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Sep 18, 2017

भोर भये पनघट पे-सत्यम शिवम सुंदरम १९७८

सत्यम शिवम सुन्दरम से एक गीत सुनते हैं लता मंगेशकर की
आवाज़ में. आनंद बक्षी की रचना है और लक्ष्मी प्यारे का संगीत.
गौरतलब है लता मंगेशकर ने सबसे ज्यादा गीत जिस गीतकार
के गाये हैं वो हैं आनंद बक्षी. इनमें से चार सौ से ऊपर गीत तो
ऐसे हैं जो लक्ष्मी प्यारे के संगीत निर्देशन में हैं.

इस फिल्म के अधिकांश गीत पॉपुलर और हिट हैं. सबसे ज्यादा
तो फिल्म का शीर्षक गीत ही बजा है.

राज कपूर की फिल्मों में आपको पानी से भीगी हीरोईन ज़रूर
दिखाई देगी. इस गीत में भी ऐसा कुछ है. नायक नायिका की
आवाज़ सुन कर सुन्दरम की तलाश में निकल पड़ता है. आगे
का हाल खुद गीत में मालूम करें.



गीत के बोल:

खिले हैं आशा के फूल मन में
ये राज़ उनसे छुपाया हमने
कदम मुबारक हमारे दर पे
नसीब अपना जगाया हमने

भोर भये पनघट पे मोहे नटखट श्याम सताये
भोर भये पनघट पे मोहे नटखट श्याम सताये
मोरी चुनरिया लिपटी जाये
मैं का करूँ हाय राम हाय हाय
भोर भये पनघट पे मोहे नटखट श्याम सताये
मोरी चुनरिया लिपटी जाये
मैं का करूँ हाय राम हाय हाय
भोर भये पनघट पे

कोई सखी सहेली नाहीं संग मैं अकेली
कोई देखे तो ये जाने
पनिया भरने के बहाने
गगरी उठाये राधा श्याम से
हाय हाय श्याम से मिलने जाये हाय
भोर भये पनघट पे मोहे नटखट श्याम सताये
भोर भये पनघट पे

आये पवन झकोरा टूटे अंग अंग मोरा
चोरी चोरी चुपके चुपके
बैठा कहीं पे वो छुप के
देखे मुस्काये निरलज को
निरलज को लाज न आये हाय
भोर भये पनघट पे मोहे नटखट श्याम सताये
भोर भये पनघट पे

मैं न मिलूँ डगर में तो वोह चला आये घर में
मैं दूँ गाली मैं दूँ झिड़की
मैं ना खोलूँ बंद खिड़की
निंदिया जो आये तो वो कंकर
हाय हाय कंकर मार जगाये हाय

भोर भये पनघट पे मोहे नटखट श्याम सताये
मोरी चुनरिया लिपटी जाये
मैं का करूँ हाय राम हाय हाय
भोर भये पनघट पे
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Bhor bhaye panghat pe-Satyam Shivam Sundaram 1978

Artist: Zeenat Aman, Shashi Kapoor

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Sep 16, 2017

चंचल शीतल निर्मल कोमल-सत्यम-शिवम-सुंदरम १९७८

फिल्म सत्यम शिवम सुन्दरम से एक गीत सुनते हैं जिसमें रूटीन शब्दों
का इस्तेमाल नहीं हुआ है. एक कहावत भी इसमें है-जहाँ ना पहुंचे रवि
वहाँ पहुंचे कवि. वैसे फिल्म में नायक की हालत के ऊपर एक कहावत
और याद आती है-दूर के ढोल सुहावने. नायिका के हिस्से के कपडे भी
नायक ने पहन रखे हैं इस गाने में.

आनंद बक्षी इसके रचनाकार हैं, मुकेश की आवाज़ है और संगीत तैयार
किया है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने.



गीत के बोल:

चंचल शीतल निर्मल कोमल संगीत की देवी स्वर सजनी
चंचल शीतल निर्मल कोमल संगीत की देवी स्वर सजनी
चंचल शीतल निर्मल कोमल संगीत की देवी स्वर सजनी
सुन्दरता की हर प्रतिमा से बढ़ कर है तू सुन्दर सजनी
चंचल शीतल निर्मल कोमल संगीत की देवी स्वर सजनी

कहते हैं जहाँ ना रवि पहुँचे कहते हैं वहाँ पर कवि पहुँचे
कहते हैं जहाँ ना रवि पहुँचे कहते हैं वहाँ पर कवि पहुँचे
तेरे रंग-रूप की छाया तक ना रवि पहुँचे ना कवि पहुँचे
मैं छूने लगूँ तू उड़ जाए परियों से तेरे पर सजनी
चंचल शीतल निर्मल कोमल संगीत की देवी स्वर सजनी
चंचल शीतल निर्मल कोमल संगीत की देवी स्वर सजनी


तेरे रसवंती होंठों का मैं गीत कोई बन जाऊँगा
तेरे रसवंती होंठों का मैं गीत कोई बन जाऊँगा
सरगम के फूलों से तेरे सपनों की सेज सजाऊँगा
डोली में बैठ के आएगी जब तू साजन के घर सजनी
चंचल शीतल निर्मल कोमल संगीत की देवी स्वर सजनी
चंचल शीतल निर्मल कोमल संगीत की देवी स्वर सजनी

ऐसा लगता है टूट गए सब तारे टूट के सिमट गये
गोरे गोरे इक चन्दा से रंगीं बदन से लिपट गए
बन कर नथ कंगन करधनिया घुँघरू झुमके झूमर सजनी
चंचल शीतल निर्मल कोमल संगीत की देवी स्वर सजनी
चंचल शीतल निर्मल कोमल संगीत की देवी स्वर सजनी
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Chanchal sheetal nirmal-Stayam Shivam Sundaram 1978

Artist: Shahsi Kapoor, Zeenat Aman

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May 22, 2016

यशोमती मैया से बोले नंदलाला-सत्यम शिवम सुन्दरम १९७८

प्रेरणा शब्द बॉलीवुड में बहुत चलन में है. चाहे वो कहानी
हो, संवाद हों, बोल हों या संगीत. अंग्रेजी शब्द-इंस्पायर
शायद हमारे कानों को ज्यादा भाता है  क्यूंकि हमें हिंदी
फिल्मों और गीतों की समीक्षा अंग्रेजी में पढ़ना सुनना
ज्यादा पसंद है, और इसे हम शान समझते हैं अपनी.
हिंदी में भावाभिव्यक्ति को भले ही बुद्धू बक्से के चैनलों ने
स्वीकार लिया हो हमारा मुख्य धारा का सिनेमा अंग्रेजियत
से न आज़ाद हो पाया है ना ही हो पायेगा कभी. होना होता
तो १०० साल हो गए फिल्म उद्योग को, कभी का हो चुका
होता.

खैर हमारा आज का मकसद आपको एक गीत और उससे
जुडी पुरानी कड़ी बतलाना है. प्रस्तुत गीत जो सन ७८ की
फिल्म में है वो एक पुरानी फिल्म के गीत की धुन की कॉपी
है. प्रेरित होना अलग बात है. सत्यम शिवम सुन्दरम के
निर्देशक राज कपूर थे. राज कपूर ने सन १९४८ की एक
फिल्म गोपीनाथ में काम किया था जो अनजानी फिल्मों में
से एक है. इस फिल्म के संगीत निर्देशक भी अनजाने से हैं-
नीनू मजूमदार.

महेश कौल द्वारा निर्देशित फिल्म गोपीनाथ में नन्द किशोर,
महेश कौल, शिवाजी राठोड, रंधीर, अनवरी बाई, ज़ुबैदा, तिवारी,
तृप्ति मिश्र और राज कपूर कलाकार थे. ये महेश कौल वही
है जिन्होंने सन १९५१ की फिल्म नौजवान का निर्देशन भी
किया. नौजवान कारदार प्रोडक्शनस की फिल्म है और उस
समय कारदार के साथ काम करना एक बड़ी बात हुआ करता
था. महेश कौल को १९५७ की फिल्म अभिमान का निर्देशन
करने का मौका भी मिला ये फिल्मिस्तान द्वारा निर्मित थी.

फिल्म सत्यम शिवम सुन्दरम का गीत पंडित नरेन्द्र शर्मा ने
लिखा है और इसे गाया है लता मंगेशकर ने. शुरुआत करते
हैं मन्ना डे इस गीत में अतः ये एक युगल गीत कहलाया.



गीत के बोल:

यशोमती मैया से बोले नंदलाला
यशोमती मैया से बोले नंदलाला
राधा क्यूँ गोरी मैं क्यूँ काला
यशोमती मैया से बोले नंदलाला
राधा क्यूँ गोरी मैं क्यूँ काला
यशोमती मैया से बोले नंदलाला
राधा क्यूँ गोरी मैं क्यूँ काला

बोली मुस्काती मैया ललन को बताया
कारी अंधियारी अधि रात में तू आया
लाडला कन्हैया मेरा हो लाडला कन्हैया मेरा
काली कमली वाला इसलिए काला
यशोमती मैया से बोले नंदलाला
राधा क्यूँ गोरी मैं क्यूँ काला
यशोमती मैया से बोले नंदलाला
राधा क्यूँ गोरी मैं क्यूँ काला

बोली मुस्काती मैया सुन मेरे प्यारे
बोली मुस्काती मैया सुन मेरे प्यारे
गोरी गोरी राधिका के नैन कजरारे
काले नैनों वाली ने हो ओ ओ ओ ओ
काले नैनों वाली ने ऐसा जादू डाला इसलिए काला
यशोमती मैया से बोले नंदलाला
राधा क्यूँ गोरी मैं क्यूँ काला
राधा क्यूँ गोरी मैं क्यूँ काला

इतने में राधा प्यारी आई इठलाती
इतने में राधा प्यारी आई इठलाती
मैंने ना जादू डाला बोली बलखाती
मैया कन्हैया हो ओ ओ ओ ओ
मैया कन्हैया तेरा जग से निराला इसलिए काला
यशोमती मैया से बोले नंदलाला
राधा क्यूँ गोरी मैं क्यूँ काला
राधा क्यूँ गोरी मैं क्यूँ काला
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Yashomati maiya se bole nandlala-Satyam Shivam Sundaram 1978

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