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Oct 11, 2016

जा रे जा रे उड़ जा रे पंछी-माया १९६१

पंछी हिट्स सुने बहुत दिन हो गए. आज एक उम्दा पंछी हिट
सुनते हैं फिल्म माया से. पक्षी हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा
होते हैं. भोर के समय पक्षियों की चहचहाहट से मन प्रसन्न हो
जाता है. नेचुरल अलार्म है जिसकी आवाज़ से शायद ही किसी
का मन खिन्न होता हो. पक्षियों की आवाज़ में ईश्वरीय रूप से
आकर्षण और माधुर्य होता है.

कवियों ने पक्षी और पक्षियों के प्रसंगों पर कई गीत लिखे हैं
मसलन तोता-मैना और बुलबुल के ऊपर तो खूब गीत मिलेंगे
आपको. गीत लता का एक बेहद प्रचलित गीत है जिसके बोल
और धुन दोनों बढ़िया है. गीत दुःख भरा है.



गीत के बोल:

जा रे जा रे उड़ जा रे पंछी
बहारों के देश जा रे
यहाँ क्या है तेरे प्यारे
क्यूँ उजड गयी बगिया मेरे मन की
जा रे जा रे उड़ जा रे पंछी
बहारों के देश जा रे
यहाँ क्या है तेरे प्यारे
क्यूँ उजड गयी बगिया मेरे मन की
जा रे

न डाली रही न कली
अजब गम की आंधी चली
उडी दुःख की धूल राहों में
न डाली रही न कली
अजब गम की आंधी चली
उडी दुःख की धूल राहों में
जा रे ये गली है बिरहन की
बहारों के देश जा रे
यहाँ क्या है तेरे प्यारे
क्यूँ उजड गयी बगिया मेरे मन की
जा रे

मैं वीणा उठा ना सकी
तेरे संग गा न सकी
ढले मेरे गीत आहों में
मैं वीणा उठा ना सकी
तेरे संग गा न सकी
ढले मेरे गीत आहों में
जा रे ये गली है असुवन की
बहारों के देश जा रे
यहाँ क्या है तेरे प्यारे
क्यूँ उजड गयी बगिया मेरे मन की
जा रे जा रे उड़ जा रे पंछी
बहारों के देश जा रे
यहाँ क्या है तेरे प्यारे
क्यूँ उजड गयी बगिया मेरे मन की
जा रे
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Ja re ja re ud ja re panchhi-Maya 1961

Artist: Mala Sinha

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Jul 6, 2011

तसवीर तेरी दिल में-माया १९६१

फिल्म माया के गीत में वायलिन की आवाज़ का जिक्र हम कर चुके
हैं अब सुनिए बांसुरी की मनमोहक तान वाला मधुर युगल गीत।
इसे गाया है लता और रफ़ी ने। ये गीत भी ऊंची तान पर जाता
है और इसे गुनगुनाना आसान नहीं है जबकि सुननेवाला असफल
कोशिश ज़रूर करता है। गीत फिल्माया गया है देव आनंद और माला
माला सिन्हा पर। बोल मजरूह के हैं और संगीत सलिल चौधरी का। गीत
बेहद रोमांटिक है और इसकी सादगी के सभी कायल हैं। सरल और
सौम्य तरीके से अपनी भावनाओं का इज़हार कैसे किया जाये इस
गीत से सीखा जा सकता है।



गीत के बोल :

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

माथे की बिंदिया तू है सनम,
नैनों का कजरा पिया तेरा ग़म
माथे की बिंदिया तू है सनम,
नैनों का कजरा पिया तेरा ग़म
नैन के नीचे-नीचे, रहूँ तेरे पीछे-पीछे,
चलूँ किसी मंजिल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

तुमसे नज़र जब गई है मिल,
जहाँ हैं कदम तेरे वहीं मेरा दिल
तुमसे नज़र जब गई है मिल,
जहाँ हैं कदम तेरे वहीं मेरा दिल
झुकें जहाँ पलकें तेरी, खुलें जहाँ ज़ुल्फें तेरी,
रहूँ उसी मंज़िल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

तूफ़ान उठाएगी दुनिया मगर,
रूक ना सकेगा दिल का सफ़र
तूफ़ान उठाएगी दुनिया मगर,
रूक ना सकेगा दिल का सफ़र
यूँ ही नजर मिलती होगी,
यूँ ही शमाँ जलती होगी,
तेरी-मेरी मंजिल में।

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

............................
Tasveer teri dil mein-Maya 1961

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Jan 27, 2010

ऐ दिल कहाँ तेरी मंज़िल २ -माया १९६१

सलिल चौधरी के खजाने से एक मधुर गीत पेश है।
इस गीत के लता वाले संस्करण का जिक्र हम पहले कर
चुके हैं। इस गीत में भी लता मंगेशकर की छाप है।
जो महिला आवाज़ है, ऊंचे सुर वाली इस गीत में वो लता
की है। गीत के बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे हैं
और इसको गाया है द्विजेन मुखर्जी ने। फिल्म का नाम है
माया और परदे पर देव आनंद नाम के कलाकार पर इसे
फिल्माया गया है।

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गाने के बोल:

ऐ दिल कहाँ तेरी मंज़िल
ना कोई दीपक है ना कोई तारा है
गुम है ज़मीं दूर आसमाँ
ऐ दिल कहाँ तेरी मंज़िल

किस लिये मिल मिल के दिल छूटते हैं
किस लिये बन बन महल टूटते हैं
किस लिये दिल टूटते हैं
पत्थर से पूछा शीशे से पूछा
ख़ामोश है सबकी ज़बाँ

ऐ दिल कहाँ तेरी मंज़िल

ढल गये नादाँ वो आँचल के साये
रह गये रस्ते में अपने पराये
रह गये अपने पराये
आँचल भी छूटा साथी भी छूटा
ना हमसफ़र ना कारवाँ

ऐ दिल कहाँ तेरी मंज़िल
ऐ दिल कहाँ तेरी मंज़िल
ना कोई दीपक है ना कोई तारा है
गुम है ज़मीं दूर आसमाँ
ऐ दिल कहाँ तेरी मंज़िल

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Jan 9, 2010

ऐ दिल कहाँ तेरी मंज़िल १ -माया १९६१

वायलिन और बांसुरी की आवाज़ को दर्द का पर्याय समझा जाता है।
एक गीत है फिल्म माया से जो वायलिन की आवाज़ से शुरू होता है
और शुरू में ही ये आभास दिलाता है की गाने में दुखी भावनाएं व्यक्त
की जाने वाली हैं। गीत मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा है और धुन बनाई
है सलिल चौधरी ने। गीत गाया है लता मंगेशकर ने।


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गाने के बोल:

ऐ दिल कहाँ तेरी मंज़िल
ना कोई दीपक है ना कोई तारा है
गुम है ज़मीं, दूर आसमाँ

ऐ दिल कहाँ तेरी मंज़िल
ना कोई दीपक है ना कोई तारा है
गुम है ज़मीं, दूर आसमाँ

ऐ दिल कहाँ तेरी मंज़िल

किस लिये मिल मिल के दिल छूटते हैं
किस लिये बन बन महल टूटते हैं
किस लिये दिल टूटते हैं
किस लिये मिल मिल के दिल छूटते हैं
किस लिये बन बन महल टूटते हैं
किस लिये दिल टूटते हैं
पत्थर से पूछा, शीशे से पूछा
ख़ामोश है सबकी जुबां

ऐ दिल कहाँ तेरी मंज़िल
ना कोई दीपक है ना कोई तारा है
गुम है ज़मीं, दूर आसमाँ
ऐ दिल कहाँ तेरी मंज़िल

ऐ दिल कहाँ तेरी मंज़िल
ना कोई दीपक है ना कोई तारा है
गुम है ज़मीं, दूर आसमाँ
ऐ दिल कहाँ तेरी मंज़िल

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