी मिल कैसी
पंख बिना उडूं
रोके से ना रुकूं
खुशी मिली ऐसी

सरगम की डोरी में गीतों के मोती
सजी सपनों की मोहक माला
आशा की नगरी में आज अचानक
पहला कदम ये मैंने डाला
होंठों पे गीत जागे
मन कहीं दूर भागे
खुशी मिल कैसी
पंख बिना उडूं
रोके से ना रुकूं
खुशी मिली ऐसी
होंठों पे गीत जागे
मन कहीं दूर भागे
खुशी मिल कैसी
पंख बिना उडूं
रोके से ना रुकूं
खुशी मिली ऐसी
……………………………………….
Honthon pe geet jaage-Manpasand 1980

Artists: Tina Munim, Dev Anand, Leela Mishra

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May 12, 2017

चारु चंद्र की चंचल चितवन-मनपसंद १९८०

हिंदी सिनेमा के गीतों में उच्च स्तरीय साहित्य से
लेकर टुच्च स्तरीय लाइनों तक सब कुछ हम सुनते
आये हैं बरसों से.

सन १९८० की फिल्म मनपसंद में एक गीत है जो
हमें कवि मैथिलिशरण गुप्त की कविता की याद दिला
देता है.

ये एक ट्रेंड रहा है कि किसी शेर की या कविता के
कुछ शब्दों को लेकर पूरा गीत बना दिया जाए. ये
मामला आपने शेरोन के मामले में ज्यादा देखा होगा.
कविता के मामले थोड़े कम हैं.

अमित खन्ना ने एक अच्छा गीत लिखा है कुछ शब्दों
को आधार बना कर. राजेश रोशन ने इसकी धुन बनाई
है.

सा गा सा गा सुनते सुनते कभी कभी सरसों दा सागा
याद आ जाता है.




गीत के बोल:

चारु चन्द्र की चंचल चितवन
बिन बदरा बरसे सावन
मेघ मल्हार मधुर मनभावन
पवन पिया प्रेमी पावन
.......................................................
Charu Chandra ki chanchal chitwan-Manpasand 1980

Artists: Dev Anand, Tina Munim

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