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Jan 26, 2016

काहे सताये- क़यामत से क़यामत तक १९८८

१९८८ का फिल्म से एक छोटा कर्णप्रिय गीत पेश है
आज. इसे अलका याग्निक ने गाया है. परदे पर इसे
जूही चावला पर फिल्माया गया है. फिल्म है सन १९८८
की क़यामत से क़यामत तक. सन १९८३ की लव स्टोरी
के बाद कुछ ऐसा कथानक दर्शकों को देखने को नहीं
मिला था. इस फिल्म को जनता ने हाथों-हाथ लिया
और तबियत से देखा, सराहा.

मजरूह के बोलों को संगीत में ढाला है आनंद मिलिंद
ने. ऐसे छोटे गीत अमूमन कम फिल्मों में देखने को
मिलते हैं. इनका ज्यादा जिक्र भी नहीं होता, ना ही
ये रेडियो वगैरह पर बजते मिलेंगे आपको. हाँ, आंकड़ों
के उद्देश्य से इनकी गिनती कर ली जाती है. अलका
याग्निक द्वारा गाया हुआ ये संभवतः सबसे छोटा गीत
है.

नायिका नायक को कोस रही है और उसका असर भी
दिख रहा है गीत में. ये रूठना थोड़ी देर का ही है
उसके बाद नायिका शिकायत खत्म कर के हल्का सा
मुस्कुरा के सही जगह पहुँच जाती है. 



गीत के बोल:

काहे सताए काहे को रुलाये
राम करे तुझको नींद न आये
राम करे तुझको नींद न आये
............................................................
Kaahe sataye-Qayamat se qayamat tak 1988

Artists on screen-Aamir Khan, Juhi Chawla

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Apr 12, 2015

अकेले हैं तो क्या गम है-क़यामत से क़यामत तक १९८८

फिल्म ‘क़यामत से क़यामत तक’ से आपको तीन गीत
सुनवाए हैं जानकारियों के साथ साथ. अब सुनते हैं इस
१९८८ की ब्लाक-बस्टर फिल्म से चौथा गीत. इसके पहले
थोड़ी सी जानकारी साझा की जाए.

आमिर खान इसके पहले भी फिल्म उद्योग को अपनी सेवाएं
दे चुके थे. बतौर्बाल कलाकार वे सबसे पहले फिल्म यादों की
बरात में दिखलाई दिए. उसके बाद वे फिल्म मदहोश(१९७४)
में दिकाई दिए. खान एक प्रयोगधर्मी फिल्म-पैरानोयिया में
विक्टर बैनर्जी और नीना गुप्त के साथ दिखे. इस फिल्म के
बाद उनमें अभिनाय के कीड़े कुलबुलाए.

अभी समय था थोडा उनके नायक बनने में. नासिर हुसैन की
दो फिल्मों में उन्होंने सहायक के रूप में काम किया-ज़बरदस्त
और मंजिल मंजिल. दोनों फिल्मों में सनी देवल अभिनेता के
रूप में मौजूद हैं. ज़बरदस्त बहुसितारा फिल्म है जिसमें सनी
के साथ एक और नायक राजीव कपूर भी हैं. 

उसके बाद वे एक प्रयोगात्मक फिल्म होली में दिखाई दिए.
बतौर नायक उनकी पहली फिल्म क़यामत से क़यामत तक
है. फिल्म बेहद सफल रही और उनके लिए आवाज़ देने वाले
उदित नारायण के लिए भी सुनहरा अवसर साबित हुयी. फिल्म
का गीत “पापा कहते हैं” ज़बरदस्त हिट हुआ.

इस फिल्म की अभिनेत्री जिनकी सन १९८६ में आई सल्तनत
कोई कमाल नहीं दिखा पायी थी, उनके फ़िल्मी कैरियर को भी
इस फिल्म से रफ़्तार मिली-जूही चावला. चित्रगुप्त पुत्र जो इस
फिल्म के पहले तक सहायक संगीत निर्देशक के तौर पर कई
संगीतकारों को सेवाएं देते आ रहे थे, उनका बतौर स्वतंत्र संगीत
निर्देशक कैरियर उड़ान भरने लगा और ९० के दशक में वे सबसे
ज्यादा व्यस्त संगीतकार बने.

ये तय है इस फिल्म के बाद बॉलीवुड के दिशा बदली जो कुछ
असमंजस जैसी स्तिथि में थी ८० के दशक के शुरूआती दौर में.
सन १९८८ के बाद रोमांटिक फिल्मों की झड़ी सी लग गयी और
नए चेहरों पर दांव खेलने की बॉलीवुड के निर्माता-निर्देशकों की
हिम्मत भी बढ़ी.


 
गीत के बोल:

अकेले हैं, तो क्या ग़म है
चाहें तो हमारे बस में क्या नहीं
बस इक ज़रा, साथ हो तेरा
तेरे तो हैं हम, कब से सनम
   
अकेले हैं, तो क्या ग़म है

अब ये नहीं सपना, ये सब है अपना
ये जहाँ, प्यार का
छोटा सा ये आशियाँ बहार का
बस इक ज़रा, साथ हो तेरा
तेरे तो हैं हम, कब से सनम
   
अकेले हैं, तो क्या ग़म है

फिर नहीं टूटेगा, हम पे कोई तूफां
साजना, देखना
हर तूफ़ां का मैं करूंगी सामना
बस इक ज़रा, साथ हो तेरा
तेरे तो हैं हम, कब से सनम
   
अकेले हैं, तो क्या ग़म है

अब तो मेरे साजन बीतेगा हर दिन
प्यार की, बाहों में
रंग जाएगी रुत तेरी अदाओं में
बस इक ज़रा, साथ हो तेरा
तेरे तो हैं हम, कब से सनम
   
अकेले हैं, तो क्या ग़म है
....................................................
Akele Hain To Kya Gam Hai- Qayamat Se Qayamat Tak 1988

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Apr 7, 2015

गज़ब का ये दिन-क़यामत से क़यामत तक १९८८

कुछ नए चेहरे जो आगे चल के बॉलीवुड के बेहतरीन
कलाकार बनने वाले हैं. आइये चलें सन १९८८ में
जब फिल्म क़यामत से क़यामत तक आई थी.
८० के दशक ने कई सितारा पुत्र पुत्रियां देखे जिनमे
से बहुत कम सफलता की सीढियां चढ पाए. इस
दशक की शुरुआत में हमने राजेंद्र कुमार पुत्र का
पदार्पण देखा फिल्म लव स्टोरी में, उसी के आस-पास
सुनील दत्त पुत्र संजय भी रुपहले परदे पर आये. दोनों
की लॉन्च फ़िल्में उनके पिताओं ने बनाईं. फिर आये
सनी देवल जिन्हें धर्मेन्द्र ने लॉन्च किया राहुल रवैल के
निर्देशन में फिल्म बेताब(१९८३) में. उसके बाद दिखे
शशि कपूर पुत्र करन, फिल्म सल्तनत(१९८६) में जो
फिल्मों के बजाये अपने बॉम्बे डाईंग के विज्ञापन के लिए
ज्यादा जाने गए.

फिल्म क़यामत से क़यामत तक के लिए गीतकार मजरूह
के लिखे गीत बेहद पसंद किये गए. लोगों को इनके बोल
याद हो गए अच्छे से, विशेषकर युवा पीढ़ी को. संगीतकार
जोड़ी आनंद मिलिंद की ये पहली फिल्म है. फिल्म से कई
लोगों को ब्रेक मिला. कईयों को सस्पेंशन मिले, कईयों के
कैरियर को एक्स्सेलरेटर मिले तो कईयों की गाडी आगे के
गियर में पहुँच गयी. कुल मिला के इस फिल्म ने कईयों
का कैरियर संवारने में अहम योगदान दिया.

ताहिर हुसैन के पुत्र आमिर को ब्रेक उनके ताऊ ने दिया
इस फिल्म से में, जो नासिर हुसैन के पुत्र मंसूर की बतौर
निर्देशक पहली फिल्म है. फिल्म पर आगे और चर्चा करेंगे.



गीत के बोल:

ग़ज़ब का है दिन, सोचो ज़रा
ये दीवानापन, देखो ज़रा
तुम हो अकेले, हम भी अकेले
मज़ा आ रहा है, क़सम से

ग़ज़ब का है दिन

देख लो हमको करीब से
आज हम मिले हैं नसीब से
ये पल फिर कहाँ
और ये मंज़िल फिर कहाँ

ग़ज़ब का है दिन

क्या कहूँ, मेरा जो हाल है
रात दिन, तुम्हारा खयाल है
फिर भी, जान-ए-जां
मैं कहाँ और तुम कहाँ

ग़ज़ब का है दिन, सोचो ज़रा
ये दीवानापन, देखो ज़रा
तुम हो अकेले, हम भी अकेले
मज़ा आ रहा है, क़सम से
............................................
Gazab ka ye din-QSQT

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Jun 20, 2009

ए मेरे हमसफ़र- क़यामत से क़यामत तक १९८८

सुनते हैं १९८८ का एक कर्णप्रिय युगल गीत। फिल्म का नाम है
क़यामत से क़यामत तक। बिलकुल नए चेहरे और नए गायक।
मजरूह सुल्तानपुरी के बोलों को नए संगीतकारों ने सुरों में पिरोया
है नयी जोड़ी-आनंद मिलिंद ने। ये गीत आज भी रेडियो चैनल पर
सुनाई दे जाता है कभी कभी। आमिर खान और जूही चावला
पर ये गीत फिल्माया गया है और इसे गाया है उदित नारायण
एवं अलका याग्निक ने। बार बार वही प्यार इश्क और मोहब्बत
शब्दों का इस्तेमाल होने के बावजूद हर गीत नयी रेसिपी की तरह
लगता है। है ना जी ;)



गीत के बोल:

ऐ मेरे हमसफ़र, इक ज़रा इन्तज़ार
सुन सदाएं, दे रही है, मंज़िल प्यार की

ऐ मेरे हमसफ़र, इक ज़रा इन्तज़ार
सुन सदाएं, दे रही है, मंज़िल प्यार की

अब है जुदाई का मौसम, दो पल का मेहमान
कैसे ना जाएगा अंधेरा, क्यूँ ना थमेगा तूफ़ान

अब है जुदाई का मौसम, दो पल का मेहमान
कैसे ना जाएगा अंधेरा, क्यूँ ना थमेगा तूफ़ान
कैसे ना मिलेगी, मंजिल प्यार की

ऐ मेरे हमसफ़र, इक ज़रा इन्तज़ार
सुन सदाएं, दे रही है, मंज़िल प्यार की

प्यार ने जहाँ पे रखा है, झूम के कदम इक बार
वहीं से खुला है कोई रस्ता, वहीं से गिरी है दीवार

प्यार ने जहाँ पे रखा है, झूम के कदम इक बार
वहीं से खुला है कोई रस्ता, वहीं से गिरी है दीवार
रोके कब रुकी है, मंज़िल प्यार की

ऐ मेरे हमसफ़र, इक ज़रा इन्तज़ार
सुन सदाएं, दे रही है, मंज़िल प्यार की
......................................................................
Ae mere hamsafar-QSQT   1988

Artists-Aamir Khan, Juhi Chawla

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Mar 25, 2009

पापा कहते हैं बड़ा नाम-क़यामत से क़यामत तक १९८८

क़यामत से क़यामत तक फ़िल्म से एक नया दौर शुरू हुआ.
आप सोच रहे होंगे कौनसा और कैसा दौर. बहुत अरसे के
बाद किसी फ़िल्म को ऐसे पहचाना गया-QSQT. उसके
बाद दौर चल गया लंबे नाम वाली फ़िल्म की ऐसे संक्षिप्त नाम
देकर पहचानने का । आमिर खान की पहली फ़िल्म जो एक
बड़ी हिट फ़िल्म साबित हुई।

नासिर हुसैन के बैनर की काफ़ी अरसे के बाद कोई फ़िल्म हिट
हुई। फ़िल्म ने ६ फ़िल्म फेयर पुरस्कार जीते । सर्वश्रेष्ठ संगीतकार
और गायक का पुरस्कार क्रमशः आनंद-मिलिंद और उदित नारायण
ने जीता। उसके अलावा मिले पुरस्कारों में स्क्रीन प्ले के लिए
नासिर हुसैन को भी पुरस्कार प्राप्त हुआ।

आइये सुनें वही फ़िल्म फेयर विजेता गीत। गीत ध्यान से देखिये।
इस कॉलेज का नाम एक और फ़िल्म में आने वाला है आगे चल
कर एक इसी बैनर की फ़िल्म में आमिर खान नायक हैं ।



गीत के बोल:

दोस्तों, सबसे पहले तो शुक्रिया सेकण्ड इयर स्टूडेंट्स का
जिन्होंने हम फ़ायनल ईयर स्टुडेंट्स के लिए ये शानदार पार्टी दी है।

थैंक्स अ लोट वी विल मिस यू।

हमारे लिए ये कॉलेज का ये आखरी दिन है और मैं ये जानता हूँ
आने वाली ज़िन्दगी के लिए सभी ने कुछ ना कुछ सोच रखा है।
लेकिन मैंने अपने लिए कुछ नहीं सोचा है और आज ,आज मुझे
यही ख्याल आता है ।

पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा
बेटा हमारा ऐसा काम करेगा
मगर ये तो, कोई ना जाने
के मेरी मंज़िल, है कहाँ

बैठे हैं मिलके, सब यार अपने
सबके दिलों में, अरमां ये है
वो ज़िन्दगी में, कल क्या बनेगा
हर इक नजर का, सपना ये है
कोई इंजिनियर का काम करेगा
बिज़नस में कोई अपना नाम करेगा,

मगर ये तो, कोई ना जाने
के मेरी मंज़िल, है कहाँ

मेरा तो सपना, है एक चेहरा
देखे जो उसको, झूमे बहार
गालों में खिलती, कलियों का मौसम
आँखों में जादू, होठों में प्यार
बन्दा ये खूबसूरत काम करेगा
दिल की दुनिया में अपना नाम करेगा,

मगर ये तो, कोई ना जाने
के मेरी मंज़िल, है कहाँ
.....................................................
Papa kehte hain-Qayamt se qayamat tak 1988

Artist: Aamir Khan

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