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Dec 24, 2015

मैं गुनाहगार हूँ-नई रौशनी १९६७

आपको बहुत दिन हुए महेंद्र कपूर का गीत सुनवाए. आइये सुना
जाए एक शांत सा मधुर युगल गीत सन १९६७ की एक फिल्म
नै रोशनी से. संगीतकार रवि के संगीत की सभी खूबियां आपको
इस गीत द्वारा ज्ञात हो जाएँगी. खूबियों से यहाँ मेरा अभिप्राय
संगीत संयोजन से है.

महेंद्र कपूर के साथ यह गीत लता मंगेशकर ने भी गाया है. इस
गीत को शायद ही आपने कभी सुना होगा. अरे, मैंने ही इसे एक दो
बार सुना है केवल. गीत विश्वजीत और माला सिन्हा पर फिल्माया
गया है. रात में फिल्माया गया ये गीत काफी रोमांटिक किस्म का
है. गीत राजेंद्र कृष्ण की कलम से निकला है.

गीतकार ने कुछ अनूठे भाव इस गीत में ढोले हैं- ‘हमने देखा ये अजब
दीवाना कैद हो के भी मज़ा लेता है’




गीत के बोल:


मैं गुनाहगार हूँ जो चाहे सजा दो मुझको
मैंने सपने में तुम्हें छेड़ दिया
उम्र भर कैद-ए-मोहब्बत की सजा दी तुमको
तुमने सपने में हमें छेड़ दिया

प्यार से जिसने गिरफ्तार किया
दिल मेरा उसको दुआ देता है
हमने देखा ये अजब दीवाना
कैद हो के भी मज़ा लेता है
मैं गुनाहगार हूँ जो चाहे सजा दो मुझको
मैंने सपने में तुम्हें छेड़ दिया
उम्र भर कैद-ए-मोहब्बत की सजा दी तुमको
तुमने सपने में हमें छेड़ दिया

सख्तियाँ कैद की तुम क्या जानो
चाहते हो तो रिहाई ले लो
अब कफस ही में पड़ा रहने दो
चाहे बदले में खुदाई ले लो
उम्र भर कैद-ए-मोहब्बत की सजा दी तुमको
तुमने सपने में हमें छेड़ दिया
मैं गुनाहगार हूँ जो चाहे सजा दो मुझको
मैंने सपने में तुम्हें छेड़ दिया

मैंने ख्वाबों का सहारा ले के
दो घडी तुमसे मोहब्बत की है
तुम इसे लाख मोहब्बत कह लो
हम तो समझेंगे शरारत की है
मैं गुनाहगार हूँ जो चाहे सजा दो मुझको
मैंने सपने में तुम्हें छेड़ दिया
उम्र भर कैद-ए-मोहब्बत की सजा दी तुमको
तुमने सपने में हमें छेड़ दिया
.........................................................
Main gunahgaar hoon-Nai roshni 1967

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Sep 21, 2015

जिस प्यार में ये हाल हो-फिर सुबह होगी १९५८

साहिर लुधियानवी के लिखे हुए ६६ गीत अभी तक आपको
सुनवा चुके हैं इस ब्लॉग पर. सन १९५८ की एक फिल्म है
फिर सुबह होगी. काफी रिवोल्युशनरी किस्म के गीत हैं इस
फिल्म के. धुनें भी दमदार बनायीं हैं खय्याम ने. कुल मिला
के ज्यादा पैसे वसूल वाले गीत हैं. प्रस्तुत गीत भी एक प्रकार
से आशिकों और यारों पर कहीं मखमल कहीं बिना मखमल
के दे-दना-दन देता सा प्रतीत होता है. सिकंदर और कबूतर
का अच्छा एग-जाम-फल दिया गया है गीत में.

यार तीन तरीके से ज्यादा बोर कर सकते हैं-चुटकुले सुना के,
गीत शेर-शायरी सुना के या अपनी कहानी सुना के. उसके
अलावा बोर करने के बहुत से सामान मौजूद हैं.

गौरतलब है फिल्म त्रिशूल का गीत-मोहब्बत बड़े काम की चीज़
है भी साहिर का लिखा हुआ है. संयोग से उस फिल्म का संगीत
भी खैय्याम ने तैयार किया है. मेरा अनुमान है अगर साहिर के
साथ खैय्याम की जुगलबंदी लगातार चली होती तो हमें कुछ
और अनमोल और नायब किस्म के रत्न मिल जाते सुनने के
लिए.  गीत मुकेश संग मोहम्मद रफ़ी ने गाया है. गीत इन
कलाकारों पर फिल्माया गया है -राज कपूर, माला सिन्हा और
रहमान.

चलते चलते वही सैकड़ों बार सुना हुआ जुमला दोहरा देते हैं
आपके लिए, साहिर का है अंदाज़-ए-बयां और.................



गीत के बोल:

फिरते थे जो बड़े ही सिकंदर बने हुये
बैठे हैं उनके दर पे कबूतर बने हुये
जिस प्यार में ये हाल हो उस प्यार से तौबा
तौबा, उस प्यार से तौबा
जो बोर करे यार को उस यार से तौबा
तौबा, उस यार से तौबा

हमने भी ये सोचा था कभी प्यार करेंगे
छुप-छुप के किसी शोख हसीना पे मरेंगे
देखा जो अज़ीज़ों को मुहब्बत में तड़पते
दिल कहने लगा, हम तो मुहब्बत से डरेंगे
इन नरगिसी आँखों के छुपे वार से तौबा
जो बोर करे यार को उस यार से तौबा
तौबा, उस यार से तौबा
जिस प्यार में ये हाल हो उस प्यार से तौबा
तौबा, उस प्यार से तौबा


तुम जैसों की नज़रें न हसीनों से लड़ेंगीं
ग़र लड़ भी गईं, अपने ही क़दमों पे गड़ेंगीं
भूले से किसी शोख पे दिल फ़ेंक न देना
झड़ जायेंगे सब बाल वो बेभाव पड़ेंगीं
तुम जैसों को जो पड़ती है
उस मार से तौबा, तौबा उस मार से तौबा
जिस प्यार में ये हाल हो उस प्यार से तौबा

दिल जिनका जवाँ है वो सदा इश्क़ करेंगे
जो इश्क़ करेंगे वो सदा, हाय आह भरेंगे
जो दूर से देखेंगे, वो जल-जल के मरेंगे
जल-जल के मरेंगे तो कोई फ़िक्र नहीं है
माशूक़ के क़दमों पे मगर सर न धरेंगे
सरकार से तौबा, मेरी, सरकार से तौबा
जिस प्यार में ये हाल हो उस प्यार से तौबा
तौबा, उस प्यार से तौबा
..................................................................
Jis pyar mein ye haal ho-Phir Subah Hogi 1958

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Jun 14, 2012

वो हसीं दर्द दे दो-हमसाया १९६८

आज एक मकान में सूखते कपड़ों के बीच एक साये(petticoat) को सूखते  
देख एक कहावत याद आई-गर्दिश में साया भी साथ छोड़ देता है। उस
कहावत के याद आते आते एक हमसाये की याद भी आई जो अचानक
से गायब हो गया था समय के थपेड़ों में। लोग क्यूँ गायब हो जाते हैं
इसका पुख्ता जवाब मिलना असंभव सा है।

खैर फिल्म हमसाया से एक बेहद लोकप्रिय गीत सुनते हैं आज जिसे
गाया है आशा भोंसले ने। इसे फिल्माया गया है माला सिन्हा और जॉय
मुखर्जी पर। माला सिन्हा पर फिल्माए लता के गाये हिट गीत आपने
बहुतेरे सुने होंगे, ये दुर्लभ सा है। क्यूँ ना हो, फिल्म में संगीत नैयर का
जो है। अब नैयर हैं तो लता के गीत आपको फिल्म में कैसे मिल सकते
हैं भाई ? गीत शेवान रिज़वी साहब ने लिखा है

गीत क्या है जनाब   आवाज़ और वाद्य यंत्रों की आवाजों का अद्भुत मिश्रण
है और किसी भी आवाज़ की अनुपस्थिति की कल्पना करना असंभव सा
है। गीत की ताल मनमोहक किस्म की है जो दिमाग की सीढियां तुरंत ही
चढ़ जाती है।




गीत के बोल:

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मैं तुमसे मांगती हूँ, ज़रा अपना हाथ दे दो
मुझे आज ज़िंदगी की, वो सुहागरात दे दो
जिसे ले के कुछ मांगूं, और मांग में सजा लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मेरी आरज़ू तो देखो, तुम्हें सामने बिठा कर
कभी दिल के पास लाकर, कभी दिलरुबा बना कर
कोई दास्तान सुन लूँ, कोई दास्तां सुना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मैंने प्यार के अलावा कभी तुमसे कुछ ना माँगा
तुम्हें जाने क्या समझ कर मैंने हर कदम पे चाहा
मेरा आज फैसला है तुम्हें हमसफ़र बना लूं

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
..........................................
Wo haseen dard de do-Humsaya 1968

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Jul 28, 2011

इब्तिदा-ए-इश्क में हम -हरियाली और रास्ता १९६२

आज फरियाली का नाश्ता करते हुए एक फिल्म का नाम याद आया
हरियाली और रास्ता. फिल्म सन १९६२ की है जनाब. गीत एक युगल
गीत है लता और मुकेश की आवाजों में. गीत हलके फुल्के मूड वाला
है जिसे अपनी अपनी फ्री इस्टाइल में गाया जा रहा है परदे पर. फैशनेबल
स्वेटर के साथ सरकारी दफ्तर के चपरासी की टोपी का कुछ अजीब सा
कोम्बिनेशन लिए नायक बर्फीले पहाड़ों में कामगार मजदूर सरीखी दिख
रही नायिका के साथ गीत गा रहा है. बर्फीले इलाकों में ऐसी टोपी पहने
शायद ही आप किसी को देखें. अब शायद आप समझ गए होंगे कि फिल्म
जगत में इस जुमले का प्रयोग ज्यादा क्यूँ होता है-"अलग हट के"
नायक नायिका अति गदगद हैं उसकी क्या वज़ह है इसके लिए आपको एक
बार फिल्म अवश्य देखना पड़ेगी.

गीत लिखा है हसरत जयपुरइ ने और इसकी धुन बनायीं है शंकर जयकिशन
ने. फिल्म के सबसे लोकप्रिय गीतों में इसकी गिनती होती है.





गीत के बोल:

इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम सारी रात जागे
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे
दिल में तेरी उलफ़त के बंधने लगे धागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे

क्या कहूँ कुछ कहाँ नहीं जाए
बिन कहे भी रहा नहीं जाए
रात-रात भर करवट मैं बदलूँ
दर्द दिल का सहा नहीं जाए
नींद मेरी आँखों से दूर-दूर भागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे

दिल में जागी प्रीत की ज्वाला
जबसे मैंने होश सम्भाला
मैं हूँ तेरे प्यार की सीमा
तू मेरा राही मतवाला
मेरे मन की बीना में तेरे राग जागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे

तूने जब से आँख मिलाई
दिल से इक आवाज़ ये आई
चल के अब तारों में रहेंगे
प्यार के हम तो हैं सौदाई
मुझको तेरी सूरत भी चाँद रात लागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे
....................................
Ibteda-e-ishq mein ham-Hariyali aur rasta 1962

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Jul 18, 2011

आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद-गुमराह १९६३

गीत को अगर एक पंक्ति या वाक्य में लिखा जाए तो यूँ होगा -
आप जले पर नमक छिडकने चले आये. इसी बात को कई
पहलुओं के साथ आहिस्ता से कहा गया है इस गीत में साहिर द्वारा.
आखिर में सब बातों को याद करने के लिए अफ़सोस भी व्यक्त
किया गया है.

बात आहिस्ता से भले ही कही गयी हो मगर महेंद्र कपूर की बुलंद
आवाज़ में है. महेंद्र कपूर को दो फिल्मों के गीत से बहुत फायदा
हुआ-गुमराह और हमराज़. दोनों ही फिल्मों में रवि का संगीत है.

एक फ़िल्मी गीत को रेकोर्ड करने के लिए साजिंदों की कितनी जमात
हो सकती है इस गीत से अंदाजा लगाइए. ये बात दीगर है कि इन
साजिंदों को गायकों की तुलना में चवन्नी या अठन्नी ही प्राप्त होती है.
और शायद एक बात और गौर करने लायक है-सितार बजाने वाले शास्त्रीय
संगीत के कलाकार आराम से नीचे खुली जगह में बैठ के सितार वादन
करते हैं, यहाँ टीन की छोटी फोल्डिंग कुर्सी पर असुविधाजनक तरीके से
साजिन्दे सितार बजने की चेष्टा कर रहे हैं.




गीत के बोल:

आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए

आप के लब पे कभी अपना भी नाम आया था
शोख नजरों सी मुहब्बत का सलाम आया था
उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था
उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था
आपको देख के वो अहदे वफा याद आया

कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए

रूह में जल उठे बुझती हुई यादों के दिए
कैसे दीवाने थे हम आपको पाने के लिए
यूँ तो कुछ कम नहीं जो आपने एहसान किए
यूँ तो कुछ कम नहीं जो आपने एहसान किए
पर जो मांगे से ना पाया वो सिला याद आया

कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए

आज वो बात नहीं फिर भी कोई बात तो है
मेरे हिस्से में ये हल्की सी मुलाकात तो है
ग़ैर का हो के भी ये हुस्न मेरे साथ तो है
ग़ैर का हो के भी ये हुस्न मेरे साथ तो है
हाय किस वक्त मुझे कब का गिला याद आया

कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए
.......................................
Aap aaye to khayal-e-dil-e-nashaad-Gumrah 1963

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Jul 11, 2011

दिल से दिल टकराये-लव मैरिज १९५९

गायक-गीता दत्त, मोहम्मद रफ़ी
गीतकार-शैलेन्द्र
संगीतकार-शंकर जयकिशन
फिल्म-लव मैरिज
वर्ष-१९५९




गीत के बोल:

दिल से दिल टकराये,
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

वो उत्तर के पंछी थे
और वो दक्षिण की मैना
ली ली ली ली ली ली ली ली ली या
वो उत्तर के पंछी थे
और वो दक्षिण की मैना
एक रोज़ एक बाग़ में
यूँ ही लड़ गये नैना
एक रोज़ एक बाग़ में
यूँ ही लड़ गये नैना
दिल दे के घर आये
घर आ कर पच्छताये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

कब तक छत पर लेट कर
करते तारों से बातें
ली ली ली ली ली ली ली ली ली या
कब तक छत पर लेट कर
करते तारों से बातें
नींद चली गई रूठ के
कैसे कटतीं रातें
नींद चली गई रूठ के
कैसे कटतीं रातें
अपनों से शरमाये
ग़ैरों से कतराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये
...............................
Dil se dil takraye-Love Marriage 1959

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Jul 6, 2011

तसवीर तेरी दिल में-माया १९६१

फिल्म माया के गीत में वायलिन की आवाज़ का जिक्र हम कर चुके
हैं अब सुनिए बांसुरी की मनमोहक तान वाला मधुर युगल गीत।
इसे गाया है लता और रफ़ी ने। ये गीत भी ऊंची तान पर जाता
है और इसे गुनगुनाना आसान नहीं है जबकि सुननेवाला असफल
कोशिश ज़रूर करता है। गीत फिल्माया गया है देव आनंद और माला
माला सिन्हा पर। बोल मजरूह के हैं और संगीत सलिल चौधरी का। गीत
बेहद रोमांटिक है और इसकी सादगी के सभी कायल हैं। सरल और
सौम्य तरीके से अपनी भावनाओं का इज़हार कैसे किया जाये इस
गीत से सीखा जा सकता है।



गीत के बोल :

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

माथे की बिंदिया तू है सनम,
नैनों का कजरा पिया तेरा ग़म
माथे की बिंदिया तू है सनम,
नैनों का कजरा पिया तेरा ग़म
नैन के नीचे-नीचे, रहूँ तेरे पीछे-पीछे,
चलूँ किसी मंजिल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

तुमसे नज़र जब गई है मिल,
जहाँ हैं कदम तेरे वहीं मेरा दिल
तुमसे नज़र जब गई है मिल,
जहाँ हैं कदम तेरे वहीं मेरा दिल
झुकें जहाँ पलकें तेरी, खुलें जहाँ ज़ुल्फें तेरी,
रहूँ उसी मंज़िल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

तूफ़ान उठाएगी दुनिया मगर,
रूक ना सकेगा दिल का सफ़र
तूफ़ान उठाएगी दुनिया मगर,
रूक ना सकेगा दिल का सफ़र
यूँ ही नजर मिलती होगी,
यूँ ही शमाँ जलती होगी,
तेरी-मेरी मंजिल में।

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

............................
Tasveer teri dil mein-Maya 1961

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Jun 7, 2011

तुम्हीं तो मेरी पूजा हो-सुहागन १९६४

फिल्म सुहागन(१९६४) से आपको पूर्व में २ गीत सुनवा चुके हैं।
अब सुनिए फिल्म का तीसरा गीत जो कि लता और तलत
की आवाज़ में एक युगल गीत है। इस फिल्म का एक युगल गीत
जो आपने पहले सुना था वो मन्ना डे और लता की आवाज़ में है।
६० के दशक के आते तलत महमूद को फिल्मों में गीत मिलना
कम हो गये। बदलते ज़माने और पसंद के साथ दूसरे गायक दृश्य
में दिखाई देने लगे। दूसरे संगीतकार जहाँ उनसे किनारा करने लगे,
मदन मोहन ने उन्हें कुछ गीत अवश्य दिए गाने को. मदन मोहन
ने तलत महमूद को फिल्म जहाँआरा में भी अवसर दिए।






गीत के बोल:


तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
तुम्हें दिल में बसाया है

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
हाँ हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हें दिल से लगाया है

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो

इबादत है निगाहों की तुझी को देखते रहना
तेरी हर बात को सहना
तुम्हीं तो मेरे साथी हो तुम्हें अपना बनाया है

तुम्हीं तो मेरी पूजा हो

तमन्ना है इन आँखों की तुम्हारे ही नज़ारे हों
जहाँ देखूँ तुम्हें देखूँ हसीं जलवे तुम्हारे हों
हसीं जलवे तुम्हारे हों
तुम्हीं ने मेरी मंज़िल को बहारों से सजाया है

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो

तुम्हारे हाथ में है अब हमारी लाज का आँचल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
हमारी आंख का काजल

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
......................................
Tumhin to meri pooja ho-Suhagan 1964

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Jun 5, 2011

तू मेरे सामने है-सुहागन १९६४

आइये आपको एक रोमांटिक गीत सुनवाते हैं। ये असली छाया गीत
है, श्वेत श्याम युग का और इसमें भाव भंगिमाएं भी कुछ श्याम
वर्ण सी हैं । गीत की सिचुएशन कुछ विरोधाभासी किस्म की सी है।
नायक रोमांटिक मूड में है और नायिका बेबस और लाचार सी दिखती
है। नायक हैं गुरुदत्त और नायिका माला सिन्हा।

नायक न्यूनतम और दृढ़ प्रतिज्ञ से भावों के साथ गीत गा रहा है
और नायिका अपनी पूरी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन कर रही है और
काफी ज़द्दो ज़हद के बाद आखिरकार समर्पण वाली मुद्रा में आ जाती
है। मदन मोहन के साथ हसरत जयपुरी ने बहुत कम फिल्मों में गीतों
पर काम किया है। इस गीत के लिए तो मानना पड़ेगा कि हसरत जयपुरी
का रोमांटिक गीतों को लिखने के मामले में कोई सानी नहीं। गीत में
संगीत कहीं कहीं लाऊड हो जाता है, इसको मदन मोहन भक्तों की भाषा
में बोलें तो-इतना तो चलता है गाने में.



गीत के बोल :

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
और तेरे होंठ लरजते हुए मैखाने हैं
मेरे अरमान इसी बात पे दीवाने हैं
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तेरी साँसों से ग़ुलाबों की महक आती है
तू जो चलती है तो कुदरत भी बहक जाती है
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

................................
Too mere samne hai-Suhagan 1964

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May 4, 2010

तेरे चेहरे से हटे आंख-प्यार का सपना १९६९

माला सिन्हा और विश्वजीत की जोड़ी। सन १९६९ की फिल्म का नाम
है प्यार का सपना। हॉस्पिटल की जूनियर डॉक्टर सी दिखती नायिका
और क्रिकेट के मैदान से भगा दिए गए क्रिकेटर से दिखते नायक
के ऊपर ये एक सॉफ्ट किस्म का रोमांटिक गीत फिल्माया गया है।
अब आप क्रिकेट के मैदान पर ऑफ व्हाइट शर्ट और टाई पहन के
जायेंगे तो भगा ही दिए जायेंगे ना। निर्देशक का बस चलता तो
ज़मीन की घास भी सफ़ेद पुतवा देता। निर्देशक नामचीन हस्ती हैं
जिनका मैं भी एक प्रशंसक हूँ इसलिए इस कथन का थोडा संशोधन
करके कहता हूँ कि श्वेत श्याम के युग के कलाकारों को रंगीन रील
में भी श्वेत श्याम दिखने कि कला कोई उनसे सीखे।


रफ़ी के गाये इस गीत को लिखा है राजेंद्र कृष्ण ने और इसकी धुन बनाई
है चित्रगुप्त ने।



गीत के बोल:


तेरे चेहरे से हटे आँख तो दुनिया देखूं
तेरे चेहरे से हटे आँख तो दुनिया देखूं
सामने तू है तुझे देख के अब क्या देखूं
तेरे चेहरे से हटे आँख तो दुनिया देखूं

रात जुल्फों में तेरी दिन तेरे रुखसारों में
रात जुल्फों में तेरी दिन तेरे रुखसारों में
एक ही वक़्त पे दिन-रात का जलवा देखूं
तेरे चेहरे से हटे आँख तो दुनिया देखूं
तेरे चेहरे से हटे आँख तो दुनिया देखूं

तेरे जलवों की बहारें भी तमाशाई हैं
तेरे जलवों की बहारें भी तमाशाई हैं
मैं भी दिल थाम के कब तक ये तमाशा देखूं
तेरे चेहरे से हटे आँख तो दुनिया देखूं
तेरे चेहरे से हटे आँख तो दुनिया देखूं

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May 2, 2010

कोई तुमसा नहीं-मैं सुहागन हूँ १९६४

अगर आपने ये गीत पहले नहीं सुना है या एक आध बार सुना भी है
तो अंदाज़ा लगाइए कौन इसका संगीत निर्देशक है। शायद आपके
दिमाग में ३ नाम आयें-रोशन, मदन मोहन या शंकर जयकिशन ।

कैफ़ी आज़मी के बोलों को स्वर दिया है रफ़ी ने और ये रोमांटिक गीत
गाया जा रहा है नायिका माला सिन्हा के लिए। कुंदन कुमार नाम के
सज्जन ने फिल्म का निर्देशन किया है और जो शख्स परदे पर गा रहे हैं
उनके नाम की तलाश जारी है। माला सिन्हा को अपने कैरियर में कई
अजनबी से चेहरों के साथ काम करने का मौका मिला है। गाना शुरू
होते ही लगता है कोई तेज़ गीत गया जानेवाला है। एकदम से गियर
बदल जाता है । गीत के आखिर में ऊंचे सुर में तारीफ़ सुनकर नायिका
उठ कर चली जाती है

संगीतकार का नाम है लच्छीराम , इनका नाम आपने अवश्य एक आध
बार सुना होगा, इसी फिल्म का लता का गाया गीत खासा लोकप्रिय है-
ऐ दिल मचल मचल ............

अंत में,दुर्लभ गीत अपलोड करने वाले को धन्यवाद् । साथ साथ जो भी
इस पोस्ट को बिना धन्यवाद दिए कॉपी करेगा उसको भी धन्यवाद।




गीत के बोल:

सब जवान सब हसीं
सब जवान सब हसीं कोई तुमसा नहीं
हो गए
हो गए जिसके हम वो तुम्ही हो तुम्ही

सब जवान सब हसीं कोई तुमसा नहीं

हो हो हो हो हो ओ ओ

देखा जो तुम्हे तो महसूस हुआ
पहचान है अपनी मुद्दत से
ख्वाबों में बनायें थी जो सूरत
मिलती है तुम्हारी सूरत से
मिलती है तुम्हारी सूरत से
तुम वो ही हो वो ही, है ये दिल को यकीन

सब जवान सब हसीं कोई तुमसा नहीं

हो हो ओ

रास्ता भी मिले मंजिल भी मिले
जब साथ चले दीवाने दो
या हाथ पकड़ लो बढ़ के तुम्ही
या मुझको करीब आ जाने दो
या मुझको करीब आ जाने दो

ये सितम कब तलक तुम कहीं हम कहीं

सब जवान सब हसीं कोई तुमसा नहीं

हो हो हो हो हो ओ ओ

कुछ जान के भी धोखा खाया
कुछ देखे उनके इशारे भी
लो आस की बदली में चमके
उम्मीद के चाँद सितारे भी
उम्मीद के चाँद सितारे भी
वो गाई आज आसमान आज दिल की ज़मीन

सब जवान सब हसीं कोई तुमसा नहीं
कोई तुमसा नहीं
......................................................
Koi tumsa nahin-Main suhagan hoon 1964

Artist: Kewal Kumar

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Jan 28, 2010

तारों की जुबां पर- नौशेरवां-ए-आदिल १९५७

कुछ गीत जिनमे चाँद सितारों का जिक्र है उनको रात में सुना जाए
तो अधिक आनंद देते हैं। इस गीत को भी आप रात में सुनिए ज्यादा
आनंद आएगा। वजह क्या है ये तो संगीत के दिग्गज बता सकते हैं।
एक मधुर युगल गीत लता और रफ़ी की आवाज़ में जिसकी धुन बनाई
है सी रामचंद्र ने। गीत फिल्माया गया है माला सिन्हा और राजकुमार पर।
गीत लिखा है परवेज़ शम्सी ने जिनका नाम और किसी फिल्म के साथ
मैंने नहीं सुना।



गीत के बोल:

तारों की जुबां पर है मुहब्बत की कहानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी
तारों की जुबां पर है मुहब्बत की कहानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी

कहते हैं जिसे चांदनी है नूर-ए-मुहब्बत
कहते हैं जिसे चांदनी है नूर-ए-मुहब्बत
तारों से सुनहरी है हमेशा तेरी किस्मत
तारों से सुनहरी है हमेशा तेरी किस्मत
जा जा के पलट आती है फिर तेरी जवानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी

तारों की जुबां पर है मुहब्बत की कहानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी

छाया हुआ दुनिया पे मुहब्बत का असर है
छाया हुआ दुनिया पे मुहब्बत का असर है
कहते हैं जिसे चाँद मेरा दाग-ए-जिगर है
कहते हैं जिसे चाँद मेरा दाग-ए-जिगर है
तारों से कहा करता है ये दिल की कहानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी

तारों की जुबां पर है मुहब्बत की कहानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी

हम हो ना हो दुनिया यूँ ही आबाद रहेगी
हम हो ना हो दुनिया यूँ ही आबाद रहेगी
ये ठंडी हवा और ये फिजा याद रहेगी
ये ठंडी हवा और ये फिजा याद रहेगी
रह जाएगी दुनिया में मुहब्बत की निशानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी

तारों की जुबां पर है मुहब्बत की कहानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी

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Jan 24, 2010

झूमता मौसम मस्त महीना-उजाला १९५९

टिर्र टुर्र वाले गीत : २
.................................

फिल्म: उजाला
वर्ष: १९५९
संगीत: शंकर जयकिशन
गीतकार : हसरत जयपुरी
गायक: लता मंगेशकर, मन्ना डे
कलाकार: शम्मी कपूर, माला सिन्हा



गीत के बोल:
झूमता मौसम, मस्त महीना
चाँद सी गोरी, एक हसीना
आँख में काजल, मुंह पे पसीना
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गई
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गई

कोई रंगीला, सपनों में आ के
एक नज़र से अपना बना के
प्यार का जादू हम पे चला के
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गया
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गया

ठंडी सड़क नीम तले, तीर-ए-नज़र खूब चले
ओ तुम भी उधार ज़ख़्मी हुए
हम भी इधर ज़ख़्मी हुए
हाय लाल चुनरिया, चाल निराली
सर पे झूमर, कान में बाली
हाथ में चूड़ियां, मोतियों वाली
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गई
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गई

कोई रंगीला, सपनों में आ के
एक नज़र से अपना बना के
प्यार का जादू हम पे चला के
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गया
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गया

तुम भी यहाँ, हम भी यहाँ
ऐसा मिलन होगा कहाँ
हाय, तेरी कसम जान-ए-जहाँ
दिल है वहीँ, तू है जहान
हाय दिल का मालिक, इक मतवाला
इस जहान में सब से निराला
प्यार का सूरज, दिल का उजाला
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गया
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गया

आये हाय, झूमता मौसम, मस्त महीना
चाँद सी गोरी, एक हसीना
आँख में काजल, मुंह पे पसीना
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गई
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गई

दोनों तरफ आग लगी
ऐसी लगी बुझ ना सकी
हो तुम भी जले, हम भी जले
खिल तो गई, दिल की कली
मुखड़ा तेरा, गुल की कहानी
जुल्फें तेरी शाम सुहानी
रूप की मलका प्यार की रानी
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गई
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गई

कोई रंगीला, सपनों में आ के
एक नज़र से अपना बना के
प्यार का जादू हम पे चला के
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गया
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गया

अए,झूमता मौसम, मस्त महीना
चाँद सी गोरी, एक हसीना
आँख में काजल, मुंह पे पसीना
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गई
या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गई

या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गया

या अल्लाह,या अल्लाह
दिल ले गई

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Jan 22, 2010

फिर ना कीजे मेरी गुस्ताख-फिर सुबह होगी १९५८

"फिर ना कीजे मेरी गुस्ताख निगाही का गिला " ये गीत सुनते ही
शायद आपको भूले बिसरे गीत कार्यक्रम याद आ जाए। खय्याम
की ये सदाबहार धुन है फिल्म 'फिर सुबह होगी से। इसके बोल हैं
साहिर लुधियानवी के और ये राज कपूर, माला सिन्हा पर फिल्माया
गया है। गीत गाया है मुकेश और आशा भोंसले ने।



गीत के बोल:

फिर ना कीजै मेरी गुस्ताख़ निगाही का गिला
देखिये आप ने फिर प्यार से देखा मुझको

मैं कहाँ तक ये निगाहों को पलटने देती
आप के दिल ने कई बार पुकारा मुझको

इस कदर प्यार से देखो ना हमारी जानिब
दिल अगर और मचल जाये तो मुश्किल होगी
तुम जहाँ मेरी तरफ़ देख के रुक जाओगे
वो ही मंजिल मेरी तक़दीर की मंजिल होगी

देखिये आप ने फिर प्यार से देखा मुझको
आप के दिल ने कई बार पुकारा मुझको

एक यूँ हीं सी नजर दिल को जो छू लेती है
कितने अरमान जगाती है तुम्हे क्या मालूम
रूह बेचैन है कदमों से लिपटने के लिये
तुमको हर साँस बुलाती है तुम्हें क्या मालूम

देखिये आप ने फिर प्यार से देखा मुझको
आप के दिल ने कई बार पुकारा मुझको

हर नज़र आप की जज़बात को उकसाती है
मैं अगर हाथ पकड़ लूं तो खफ़ा मत होना
मेरी दुनिया-ए-मोहब्बत है तुम्हारे दम से
मेरी दुनिया-ए-मोहब्बत से जुदा मत होना

देखिये आप ने फिर प्यार से देखा मुझको
आप के दिल ने कई बार पुकारा मुझको

देखिये आप ने फिर प्यार से देखा मुझको
आप के दिल ने कई बार पुकारा मुझको

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Jan 10, 2010

रूप ये तेरा जिसने बनाया-संजोग १९७२

अमिताभ बच्चन और माला सिन्हा की जोड़ी ! ढलती उम्र की
माला सिन्हा और चढ़ती उम्र के अमिताभ की जोड़ी थोड़ी
अजीब सी लगी इस फिल्म में। निर्माता निर्देशक एस एस बालन
ने थोड़ी सी ही फ़िल्में बनाई हिंदी में जैसे, औरत(१९६७),
लाखों में एक(१९७१), तीन बहुरानियाँ(१९६८)। इनमे से
कोई भी हिट फिल्म नहीं है। जो भी हो, ये गीत सुनने
लायक है और इसे गाया है किशोर कुमार ने। गीतकार हैं
आनंद बक्षी और संगीत है राहुल देव बर्मन का।



गीत के बोल:

रूप ये तेरा जिसने बनाया वो
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं
रंग ये तेरा जिसने सजाया वो
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूम
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूम

रूप ये तेरा

कारी कारी रतियाँ से काजल चुराया
तेरी प्यारी प्यारी अखियों में लगाया
कारी कारी रतियाँ से काजल चुराया
तेरी प्यारी प्यारी अखियों में लगाया
आ हा हा हा हा, आ हा हा हा, आ हा हा
मुख पे सवेरा जिसने सजाया वो
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं

रूप ये तेरा

सुन्दर ऐसी कोई कविता नहीं है
चंचल ऐसी कोई सरिता नहीं है
सुन्दर ऐसी कोई कविता नहीं है
चंचल ऐसी कोई सरिता नहीं है
आ हा हा हा हा, आ हा हा हा, ए हे हे
अंग अंग तेरा जिसने बनाया वो
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं

रूप ये तेरा

गोरा बदन जैसे शीशे का प्याला
बन गया मैं तो बिन पिए मतवाला
गोरा बदन जैसे शीशे का प्याला
बन गया मैं तो बिन पिए मतवाला
ए हे हे हे हे, उहं हूँ हूँ हूँ, ए हे हे
हाल ये मेरा जिसने बनाया वो
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं

रूप ये तेरा जिसने बनाया वो
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं

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Dec 4, 2009

क्या देखा नैनों वाली -धर्म पुत्र १९६१

सन १९५९ की फ़िल्म धूल का फूल में माला सिन्हा बिन ब्याही माँ बनी
थीं। इस फ़िल्म के निर्देशक यश चोपड़ा थे और इसका निर्माण किया था
बी आर चोपड़ा, उनके बड़े भाई ने। सन १९६१ में एक फ़िल्म और बनाई
बी आर चोपड़ा ने-धर्म पुत्र इसका निर्देशन भी यश चोपड़ा ने किया। इसमे
भी माला सिन्हा ने एक बार फ़िर मिलता जुलता सा रोल किया जिसमे
उसे उसका प्रेमी छोड़ के चला जाता है। फ़िल्म के बारे में चर्चा किसी और
गाने के समय। फिलहाल इस गीत पर चर्चा की जाए। ये इस फ़िल्म का
एक कम सुना गया गीत है। गायिका हैं आशा भोंसले और संगीतकार
एन. दत्ता।

साहिर का सोचने का ढंग जुदा होने के कारण अगर खोजे जाएँ तो हमें
थोड़ा उनके दर्शन को समझने का मौका मिलेगा. साहिर की ज़िन्दगी
इतने उतार चढ़ाव भरी थी कि एक संवेदनशील रचनाकार का "यूँ" ही
प्रभावित होना सहज ही समझ आता है। जिस व्यक्ति ने अमीरी से लेकर
फुटपाथ पर फाकाकशी तक सभी रंग देखें हों, वही व्यक्ति इतने करीबी
और संजीदा बयान अपने शब्दों में पिरो सकता है।

उदाहरण के लिए इसी नग्मे में:
नायिका का अंतर्मन पूछ रहा है- "क्या देखा नैना वाली नैंना क्यूँ भर आये"
नैना वाली से मतलब- नैना तो सभी प्राणियों की इश्वर ने सामान दिए हैं.
नैनों से भावाभिव्यक्ति का गुण भी बहुत से प्राणियों को दिया है। नैनों से
मतलब यहाँ दो हो सकते हैं-सुन्दर नयन वाली या फिर बुद्धिमान दृष्टि वाली।
अब जिसको जो समझना है समझ ले।

जवाब उसका चेतन मन देता है-
"कोख भरी और गोद है खाली, नैना यूँ भर आये"

यहाँ मन और अंतर्मन का द्वंद बहुत ही अनूठे ढंग से दर्शाया गया है।
शायद ही कभी नेट पर किसी जगह इस गाने और इसके विडियो का जिक्र
होते मैंने देखा है। यही विडम्बना है हमारे संगीत प्रेमियों और समीक्षाकारों
की, उन्होंने कभी भी एन दत्ता और साहिर के युग्म पर चर्चा नहीं करना चाही।
वे हमेशा एस. डी. बर्मन और साहिर के संगम का गुणगान करते रह गए।

सवाली शब्द का सबसे ज्यादा प्रचार जिस गाने ने किया वो है "हो के मायूस
तेरे दर से सवाली न गया " फिल्म लैला मजनू से, उल्लेखनीय बात ये है कि
इस गाने के शब्द भी साहिर की लेखनी से छूटे थे।

सवाली का सीधा अर्थ भिखारी से लगाना शायद किसी के आत्मसम्मान
को चोट पहुँचाना होता है, इसलिए कवि या शायर अपनी बात कहने के लिए
बहु अर्थी शब्द खोजा करते हैं । ' सवाली' भी एक बहु-अर्थी शब्द है जिसका
यहाँ मतलब "भिखारी" भी हो सकता है और "याचक" भी। याचक कहने से
मर्म को चोट थोडी कम पहुँचती है।



गीत के बोल:

क्या देखा नैनों वाली
नैना क्यूँ भर आए
कोख भरी और गोद है खाली
नैना यूँ भर आए
नैना यूँ भर आए

माँ बन कर भी माँ न बनी मैं
बदनामी के डर से
दूध मेरे बोझल सीने को
आंसू बन बन बरसे
अपना धन और आप सवाली
नैना यूँ भर आए
नैना यूँ भर आए
नैना यूँ भर आए

क्या देखा नैनों वाली
नैना क्यूँ भर आए
नैना क्यूँ भर आए
कोख भरी और गोद है खाली
नैना यूँ भर आए
नैना यूँ भर आए

जी भी सकी तो जीते जी ये
रहेगा मुझको
बोलेगा पर मेरा मुन्ना
माँ न कहेगा मुझको
माँ कहलाना बन गया गाली
नैना यूँ भर आए
नैना यूँ भर आए
नैना यूँ भर आए

क्या देखा नैनों वाली
नैना क्यूँ भर आए
नैना क्यूँ भर आए
.........................................................
Kya dekha nainon waali-Dharmputra 1961

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Dec 2, 2009

दामन में आग लगा बैठे-धूल का फूल १९५९

"धूल का फूल " का अर्थ हिन्दी भाषी अवश्य जानते हैं। ये
फ़िल्म राजेंद्र कुमार और माला सिन्हा को लेकर बनाई थी
सन १९५९ में बलदेव राज चोपड़ा ने। सामाजिक समस्याओं पर
उन्होंने काफ़ी सार्थक काम किया। ये एक अनब्याही माँ
मीना(माला सिन्हा) की कहानी है जिसे महेश (राजेंद्र कुमार)
धोखा देकर अपने माँ बाप की पसंद की हुई लड़की से शादी कर
लेता है। मीना को उसके रिश्तेदार घर से बहार निकल देते हैं।
मीना एक बच्चे जो जम देकर उसे जंगल में छोड़ देती है । उसके
बाद शुरू होता है उस बच्चे का किस्सा। समय के थपेड़ों से गुज़र
कर गुनाह के रास्ते से होते हुए एक दिन वो अपने बाप ,जो कि
अब तक न्यायाधीश बन चुका है, के सामने पेशी के लिए हाज़िर
किया जाता है। इस फ़िल्म का निर्देशन यश चोपड़ा ने किया है।
त्रिकोण और प्रेम त्रिकोण से उनका संयोग शायद शुरू से ही रहा
है। उनके विषयों में शायद लाल त्रिकोण-परिवार नियोजन ही बचा है।

ये गीत हीरो कि बारात के अवसर पर फिल्माया गया है। कातर और
बेबस हिरोइन बाजू से गुज़र रही है, लुटी हुयी असहाय सी। स्तिथि आज
भी वही है जो उस समय काल में थी उसमे ज्यादा परिवर्तन नहीं हुआ है
सिवाय इसके कि आज गर्भपात का विकल्प मौजूद है। समाज का
नजरिया वैसा ही है लगभग ।



गीत के बोल:

खता के नाम पे, कितने गुनाह होते हैं
ये उनसे पूछे कोई, जो तबाह होते हैं
हाय हो, ओ,ओ, ओ, ओ, ओ, ओ, ओ
दामन में दाग लगा बैठे

दामन में दाग लगा बैठे
हम प्यार में धोखा खा बैठे
हम प्यार में धोखा खा बैठे
दामन में दाग लगा बैठे
हाय , हाय

छोटी सी भूल जवानी की
छोटी सी भूल जवानी की
जो तुमको याद न आयेगी
इक भूल के ताने दे दे कर
दुनिया हमको तडपाएगी
उठते ही नज़र झुक जायेगी, ई ई ई
उठते ही नज़र झुक जायेगी
हो, हो, हो हो हो हो
उठते ही नज़र झुक जायेगी
आज ऐसी ठोकर खा बैठे

हम प्यार में धोखा खा बैठे
दामन में दाग लगा बैठे
हाय, हो, हाय

चाहत के लिए जो रस्मों को
चाहत के लिए जो रस्मों को
ठुकरा के गुजरने वाले थे
जो साथ ही जीने वाले थे
और साथ ही मरने वाले थे
तूफ़ान के हवाले करके हमें
तूफ़ान के हवाले करके हमें
हो, हो, हो हो हो हो, ओ, ओ
तूफ़ान के हवाले करके हमें
ख़ुद दूर किनारे जा बैठे

हम प्यार में धोखा खा बैठे
दामन में दाग लगा बैठे
हाय, ओ हाय

लो आज मेरी मजबूर वफ़ा
लो आज मेरी मजबूर वफ़ा
बदनाम कहानी बनने लगी
जो प्रेम निशानी पायी थी
वो पाप निशानी बनने लगी
दुःख दे के हमें जीवन भर का, आ आ आ
दुःख दे के हमें जीवन भर का
हो, हो, हो हो हो हो, ओ, ओ
दुःख दे के हमें जीवन भर का
वो सुख की सेज सजा बैठे

हम प्यार में धोखा खा बैठे
दामन में दाग लगा बैठे
हाय ओ हाय

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Nov 28, 2009

कहे झूम झूम रात ये सुहानी-लव मेरिज १९५९

लता मंगेशकर का शंकर जयकिशन के संगीत निर्देशन
में गाया हुआ एक और मधुर गीत। फिल्म का नाम
'लव मेरिज' है । फिल्म के लगभग सारे गाने हिट थे।
माला सिन्हा इस फ़िल्म में अभिनेत्री हैं जिनपर ये
फिल्माया गया है।



गीत के बोल:

कहे झूम झूम रात ये सुहानी
कहे झूम झूम रात ये सुहानी
पिया हौले से छेड़ो दुबारा
वही कल की रसीली कहानी

कहे झूम झूम रात ये सुहानी
कहे झूम झूम रात ये सुहानी
पिया हौले से छेड़ो दुबारा
वही कल की रसीली कहानी

कहे झूम झूम रात ये सुहानी

सुन के जिसे दिल मेरा धडका
सुन के जिसे दिल मेरा धडका
लाज के सर से आँचल सरका
रात ने ऐसा जादू फेरा
और ही निकला रंग सहर का

कहे झूम झूम रात ये सुहानी
पिया हौले से छेड़ो दुबारा
वही कल की रसीली कहानी

कहे झूम झूम रात ये सुहानी

मस्ती भरी ये खामोशी
मस्ती भरी ये खामोशी
चुप हूँ खड़ी देखो मैं खोई सी
देख रही हूँ मैं एक सपना
कुछ जागी सी कुछ सोयी सी

कहे झूम झूम रात ये सुहानी
पिया हौले से छेड़ो दुबारा
वही कल की रसीली कहानी
कहे झूम झूम रात ये सुहानी

तन भी तुम्हारा मन भी तुम्हारा
तन भी तुम्हारा मन भी तुम्हारा
तुमसे ही बालम जग उजियारा
रोम रोम मेरा आज मनाये
छूटे कभी न साथ हमारा

कहे झूम झूम रात ये सुहानी
पिया हौले से छेड़ो दुबारा
वही कल की रसीली कहानी
कहे झूम झूम रात ये सुहानी

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Oct 18, 2009

तन मन तेरे रंग रंगूँगी -अर्चना १९७३

चाहे बोलों के हिसाब से हो, गायकी के हिसाब से कह लो , या फ़िर
धुन के हिसाब से, इतने डूब के गाये हुए गाने बहुत कम हैं हिन्दी फ़िल्म
संगीत के खजाने में। शंकर जयकिशन ने लता मंगेह्कर से "हाँ"
शब्द को बड़े ही दिलकश अंदाज़ से गवाया है कई गानों में। इस बारे
में आगे पढ़ते रहिये। एक पत्नी द्वारा अपने पति के लिए इतना समर्पण और
भक्ति भाव शायद कुछ ही गानों में देखने को मिला है। इन सब के लिए बोल
भी जिम्मेदार हैं गाने के, जो कवि नीरज की लेखनी से प्रकट हुए । संगीत
है शंकर जयकिशन का। फ़िल्म आई थी सन १९७३ में और इसमे माला सिन्हा
मुख्य अभिनेत्री हैं। माला सिन्हा की बतौर हिरोइन कुछ आखिरी फिल्मों में
से एक। संजीव कुमार का जिक्र करना हम भूल गए। वो इस फ़िल्म के हीरो हैं।



गाने के बोल:

तन मन तेरे रंग रंगूँगी
छाया बन कर संग चलूंगी
सेवा करूंगी, अंग लगूंगी,
अर्चना मैं तेरी साजना
हाँ आं आं ................

तन मन तेरे रंग रंगूँगी
छाया बन कर संग चलूंगी
सेवा करूंगी, अंग लगूंगी,
अर्चना मैं तेरी साजना
हाँ आं आं ................

तन मन तेरे रंग रंगूँगी

जनम जनम तेरे बिना
नैना नहीं सोये
जनम जनम तेरे बिना
नैना नहीं सोये

घड़ी घड़ी, सपने तेरे
पलकों ने पिरोये

तू है मेरे जीवन की साधना
हाँ आं आं ................

तन मन तेरे रंग रंगूँगी
छाया बन कर संग चलूंगी
सेवा करूंगी, अंग लगूंगी,
अर्चना मैं तेरी साजना
हाँ आं आं ................

प्यार तेरा कुमकुम है
बाहें तेरी माला
प्यार तेरा कुमकुम है
बाहें तेरी माला

प्राण मेरा पुजारी तेरा
तन है शिवाला

ज़िन्दगी है तेरी प्रार्थना
हाँ आं आं ................

तन मन तेरे रंग रंगूँगी
छाया बन कर संग चलूंगी
सेवा करूंगी, अंग लगूंगी,
अर्चना मैं तेरी साजना
हाँ आं आं ................

झूम उठा अंगना मेरा
पड़ी नज़र तेरी
झूम उठा अंगना मेरा
पड़ी नज़र तेरी

राम करे लागे तुझे सारी उमर मेरी
दुनिया रूठे तू न रूठना
हाँ आं आं ................

तन मन तेरे रंग रंगूँगी
छाया बन कर संग चलूंगी
सेवा करूंगी, अंग लगूंगी,
अर्चना मैं तेरी साजना
हाँ आं आं ................

तन मन तेरे रंग रंगूँगी

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Sep 29, 2009

जिसके सपने हमें रोज़-गीत १९७०

ब्लॉग पड़ने वाले भाई/बहिन लोग शायद आश्चर्य करते होंगे कि
ज्यादातर गाने इस ब्लॉग पर ७० के दशक के हैं। अब वो क्या
महसूस करते हैं मुझे पता नहीं चल पाता क्यूंकि चुपके से ब्लॉग
पढ़ के भाई/बहिन लोग निकल जाते हैं, बिना टिप्पणी किए ।
अब मैं कोई ५ स्टार ब्लॉग राईटर तो हूँ नहीं कि मेरी लेखनी पर
वाह वाह की जाए।

आगे आपके लिए आज पेश है एक सुनहरा गीत (जिसको अंग्रेज़ी
में गोल्डन डूअट कहते हैं) फ़िल्म गीत से। गीत फिल्माया गया है
जुबिली कुमार राजेंद्र कुमार और माला सिन्हा पर। धुन बनाई है
कल्याणजी आनंदजी ने।



गाने के बोल:

जिसके सपने हमें रोज़ आते रहे
दिल लुभाते रहे

ये बता दो, बता दो
ये बता दो कहीं तुम वही तो नहीं
वही तो नहीं
ओ, जिसके सपने हमें रोज़ आते रहे
दिल लुभाते रहे
ये बता दो कहीं तुम वही तो नहीं
वही तो नहीं

जब भी झरनों से मैंने सुनी रागिनी
जब भी झरनों से मैंने सुनी रागिनी
मैं ये समझा तुम्हारी ही पायल बजी

ओ जिसकी पायल पे,
ओ जिसकी पायल पे हम दिल लुटाते रहे,
जान लुटाते रहे
ये बता दो कहीं तुम वही तो नहीं
वही तो नहीं

जिसके रोज़ रोज़ हम गीत गाते रहे, गुनगुनाते रहे,
ये बता दो कहीं तुम वही तो नहीं
वही तो नहीं

ये महकते हुए रास्ते,
खुल गए आप ही प्यार के वास्ते
दे रही है पता मद भरी वादियाँ
जैसे पहले भी हम तुम मिले हो यहाँ

ओ, कितने जन्मों से,
कितने जन्मों से, जिसको बुलाते रहे,
आजमाते रहे
ये बता दो कहीं तुम, वही तो नहीं
वही तो नहीं

ओ जिसके सपने हमें रोज़ आते रहे,
दिल लुभाते रहे
ये बता दो, बता दो
ये बता दो कहीं तुम वही तो नहीं
वही तो नहीं

तुम वही तो नहीं
तुम वही तो नहीं
तुम वही तो नहीं.....

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