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Aug 17, 2017

मेहंदी है रचने वाली-ज़ुबैदा २०००

अलका याग्निक ने ऐ आर रहमान के संगीत निर्देशन में
कुछ ही गीत ही गाये हैं. फिल्म ज़ुबैदा में उनके गाये २
गीत हैं. एक युगल गीत आप सुन चुके हैं पहले जो उदित
के साथ गाया हुआ है. अब सुनते हैं शादी के अवसर पर
बजाय जाने वाला एक लोकप्रिय गीत.

जावेद अख्तर इस गीत के रचयिता हैं और संगीतकार का
नाम हम आपको पोस्ट की सबसे पहली पंक्ति में बतला ही
चुके हैं. ये बन्ना और बन्नी एनवायरनमेंट फ्रेंडली जंतु होते
हैं इसलिए उन्हें हरियाला और हरियाली कह कर बुलाया
जाता है.



गीत के बोल:

मेहंदी है रचने वाली हाथों में गहरी लाली
कहें सखियां अब कलियां हाथों में खिलने वाली हैं
तेरे मन को जीवन को नई ख़ुशियां मिलने वाली हैं

हो हरियाली बन्नो
ले जाने तुझको गुईयां
आने वाले हैं सैयां
थामेंगे आ के बईयां
गूंजेगी शहनाई
अंगनाई अंगनाई

मेहंदी है रचने वाली हाथों में गहरी लाली
कहें सखियां अब कलियां हाथों में खिलने वाली हैं
तेरे मन को जीवन को नई ख़ुशियां मिलने वाली हैं

गायें मईया और मौसी गायें बहना और भाभी
के मेहंदी खिल जाये रंग लाये हरियाली बन्नी
गायें फूफी और चाची गायें नानी और दादी
के मेहंदी मन भाये सज जाये हरियाली बन्नी
मेहंदी रूप संवारे हो मेहंदी रंग निखारे हो
हरियाली बन्नी के आंचल में उतरेंगे तारे

मेहंदी है रचने वाली हाथों में गहरी लाली
कहें सखियां अब कलियां हाथों में खिलने वाली हैं
तेरे मन को जीवन को नई ख़ुशियां मिलने वाली हैं

गाजे  बाजे  बाराती  घोड़ा  गाड़ी और हाथी को
लायेंगे साजन  तेरे आंगन  हरियाली बन्नी
तेरी मेहंदी वो देखेंगे तो  अपना दिल रख देंगे वो
पैरों में तेरी चुपके से  हरियाली बन्नी
मेहंदी रूप संवारे  ओ मेहंदी रंग निखारे हो
हरियाली बन्नी के आंचल में उतरेंगे तारे

मेहंदी है रचने वाली हाथों में गहरी लाली
कहें सखियां अब कलियां हाथों में खिलने वाली हैं
तेरे मन को जीवन को नई ख़ुशियां मिलने वाली हैं
……………………………………………………
Mehndi hai rachne wali-Zubeida 2000

Artist: Karishma Kapoor

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Apr 13, 2015

बदला दिलवाएगा या रब-आलमआरा १९३१

बोलती हिंदी फिल्मों का युग आलम-आरा से शुरू हुआ था.
इस फिल्म में मास्टर विट्ठल, जुबैदा और जिल्लू नाम के
कलाकारों के अलावा पृथ्वीराज कपूर भी इस पहली बोलती
फिल्म में मौजूद थे. उस समय फिल्म के कलाकार ही गीत
गाया करते थे. इस फिल्म की नायिका जुबैदा का गाया एक
गीत पेश है आज. फिरोज शाह मिस्त्री ने इस फिल्म में संगीत
दिया था. उनके साथ बी. ईरानी साहब भी हैं जिन्हें संगीत
में श्रेय दिया जाता है.

फिल्म के गीत उपलब्ध नहीं हैं सुनने के लिए. इसका कोई
रेकोर्ड एल पी नहीं बना था. फिल्म देखने हेतु भी उपलब्ध
नहीं है. इसके सभी प्रिंट समय की मार के साथ नष्ट हो चुके
हैं. बस आप गीत पढ़ पढ़ कर आनंद ले सकते हैं. दूरदर्शन
समाचार द्वारा एक क्लिप है जिसमें कुछ जानकारी है फिल्म के
बारे में, इसे ही सुन लिया जाए.




गीत के बोल:

बदला दिलवाएगा या रब तू सितमगारों से
तू मददगार है तो क्या खौफ है ज़फाकारों से
काठ की तेग जो तू चाहे तो वो काम करे
जो के मुमकिन ही नहीं लोहे की तलवारों से

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Nov 27, 2009

है ना ....गा तू दिल के तारों पे -ज़ुबैदा २०००

श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित ये फ़िल्म २००० में आई थी ।
ये फ़िल्म ज्यादा नहीं चली। फ़िल्म के पोस्टर पर अगर
अमरीश पुरी और रेखा के चित्र होते तो शायद ये थोड़े बहुत
दर्शक और खींच सकती थी। आश्चर्य है कि पब्लिसिटी और प्रचार
के दिग्गज कभी कभी कैसे कारनामे करते हैं। मनोज वाजपई
की तस्वीर देख के आम दर्शक ने यही अंदाज़ा लगाया होगा कि
ये एक आर्ट फ़िल्म है।

इस फ़िल्म के कुछ दूसरे पहलू हैं जिन पर गौर किया जाए।
मनोज वाजपई मुख्या धारा के सिनेमा में आ गए. इसके
अलावा करिश्मा कपूर भी खटिया पटिया गीतों से अलग
एक थोड़ी बेहतर भूमिका में दिखाई दीं। इस फ़िल्म के गीत
जावेद अख्तर द्वारा लिखे गए और उनका संगीत तैयार किया है
ऐ आर रहमान ने. फ़िल्म के ३-४ गीत सुनने लायक है और ये गीत
उनमे से एक है. ऐ आर रहमान पुराने प्रतिभाशाली संगीतकारों
की याद दिलाते हैं जो वाद्य यंत्रों के प्रयोग में सिद्धहस्त थे ।



गाने के बोल:

महकी महकी है राहें
बहकी बहकी हैं निगाहें,
है ना

हाय रे, हाय रे, हाय रे, हाय रे
घेरे हैं जो ये बाहें
पी है मैंने पनाहें है न
है ना
हाय रे, हाय रे, हाय रे, हाय रे

गा तू दिल के तारों पे गा
गीत ऐसा कोई नया
जो ज़िन्दगी में कभी हो न पहले सुना

पलकों पे सपने सजा
सपनों में जादू जगा आया
तू मेरी राहों में चाहत की शम्मे जला

महकी महकी हैं रहें
बहकी बहकी हैं निगाहें है न
हाय रे, हाय रे, हाय रे, हाय रे

मेरे दिल ने तोहफा ये तुमसे पाए
धुप के ग़म के तुम लाये साए
मेरे दिल ने तोहफा ये तुमसे पाए
धुप के ग़म के तुम लाये साए

मेरी अब जो भी खुशी है
मुझे तुम से ही मिली है
सुनो न ……………

तुम्ही वो चांदनी हो जो
मेरी नज़रों में खिली है
कहीं ये तो नहीं हैं वो जो मुझको देखती हैं पिया
जो भी हूँ तेरी हूँ, बस येही गुण है मेरा
जो भी हूँ तेरी हूँ, बस येही गुण है मेरा

ग तू दिल के तारों पे ग
गीत ऐसा कोई नया
जो ज़िन्दगी में कभी हो ना पहले सुना
आ,पलकों पे सपने सजा
सपनों में जादू जगा आया
तू मेरी राहों में चाहत की शम्मे जला

दिल की ये जिद है
दिल का यह कहना
साथ तुम्हारे इसको है रहना
हो,दिल की ये जिद है
दिल का यह कहना
साथ तुम्हारे इसको है रहना

चलो कहीं दूर ही जाएँ
नै एक दुनिया बसायें
सुनो ना

वहां बस मैं और तुम हो
मोहब्बत में हम गुम हों
अब हो उल्झन कोई
अब हो बंधन कोई
हो सकते नही हम जुदा
ये तेरा ये मेरा
आखरी है फ़ैसला
ये तेरा ये मेरा
आखरी है फ़ैसला

हम्म...........हाय रे, हाय रे, हाय रे
हाय रे, हाय रे,
................................................................
Hai na........ gaa too dil ke taaron pe-Zubedia 2000

Artists: Manoj Bajpai, Karishma Kapoor

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Oct 26, 2009

मैं अलबेली -जुबैदा २०००

एक राजस्थानी लोक कलाकार अगर किसी आधुनिक दक्षिण भारतीय
धुन पर नाचे तो कैसा लगेगा, समझने के लिए, आइये इस गीत पर
गौर करें। ये गीत फ़िल्म जुबैदा का सबसे अनूठा गीत है। नृत्य
बढ़िया है और संगीत भी, मगर एक दूसरे पर फिट नहीं बैठ रहे हैं।

पीरियड फिल्मों में उस समय से मिलता जुलता खाका तैयार करना
पढता है। इस गीत में वेशभूषा और नृत्य भले ही पुराने ज़माने के लगते
हों मगर धुन मॉडर्न सुनाई देती है। कविता कृष्णमूर्ति का गाया हुआ
ये गीत कर्णप्रिय है और इसमे जगह जगह पर सुखविंदर सिंह की
आवाज़ की खूबसूरत मिलावट है। जुबैदा फ़िल्म के गीतों में से सबसे
ज्यादा मैंने इसको ही सुना है।



गाने के बोल:

रंगीली हो, सजीली हो
रंगीली हो, सजीली हो
अलबेली ओ, अलबेली ओ

मैं अलबेली
घूमों अकेली
कोई पहेली हूँ मैं

हो,मैं अलबेली
घूमों अकेली
कोई पहेली हूँ मैं

पगली हवाएं जहाँ भी ले जाएँ मुझे
इन हवाओं की सहेली हूँ मैं

तू है रंगीली हो, तू है सजीली हो

हिरनी हूँ बन में
कली हूँ गुलशन में
शबनम कभी हूँ मैं
कभी हूँ शोला

शाम और सवेरे सौ रंग मेरे
मैं भी नहीं जानूं आखिर हूँ मैं क्या

तू अलबेली, घूमे अकेली, कोई पहेली
पहेली.....

मेरे हिस्से में हैं आई कैसी बेताबियाँ
मेरा दिल घबराता है मैं जाऊं चाहे जहाँ

हम्म हम्म
मेरे हिस्से में हैं आई कैसी बेताबियाँ
मेरा दिल घबराता है मैं जाऊं चाहे जहाँ

मेरी बेचैनी ले जाए मुझको जाने कहाँ
मैं एक पल हूँ यहाँ
मैं एक पल हूँ यहाँ, मैं हूँ एक पल वहां
तू बावली है, तू मंचल है
सपनों की है दुनिया जिसमे तू है पली

मैं अलबेली
घूमों अकेली
कोई पहेली हूँ मैं

अलबेली हो

मैं अलबेली
घूमों अकेली
कोई पहेली हूँ मैं

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Oct 17, 2009

धीमे धीमे गाऊँ-जुबैदा २०००

कर्णप्रिय गीत २००० के आसपास बहुतेरे आए जिनसे ये
उम्मीद बंधी कि भारतीय सिने संगीत का भविष्य उज्जवल
है। इसी कड़ी में अगला गीत है फ़िल्म जुबैदा का जो सन २०००
में आई। थोडी लीक से हटकर बनी फ़िल्म बॉक्स ऑफिस
की पटरी से थोडी जल्दी उतर गई। इसमे समानांतर सिनेमा
के कलाकार जो मुख्य धारा के सिनेमा में अपनी पैठ बनाने
की कोशिश में थे -मनोज वाजपेयी और उस समय की चोटी
की अभिनेत्री करिश्मा कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं।

इस फ़िल्म का संगीत बिना ध्यानाकर्षण के गुल नहीं हुआ।
शौकीनों ने इसके ऑडियो केसेट और सी. डी. बहुत ख़रीदे।
इस फ़िल्म में संगीत ऐ. आर. रहमान का है ।

ये जो गीत है -'धीमे धीमे गाऊँ' ये कविता कृष्णामूर्ति ने गाया
है । इस गाने की क्लेरिटी गज़ब की है। ए आर रहमान का वाद्य
संयोजन बेहतरीन है और वही उनको उनके समकालीनों से
अलग करता है।




गाने के बोल
:

धीमे धीमे गाऊँ
धीरे धीरे गाऊँ
हौले हौले गाऊँ
तेरे लिए पिया
गुन गुन मैं गाती जाऊं
छुन छुन पायल छनकाऊँ
सुन सुन कब से दोहराऊँ
पिया पिया ….

गुलशन महके महके
ये मन बहके बहके
और तन दहके दहके
क्यों है बता पिया
मन की जो हालत है
तन की जो रंगत है ये
तेरी मोहब्बत है ये
पिया पिया पिया

गुन गुन मैं गाती जाऊं ….

पिया पिया, हो .....
जिंदगी में तू आया तो
धूप में मिला साया तो
जागे नसीब मेरे, हो .....
अनहोनी को था होना
धूल बन गई है सोना
आके करीब तेरे, हो .......
प्यार से मुझको तूने छुआ है
रूप सुनहरा तब से हुआ है
कहूं और क्या तुझे मैं पिया,हो ….

तेरी निगाहों में हूँ
तेरी ही बाँहों में हूँ
ख्वाबों की राहों में हूँ
पिया पिया पिया ….

गुन गुन मैं गाती जाऊं ….

मैंने जो खुशी पायी है
झूम के जो रुत आई है
बदले न रुत वो कभी हो .....
दिल को देवता जो लागे
सर झुका है जिसके आगे
टूटे न बुत वो कभी हो......
कितनी है मीठी कितनी सुहानी
तूने सुनाई है जो कहानी
मैं जो खो गई, नई हो गई, हो हो ......

आंखों में तारे चमके
रातों में जुगनू दमकें
मिट गए निशान गम के
पिया पिया पिया …

गुन गुन मैं गाती जाऊं
छुन छुन पायल छनकाऊँ
सुन सुन कब से दोहराऊँ
पिया पिया ….
.................................
Dheeme dheeme gaoon-Zubeida 2000

Artists: Manoj Bajpai, Karishma Kapoor

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