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Apr 7, 2018

एक दो फेरे बालम संग तेरे-तीन चोर १९७३

आज आपको एक अनूठा गीत सुनवाते हैं. अब ये अनूठा क्यूँ
है ये तो आपको बतलाना ही पड़ेगा. इस गीत का दो गीतकारों
से सम्बन्ध जो है.

गीत में तीन चेहरे आपको दिखलाई देंगे. नायिका के अलावा जो
दो चेहरे हैं उनमें सबसे पहला चेहरा गुलशन बावरा का है. दूसरा
है नायक विनोद मेहरा का.

गीत लिखा है राजेंद्र कृष्ण ने और इसकी धुन तैयार की है
सोनिक ओमी ने जिसे लता मंगेशकर गा रही हैं. तो जनाब हो
गया ना दो गीतकारों का कनेक्शन.




गीत के बोल:

एक दो फेरे बालम संग तेरे कहे तो मैं ले लूं अभी
हाय रे सात पूरे ना होंगे कभी हाय हाय हाय
एक दो फेरे बालम संग तेरे कहे तो मैं ले लूं अभी
हाय रे सात पूरे ना होंगे कभी हाय हाय हाय
एक दो फेरे

सॉरी सॉरी वैरी सॉरी दीवाने से पड़ गया पाला
दीवाना तो दीवाना है अभी इसे निपटा के आई
पेड़ के नीचे फुर्सत से फिर बातें होंगी अभी मैं आई
किसी से ना कहना जो मैं तुझसे कहूँ
लिखा है मेरे हाथ में कुंवारी रहूँ
हाय किसी से ना कहना जो मैं तुझसे कहूँ
लिखा है मेरे हाथ में कुंवारी रहूँ
रेखा सुहाग की है टूटी हुई
किस्मत जनम से है फूटी हुई रे रे रे
एक दो फेरे बालम संग तेरे कहे तो मैं ले लूं अभी
हाय रे सात पूरे ना होंगे कभी हाय हाय हाय
एक दो फेरे

हाय बेचारा प्यार का मारा चक्कर कब से काट रहा है
सूख रहे हैं फिर भी पगला होंठ जुबान से चाट रहा है
अरे रे रे रे फिर आया तुम छुप जाओ छुप जाओ ना
वैसे तेरे प्यार में ये दिल तो जले
के विधि के विधान पे तो बस ना चले
हाय वैसे तेरे प्यार में ये दिल तो जले
के विधि के विधान पे तो बस ना चले
राहू तो कब से है पीछे पड़ा
केतु भी आज मेरे आगे खड़ा

एक दो फेरे बालम संग तेरे कहे तो मैं ले लूं अभी
हाय रे सात पूरे ना होंगे कभी हाय हाय हाय
एक दो फेरे
…………………………………………………………….
Ek do phere-Teen chor 1973

Artists: Zahida, Gulshan Bawra, Vinod Mehra

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May 31, 2016

मन के खज़ाने में माया ही माया-तीन चोर १९७३

आपको एक बिछड़े गीत से मिलवाया था कुछ दिन पहले
सपन जगमोहन का-फिल्म दोराहा से. आज आपको ७० के
दशक के पूर्वार्ध से एक और बिछड़ा गीत सुनवाते हैं जिसे
मैंने लगभग सन ८३ तक आकाशवाणी पर सुना है. उसके
बाद ये कहीं खो सा गया. भजन जैसा गीत है ये.

जिन गीतों ने मेरे मानस पर असर किया ये उनमें से एक
है. वे गीत जिन्हें सुन के उथल पुथल होती है ऐसा कुछ है
पहली बार जब सुना था इसे तब इसमें महिला मंडल की
अलग सी आवाज़ ने मेरा ध्यान आकृष्ट किया था. उसके
बाद तो इसके बोलों और रफ़ी की गायकी ने मुझे इस गीत
का फैन बनाया. हालाँकि सोनिक-ओमी ने इसे ऊंचे स्केल
पर गवाया है और इसके पहले अंतरे का संगीत थोडा लाउड
है.

सोनिक ओमी ने जो बेहतर गीत ऊंची पट्टी पर रफ़ी से गवाया
वो है महुआ का गीत-दोनों ने किया था प्यार. उल्लेखनीय
है महुआ के बाकी गीत पट्टी के थोड़े शांत वाले हिस्से में आते
हैं और कर्णप्रिय हैं.

इस गीत के साथ दो कृष्ण जुड़े हैं-मनमोहन कृष्ण जो इसे परदे
पर गा रहे हैं और दूसरे राजेंद्र कृष्ण जिन्होंने इस गीत को
लिखा है. गौरतलब है पूजा भी मुरलीवाले की ही हो रही है.
मनमोहन कृष्ण के साथ परदे पर सुलोचना लटकर और अभिनेत्री
ज़ाहिदा दिखाई दे रहे हैं. फिल्म के शीर्षक अनुसार तीन
चोर भी इस गीत में आपको दिखाई देंगे-जीवन, ओम प्रकाश और
आई एस जौहर.



गीत के बोल:

मन के खजाने में माया ही माया
जब भी तू चाहे इसे लूट ले
जब भी तू चाहे इसे लूट ले, हरिओम
मन के खजाने में माया ही माया
जब भी तू चाहे इसे लूट ले
जब भी तू चाहे इसे लूट ले, हरिओम

दिखाई न दे जो अँधेरे में ताला
तू ज्योति लगन की जला ले
हो, तू ज्योति लगन की जला ले
दिखाई न दे जो अँधेरे में ताला
तू ज्योति लगन की जला ले
हो, तू ज्योति लगन की जला ले
हे, अगर हाथ कांपें तो हरि नाम ले कर
तू पूजा की कोपी लगा ले
हाँ, तू पूजा की चाबी लगा ले
डराती है क्यूँ तुझे अपनी ही छाया
तेरा ही धन है ये नहीं है पराया
जब भी तू चाहे इसे लूट ले
जब भी तू चाहे इसे लूट ले, हरिओम
कॉपी मत कर
मन के खजाने में माया ही माया
जब भी तू चाहे इसे लूट ले
जब भी तू चाहे इसे लूट ले, हरिओम


कभी हार दाता की होती नहीं है
न जीता कभी लेने वाला
हो न जीता कभी लेने वाला
कभी हार दाता की होती नहीं है
न जीता कभी लेने वाला
हो न जीता कभी लेने वाला
हे, भरेगी न तेरी ये तृष्णा की झोली
थकेगा न वो देने वाला
हाँ, थकेगा न वो देने वाला
उसी ने बनायीं है तेरी ये काया
काया में भक्ति का धन है छुपाया
जब भी तू चाहे इसे लूट ले
जब भी तू चाहे इसे लूट ले, हरिओम

मन के खजाने में माया ही माया
जब भी तू चाहे इसे लूट ले
जब भी तू चाहे इसे लूट ले, हरिओम
................................................................
Manke khazane mein maya-Teen chor 1973

Artists on screen- Manmohan Krishna, Jeevan, IS Johar, Om Prakash, Sulochana Latkar, Zahida

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