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Apr 6, 2020

नज़र लगे ना साथियों-देस परदेस १९७८

ढेर सारे गायकों वाला एक गाना सुनते हैं. ये कव्वाली नहीं
है, सामान्य गाना है. इसे सुनते सुनते समय बीत गया मगर
बरसों बाद मालूम हुआ कि इस भीड़ में विजय बेनेडिक्ट की
आवाज़ भी है. विजय बेनेडिक्ट बप्पी लहरी के लिए काफ़ी
गीत गा चुके हैं डिस्को युग में.

सुनते हैं गीत जिसमें बाप-बेटा अर्थात किशोर कुमार और उनके
पुत्र संग मनहर की आवाजें हैं चौथी आवाज़ के बारे में हम
लिख ही चुके हैं ऊपर.

गीत अमित खन्ना का है और इसका संगीत तैयार किया है
राकेश रोशन के भाई और संगीतकार रोशनलाल नागरथ के
सुपुत्र राजेश रोशन ने.

इस ब्लॉग पर संगीत रसिकों के लिए ही हम चर्चा करते हैं.
हमारा उद्देश्य केवल गीत प्रेमियों और गाना गुनगुनाने के
शौकीनों के लिए बोल देना है. ये कोई फ्री सर्विस नहीं कि
यहाँ तमाम लिरिक्स वाली साइटें के मालिक आ कर कॉपी
कर के अपनी साइटों पर पेस्ट मार दें.





गीत के बोल:

अरे नज़र लगे ना.........
अरे हो ...... ओ ओ ओ ओ
आज भरी महफ़िल मे
रे कहीं डोल न जाये ...
............. गोरी मेमों का
अ ब ब .........
अरे नज़र लगे ना.........
अरे हो ओ ओ ................
आज भरी .................
रे कहीं ....... न जाये दिल
इन गोरी गोरी ..... का
अ ब ब .................

वहाँ मिले थे ..........हम तुम कुछ दिन पहले
यहाँ मिले ..... विष मयखाने में ...........
अरे हुक्का ..... पीते थे वहां बाँध के ...... पगड़ी
अरे कस के बूट ............. बात करें कोई तगड़ी
यादें वादे .............. भूली बातें याद करा दे
अरे भटके ..... अरे यूँ ही अटके ........हम लटके लटके
उल्टा चोर ........... डांटे ये पुराना दस्तूर हमने माना
हुर्र .......भरी महफ़िल मे
रे कहीं ........ जाये दिल
इन गोरी ...... मेमों का
........... ब ब ब ब ब
भुर्र

अरे सोच ......... आगे बढ़ना आग का ये एक दरिया
दिलवालों से मिलना हो तो ........ ... ज़रिया हो
वहाँ ...... साथी है यहाँ .....नया साँवरिया
वो ..... तो ये भी ठीक है अपना अपना नज़रिया
झूमर पायल बिंदिया ....... चुनरी है ना है आँचल
रोज़ बरस के ....... है ये अंग्रेज़ी ...... का बादल
अरे ........ के बीच में ..... साबुत बचा न कोय
ये क्यों होये

आज ..... महफ़िल मे
रे कहीं डोल ..... दिल
इन गोरी गोरी मेमों का
बल्ले .. बल्ले .गेंद गेंद

इक दिन ........... था अब किसको ... के आये
हम तो ...... बैठे अब तुम क्या खाने आये हो
..... करो ......खेतों की .... जहाँ .... के आये
अरे यहाँ तो पल पल ..... मारे दम भी ..... जाये
आओ आओ उन्हें ... सोये हुओं को .... जगाओ
डरते ...... हैं करते सौ बार बचे हैं...... मरते
अरे खाओ ...... मनाओ मौका फिर नहीं आना
ओ रे लाना
हे रे कहीं ...... जाये दिल
इन गोरी गोरी .........
ब ब ब ....................
अरे नज़र लगे ना साथियों
अरे हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आज भरी ........ मे
रे कहीं ........ जाये दिल
इन ..... गोरी मेमों का
अ ब ब ब अ ब ब ब ..........
………………………………………………….
Nazar lage na sathiyon-Des Pardes 1978

Artists: Dev Anand, Tina Munim, Mehmood

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Apr 5, 2020

तू पी और जी-देस परदेस १९७८

७० के दशक से एक शराबी गीत सुनते हैं. इस बात का
क्रायटेरिया क्या है कि ये शराबी गीत ही है. तो जनाब
सयाने कहते हैं जिस गाने में शराब शब्द आ जाए वो
शराबी गीत हो जाता है. अब जो शराब-बंदी वाले गाने
हैं उनका क्या?

भांग और शराब पर तो गाने बने हैं मगर दूसरी चीज़ों
को एक नाम-चिलम में समेट दिया गया है.

सुनते हैं छोटे मुखड़े वाला ये गीत देस परदेस फिल्म से.
अमित खन्ना इसके रचनाकार हैं और राजेश रोशन ने
धुन तैयार की है. किशोर कुमार ने इसे गाया है.

शादी के मंडपों के बाहर लगने वाला वेलकम सरीखा
कुछ दारू की दुकान के उदघाटन के अवसर पर लगा
है. अतिथियों की आरती और टीका भी किया जा रहा है.
देव आनंद ने अपनी संस्कृति का काफी ख्याल रखा है
इस गीत में. अतिथि देवो भवः

गीत के शुरू और मध्य तक नायिका लदी फंदी दिखलाई
देती है और गीत के अंत में वो शराब के ड्रम में कपड़ों
की मंदी का शिकार बन जाती है. भीड़ भी छलकती हुई
शराब की बूंदें पा जाने के लिए बेसब्र हो जाती है.




गीत के बोल:

तू पी और जी
तू जी और पी

सरदी में जब पियोगे यारों
सरदी में जब पियोगे यारों गरम कोट बन जायेगा ये
आई गरमी तो मदिरा-जल ठंडक तुमको पहुँचायेगा
अरे रंग भरेगा सपनों में आँखों में जब ये बस जायेगा
मन को तेरे मीत तेरा बस यहीं कहीं पे मिल जायेगा
काहे को तू फिरे अकेला
अरे काहे को तू फिरे अकेला देख ज़रा मौजों का मेला
आ तू भी आ लहरा
अरे आओ ना अकेले कभी रहो ना अकेले कभी
अरे सभी ये ये कहे कवि
के ऊपर नीचे आगे पीछे छाई कैसी मस्ती
ज़रा पी और जी

ये गुजराती वो बंगाली
ये गुजराती वो बंगाली ये दिलवाला वो दिलवाली
मैं देसी हूँ तू परदेसी फिर भी धड़कन है एक जैसी
अरे ये मद्रासी वो पंजाबी हर ताले की है एक चाबी
प्यार के मारे सब बेचारे गोरे काले ये मतवाले
अरे वर्कर हो या मालिक मिल का
वर्कर हो या मालिक मिल का रात का प्यासा भूखा दिन का
आ तू आ ना घबरा
उधार ना चढ़ाओ कभी पैसे साथ लाओ अभी
अभी ये दुकान है खुली
के पहली पहली बिक्री मेरी बेचूँ मैं तो सस्ती
ज़रा पी और जी

घरवालों की याद सताये
घरवालों की याद सताये या आँखों में आँसू आये
हमको देखो घूँट हँसी के पी कर हम कैसे मुस्काये
हो हो हो हो हो हा हा हा हा हा
इसमें कितने राज़ छुपे हैं पूछो मेरे दिल से तुम
बैठे बैठे महफ़िल से होता है कैसे कोई गुम
अरे दुनिया सारी हिल जायेगी
दुनिया सारी हिल जायेगी फ़टी जेब भी सिल जायेगी
आ तू भी बन जा राजा
अरे लफ़ड़ा ना करो कभी झगड़ा ना करो कभी
भंगड़ा तो पाओ ज़रा जट जी
अरे बल्ले बल्ले बच के कहीं डूबे ना ये कश्ती
ज़रा पी और जी
कहता ये टोनी
हे हे कम ऑन मैडम हा हा
कम ऑन सिस्टर ये पकड़ा दो ब्रदर
ओये आनो ना सिस्टर
बोलो चीयर्स
…………………………………………………….
Too pee aur jee-Des Pardes 1978

Artists: Dev Anand, Tina Munim

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Jul 25, 2017

मनमानी से हरगिज़ ना डरो-मनपसंद १९८०

फिल्म मनपसंद के बहाने एक गंभीर कलाकार से हिंदी सिनेमा
के दर्शकों का परिचय हुआ-गिरीश कर्नाड. फिल्म में देव आनंद
और टीना मुनीम मुख्य कलाकार हैं और गिरीश कर्नाड ने इस
फिल्म में नायक के मित्र की भूमिका निभाई है.

फिल्म से एक गीत सुनते हैं किशोर का गाया हुआ जिसे लिखा
है अमित खन्ना ने और इसकी धुन तैयार की राजेश रोशन ने.
गीत में शादी ना करने के कई बढ़िया कारण बतलाये जा रहे हैं.



गीत के बोल:

मनमानी से हरगिज़ ना डरो
कभी शादी ना करो
मन मानी से हरगिज़ ना डरो
कभी शादी ना करो

अरे मरज़ी है आज कहीं बाहर खाना खायें
वो कहेगी नहीं साहब ठीक आठ बजे
घर वापस आ जायें

किताब लिये हाथ में आप चैन से बैठे हैं
मेमसाब पूछेंगी क्यों जी हमसे रूठे हैं

कभी किसी भी नारी से कर लो दो बातें
वो कहेंगी क्या इन्हीं से होती हैं छुप के मुलाक़ातें

अरे तौबा बेवक़ूफ़ी की है शादी इन्तहा
अरे औरत अपना सोचे औरों की नहीं परवाह
क्यों ठीक नहीं कहा मैने
जो जी मैं आये वो करो कभी शादी ना करो

मनमानी से हरगिज़ ना डरो
कभी शादी हां कभी शादी

ज़रा सोचिये
आराम से आप ये जीवन जी रहे हैं
पसंद का खा रहे पसंद का पी रहे हैं
अच्छा भला घर है आप का
लेकिन क्या करें
आप से जुदा हैं शौक वो गम साहब का
आते ही कहें सुनिए जी हर चीज़ को बदलो
पहले परदे फिर सोफा फिर अपना हुलिया बदलो
अजी माना तन्हाई से कभी दिल घबराएगा
जीवनसाथी की ज़रूरत महसूस कराएगा
लेकिन इस घबराहट में जो शादी कर बैठे
वो उम्र भर पछतायेगा
जीते जी अरे भाई ना मरो
कभी शादी ना करो
मनमानी से हरगिज़ ना डरो
कभी शादी ओ कभी शादी हां कभी शादी
ना बाबा ना
……………………………………………………
Manmani se hargiz na daro-Manpasand 1980

Artists: Dev Anand, Girish Karnad

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May 21, 2017

होंठों पे गीत जागे-मनपसंद १९८०

किसी को अप्रत्याशित खुशी क्विंटलों में, टनों में मिल जाए
तो उसका क्या हाल होगा. वो बिना पंख लगाये जेट प्लेन
से भी ऊंचा उड़ जायेगा बिना हीलियम के गुब्बारे के.

गीत सुनते हैं फिल्म मनपसंद से लता मंगेशकर का गाया
हुआ. अमित खन्ना के बोल हैं और राजेश रोशन का संगीत.

परदे पर आपको जो मुख्य कलाकार दिखेंगे वो हैं-देव आनंद,
टीना मुनीम और लीला मिश्रा.



गीत के बोल:

होंठों पे गीत जागे
मन कहीं दूर भागे
खुशी मिल कैसी
पंख बिना उडूं
रोके से ना रुकूं
खुशी मिली ऐसी
होंठों पे गीत जागे
मन कहीं दूर भागे
खुशी मिल कैसी
पंख बिना उडूं
रोके से ना रुकूं
खुशी मिली ऐसी

मैं हूँ गगन पे सितारे ज़मीन पर
रंग बिरंगा है हर नज़ारा
साँसों की तारें गाने लगी हैं
धडकन बनी हैं बहती धारा
होंठों पे गीत जागे
मन कहीं दूर भागे
खुशी मिल कैसी
पंख बिना उडूं
रोके से ना रुकूं
खुशी मिली ऐसी

सरगम की डोरी में गीतों के मोती
सजी सपनों की मोहक माला
आशा की नगरी में आज अचानक
पहला कदम ये मैंने डाला
होंठों पे गीत जागे
मन कहीं दूर भागे
खुशी मिल कैसी
पंख बिना उडूं
रोके से ना रुकूं
खुशी मिली ऐसी
होंठों पे गीत जागे
मन कहीं दूर भागे
खुशी मिल कैसी
पंख बिना उडूं
रोके से ना रुकूं
खुशी मिली ऐसी
……………………………………….
Honthon pe geet jaage-Manpasand 1980

Artists: Tina Munim, Dev Anand, Leela Mishra

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May 12, 2017

चारु चंद्र की चंचल चितवन-मनपसंद १९८०

हिंदी सिनेमा के गीतों में उच्च स्तरीय साहित्य से
लेकर टुच्च स्तरीय लाइनों तक सब कुछ हम सुनते
आये हैं बरसों से.

सन १९८० की फिल्म मनपसंद में एक गीत है जो
हमें कवि मैथिलिशरण गुप्त की कविता की याद दिला
देता है.

ये एक ट्रेंड रहा है कि किसी शेर की या कविता के
कुछ शब्दों को लेकर पूरा गीत बना दिया जाए. ये
मामला आपने शेरोन के मामले में ज्यादा देखा होगा.
कविता के मामले थोड़े कम हैं.

अमित खन्ना ने एक अच्छा गीत लिखा है कुछ शब्दों
को आधार बना कर. राजेश रोशन ने इसकी धुन बनाई
है.

सा गा सा गा सुनते सुनते कभी कभी सरसों दा सागा
याद आ जाता है.




गीत के बोल:

चारु चन्द्र की चंचल चितवन
बिन बदरा बरसे सावन
मेघ मल्हार मधुर मनभावन
पवन पिया प्रेमी पावन
.......................................................
Charu Chandra ki chanchal chitwan-Manpasand 1980

Artists: Dev Anand, Tina Munim

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May 5, 2017

हँस तू हरदम-लूटमार १९८०

फिल्म:लूटमार
वर्ष: १९८०
गीतकार:अमित खन्ना
गायक: किशोर, लता
संगीत: राजेश रोशन




गीत के बोल:


हे हँस तू हरदम
खुशियां या ग़म
किसी से डरना नहीं
 डर डर के जीना नहीं
हँस तू हरदम
खुशियां या ग़म

हँस तू हरदम
खुशियां या ग़म
किसी से डरना नहीं
डर डर के जीना नहीं
हग तू हरदम
खुशियां या ग़म

जो डरपोक हैं  खुद वो ही
आँख दिखाया करते हैं
जो कमजोर हैं खुद वो ही
हाथ उठाया करते हैं
दुश्मन की किसी बात से
तुम डर जाया ना करो
हे हँस तू हरदम
खुशियां या ग़म
किसी से डरना नहीं
 डर डर के जीना नहीं
हँस तू हरदम
खुशियां या ग़म

तेरी हिम्मत की किस्मत
जो बिगड़ी बात बनायेगी
शान से तू ये कदन उठा
 मंज़िल खुद मिल जायेगी
खुद को लड़ाई में तुम
उलझाया ना करो
हे हँस तू हरदम
खुशियां या ग़म
किस्सी से डरना नहीं
डर डर के जीना नहीं
हँस तू हरदम
खुशियां या ग़म

लूटमार में क्या रखा
खून खराबा होता है
जैसी करनी वैसी भरनी
यही फ़ैसला होता है
हे हँस तू हरदम
खुशियां या ग़म
किसी से डरना नहीं
डर डर के जीना नहीं
हँस तू हरदम
खुशियां या ग़म
...........................................................................
Hans too hardam-Loot maar 1980

Artists: Dev Anand, Tina Munim

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Oct 19, 2016

जैसा देस वैसा भेस-देस परदेस १९७८

देशभक्ति की बात चली तो देस परदेस की बात भी कर ली
जाए. मनोज कुमार और देव आनंद से बेहतर देशभक्ति और
देश विदेश की बातें और किसने बेहतर की हैं भला !!

देव आनंद की उल्लेखनीय देशभक्ति फिल्म थी-प्रेम पुजारी.
वैसे कई सामाजिक मुद्दों पर देव आनंद ने फ़िल्में बनायीं
कुछ जनता के समझ में आयीं तो कुछ समय से आगे की
थीं जिन्हें आज के फिल्म समीक्षक क्रिटिकली ऐक्लैडम्ड जैसा
कुछ कहते हैं.

फिल्म विलायत में जा कर धन कमाने वालों की समस्याओं
पर केंद्रित है और इसमें कबूतरबाजी का जिक्र भी है. फिल्म
अपने संगीत की वजह से काफी लोकप्रिय हुई थी. नवोदित
अभिनेत्री टीना मुनीम भी इसकी प्रसिद्धि की एक वजह थीं.

श्रेणी प्रेमी इस गीत को ‘ऊह आह आउच’ हिट्स या ‘वाह वाह’
हिट्स श्रेणी में भी रख सकते हैं. उसके अलावा की श्रेणियाँ
अपने आप समझ में आने वाली हैं, अल-जेब्रा की श्रेणियों की
तरह.



गीत के बोल:

जैसे देस वैसा भेस फिर क्या डरना
ओ......हाय
जैसे देस वैसा भेस फिर क्या डरना
अरे छोडो रानी छोडो यूँ ही आहें भरना
अरे काहे की शर्म है कुडिये जल्दी करना
मैं नहीं करना यूँ नहीं बनना
मैं नहीं करना यूँ नहीं बनना

आ आ आ आ आ आ आ आ आ
कैसी ये नगरिया कैसे हैं ये लोग
कैसे हैं ये लोग
हाय सबको लागा प्रभु बेशर्मी का रोग
अब तू ही बता भगवन मैं भी क्या करूं
मैं भी क्या करूं
मैं तो कुछ भी करने से ना जाने क्यूँ डरूं
घूंघटा खोलूं ना खोलूं ना खोलूं रे
अरे छोड़ दे नखरा अब तो गोरिये
अरे आया है मौका ले अब तू बन संवरना
अरे काहे की शर्म है कुडिये जल्दी कर ना
मैं नहीं करना यूँ नहीं बनना
मैं नहीं करना यूँ नहीं बनना

मन को ढँक ले गोरी तन का ढंकना है बेकार
ढंकना है बेकार
फूल न महके जब तक उसका खिलना है बेकार
अरे अक्सर ऐसा होता है पहली पहली बार
पहली पहली बार
आ मुझसे तू ले ले हिम्मत थोड़ी सी उधार
झूठ बोलूं ना बोलूं ना बोलूं बोलूं रे
अरे गिर न जाऊं मैं तो कमसिन रे आउच
अरे हाथों में मेरे तू अपना हाथ धरना
अरे काहे की शर्म वे मुंडिया जल्दी करना
अरे ववाह भाई वाह हुई गल ना
जैसे देस वैसा भेस फिर क्या डरना
जैसे देस वैसा भेस फिर क्या डरना
अरे काहे की शर्म वे मुंडिया जल्दी करना
................................................................
Jaisa des waisa bhes-Des pardes 1978

Artists: Tina Munim, Dev Anand

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Oct 3, 2015

का करूँ सजनी-स्वामी १९७७

१९७७ की फिल्म स्वामी के सभी गीत क्लासिक गीत हैं. एक
गीत किशोर का गाया आप सुन चुके हैं इधर, आज सुनवाते हैं
येसुदास का गाया एक क्लासिकल गीत जिसे परदे पर धीरज
कुमार गा रहे हैं. शबाना अजमी और गिरीश कर्नाड भी दिखाई
देते हैं गीत में. घर में महफ़िल जमी है और ये गीत गाया जा
रहा है. पिछले गीत में संगीतकार राजेस्ज रोशन थे, इस गीत
के भी वही हैं, बस गीतकार बदल गए हैं. अमित खन्ना ने इस
गीत को लिखा है. अमित खन्ना के लिखे फिल्म देस परदेस के
गीतों से आप वाकिफ होंगे ही.

आये न बालम-एक प्रसिद्ध ठुमरी है जिसे बड़े गुलाम अली ने गा
के अमर बना दिया. गीत का मुखडा ठुमरी के मुखड़े से मिलता
जुलता है.



गीत के बोल:


का करूँ सजनी आए न बालम
खोज रही हैं पिया परदेसी अँखियाँ
आए न बालम

जब भी कोई, आहट होए, मनवा मोरा भागे
देखो कहीं, टूटे नहीं, प्रेम के ये धागे
है मतवारी प्रीत हमारी,
छुपे न छुपाए, छुपे न छुपाए
सावन हो तुम, मैं हूँ तोरी बदरिया
आये न बालम
का करूँ सजनी आए न बालम

भोर भई और, साँझ ढली रे, समय ने ली अंगड़ाई
ये जग सारा, नींद से हारा, मोहे नींद न आई
मैं घबराऊँ, डर डर जाऊँ,
आए वो न आए, आए वो न आए
राधा बुलाए कहाँ खोए हो कन्हैय्या
आए न बालम
का करूँ सजनी  आए न बालम
...............................................................
Aaye na balam-Swami 1977

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Jun 14, 2015

नैना बोले नैना-और एक प्रेम कहानी १९९६

फिल्म के कैमरामेन को आदर के साथ सिनेमाटोग्राफर कह
कर बुलाया जाता है. फिल्म का कैमरा काफी भरी होता है
और हर किसी के बस का नहीं इसे संभालना. बालू महेंद्र
दक्षिण के एक कामयाब और चर्चित सिनेमाटोग्राफर थे.
गत वर्ष वे इस नश्वर संसार को अलविदा कह गए. उन्होंने
सन १९७७ में कन्नड़ फिल्म कोकिला से अपना निर्देशन का
सफर शुरू किया था. काफी सफल फ़िल्में बनाने के पश्चात
उन्होंने सन १९९६ में फिल्म बनायीं-और एक प्रेम कहानी
जिससे कई कलाकारों ने अपना पदार्पण किया रुपहले परदे
पर. फिल्म की स्टारकास्ट में उस वक्त सबसे चर्चित कलाकार
थीं रेवती. फिल्म के निर्माता महेश भट्ट और अमित खन्ना
हैं.

बालू महेंद्र यथार्थवादी फ़िल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं.
मून्दरम पिराई उर्फ सदमा तो आपको याद ही होगी जिसमें
श्रीदेवी और कमाल हासन ने अविस्मरणीय अभिनय किया
था.

फिल्म “और एक प्रेम कहानी” का सबसे चर्चित गीत आपको
आज सुनवा रहे हैं जो आशा भोंसले का गाया हुआ है. अमित
खन्ना के बोल है और इलैयाराजा का संगीत है.





गीत के बोल:

नैना बोले नैना
दिल की ये बातें धीमे से
नैना बोले नैना
दिल की ये बातें धीमे से
मन बहका तन महका
चुप रहना सजन कोई है ना
बोले नैना
दिल की ये बातें धीमे से

रातों को अब तो मुझे नींद ना आये
पलकों से मेरी अब तो कोई ख्वाब चुराए
बेवजह मन को आये करार
बिन मौसम में गाऊँ मल्हार
झूमूं नाचूं खुद से पूछूं
हुआ ये क्या कहाँ गया है चैना
बोले नैना
दिल की ये बातें धीमे से

रस में डूबी कली क्यूँ इतराए
भंवरा तो पल में कहीं और उड़ जाए
मुझको तो है खुद पे पूरा यकीन
सच होंगे सपने सारे यहीं
बिंदिया कंगना पायल काजल
सोलह सिंगार पिया निभा देना
बोले नैना
दिल की ये बातें धीमे से
नैना बोले नैना
दिल की ये बातें धीमे से
मन बहका तन महका
मैं चुप रहूँ बता
सजन कोई है ना
बोले नैना
दिल की ये बातें धीमे से
…………………………………………………………….
Naina bole naina-Aur ek prem kahani 1996

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May 10, 2015

जब छाये मेरा जादू-लूट मार १९८०

देव आनंद की फिल्म देस परदेस का संगीत पॉपुलर हुआ.
उसके बाद आई उनकी अगली फिल्म-लूट मार. बहुसितारा
फिल्म देस परदेस जैसी तो नहीं चली मगर इक्का दुक्का
गीत लोकप्रिय हुए. फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत आज
पेश है. ये आज भी बजता है रेडियो के चैनलों पर.

गीत के धुन कैची है और छोटी छोटी पंक्तियों वाला ये गीत
संगीत से कूट कूट के भरा है. ८० का दशक और डिस्को का
बुखार. संगीत के सभी केंद्र लगभग डिस्को के बुखार से तप्त
थे उन दिनों सिवाए क्लासिकल संगीत के मुकामों के.

गीत अमित खन्ना ने लिखा है और इसकी धुन बनाई है
राजेश रोशन ने.




गीत के बोल:

जब छाये मेरा जादू
कोई बच न पाये, हाय

फूलों की नरमी हूँ मैं
शोलों की गर्मी हूँ मैं
तूफ़ानों की हलचल हूँ
हवाओं का आँचल हूँ मैं
जो ढूँढे वो पाये
फिर भी हाथ न आये, हा!
जब छाये मेरा जादू
कोई बच न पाये

कभी मैं दर्द जगाती हूँ
कभी मैं ज़ख़्म मिटाती हूँ
कभी मैं राज़ छुपाती हूँ
कभी ख़ुद राज़ बन जाती हूँ
दुल टूटे, हाँ साथ छूटे
फिर भी तू पीछे आये, हा!
जब छाए मेरा जादू
कोई बच न पाये, हाय

मुझसे तुम टकराना ना
आके यहाँ पछताना ना
मेरा बदन पिघला सोना
जान भी जाये खबर हो न
ये मस्ती, नहीं सस्ती
दिलवाला ही बोली लगाये, हाय!

जब छाये मेरा जादू
कोई बच न पाये
..................................................................
Jab chhaye mera jadoo-Loot maar 1980

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Feb 15, 2015

अव्वल नंबर(शीर्षक गीत)-अव्वल नंबर १९९०

आज भारत पाकिस्तान का मैच हुआ. भारत की बैटिंग के
बाद जनता ने अनुमान लगाया कि ३०० रन कम हैं. ये
अनुमान गलत साबित हुआ और भारत ये मैच जीत गया.
लगभग सभी चैनलों पर विशेषज्ञ मौजूद थे किरकिट के.
वैसे तो आज आम भारतीय भी अपने आप को बड़ा ज्ञानी
समझने लगा है क्रिकेट  का. एक चैनल पर नवजोत सिद्धू
मौजूद थे. उनको थोड़ी देर सुनने के बाद हमने चैनल बदल
दिया. उनकी खूबी है कि वे जहाँ भी मौजूद होते हैं सामने
वाले को बोलने का मौका कम दिया करते हैं. उनका ऊर्जा
स्तर इतना ज्यादा होता है कि सामने वाला बादाम पिस्ता
ढूँढने लग जाता है. उसके अलावा तीखापन और मजाक उड़ाने
वाला नियमित तेवर शायद उनके स्वभाव का अटूट हिस्सा
बन चुका है. अपने अट्टाहास वाली हंसी के चलते वे कई
कॉमेडी शो में दिखाई दे चुके हैं.किसी बोर चीज़ में जान डालना
हो तो सिद्धू को बुलाइए . वो दुगनी जान डाल देंगे .

आइये सुना जाए आज एक किरकिट वाली फिल्म से एक
गाना. फिल्म का नाम है अव्वल नंबर . ये सन १९९० की
फिल्म है और इसमें आमिर खान हैं. 



गीत के बोल:

अव्वल नंबर, अव्वल नंबर, अव्वल नंबर
अव्वल नंबर, अव्वल नंबर, अव्वल नंबर
सबकी है कोशिश यहाँ
है सब से जो आगे यहाँ
रह जाएँ देखते ज़मीन आसमान
अव्वल नंबर, अव्वल नंबर
अव्वल नंबर, अव्वल नंबर
अव्वल नंबर, अव्वल नंबर
अव्वल नंबर, अव्वल नंबर
चमका नया एक तारा
बदले समय सबकी धारा
अकड़े जो बेवजह समझो वो हारा
अव्वल नंबर, अव्वल नंबर
अव्वल नंबर, अव्वल नंबर

झुकते हुए ले इनाम
जग में होगा तेरा नाम
करेंगे फिर तुम्ही को सभी सलाम
अव्वल नंबर, अव्वल नंबर
अव्वल नंबर, अव्वल नंबर
.....................................................
Awwal Number-Title song

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Dec 13, 2014

वो बीते दिन याद हैं २ -पुराना मंदिर १९८४

आपको एक हिट भूतिया फिल्म से एक मधुर गीत सुनवाया था.
आज उसका दूसरा संस्करण सुनते हैं जो स्वयं संगीतकार की
आवाज़ में हैं . ये संगीतकार-गायक हैं अजित सिंह. नायक हैं
मोहनीश बहल और नायिका वही हैं-आरती गुप्ता. एक बी ग्रेड
कि फिल्म, जैसा कि जनता इसे कहती है में ऐसे मधुर गीत
का पाया जाना आश्चर्य का विषय हो सकता है . हमारा हिंदी
फिल्म जगत ऐसे कई अजूबों से भरा पड़ा है. संगीत प्रेमियों के
दिमाग में एक थ्योरी चलती है-सबसे बढ़िया धुन संगीतकार अपने
गाने के लिए सुरक्षित रखता है, काफी हद तक सही है. बप्पी लहरी
ने मगर कई बार क़ुरबानी दी है और बेहतर धुनें दूसरों से गवाईं हैं.




गीत के बोल:

वो बीते दिन याद हैं वो पलछिन याद हैं
गुज़ारे तेरे संग जो, लगा के तुझे अंग जो
वो मुस्काना तेरा वो शर्माना तेरा
दिसंबर का समां , वो भीगी भीगी सर्दियाँ
वो मौसम क्या हुआ, न जाने कहाँ खो गया
बस यादें बाक़ी
वो बातें सब याद हैं, वो रातें सब याद हैं
बितायीं तेरे संग जो, लगा के तुझे अंग जो
मुझसे लिपटना तेरा, पलकें झुकाना तेरा
अभी है दिल में मेरे होंठों की वो नर्मियां
आग लगा के तुम न जाने कहाँ खो गए
बस यादें बाक़ी

वो बीते दिन याद हैं वो पलछिन याद हैं
गुज़ारे तेरे संग जो लगा के तुझे अंग जो
वो मुस्काना तेरा वो शर्माना तेरा
दिसंबर का समां , वो भीगी भीगी सर्दियाँ
वो मौसम क्या हुआ, न जाने कहाँ खो गया
बस यादें बाक़ी

..........................................

Wo beete din yaad hain 2 -Purana Mandir 1984

Artists: Aarti Gupta, Mohnish Behl

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Feb 15, 2012

वो बीते दिन याद हैं-पुराना मंदिर १९८४

रामसे ब्रदर्स ने हिंदी में कई भूतिया फ़िल्में बनाई हैं। इनमें से एक हिट फिल्म
का मधुर गीत पेश है आज। गीत में भूत नहीं है मगर कैमरा ऐसे घूम रहा है
मानो उसमें भूत घुस गया हो। सन १९८४ कि फिल्म "पुराना मंदिर" काफी चली
हुई फिल्म है । आरती गुप्ता नामक अभिनेत्री पर फिल्माए गये गीत को गाया है
आशा भोंसले ने। उल्लेखनीय है कि अभिनेत्री आरती गुप्ता रामसे ब्रदर्स की कई
भूतिया फिल्मों में देखी गई हैं । ये हालाँकि बतौर नायिका उनकी पहली फिल्म है
इसके पहले तक उनको फिल्मों में सहायक भूमिकाएं मिलती रहीं।

'पसंद अपनी अपनी', जैसे आपको ध्यान हो आई. एस. जौहर की कई फिल्मों में
आपने सोनिया साहनी नाम की अभिनेत्री को देखा है। हर निर्देशक और खेमे के
अपने पसंदीदा कलाकार होते हैं।

गीत लिखा है अमित खन्ना ने और इसकी धुन बनाई है अजीत सिंह ने।




वो बीते दिन याद हैं
वो पलछिन याद हैं
गुज़ारे तेरे संग जो
लगा के तुझे अंग जो

बाहों में तेरी
सिमटना हो मेरा
जुल्फों में मेरी
लिपटना हो तेरा

समय सब ले गया
बस यादें दे गया
क्यूँ टूटे सपने ?

वो गुजरी ज़िन्दगी
तेरी मेरी ख़ुशी
मोहब्बत का जहाँ
वो चाहत का समां

तरसती चिलमनें
बहकती धडकनें
वो नगमे साथ साथ
जो हमने थे बुने

वो थक के सो गये
हवा में खो गये
क्यूँ टूटे सपने ?
..........................
Wo beete din yaad hain-Purana Mandir 1984

Artists: Aarti Gupta, Mohnish Behl

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Dec 8, 2011

ये देस परदेस -देस परदेस १९७८

एक गीत पेश है जिसने मुझे काफी प्रभावित किया और देव आनंद
के साथ साथ किशोर कुमार को भी ज्यादा पसंद करने की वजहें
बनायीं वो है फिल्म देस परदेस का गीत-ये देस परदेस। देस परदेस
हिंदी फिल्म सिनेमा का एक मील का पत्थर है। संभवतः ये देव आनंद
के निर्देशन वाली अंतिम बड़ी हिट फिल्म थी। इसके बाद आई लूटमार
भी काफी चली मगर इस फिल्म जैसा प्रभाव नहीं जगा पाई।

फिल्म देस परदेस के सभी गीत हिट हुए और आज भी उतने ही चाव से
सुने जाते हैं। रेडियो-अदरक लहसुन भी कई बार इस फिल्म के गीत
बजाते मिल जाते हैं। फ़िल्म के बाकी गीतों में और प्रस्तुत गीत में क्या
फर्क रहा मेरे लिए:देस परदेस के अन्य गीत मैं भी साथ साथ गुनगुनाने
की कोशिश करता और फिल्म के शीर्षक गीत को केवल ध्यान से सुनता।
कुछ गीत केवल तल्लीनता से सुनने में ही आनंद आता और उन गीतों
के साथ अपनी आवाज़ की मिलावट करके कानों पर बोझ डालना मेरे
हिसाब से उचित नहीं है।




गीत के बोल:

ये देस परदेस

हे, खुशियाँ यहीं पे
मिलेंगी हमें रे
सपना है अपना
ये देस परदेस

खुशियाँ यहीं पे
मिलेंगी हमें रे
अपना है अपना
ये देस परदेस

वही पुराने हैं, सारे फसाने,
नया है लेकिन जहाँ
अरे रस्ते नये हैं, ये मन्ज़िल नई है
लेकिन वही आसमाँ
सपना है सपना
अपना है अपना
ये देस परदेस

अकेला नहीं हूँ मैं, तेरे बिना
संग मेरे तेरी याद है
मिलकर खिलें फूल हर रंग के,
बस यही मेरी फरियाद है
सपना है सपना
अपना है अपना
ये देस परदेस
...............................
Ye des pardes-Des Pardes 1978

Artist-Dev Anand

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Dec 5, 2011

जीना भी कोई जीना है-सबूत १९८०

नवीन निश्चल हिंदी सिनेमा के प्रभावशाली अभिनेताओं में
से एक थे. उनका अभिनय, संवाद अदायगी और उच्चारण
कई नामचीन अभिनेताओं से बेहतर है. उनकी आवाज़ भी
अलग किस्म की आवाज़ है और उसमें सहजता है.

परदे पर उनके हिस्से में किशोर कुमार के कई गीत आये
और अधिकांश ही आज लोकप्रिय गीत कहलाते हैं.

सन १९८० की फिल्म सबूत से एक गाना सुनते हैं जिसे
फिल्म के एक और नायक विनोद मेहरा पर फिल्माया गया
है. उनके साथ विद्या सिन्हा दिखलाई दे रही हैं. गीत युगल
गीत है और इसमें लता मंगेशकर की भी आवाज़ है.

बोल अमित खन्ना के हैं और संगीत बप्पी लहरी का.




गीत के बोल:

जीना भी कोई जीना है जब तक तेरा साथ नहीं
साथ हमारा सदियों का ये पल दो पल की बात नहीं

जीना भी कोई जीना है जब तक तेरा साथ नहीं
साथ हमारा सदियों का ये पल दो पल की बात नहीं
हो ओ ओ जो करे संग करे संग जिये संग मरे

हो जीना भी कोई जीना है जब तक तेरा साथ नहीं
साथ हमारा सदियों का ये पल दो पल की बात नहीं

सपनो पे चढ़ा रंग तेरा खिल उठा अंग अंग मेरा
सपनो पे चढ़ा रंग तेरा खिल उठा आज अंग मेरा
आ हा तेरी अदाओं का जादू करे कहीं हमें न बेकाबू
हम हैं तुम्हारे तुम हो हमारे
जो करे संग करे संग जिये संग मरे

हो जीना भी कोई जीना है जब तक तेरा साथ नहीं
साथ हमारा सदियों का ये पल दो पल की बात नहीं

है रूप मेरा मतवाला मैंने तेरे लिए ही संभाला
है रूप मेरा मतवाला मैंने तेरे लिए ही संभाला
तू आये बहारें आये तेरे साथ नज़ारे गायें
फूल ये दिल के महके मिल के
जो करे संग करे संग जिये संग मरे

हो जीना भी कोई जीना है जब तक तेरा साथ नहीं
साथ हमारा सदियों का ये पल दो पल की बात नहीं
………………………………………….
Jeena bhi koi jeena hai-Saboot 1980

Artists: Vinod Mehra, Vidya Sinha

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Oct 28, 2011

हाँ पहली बार-और कौन १९७९

एक निहायत ही रोमांटिक गीत सुनवाते हैं आपको। एक थोड़ी कम
जानी पहचानी सी फिल्म से मगर बहुत पहचाने से संगीतकार की धुन
पर ये नगमा तैरता है। कुछ ऐसे दुर्लभ गीत हैं हिंदी फिल्म संगीत के
खजाने में जिनमें गिटार की आवाज़ के साथ किशोर की आवाज़ का
कातिलाना मिश्रण है। ये भी एक ऐसा ही गीत है जो मेरे ख्याल से
नॉन-रोमांटिक लोगों को भी उतना ही भाता है जितना रोमांटिक किस्म
के लोगों को। फिल्म एक भूतिया फिल्म है निर्देशन निर्माण व निर्देशन
रामसे ब्रदर्स ने किया है।

गीत जनता को इतना भाया कि इसका विडियो पॉप अल्बम वाले अंदाज़
में बनाया गया जिसे आपने हाल ही में २-३ वर्ष पूर्व देखा होगा टी वी चैनलों
पर। गीत अमित खन्ना का लिखा हुआ है जिनके लिखे और बप्पी के स्वरबद्ध
किये हिट गीत आप फिल्म चलते-चलते में सुन चुके हैं। बस एक ही चीज़
नहीं समझ आई इस गीत में-लड़की ने हाथ पकड़ कर क्या बोला? फिल्म में
इन्द्रजीत, पद्मिनी कपिला और रूपेश कुमार प्रमुख कलाकार हैं। पद्मिनी कपिला
फिल्मों के लिए उतना चर्चित नहीं हुईं जितनी वे नवीन निश्चल के साथ नाम जोड़े
जाने की वजह से हुईं।




गीत के बोल:

हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ

हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ

हाँ पहली बार

किसी को ना पता चला क्या हो गया
ऐसी मिली नज़रें के दिल खो गया
किसी को ना पता चला क्या हो गया
ऐसी मिली नज़रें के दिल खो गया
चुपके से वो पहलू में आ
चुपके से वो पहलू में आ
बोली मुझे आ रे आ

हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ

हाँ पहली बार

नशा आँखों में अब छाने लगा हैं
मज़ा जीने का अब आने लगा हैं
नशा आँखों में अब छाने लगा हैं
मज़ा जीने का अब आने लगा हैं
साथ है वो पास है वो
साथ है वो पास है वो
आज नहीं ना रे ना

हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ

हाँ पहली बार

साँसों में सांस जब मिल जाएगी
कली सपनों की खिल जाएगी
साँसों में सांस जब मिल जाएगी
कली सपनों की खिल जाएगी
कल का मुझे याद नहीं
कल का मुझे याद नहीं
आज की बात वाह रे वाह

हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ

हाँ पहली बार
.................................................
Haan pehli baar-Aur Kaun 1979

Artists: Sachin, Rajni Sharma

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Jul 20, 2011

आप कहें और हम न आयें-देस परदेस १९७८

आपको जब पिछले दफे देस परदेस का गीत सुनाया था तब एक मित्र का
जिक्र किया था जिन्होंने रोते-धोते ज़माने के गीत ब्लॉग पर प्रस्तुत करने
की सलाह दी थी. उनकी सलाह अमल में लायी गयी लेकिन क्या किया
जाए फ़िल्मी मसाले पर इतने ब्लॉग और वेबसाइट उपलब्ध हैं कि पाठक
के सामने समस्या होती है क्या पढ़े और क्या न पढ़े. पूरे अंतरजाल पर
इतना गहरा जाल है साईट और ब्लॉग का कि विषय चुनाव भी एक समस्या
सरीखा हो जात है - आलू प्याज के भाव पढ़ें या ताजे घोटालों का विवरण.

अब सुनते हैं फिल्म देस परदेस से दूसरा गीत जो लता मंगेशकर ने गाया है
अभिनेत्री टीना मुनीम के लिए. संगीतकार राजेश रोशन ने जितने भी लता
के एकल गीत बनाये हैं उनमें से सबसे बढ़िया ५६ चुन लीजिए और इसको
आप उस सूची में ज़रूर पाएंगे. गीत लिखा है अमित खन्ना ने. विडियो में
से एक अंतरा नदारद है .

गीत 'स्टेज' पर गाया जा रहा है अतः इसे इसी श्रेणी में रख लेते हैं. आगे
चल के उप-श्रेणियाँ भी बना लेंगे-४ फीट का स्टेज, १० फीट ऊंचा स्टेज इत्यादि



गीत के बोल:


आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं, ओ
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे, आपका जब तक साथ नहीं, ओ
आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं, ओ

चाहने वालों की आज दुनिया में चाहने वाले आ गए
उल्फ़त की मय आँखों से लो आज पिलाने आ गए
आप पियें और आप न झूमें आपके बस की बात नहीं, ओ
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे आपका जब तक साथ नहीं

कसा हुआ है तीर हुस्न का, ज़रा सम्भल के रहियेगा
नज़र नज़र को मारेगी तो, कातिल हमें न कहियेगा
चाल चली है सोच के हमने इस खेल में अपनी मात नहीं, ओ

पास आ के ये आपके हमें होने लगा एहसास है
दम है तो बस आपके दमसे आप ही से साँस है
बयान करें जो हाल-ए-दिल को ऐसे कोई जज़्बात नहीं, ओ

आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे, आपका जब तक साथ नहीं
........................................................................
Aap kahen aur ham na aayen-Des Pardes 1978

Artists: Dev Anand, Tina Munim

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Jul 9, 2011

बादल तो आये-दिल्लगी १९७८

राजेश रोशन ने भी और संगीतकारों की तरह लता मंगेशकर
के लिए विशेष धुनें बनायीं. कुछ गीत उनमें से ऐसे हैं जो
जनता के द्वारा ज्यादा नहीं सुने गए. धर्मेन्द्र, हेमा मालिनी
अभिनीत फिल्म 'दिल्लगी ' से एक मधुर गीत सुनवा रहे
हैं आपको. सन १९७८ में इस गीत का पदार्पण हुआ था .




गीत के बोल :

बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम न आये
बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम न आये

तुम ज़िन्दगी में यूँ मेरी आ कर
गुम हो गए हो ऐसे मुझको भुला कर
मैं प्यार तेरा दिल में सजा कर
बैठी हूँ कब से आस लगा कर

दुःख मेरे दिल के होंठों पे आये
ओ आने वाले पर तुम तो न आये

आवाज़ मेरी आ जाओ सुन के
रौंदो ना सपने हाय मेरे नयन के
इस पार तुमसे किसी भी जतन से
मैं राज़ अपने सारे कह दूँगी मन के

ख़ामोश रह के ये दर्द पाए
ओ आने वाले पर तुम तो न आये

बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम तो न आये
तुम तो न आये

........................
Baadal to aaye-Dillagi 1978

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Jun 12, 2011

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ-दिल्लगी १९७८

एक फुरसती ज़माना था जब जनता नदी नाले के किनारे बैठा करती,
गप शाप मारती और गीत गाती और सुनती। उस दौर की कल्पना
करना भी शायद आधुनिक युग में affordable नहीं है। साफ़ सुथरी
फ़िल्में बनाने के लिए विख्यात बासु चटर्जी की इस फिल्म ने
ज्यादा बिज़नेस नहीं किया मगर जनता द्वारा सराही अवश्य
गई। ये जी जनाब सराहने वाली जनता है ना, उसके बलबूते पर
बॉलीवुड की रोजी रोटी नहीं चलती। वो चलती है जब सिनेमा हॉल
की आगे की सीट से पीछे की सीट तक जगह ना बची हो। जिसे हम
चवन्नी क्लास कहते हैं, कई नामचीन नायकों की रोजी रोटी वहीँ से
निकल के आई। कभी कभार आंशिक कडकी के चलते हम भी उस
क्लास का आनंद उठा चुके हैं।

बासु की खूबी ये है कि उन्होंने हमारे इर्द गिर्द के और आम जीवन
के सामान्यतया ना छुए जाने वाले पहलुओं को बहुत सहजता से
प्रस्तुत किया परदे पर, दर्शक को यही लगा जैसे वो रोजमर्रा की
कोई आम घटना से रूबरू हो रहा हो। बाकी के निर्देशक अवास्तविकता
को वास्तविकता में तब्दील करने का प्रयत्न करते रहे और बासु चटर्जी
वास्तविकता को सरलता से प्रस्तुत करने में। शत प्रतिशत वास्तविक
हम किसी भी फ़िल्मी कथानक को नहीं कह सकते क्यूंकि नाटकीयता
आवश्यक तत्त्व है मंच और फिल्मों का। फर्क करना होता है हमें तो
बस नाटकीयता, जीवंत नाटकीयता, अति नाटकीयता, फूहड़ता और
मूढ़ता में । कल्पनाशीलता जब इनमे से किसी भी एक तत्त्व से चिपक
जाती है तो उसी तत्त्व विशेष को बढावा देती है। कल्पनाशीलता निर्देशक
के पास होना पहली अनिवार्य शर्त है, उसके बाद नंबर आता है कलाकारों
का। कल्पनाशीलता प्रस्तुतीकरण को बेहतर बनाने का काम करती है।

प्रस्तुत गीत में आपको जो कलाकार दिखाई देंगे उनके नाम इस
प्रकार से हैं-धर्मेन्द्र, असरानी, हेमा मालिनी और मिठू मुखर्जी।
पांचवे शख्स को शायद आप ना पहचान पायें तो आपको एक क्लू
देता हूँ-महाभारत सीरियल में मामा शकुनि की भूमिका निभाने
वाला कलाकार।



गीत के बोल:

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में
खिल जाएँ सोयी कलियाँ, हाय कलियाँ
और बहारें आयें सूनी बगियाँ में

ये कैसे अचानक बिना कोई आहट
चले आये हो तुम मेरी ज़िन्दगी में
तुम्हें आज पा कर मैं सब कुछ भुला कर
मगन हो के डूबी हुई हूँ ख़ुशी में

इतने ही रंग सलोने, हाय सलोने
भर गये हैं मेरे खाली सावन में

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में

कभी तुम सहारा बनोगे हमारा
मैं ये बात कल तक नहीं मानती थी
मगर आज कैसे ये लगता है जैसे
मैं हर जनम में तुम्हें जानती थी
लगता है सारी दुनिया, सारी दुनिया
भर गई है जैसे सज के कण कण में

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में
खिल जाएँ सोयी कलियाँ, हाय कलियाँ
और बहारें आयें सूनी बगियाँ में

.....................................
Main kaun sa geet sunaaon-Dillagi 1978

Artists: Asrani, Dharmendra, Mithu Mukharji, Gufi Paintal, Hema Malini,

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May 19, 2011

ये नैना ये काजल-दिल से मिले दिल १९७८

एक अनजान सी जोड़ी पर फिल्माया गया एक बेहतरीन गीत सुनिए।
फिल्म की एडिटिंग ख़राब किस्म की है। गीत झटके से शुरू होता है जैसे
नायक नायिका और निर्देशक, उनिते के अन्य लोग सब जल्दी में हों। फिल्म
एक हिट फिल्म की श्रेणी में आती है जिसके गीत भी बहुत बजे थे उन दिनों।
फिल्म के नायक हैं भीष्म कोहली जो फिल्म के निर्देशक भी हैं। उनके साथ
श्यामली नामक अभिनेत्री है। भीष्म और श्यामली दोनों को इस फिल्म से कोई
फ़ायदा नहीं हुआ, उन्हें आगे शायद ही किसी और फिल्म में देखा गया हो। एक
बात आप ज़रूर महसूस करेंगे, नायक के चेहरे, हाव भाव में २० टका देव आनंद
की अदाओं की मिलावट है। २० टका किस्मत भी अगर साथ होती तो शायद
भीष्म की फ़िल्मी गाडी चलती रहती। गीत लिखा है अमित खन्ना ने और
संगीत तैयार किया है बप्पी लहरी ने। गीत का फिल्मांकन अच्छा है और
निर्देशक के ड्रेस-सेंस की दाद देना पड़ेगी। अगर आप अपना नज़र का चश्मा उतार
कर गीत देखें तो यही लगेगा की ७० के दशक की कोई देव आनंद की फिल्म
का गीत देख रहे हों।




गीत के बोल :

ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल

ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम
ज़िन्दगी तुम मेरी
मेरी तुम ज़िन्दगी

मेरी आँखों से देखो मेरी नज़रों से जानो
मेरी आँखों से देखो मेरी नज़रों से जानो
तुम माला हम मोती
हम दीपक तुम ज्योति

ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम

सपनों का पनघट हो
आशा का झुरमुट हो
सपनों का पनघट हो
आशा का झुरमुट हो
तुम नदिया हम धारा
तुम चंदा हम तारा

ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम

मेरी साँसों से पूछो
मेरी आहों को समझो
मेरी साँसों से पूछो
मेरी आहों को समझो
तुम पूजा हम पुजारी
तुम किस्मत हम जारी

ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम
ज़िन्दगी तुम मेरी
मेरी तुम ज़िन्दगी
...............................................................
Ye naina ye kajal-Dil se mile dil 1978

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