Apr 12, 2015

अकेले हैं तो क्या गम है-क़यामत से क़यामत तक १९८८

फिल्म ‘क़यामत से क़यामत तक’ से आपको तीन गीत
सुनवाए हैं जानकारियों के साथ साथ. अब सुनते हैं इस
१९८८ की ब्लाक-बस्टर फिल्म से चौथा गीत. इसके पहले
थोड़ी सी जानकारी साझा की जाए.

आमिर खान इसके पहले भी फिल्म उद्योग को अपनी सेवाएं
दे चुके थे. बतौर्बाल कलाकार वे सबसे पहले फिल्म यादों की
बरात में दिखलाई दिए. उसके बाद वे फिल्म मदहोश(१९७४)
में दिकाई दिए. खान एक प्रयोगधर्मी फिल्म-पैरानोयिया में
विक्टर बैनर्जी और नीना गुप्त के साथ दिखे. इस फिल्म के
बाद उनमें अभिनाय के कीड़े कुलबुलाए.

अभी समय था थोडा उनके नायक बनने में. नासिर हुसैन की
दो फिल्मों में उन्होंने सहायक के रूप में काम किया-ज़बरदस्त
और मंजिल मंजिल. दोनों फिल्मों में सनी देवल अभिनेता के
रूप में मौजूद हैं. ज़बरदस्त बहुसितारा फिल्म है जिसमें सनी
के साथ एक और नायक राजीव कपूर भी हैं. 

उसके बाद वे एक प्रयोगात्मक फिल्म होली में दिखाई दिए.
बतौर नायक उनकी पहली फिल्म क़यामत से क़यामत तक
है. फिल्म बेहद सफल रही और उनके लिए आवाज़ देने वाले
उदित नारायण के लिए भी सुनहरा अवसर साबित हुयी. फिल्म
का गीत “पापा कहते हैं” ज़बरदस्त हिट हुआ.

इस फिल्म की अभिनेत्री जिनकी सन १९८६ में आई सल्तनत
कोई कमाल नहीं दिखा पायी थी, उनके फ़िल्मी कैरियर को भी
इस फिल्म से रफ़्तार मिली-जूही चावला. चित्रगुप्त पुत्र जो इस
फिल्म के पहले तक सहायक संगीत निर्देशक के तौर पर कई
संगीतकारों को सेवाएं देते आ रहे थे, उनका बतौर स्वतंत्र संगीत
निर्देशक कैरियर उड़ान भरने लगा और ९० के दशक में वे सबसे
ज्यादा व्यस्त संगीतकार बने.

ये तय है इस फिल्म के बाद बॉलीवुड के दिशा बदली जो कुछ
असमंजस जैसी स्तिथि में थी ८० के दशक के शुरूआती दौर में.
सन १९८८ के बाद रोमांटिक फिल्मों की झड़ी सी लग गयी और
नए चेहरों पर दांव खेलने की बॉलीवुड के निर्माता-निर्देशकों की
हिम्मत भी बढ़ी.


 
गीत के बोल:

अकेले हैं, तो क्या ग़म है
चाहें तो हमारे बस में क्या नहीं
बस इक ज़रा, साथ हो तेरा
तेरे तो हैं हम, कब से सनम
   
अकेले हैं, तो क्या ग़म है

अब ये नहीं सपना, ये सब है अपना
ये जहाँ, प्यार का
छोटा सा ये आशियाँ बहार का
बस इक ज़रा, साथ हो तेरा
तेरे तो हैं हम, कब से सनम
   
अकेले हैं, तो क्या ग़म है

फिर नहीं टूटेगा, हम पे कोई तूफां
साजना, देखना
हर तूफ़ां का मैं करूंगी सामना
बस इक ज़रा, साथ हो तेरा
तेरे तो हैं हम, कब से सनम
   
अकेले हैं, तो क्या ग़म है

अब तो मेरे साजन बीतेगा हर दिन
प्यार की, बाहों में
रंग जाएगी रुत तेरी अदाओं में
बस इक ज़रा, साथ हो तेरा
तेरे तो हैं हम, कब से सनम
   
अकेले हैं, तो क्या ग़म है
....................................................
Akele Hain To Kya Gam Hai- Qayamat Se Qayamat Tak 1988

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