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Apr 3, 2020

पत्थर क्या मारते हो-दरियादिल १९८८

सन १९८८ की क्लासिक फिल्म दरियादिल से एक गीत
सुनते हैं. किसके दरिया और किसके दिल की बात है
फिल्म के शीर्षक में आपको समझना पड़ेगा फिल्म को
देख के.

संगीतकार जब लंबा समय बॉलीवुड में गुज़ार लेते हैं
तब उनके संगीत में ठहराव सा आने लगता है और नया
सा कुछ ढूँढना पड़ता है उनके संगीत में. इसकी एक वजह
बैटरी का धीमे धीमे चुकते जाना और अपनी मर्जी के
हिसाब से काम न कर पाना. सिचुएशन के मांग पूरी
करते करते उनकी क्रियेटिविटी कहीं गम होने लगती है.

एक अलग हट के गीत है दरियादिल फिल्म में जिसमें
नायक नायिका और विलन के अलावा ढेर सारे कलाकार
हैं. मनोरंजक गीत है. इन्दीवर इसके रचयिता हैं और
राजेश रोशन धुन बनाने वाले.



गीत के बोल:

काटा हमारा पानी ना माँगे
हम वो साँप है काले
आज तू बच के जा ना सकेगा
चाहे तू पुलिस बुला ले
आज तू बच के जा ना सकेगा
चाहे तू पुलिस बुला ले

काटा हमारा पानी ना माँगे
हम वो साँप है काले
काटा हमारा पानी ना माँगे
हम वो साँप है काले
आज तू बच के जा ना सकेगा
चाहे तू पुलिस बुला ले
आज तू बच के जा ना सकेगा
चाहे तू पुलिस बुला ले

अरे अरे अरे इनसे क्या लड़ रहे हो
ये तो मर्द हैं, पहले इनसे तो निपटो
ऐ हलीमा ऐ मीना ऐ सलमा अरे चिकने
छोरों की महफ़िल लगी है रे, जल्दी आ जल्दी आ
हाय हाय हमसे निपटो री हमसे निपटो
हाय हाय निपटो नहीं रे लिपटो लिपटो
खबरदार
अगर किसी ने एक कदम भी आगे बढ़ाया
तो हाय हाय क्या कर लेगा हमारा
तो फोड दूंगा
क्या फोड़ेगा
सर

पत्थर क्या मारते हो
पत्थर क्या मारते हो पहाड़ मार दो
पहाड़ मार दो
हम तो यूं ही मारे जायेंगे
एक बार आँख मार दो
एक बार आँख मार दो
हाँ हाँ मार दो ना
पत्थर क्या मारते हो पहाड़ मार दो
पहाड़ मार दो
हम तो यूं ही मारे जायेंगे
एक बार आँख मार दो
एक बार आँख मार दो
हाँ हाँ मार दो ना

हम भी हैं जिद के पक्के
मारेंगे इतने धक्के
के होश तुम्हारे उड़ा देंगे
अजी छक्के भी छक्के छुड़ा देंगे
अजी छक्के भी छक्के छुड़ा देंगे
हाय हाय लातों के भूत है रे
हाय हाय लातों के भूत है रे
बातो से कब ये मानते हैं

पत्थर क्या मारते हो पहाड़ मार दो
पहाड़ मार दो
हम तो यूं ही मारे जायेंगे
एक बार आँख मार दो
एक बार आँख मार दो
हाँ हाँ मार दो ना

ओ हो हो हो
बेईमानी का शहर औरों का माल मारा
टुकड़े हमारे ही खाते हो
हमको ही अकड़ क्या दिखाते हो
हमको ही अकड़ क्या दिखाते हो
हाय हाय तुम शामिल हो जाओ हम में
हाय हाय तुम शामिल हो जाओ हम में
बाहर तुम काहे को जाते हो

पत्थर क्या मारते हो पहाड़ मार दो
पहाड़ मार दो
हम तो यूं ही मारे जायेंगे
एक बार आँख मार दो
एक बार आँख मार दो
हाँ हाँ मार दो ना
पत्थर क्या मारते हो पहाड़ मार दो
पहाड़ मार दो
हम तो यूं ही मारे जायेंगे
एक बार आँख मार दो
एक बार आँख मार दो
हाँ हाँ मार दो ना बहन

हे इसे बिंदी लगा दो हां जी
काजल भी लगा दो हां जी
पाउडर भी लगा दो हां जी
ज़रा लाली लगा दो हां जी
चूड़ी तो पहना दो हां जी
घुंघरू भी पहना दो हां जी
झुमके भी ला दो हां जी
अब साड़ी पहना दो हां जी
ए बहन रेडी रेडी
एक दो तीन चार

सज के आया मेरा यार हमारी बिरादरी में
सज के आया मेरा यार हमारी बिरादरी में
गोरी तेरे नखरे की गजब है बात
गोरी तेरे नखरे की गजब है बात
गोरी तेरे नखरे की हाँ हाँ हाँ
गोरी तेरे नखरे की गजब है बात
चंदा जैसा मुखड़ा किरण जैसे हाथ
सज के आया मेरा यार हमारी बिरादरी में
सज के आया मेरा यार हमारी बिरादरी में
इसे गधा पे बिठा दो
……………………………………………..
Patthar kya maarte ho-Dariyadil 1988

Artists: Kimi Katkar, Govinda, Gulshan Grover

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Mar 28, 2020

चोरी चोरी छुपे छुपे घर मेरे-सोने पे सुहागा १९८८

कभी कभी किसी कलाकार के एक्सप्रेशन किसी दूसरे कलाकार
की याद दिलाते हैं. किस गीत में कौन सा सिम्बल छुपा हो
मालूम नहीं.

बप्पी को जीतू भाई की फिल्मों के लिए काफी गाने कम्पोज़
करने का मौका मिला. कम्पोज़ से याद आया कि डि-कम्पोज़
इसकी बिलकुल उलट प्रक्रिया है. दिमाग का दही बनाना और
उसका रायता फैलाना दो अलग अलग चीज़ें हैं.

हम भटक गए क्या, कमिंग बैक टू द पॉइंट-गीत के शुरू में
जो मुद्राएँ बनाई गयी हैं वो जीतेंद्र और उनकी अभिनेत्रियों की
याद दिलाती हैं. फिर नायक लगाता है एक जोर का जंप.
जम्पिंग जैक की याद ताज़ा कराने के लिए. याद क्या दिलाना
जी वो तो इस फिल्म में मौजूद हैं.

इस ट्रिब्यूट पे बाद नायक अपनी दुनिया में वापस आ जाता है.
मैं लिखना चाहता था -अपनी औकात पे वापस आ जाता है.
एक तो पहले ही पाठकों की ठक ठक कम हो गयी है, ऐसे
आर्टिकल लिखने पे तो और दूर भागेंगे न जी.

ये क्या हुआ भई, दो पंक्ति गा के ही हीरोईन तो लेडी-पहलवान
दिखने लगी. कुछ देर तक तो सब ठीक ठाक है, उसके बाद
फैशन परेड का एक और दौर. लाल सफ़ेद के कॉम्बिनेशन में
कंगना ओए होए कंगना हो रहा है. मानते हो ना ऑरेंज बार
वैनीला फेनिला से कहीं ज्यादा बिकती है. अब ये तो बता दो
पहाड़ पे कुल्फी वाला चढा कैसे. जादू से ऑरेंज बार गुलाब का
फूल हो जाती है. यार कैसे करते हो हमें भी बतला दो नूडल्स
को समोसा बना लिया करें.

और एक और दौर नए फैशन का. कोरेओग्राफर या तो कोरिया
घूम के आया था गाने के पहले या फिर तीखा उसल-मिसल खा
के आया था. गाने को मनोरंजन के लिए ८/१० नंबर. वैसे मेरी
११/१० नंबर देने कि इच्छा है मगर हंग-मामा और वोई-कोई
जैसी साइटें हमेशा खडूस मास्टर की तरह कम नंबर देती हैं.
कम नंबर देने से पता चलता है कि मास्टरजी कितने स्ट्रिक्ट
हैं.

DNA(डेली न्यूसेंस एनालिसिस) में आज बस इतना ही. आपको
आज ये बतलाना है कि ये दोनों किस हिस्टोरिकल मोन्यूमेंट के
आस पास गाना गा रहे हैं.




गीत के बोल:


चोरी चोरी छुपे छुपे घर मेरे आना
भैया तेरा घर पे ना हो तब तू बुलाना
ता ना ना तन्नना ता ना ना तन्नना
ता ना ना तन्नना ता ना ना तन्नना
ता ना ना तन्नना ता ना ना तन्नना
ता ना ना तन्नना ता ना ना तन्नना
रात को आती है तेरी याद कई बार
रात को आती है तेरी याद कई बार
नींद आये तो मेरे ख्वाबों में आना
ता ना ना तन्नना ता ना ना तन्नना
ता ना ना तन्नना ता ना ना तन्नना

मेरी पड़ोसन को बना लेना सहेली
कभी कभी मुझसे मिलने आना अकेली
मेरी पड़ोसन को बना लेना सहेली
कभी कभी मुझसे मिलने आना अकेली
तुझको देखते हैं तुझसे सोचते हैं हम
नींद में भी घर तेरे ले आयेंगे कदम
आऊँगी ऐसे ना कहीं जाऊँगी जाना
ता ना ना तन्नना ता ना ना तन्नना
ता ना ना तन्नना ता ना ना तन्नना
ता ना ना तन्नना ता ना ना तन्नना
ता ना ना तन्नना ता ना ना तन्नना

छुट्टी के दिन मुझसे मिलने घर पे ना आना
होंगे सभी घर पे मिलेगा ना बहाना
अच्छा
छुट्टी के दिन मुझसे मिलने घर पे ना आना
होंगे सभी घर पे मिलेगा ना बहाना
काम के दिन आऊँगा तब काम बनेगा
तुझसे जुड़े नाम तभी काम बनेगा
दम हो निभाने का तभी बात बढ़ाना
ता ना ना तन्नना ता ना ना तन्नना
ता ना ना तन्नना ता ना ना तन्नना
………………………………………………………
Chori chori chhupe chhupe-Sone pe suhaga 1988

Artists: Anil Kapoor, Kimi Katkar

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Mar 19, 2020

तूने मोहे ताका-सोने पे सुहागा १९८८

कहावतें और मुहावरों पर फिल्मों के नाम रखने का
सिलसिला फिल्म उद्योग में पुराना है. वर्तमान समय
में ऐसे नाम हमें कम दिखलाई देते हैं. सन १९८८ की
एक फिल्म है सोने पे सुहागा.

ताकी शब्द का पुर्लिंग होगा ताका. ताकना वैसे तो
क्रिया है मगर ताकी ताकी गाने को सुन के ऐसा लगता
है मानो किसी का नाम हो.

इन्दीवर की रचना को स्वर दिया है आशा भोंसले और
नितिन मुकेश ने बप्पी लहरी की धुन पर. लोक गीत
में प्रयुक्त होने वाले यदि यंत्रों की आवाजों से गीत शुरू
होता है और अर्ध फ़िल्मी अर्ध लोक गीत में परिवर्तित
हो जाता है. 




गीत के बोल:

ओ हो
तूने मोहे ताका मैंने तोहे ताका
तूने मोहे झांका मैंने तोहे झांका
प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा
दिल तोसे लागा सोने पे सुहागा
प्यार दिल में जागा सोने पे सुहागा
प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा
होये प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा

रूप की तू अनुरागी भौंरा
कली कली को गीत सुनाए
जब न चाहूँ मुझे सताये
जब मैं चाहूँ पास न आये
तन बिजली का मन तितली का
किस किस से कोई तुझे बचाये
मटक मटक कर सबसे बोले
सबसे हँसे मोरा जिया जलाये
रूठ के मन से फल नहीं लागा
दिल तोसे लागा सोने पे सुहागा
प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा

दिल तोसे लागा सोने पे सुहागा
प्यार दिल में जागा सोने पे सुहागा
प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा
होये प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा

जैसे मिले बादल से बादल
जैसे मिले पानी में पानी
जैसे मिले ज्योति से ज्योति
ऐसी मिली दोनों की जवानी
दोनों को दोनों की ज़रूरत
तू मेरा जीवन मैं तेरा जीवन
तुझे चाहिये प्यासी धरती
मुझे चाहिये झूमता सावन
तेरे संग बांधा प्रीत का धागा
दिल तोसे लागा सोने पे सुहागा
प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा

तूने मोहे ताका मैंने तोहे ताका
तूने मोहे झांका मैंने तोहे झांका
दिल तोसे लागा सोने पे सुहागा
प्यार दिल में जागा सोने पे सुहागा
प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा
होये प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा
………………………………………………….
Toone mohe taaka-Sone pe suhaga 1988

Artists: Jeetendra, Sridevi

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Jan 7, 2020

आवाज़ हमारी-शूरवीर १९८८

कुछ गीत फिल्मों के नाम से भी ज्यादा प्रसिद्ध हो जाया
करते हैं. गीतों के अलावा श्रोता को ज्यादा मालूम नहीं
होता फिल्म के बारे में.

प्रस्तुत गीत कविता कृष्णमूर्ति और मोहम्मद अज़ीज़ ने
गाया है. एस एच बिहारी के बोल हैं और लक्ष्मी प्यारे
का संगीत.



गीत के बोल:

ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला
आवाज़ हमारी इसी वादी में रहेगी
आवाज़ हमारी इसी वादी में रहेगी
आज की बातें ये कल भी कहेंगी
गूंजेगा गीत सुहाना
हमको न भुलाना कभी हमको न भुलाना
हमको न भुलाना कभी हमको न भुलाना
आवाज़ हमारी इसी वादी में रहेगी
आज की बातें ये कल भी कहेंगी
गूंजेगा गीत सुहाना
हमको न भुलाना कभी हमको न भुलाना
हमको न भुलाना कभी हमको न भुलाना
आवाज़ हमारी इसी वादी में रहेगी
होंठों पे तो आया है कहीं भूल फ़साना
होंठों पे तो आया है कहीं भूल फ़साना
लाऊँ तो भला कैसे वो बचपन का ज़माना
ओ यार मेरे दिल के आ गा ले ज़रा मिल के
यादों का गीत सुहाना
हमको न भुलाना कभी हमको न भुलाना
हमको न भुलाना कभी हमको न भुलाना

आवाज़ हमारी इसी वादी में रहेगी
आज की बातें ये कल भी कहेंगी
गूंजेगा गीत सुहाना
हमको न भुलाना कभी हमको न भुलाना
हमको न भुलाना कभी हमको न भुलाना
आवाज़ हमारी इसी वादी में रहेगी
……………………………………………………
Awaaz hamari isi waadi mein rahegi-Shoorveer 1988

Artists: Rajan Sippy, Mandakini

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Nov 7, 2018

तू मेरा सुपरमैन-दरियादिल १९८८

कम्प्यूटर देव के आगमन के पूर्व तक फिल्मों में स्पेशल
इफेक्ट्स दिखलाना काफी दुष्कर कार्य हुआ करता था.
कई फिल्मों में कलाकार और ऑब्जेक्ट्स गत्ते और पत्ते की
तरह उड़ते नज़र आते थे.

इस फिल्म का निर्देशक काफी दरियादिल था इसलिए
उसने सस्ते में सुपरमैन और स्पाईडरवूमन के दर्शन करा
दिए फिल्म में. धन्य हो फिल्म बनाने वालों. स्पाईडरवूमन
ने स्पाईडरमैन की पोशाक पहन रखी है. देसीकरण का
यही सही अर्थ है कि हम लोजिकली कॉपी करें चीज़ों की.

विलायती फिल्म का सुपरमैन काफी लंबा और तगड़ा है.
हम तो अपने देश की औसत लम्बाई वाला सुपरमैन ही
दिखलायेंगे. लंबा नहीं है तो क्या हुआ तगड़ा तो है, इतना
काफ़ी है.




गीत के बोल:

तू मेरा सुपरमैन मैं तेरी लेडी
हो गया है अपना प्यार आलरेडी

मैं तेरा सुपरमैन तू मेरी लेडी
हो गया है अपना प्यार आलरेडी
…………………………………………………….
Too mera superman-Dariyadil 1988

Artists: Govinda, Kimi Katkar

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May 9, 2018

जिंदगी कब तुमको देखा है-जनम १९८८

महेश भट्ट निर्देशित सन १९८८ की फिल्म जनम से एक
गाना सुनते हैं. ये गीत रेयर की श्रेणी में आता है.

सूरज सनीम के बोल हैं, अजित वर्मन का संगीत और इसे
गाया है अमित कुमार ने. गीत में आप फिल्म के नायक
कुमार गौरव को विभिन्न मुद्राओं में देख सकते हैं.




गीत के बोल:

ज़िंदगी ज़िंदगी ज़िंदगी
ज़िंदगी ज़िंदगी ज़िंदगी
कब तुमको देखा है
कब तुमको जाना है तारों के संग
फूलों के रंग में तुमको पाना है
ये मैंने ठाना है तुमको पाना है
ये मैंने ठाना है अपने घर लाना है
ये मैंने ठाना है

बेच डाला मेरे माली ने
मुझे गैरों के हाथ
खुश्क पत्ते की तरह मैं
हो लिया लहरों के साथ
रातों के संग काँटों के रंग में
तुमको पाना है तुमको पाना है

ज़िंदगी ज़िंदगी ज़िंदगी
कब तुमको देखा है
कब तुमको जाना है तारों के संग
फूलों के रंग में तुमको पाना है
ये मैंने ठाना है तुमको पाना है
ये मैंने ठाना है अपने घर लाना है
ये मैंने ठाना है

तुम मेरे साथ हो मैं तेरे साथ हूँ
वो ज़मीन साथ है आसमान साथ है
ये भीगा भीगा जिस्म ये भीगी आरज़ू
ज़िन्दगी मिल गई
ज़िन्दगी है सौदागर
देती है कुछ लेने के बाद
दी बहार मुझको मगर फिर
ली चमन रखने के बाद
साये के संग लहू के रंग में
तुम को पाना है तुम को पाना है

ज़िंदगी ज़िंदगी ज़िंदगी
कब तुमको देखा है
कब तुमको जाना है तारों के संग
फूलों के रंग में तुमको पाना है
ये मैंने ठाना है तुमको पाना है
ये मैंने ठाना है अपने घर लाना है
ये मैंने ठाना है
…………………………………………………….
Zindagi kab tuko dekha hai-Janam 1988

Artist: Amit Kumar

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Oct 5, 2017

एक दो तीन चार पांच-वक्त की आवाज़ १९८८

वक्त की आवाज़ और वक्त की मार का पता नहीं चलता. वो सौ सुनार
की और एक लुहार की वाले अंदाज़ में आती है, जैसे ऊपर वाले की
लाठी. इसका अनुभव अधिकाँश करते हैं मगर अपने अहम के चलते
वे ऐसे अनुभव किसी से साझा नहीं करते.

सुनते हैं वक्त की आवाज़ से एक गीत. इन्दीवर का गीत है जिसे गाया
है सुदेश भोंसले ने अलीशा चिनाई के संग. मिथुन और श्रीदेवी पर ये
गीत फिल्माया गया है.

ये पोस्ट उन सभी छद्म पाठकों और पोस्ट चोरों को समर्पित है जो
हिंदी ब्लोगों पर चोरी कर कर के अपने अंग्रेजी के ब्लॉग और किताबें
रोशन कर रहे हैं. हिंदी ब्लॉग मतलब गरीब का घर. गरीबों के घर
पर डाका डालोगे तो गरीब की हाय भी लगेगी. हिंदी फिल्म देखने
वाले गरीब की हाय से तो वाकिफ होंगे ही.





गीत के बोल:

एक दो तीन चार पांच छ: सात आठ
एक दो तीन चार
प्यार चाहिए कितनी बार
पांच छ: सात आठ नौ दस
बस बस अरे बस
एक दो तीन चार
प्यार चाहिए कितनी बार
पांच छ: सात आठ नौ दस
बस बस अरे बस
कबूतर बा कबूतर बाज़ बा बाज़
करते हैं हम जुबां सात परवाज़
कबूतर बा कबूतर बाज़ बा बाज़
करते हैं हम जुबां सात परवाज़
तुर्की बा तुर्की हिन्दी बा हिन्दी
तुर्की बा तुर्की हिन्दी बा हिन्दी
तुर्की बा तुर्की हिन्दी बा हिन्दी
तुर्की बा तुर्की हिन्दी बा हिन्दी

एक दो तीन चार प्यार चाहिए
पांच छ: सात आठ नौ दस
बस बस अरे बस
बस बस बस बस बस बस बस बस

चाहे छिपा लो तिजोरी तालों में
चाहे डुबा दो इसे प्यालों में
एक दो तीन चार पांच छ: सात आठ
चाहे छिपा लो तिजोरी तालों में
चाहे डुबा दो इसे प्यालों में
पीछा करेगी ये दिल की आवाज़

कबूतर बा कबूतर बाज़ बा बाज़
करते हैं हम जुबां सात परवाज़
तुर्की बा तुर्की हिन्दी बा हिन्दी
तुर्की बा तुर्की हिन्दी बा हिन्दी

एक दो तीन चार
प्यार चाहिए कितनी बार
पांच छ: सात आठ नौ दस
बस बस अरे बस
बस बस मिनी बस बस बस लो फ्लोर बस

हो छक्के तेरे हम छुड़ा के रहेंगे
हो हम होश तेरे उड़ा के रहेंगे
एक दो तीन चार पांच छ: सात आठ
एक दो तीन चार पांच छ: सात आठ
हो छक्के तेरे हम छुड़ा के रहेंगे
हो हम होश तेरे उड़ा के रहेंगे
कम तो नहीं हम एक बन्दा नवाज़

कबूतर बा कबूतर बाज़ बा बाज़
करते हैं हम जुबां सात परवाज़
कबूतर बा कबूतर बाज़ बा बाज़
करते हैं हम जुबां सात परवाज़
तुर्की बा तुर्की हिन्दी बा हिन्दी
तुर्की बा तुर्की हिन्दी बा हिन्दी
तुर्की बा तुर्की हिन्दी बा हिन्दी
तुर्की बा तुर्की हिन्दी बा हिन्दी

एक दो तीन चार
प्यार चाहिए कितनी बार
पांच छ: सात आठ नौ दस
बस बस अरे बस
बस बस बस बस बस बस बस बस
……………………………………………………………
Ek do teen chaar-Waqt ki awaaz 1988

Artists: Mithun, Sridevi

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Sep 15, 2017

दीवारों से मिल कर रोना-एक ही मकसद १९८८

आपको सुनवाते हैं सन १९८८ की फिल्म एक ही मकसद से
एक गीत जिसकी धुन पंकज उधास ने बनाई है. इसे गाया
है अनुराधा पौडवाल ने.

ओम पुरी और दिव्या राणा फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं. ये
गीत सबसे पहले हमने पंकज उधास की आवाज़ में ही सुना
था. रचना कैसर उल जाफरी की है.



गीत के बोल:

दीवारों से मिल कर रोना अच्छा लगता है
हम भी पागल हो जायेंगे ऐसा लगता है
दीवारों से मिल कर रोना अच्छा लगता है
हम भी पागल हो जायेंगे ऐसा लगता है
दीवारों से

चलते चलते राह में कैसा मोड ये आया है
चलते चलते राह में कैसा मोड ये आया है
अपनी मंजिल का हर रास्ता धुंधला लगता है
हम भी पागल हो जायेंगे ऐसा लगता है
दीवारों से

कैसी यादें हैं जो उलझन बन कर आई हैं
कैसी यादें हैं जो उलझन बन कर आई हैं
हमसे जुदा अब हमको अपना साया लगता है 
हम भी पागल हो जायेंगे ऐसा लगता है
दीवारों से

रोक सके तो रोक ले कोई वक्त की ये रफ़्तार
आने वाले हर एक पल से डर सा लगता है

दीवारों से मिल कर रोना अच्छा लगता है
हम भी पागल हो जायेंगे ऐसा लगता है
दीवारों से
..............................................................
Deewaron se mil kar rona-Ek hi maqsad 1988

Artists: Om Puri, Divya Rana

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Aug 13, 2017

एक रुपया दोगे-शेरनी १९८८

सन १९८८ की फिल्म शेरनी से एक गीत सुनते हैं. आपने कई
हिंदी गीतों में छप्पन छुरी शब्द सुने होंगे. ये ना तो पचपन
हुई ना ही चौवन. गिनती हमेश से फिक्स रही है इन शब्दों में.
सुनने में अटपटे ज़रूर लगते हैं ये शब्द मगर चलन में हैं.

वर्मा मलिक के गीत को अनुराधा पौडवाल ने गाया है और इस
गीत कि तर्ज़ बनाई है कल्याणजी आनंदजी ने.



गीत के बोल:

आ गई आ गई आ गई
अरे छप्पन छुरी छम छम छम करत आ गई
हाँ तो क्या करेगी
अरे गायेगी नाचेगी झूमेगी और सबका दिल बहलाएगी
हाँ तो भाई जान मेहरबान कद्रदान कुछ क़दर कीजिए
याने सिर्फ़ एक रुपया दीजिए
मेरे भैया एक रुपया

एक रुपया
एक रुपया दोगे दो दो काम करूँगी
एक रुपया दोगे दो दो काम करूँगी
ओ पहले गाना गाऊँगी
पहले गाना गाऊँगी फिर सलाम करूँगी
एक रुपया
एक रुपया दोगे दो दो काम करूँगी
हो दो दो काम करूँगी

ज़रा चढ़ती जवानी के नज़ारे देखना
अरे जलवे ये जलवे कंवारे देखना
मैं तो अँखियों में भर दूँगी मीठे सपने
जो कुछ हैं तुम्हारे कुछ मेरे अपने
अरे जो भी करूंगी
हाँ हाँ जो भी करूँगी खुले आम करूँगी

एक रुपया
एक रुपया दोगे दो दो काम करूँगी
हो दो दो काम करूँगी

मेरे गालों पे ज़ुल्फ़ जो मचल जाएगी
मेरे गालों पे ज़ुल्फ़ जो मचल जाएगी
अरे कईयों की नीयत बदल जाएगी
मेरी पतली कमर में जो लोच आएगी
दीवाने दिलों को ये तड़पाएगी
हो मैं तो रातों की निंदिया
मैं तो रातों की निंदिया हराम करूँगी

एक रुपया
एक रुपया दोगे दो दो काम करूँगी
एक रुपया दोगे दो दो काम करूँगी
हो पहले गाना गाऊँगी
पहले गाना गाऊँगी फिर सलाम करूँगी
एक रुपया
एक रुपया दोगे दो दो काम करूँगी
हो दो दो काम करूँगी
....................................................................
Ek rupya doge-Sherni 1988

Artist: Sridevi

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Jun 27, 2017

फिर किसी शाख ने-लिबास १९८८

एक चर्चित मगर अप्रदर्शित फिल्म लिबास से अलोकप्रिय मगर
मधुर गीत सुनते हैं लता मंगेशकर का गाया हुआ. गीत गुलज़ार
ने लिखा है. हम आपको पूर्व में सीली-गीली थीम वाले कई गीत
सुनवा चुके हैं. इस गीत के संगीतकार हैं आर डी बर्मन. सीली
सीली हवा वाला गीत आप सुन चुके हैं, ये है फिल्म से ही लता
का गाया हुआ दूसरा गीत.

भाषा में मात्रा की गलतियों से कभी कभी अर्थ अलग हो जाता
है. इस गीत के बोल कहीं कहीं लिखे मिलते हैं-सिली हवा छू
गयी. डोंट बी सिली. सीली को सिली(silly) बना देने पर आप
ही बतलाइए क्या मतलब हो जायेगा गीत का. एक और जगह
पर मैंने पढ़ा-गिला चाँद. गिला और गीला शब्द दोनों के अर्थ
अलग हैं. 



गीत के बोल:

फिर किसी शाख ने फेंकी छाँव
फिर किसी शाख ने हाथ हिलाया
फिर किसी मोड से उलझे पाँव
फिर किसी शाख ने फेंकी छाँव
फिर किसी शाख ने हाथ हिलाया
फिर किसी मोड से उलझे पाँव
फिर किसी मोड से उलझे पाँव
फिर किसी राह ने पास बुलाया

फिर किसी शाख ने फेंकी छाँव
फिर किसी शाख ने हाथ हिलाया

लब पे आता नहीं था नाम उनका
लब पे आता नहीं था नाम उनका
आज आया तो बार बार आया
बेवजह बेकरार रहते थे
बेवजह आज फिर करार आया
हो हो हो
फिर किसी शाख ने फेंकी छाँव
फिर किसी शाख ने टांग हिलाया

हम तो भूले हुए थे दिल को मगर
हम तो भूले हुए थे दिल को मगर
दिल ने क्यूँ आज हमको याद किया
क्यूँ कुरेदा पुराना ज़ख्म उसने
क्यूँ किसी भूले गम को याद किया
हो हो हो
फिर किसी शाख ने फेंकी छाँव
फिर किसी शाख ने हाथ हिलाया
फिर किसी मोड से उलझे पाँव
फिर किसी राह ने पास बुलाया
………………………………………………………
Phir kisi shaakh ne-Libas 1988

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Sep 30, 2016

खामोश सा अफसाना-लिबास १९९४

कठिन चीज़ों पर काम करना और उसका ज़ज्बा बनाये रखना दुष्कर
कार्य है. अपनी संतुष्टि के लिए आदमी कर तो लेता है, हर बार उसे
उस बात की तारीफ सुनने को नहीं मिला करती. फिर भी जुनूनी लोग
लगे रहते हैं अपनी कला को परवान चढाने में.

गुलज़ार ने कुछ रचनाएँ ऐसी लिखी कि उनको कम्पोज करने के लिए
आर डी बर्मन से बेहतर नाम सूझता ही नहीं. प्रयोगधर्मिता के साथ
अनूठेपन के लिए मशहूर पंचम ने ऐसी ऐसी धुनें बनाईं कि आज की
पीढ़ी के संगीतकार भी अचंभित होते हैं और उनमें से कई तो पंचम
के मुरीद हैं और उनके गीत सुनते सुनते ही बड़े हुए हैं.

आज सुनते हैं लिबास फिल्म से एक गीत जिसका एल्बम तो १९८८
में आ गया था मगर पिक्चर रिलीज़ नहीं हुई. इज़ाज़त फिल्म के
बाद दर्शकों को बेसब्री से गुलज़ार की इस फिल्म का इंतज़ार था. 
फिल्म के प्रमुख कलाकार नसीरूदीन शाह, शबाना आज़मी और
राज बब्बर हैं. अभिनय के दिग्गजों से सजी ये फिल्म दर्शकों के
सम्मुख ना आ पाई अफसोसजनक है.

प्रस्तुत गीत लता मंगेशकर और सुरेश वाडकर की आवाजों में एक
युगल गीत है. फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत भी यही है.




गीत के बोल:

ख़ामोश सा अफ़साना पानी से लिखा होता
ना तुम ने कहा होता  ना हमने सुना होता
ख़ामोश सा अफ़साना

ला ला ला ला ला ला ला ला
दिल की बात न पूछो दिल तो आता रहेगा
दिल की बात न पूछो दिल तो आता रहेगा
दिल बहकाता रहा है दिल बहकाता रहेगा
दिल को तुमने कुछ समझाया होता

ख़ामोश सा अफ़साना पानी से लिखा होता
ना तुम ने कहा होता  ना हमने सुना होता
ख़ामोश सा अफ़साना

सहमे से रहते हैं जब ये दिन ढलता है
सहमे से रहते हैं जब ये दिन ढलता है
एक दिया बुझता है एक दिया जलता है
तुमने कोई हो दीप जलाया होता

ख़ामोश सा अफ़साना पानी से लिखा होता
ना तुम ने कहा होता  ना हमने सुना होता
ख़ामोश सा अफ़साना

इतने साहिल ढूँढे कोई न सामने आया
इतने साहिल ढूँढे कोई न सामने आया
जब मँझधार में डूबे साहिल थामने आया
तुमने साहिल हो पहले बिछाया होता

ख़ामोश सा अफ़साना पानी से लिखा होता
ना तुम ने कहा होता  ना हमने सुना होता
ख़ामोश सा अफ़साना
..................................................................................
Khamosh sa afsana-Libaas 1988

Artists: Shabana Azmi, Raj Babbar

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Jul 16, 2016

प्यार मैने तुझसे किया-कमांडो १९८८

प्रतिध्वनि और रेकोर्ड की सुई अटकने की आवाज़ में फर्क
होता है. हिंदी फ़िल्मी गीत में इनमें से कुछ भी हो सकता
है. हो सकता है दोनों का संगम मिल जाए सुनने को.

आज का जो गीत है उसमें बोलों को रिपीट कर के एक
अलग प्रभाव पैदा किया गया है. गाने में ‘हे हे’ इतनी है कि
कुमार सानू भी हैरान हो जाएँ. इस गीत की ‘हे हे’ मगर
मधुर है.

आइये सुनें फिल्म कमांडो से एक गीत जिसे अलीशा चिनॉय
संग विजय बेनेडिक्ट ने गाया है. अनजान के लिखे बोलों
की धुन बप्पी लहरी ने बनाई है. बप्पी लहरी की धुनों में एक
कंटीन्यूटी होती थी जो आजकल के धूम-चक संगीत से
आपको गायब मिलेगी.

प्रस्तुत गीत की रिदम बढ़िया है और आपको ये अंत तक
बांधे रखेगा.




गीत के बोल:

ए ए ए ए
मैने मैने मैने मैने मैंने
तुझे तुझे तुझे तुझे तुझे
किया किया किया किया
प्यार किया
प्यार मैने तुझसे किया

हे हे हे हे
मैने मैने मैने मैने मैंने
तुझे तुझे तुझे तुझे तुझे
दिया दिया दिया दिल दिया
दिल ये मैने तुझको दिया
हे हे हे हे
हे हे हे हे ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
दीवाना तेरा हूँ मैं
दिल तेरा मेरा दीवाना
मिल जाएं दीवाने दिल
आ मेरी बाहों में आ आ आ आ
दीवानापन प्यार का
ऐसा दीवाना बना दे
आ मिल के तुझे गले
मुझमें ही तू डूब जा आ आ आ आ
हे हे हे हे

मैने मैने मैने मैने मैंने
तुझे तुझे तुझे तुझे तुझे
किया किया किया किया
प्यार किया
प्यार मैने तुझसे किया

हे हे हे हे
मैने मैने मैने मैने मैंने
तुझे तुझे तुझे तुझे तुझे
दिया दिया दिया दिल दिया
दिल ये मैने तुझको दिया
ए ए हे हे

प्यासे ये लब चूम ले
बन के मिलन का तराना
दिल में उतर आए जो
ऐसा कोई गीत गा आ आ आ आ
भूलेगा ना दिल कभी
ये प्यार का पल सुहाना
मैने तुझे पा लिया
अब और पाना है क्या क्या क्या क्या
हे हे हे हे

यूं ही मिला के कदम
तय हो सफ़र ज़िंदगी का
जब तक ये साँसें चलें
हम तुम जुदा होंगे ना ना ना ना
अपने कदम के निशां
राहों में हम छोड़ जाएं
दोहराए सारा जहां
ये प्यार की दोस्ती हाँ हाँ हाँ हाँ


ए ए ए ए
मैने मैने मैने मैने मैंने
तुझे तुझे तुझे तुझे तुझे
किया किया किया किया
प्यार किया
प्यार मैने तुझसे किया

हे ए
दिल ये मैने तुझको दिया
प्यार मैने तुझसे किया
हे ए
हे हे हे हे
...........................................................................
Pyar maine tujhse kiya-Commando 1988

Artists: Mithun Chakravorty, Mandakini

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Jan 26, 2016

काहे सताये- क़यामत से क़यामत तक १९८८

१९८८ का फिल्म से एक छोटा कर्णप्रिय गीत पेश है
आज. इसे अलका याग्निक ने गाया है. परदे पर इसे
जूही चावला पर फिल्माया गया है. फिल्म है सन १९८८
की क़यामत से क़यामत तक. सन १९८३ की लव स्टोरी
के बाद कुछ ऐसा कथानक दर्शकों को देखने को नहीं
मिला था. इस फिल्म को जनता ने हाथों-हाथ लिया
और तबियत से देखा, सराहा.

मजरूह के बोलों को संगीत में ढाला है आनंद मिलिंद
ने. ऐसे छोटे गीत अमूमन कम फिल्मों में देखने को
मिलते हैं. इनका ज्यादा जिक्र भी नहीं होता, ना ही
ये रेडियो वगैरह पर बजते मिलेंगे आपको. हाँ, आंकड़ों
के उद्देश्य से इनकी गिनती कर ली जाती है. अलका
याग्निक द्वारा गाया हुआ ये संभवतः सबसे छोटा गीत
है.

नायिका नायक को कोस रही है और उसका असर भी
दिख रहा है गीत में. ये रूठना थोड़ी देर का ही है
उसके बाद नायिका शिकायत खत्म कर के हल्का सा
मुस्कुरा के सही जगह पहुँच जाती है. 



गीत के बोल:

काहे सताए काहे को रुलाये
राम करे तुझको नींद न आये
राम करे तुझको नींद न आये
............................................................
Kaahe sataye-Qayamat se qayamat tak 1988

Artists on screen-Aamir Khan, Juhi Chawla

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Jan 18, 2016

बादल पे चल के आ-विजय १९८८

घोड़े पे बैठ के आना, पालकी में आना, पैदल आना ये
सब बातें इस गीत के आने के पहले थोड़ी ज्यादा सुहानी
लगा करती थीं. फिल्म विजय के गीत ने हमारे लिए बादल
पे चल के आने का रास्ता भी खोल दिया. हम कल्पना
में ही सही किस किस प्रकार के वाहन और कैसी कैसी
दुनिया में घूम आते हैं.

निदा फाजली के लिखे इस गीत की तर्ज़ बनाई है शिव हरी
की जोड़ी ने. इसे गाया है लता संग सुरेश वाडकर ने. जो
कलाकार परदे पर इस गीत को गा रहे हैं वो हैं-ऋषि कपूर
और सोनम. इसके अलावा इसमें एक और पेयर आपको
मिलेगा-अनिल कपूर संग मीनाक्षी शेषाद्री. इसको कहते हैं
इकोनोमी गीत. चार सितारों पर एक ही गीत फिल्माया लिया
गया है. उसके अलावा पर्यावरण प्रेमी गीत है. लगभग हर
मौसम के अलावा हरियाली जितने भी प्रकार की हो सकती है
इस गीत में आप देख सकते हैं. गीत में प्रयुक्त साइकिलों ने
भी कमाल का रोमांटिसिज्म दिखलाया है.




गीत के बोल:

बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
साँसों से मेरी निकल के आ
बाहों में मेरी मचल के आ
बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
साँसों से मेरी निकल के आ
बाहों में मेरी मचल के आ
बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
साँसों से मेरी निकल के आ
बाहों से मेरी मचल के आ

शाम होते लहराए मौसम हरे हरे
चांदी सा बरसाए बदल भरे भरे
शाखों पे लहराए मौसम हरे हरे
चांदी सा बरसाए बदल भरे भरे
भीगी हुई इन फिजाओं में
आँखों से संभल के

बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ

मैं हूँ तेरी ज़मीन तू मेरा आसमान
तू मेरी आरजू मैं तेरी जाने-जान
टूटती है खनक बन के अंगडाईयाँ
आ जा बाहों में भर ले तन्हाइयां
मैं हूँ तेरी ज़मीन तू मेरा आसमान
तू मेरी आरजू मैं तेरी जाने-जान
अंचल की चंचल हवाओं में
होंठों पे गीतों सा ढल के आ

बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ

शीशे सी बाहों पे बूँदें रुकी रुकी
पलकों पे शर्माए रातें झुकी झुकी
शीशे सी बाहों पे बूँदें रुकी रुकी
पलकों पे शर्माए रातें झुकी झुकी
जुल्फों की काली घटाओं से मुझ में
नशे सा पिघल के आ
बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
साँसों से मेरी निकल के आ
बाहों से मेरी मचल के आ

बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
………………………………………………
Badal pe chalk ke aa-Vijay 1988

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Aug 17, 2015

कसम क्या होती है १-कसम १९८८

एक पुराना गीत है-कसमें वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या.
कुछ के लिए ये दिल्लगी भी हो सकती है तो कुछ के लिए सब
कुछ. कसम खाने का रिवाज फिल्मों में भी कम हो गया है. अब
मोबाइल युग में अधिकाँश ने झूठ बोलना शुरू कर दिया है और
उसके अलावा पुराने ज़माने की माँ कहाँ देखने को मिलती है अब
फिल्मों में. अब आधुनिक ज़माने की माँ है फिल्म में और बच्चे
भी प्रगतिशील हैं जिनकी प्रगति तो आगे की ओर जा रही है शील
कहीं पीछे छूटता जा रहा है. ऐसे में कसमे वस्में कौन खाए और
खा भी ले तो पचाना मुश्किल है.

आपको सुनवाते हैं कसम पर बना एक प्रमाणिक सा गीत, प्रमाणिक
इसलिए कि इसके बाद कसम के ऊपर बना इतना दमदार गीत मुझे
सुनाई नहीं दिया. हो सकता है बना हो मगर मेरे कानों तक नहीं
पहुंचा. वो तो मैंने इमानदारी से यहाँ लिख दिया, वरना, आप दूसरे
ब्लॉग पर इसकी उम्मीद ना करें. कोई भी अपनी अनभिज्ञता जाहिर
नहीं करता और अपनी कमियां ढांक के रखने की सलाह तो प्रसिद्ध
राजनीतिकार चाणक्य भी दे चुके हैं. आप अगर अलग अलग ब्लॉग
पढते होंगे तो ये ज़रूर महसूस करते होंगे कि जानकारियां अलग
अलग तरह से प्रस्तुत होती हैं सभी जगह. अगर कहीं पर एक गलती
है तो वो अधिकाँश जगह पर दोहराई हुई मिलेगी. वैसे आप फिल्म का
नाम कहीं पर Qasam तो कहीं पर Quasam लिखा हुआ पाएंगे.

गीत इन्दीवर का लिखा और बप्पी लहरी का स्वरबद्ध किया हुआ है.
इसे नितिन मुकेश और आशा भोंसले ने गाया है. ये नितिन मुकेश
वाला संस्करण है.





गीत के बोल:

कसम क्या होती है कसम वो होती है
जो तोड़ी ना जाए बिछोड़ा ना पाए
कसम क्या होती है कसम वो होती है
जो तोड़ी ना जाए बिछोड़ा ना पाए

यार बिछड़ने लगते हैं तो रब की आँख भी रोती है
कसम क्या, कसम क्या
कसम क्या होती है कसम वो होती है
जो तोड़ी ना जाए बिछोड़ा ना पाए

तेरी कसम तू हमसे जो रूठी जां से गुज़र जाएंगे ही
हो तेरी हाँ से जी उठेंगे ना से मर जाएंगे ही
बात बात में कसम क्या खाना कसम मज़ाक नहीं है
कसम है जितनी पाक चीज़ कोई उतनी पाक नहीं है
दिलों का संगम है हो कसम गंगाजल है
दिलों का संगम है हो कसम गंगाजल है
प्यार पे दाग जो लग जाए तो अपने लहू से धोती है
कसम क्या, कसम क्या
कसम क्या होती है कसम वो होती है
जो तोड़ी ना जाए बिछोड़ा ना पाए

दिलों के लिए ज़रूरी नहीं है दुनिया की मंज़ूरी
कसम प्यार की नहीं मानती जन्मों की भी दूरी
तन्हाई को महकाती है यादों की कस्तूरी
कसम है वो जो हर हालत में की जाती है पूरी
कसम इक गीता है कसम वो सीता है
कसम इक गीता है कसम वो सीता है
राजमहल के छोड़ के सुख जो अंगारों पे सोती है
कसम क्या, कसम क्या
कसम क्या होती है कसम वो होती है
जो तोड़ी ना जाए बिछोड़ा ना पाए
................................................................................
Kasam kya hoti hai-Kasam 1988

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Apr 12, 2015

अकेले हैं तो क्या गम है-क़यामत से क़यामत तक १९८८

फिल्म ‘क़यामत से क़यामत तक’ से आपको तीन गीत
सुनवाए हैं जानकारियों के साथ साथ. अब सुनते हैं इस
१९८८ की ब्लाक-बस्टर फिल्म से चौथा गीत. इसके पहले
थोड़ी सी जानकारी साझा की जाए.

आमिर खान इसके पहले भी फिल्म उद्योग को अपनी सेवाएं
दे चुके थे. बतौर्बाल कलाकार वे सबसे पहले फिल्म यादों की
बरात में दिखलाई दिए. उसके बाद वे फिल्म मदहोश(१९७४)
में दिकाई दिए. खान एक प्रयोगधर्मी फिल्म-पैरानोयिया में
विक्टर बैनर्जी और नीना गुप्त के साथ दिखे. इस फिल्म के
बाद उनमें अभिनाय के कीड़े कुलबुलाए.

अभी समय था थोडा उनके नायक बनने में. नासिर हुसैन की
दो फिल्मों में उन्होंने सहायक के रूप में काम किया-ज़बरदस्त
और मंजिल मंजिल. दोनों फिल्मों में सनी देवल अभिनेता के
रूप में मौजूद हैं. ज़बरदस्त बहुसितारा फिल्म है जिसमें सनी
के साथ एक और नायक राजीव कपूर भी हैं. 

उसके बाद वे एक प्रयोगात्मक फिल्म होली में दिखाई दिए.
बतौर नायक उनकी पहली फिल्म क़यामत से क़यामत तक
है. फिल्म बेहद सफल रही और उनके लिए आवाज़ देने वाले
उदित नारायण के लिए भी सुनहरा अवसर साबित हुयी. फिल्म
का गीत “पापा कहते हैं” ज़बरदस्त हिट हुआ.

इस फिल्म की अभिनेत्री जिनकी सन १९८६ में आई सल्तनत
कोई कमाल नहीं दिखा पायी थी, उनके फ़िल्मी कैरियर को भी
इस फिल्म से रफ़्तार मिली-जूही चावला. चित्रगुप्त पुत्र जो इस
फिल्म के पहले तक सहायक संगीत निर्देशक के तौर पर कई
संगीतकारों को सेवाएं देते आ रहे थे, उनका बतौर स्वतंत्र संगीत
निर्देशक कैरियर उड़ान भरने लगा और ९० के दशक में वे सबसे
ज्यादा व्यस्त संगीतकार बने.

ये तय है इस फिल्म के बाद बॉलीवुड के दिशा बदली जो कुछ
असमंजस जैसी स्तिथि में थी ८० के दशक के शुरूआती दौर में.
सन १९८८ के बाद रोमांटिक फिल्मों की झड़ी सी लग गयी और
नए चेहरों पर दांव खेलने की बॉलीवुड के निर्माता-निर्देशकों की
हिम्मत भी बढ़ी.


 
गीत के बोल:

अकेले हैं, तो क्या ग़म है
चाहें तो हमारे बस में क्या नहीं
बस इक ज़रा, साथ हो तेरा
तेरे तो हैं हम, कब से सनम
   
अकेले हैं, तो क्या ग़म है

अब ये नहीं सपना, ये सब है अपना
ये जहाँ, प्यार का
छोटा सा ये आशियाँ बहार का
बस इक ज़रा, साथ हो तेरा
तेरे तो हैं हम, कब से सनम
   
अकेले हैं, तो क्या ग़म है

फिर नहीं टूटेगा, हम पे कोई तूफां
साजना, देखना
हर तूफ़ां का मैं करूंगी सामना
बस इक ज़रा, साथ हो तेरा
तेरे तो हैं हम, कब से सनम
   
अकेले हैं, तो क्या ग़म है

अब तो मेरे साजन बीतेगा हर दिन
प्यार की, बाहों में
रंग जाएगी रुत तेरी अदाओं में
बस इक ज़रा, साथ हो तेरा
तेरे तो हैं हम, कब से सनम
   
अकेले हैं, तो क्या ग़म है
....................................................
Akele Hain To Kya Gam Hai- Qayamat Se Qayamat Tak 1988

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Apr 7, 2015

गज़ब का ये दिन-क़यामत से क़यामत तक १९८८

कुछ नए चेहरे जो आगे चल के बॉलीवुड के बेहतरीन
कलाकार बनने वाले हैं. आइये चलें सन १९८८ में
जब फिल्म क़यामत से क़यामत तक आई थी.
८० के दशक ने कई सितारा पुत्र पुत्रियां देखे जिनमे
से बहुत कम सफलता की सीढियां चढ पाए. इस
दशक की शुरुआत में हमने राजेंद्र कुमार पुत्र का
पदार्पण देखा फिल्म लव स्टोरी में, उसी के आस-पास
सुनील दत्त पुत्र संजय भी रुपहले परदे पर आये. दोनों
की लॉन्च फ़िल्में उनके पिताओं ने बनाईं. फिर आये
सनी देवल जिन्हें धर्मेन्द्र ने लॉन्च किया राहुल रवैल के
निर्देशन में फिल्म बेताब(१९८३) में. उसके बाद दिखे
शशि कपूर पुत्र करन, फिल्म सल्तनत(१९८६) में जो
फिल्मों के बजाये अपने बॉम्बे डाईंग के विज्ञापन के लिए
ज्यादा जाने गए.

फिल्म क़यामत से क़यामत तक के लिए गीतकार मजरूह
के लिखे गीत बेहद पसंद किये गए. लोगों को इनके बोल
याद हो गए अच्छे से, विशेषकर युवा पीढ़ी को. संगीतकार
जोड़ी आनंद मिलिंद की ये पहली फिल्म है. फिल्म से कई
लोगों को ब्रेक मिला. कईयों को सस्पेंशन मिले, कईयों के
कैरियर को एक्स्सेलरेटर मिले तो कईयों की गाडी आगे के
गियर में पहुँच गयी. कुल मिला के इस फिल्म ने कईयों
का कैरियर संवारने में अहम योगदान दिया.

ताहिर हुसैन के पुत्र आमिर को ब्रेक उनके ताऊ ने दिया
इस फिल्म से में, जो नासिर हुसैन के पुत्र मंसूर की बतौर
निर्देशक पहली फिल्म है. फिल्म पर आगे और चर्चा करेंगे.



गीत के बोल:

ग़ज़ब का है दिन, सोचो ज़रा
ये दीवानापन, देखो ज़रा
तुम हो अकेले, हम भी अकेले
मज़ा आ रहा है, क़सम से

ग़ज़ब का है दिन

देख लो हमको करीब से
आज हम मिले हैं नसीब से
ये पल फिर कहाँ
और ये मंज़िल फिर कहाँ

ग़ज़ब का है दिन

क्या कहूँ, मेरा जो हाल है
रात दिन, तुम्हारा खयाल है
फिर भी, जान-ए-जां
मैं कहाँ और तुम कहाँ

ग़ज़ब का है दिन, सोचो ज़रा
ये दीवानापन, देखो ज़रा
तुम हो अकेले, हम भी अकेले
मज़ा आ रहा है, क़सम से
............................................
Gazab ka ye din-QSQT

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Feb 28, 2015

सीली हवा छू गयी-लिबास १९८८

सीली हवा, गीली हवा, सर्द हवा , बर्फीली हवा सबसे सामना हुआ इस बार.
मौसम का मिज़ाज काफी महीनों से बिगड़ा हुआ है. आज खोमचे में से एक
पुरानी सी डी निकाली और गाने सुनने बैठ गए. एक गीत जिस पर ध्यान
अटक गया वो था लिबास का-सीली हवा छू गयी.

सीली हवा -इस कंसेप्ट को नदी किनारे या झील किनारे रहने वाले बेहतर
समझ पायेंगे. हवा जब पानी को छूती हुई बहती है तब उसमे नमी आ जाती
है और इसको सीलापन कहेंगे, ज्यादा नमी आये तो गीलापन, उससे भी ज्यादा
आये तो बारिश ही कहेंगे . वैसे मन इस समझ के मामले में अधेढ़ से ज्यादा गधेड
है . ज्यादा टेक्निकलिटी में उलझने से गीत सुनने का मज़ा किरकिरा हो जाता है.
नीली नदी के परे गीला सा चाँद भी खिल गया है गीत में.

गुलज़ार ने सबसे ज्यादा किसी कलाकार को याद किया है तो वे हैं बर्मन जूनियर
अर्थात राहुल देव बर्मन. शायद गुलज़ार को आर डी के संगीत से अधिक लगाव
है. आर डी ने भी गुलज़ार के गीतों के लिए नायाब धुनें बनायीं हैं.

फिल्म रिलीज़ नहीं हुई सन १९८८ में  पर उसका संगीत पहले रिलीज़ हो गया 
फिल्म शायद बाद में किसी फिल्मोत्सव में दिखाई गयी. सिनेमा हाल में इस
फिल्म को देखने का सौभाग्य शायद मिल जाए हमें भी कभी.

गीत सुना जाए जो आज के लिहाज से बहुत बेहतर गीत है और कभी कभार
इसे सुना जा सकता है. फिल्म में नसीरुद्दीन शाह और शबाना आजमी प्रमुख
कलाकार हैं.



गीत के बोल:

सीली हवा छू गई
सीला बदन छिल गया
नीली नदी के परे
गीला सा चांद खिल गया

तुम से मिली जो ज़िन्दगी
हमने अभी बोई नहीं
तेरे सिवा कोई न था
तेरे सिवा कोई नहीं

सीली हवा छू गई
सीला बदन छिल गया

जाने कहाँ कैसे शहर
लेके चला ये दिल मुझे
तेरे बगैर दिन ना जला
तेरे बगैर शब ना बुझे

सीली हवा छू गई
सीला बदन छिल गया

जितने भी तय करते गये
बढ़ते गये ये फ़ासले
मीलों से दिन छोड़ आये
सालों से रात ले के चले

सीली हवा छू गई
सीला बदन छिल गया
नीली नदी के परे
गीला सा चांद खिल गया
..........................................................................
Seeli hawa chhoo gayi-Libaas 1994

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Jan 4, 2015

ऐ जिंदगी हुई कहाँ भूल-नामुमकिन १९८८

आज एक दैनिक अखबार में राहुल देव बर्मन को एक पत्रकार
ने याद किया इस गीत के साथ-रूठ के तुम तो चल दिए-जलती निशानी 
पंचम को बिछड़े पूरे २१ साल हो गए आज. गीतकार गुलज़ार उनको
आज भी याद किया करते हैं. उन दोनों में मजबूत रिश्ता था . एक और
रिश्ता जो बना रहा मजबूती से साथ वो था किशोर कुमार के साथ जो
किशोर के अवसान के साथ १९८७ में टूटा. किशोर कुमार के निधन से
सबसे ज्यादा क्षति राहुल देव बर्मन के संगीत को हुई. सन ८७ के बाद
इसका असर उनके संगीत में देखा जा सकता है. कुछ कमी सी बनी
ही रही १९९४ तक. बदलते समय, फिल्म उद्योग के बदले हुए समीकरण
समय के साथ छूटते हुए मित्र और साथी इन सबकी पीड़ा शायद आर डी
ने लंबे समय झेली. संगीत पर भी प्रभाव पड़ना लाजिमी था.

उनकी फिल्मों में से एक है-नामुमकिन. गुमनाम सी फिल्म लेकिन
संगीत बढ़िया. इसमें से एक दर्द भरा गीत सुनवाते हैं आज आपको जो
आज के दिन के लिए पर्याप्त है. गीत अनजान ने लिखा है.





गीत के बोल:



ऐ जिंदगी हुई कहाँ भूल 
जिसकी हमें मिली ये सजा 
ऐ जिंदगी हुई कहाँ भूल 
जिसकी हमें मिली ये सजा 
कहाँ से कहाँ लायी तू हमें 
हमसे है क्यूँ इतनी खफा 
 
ऐ जिंदगी 
 
कहाँ गए दिन वो सुहाने 
कहाँ खोया प्यार हमारा 
कहाँ उडी क्या चिंगारी 
जल गया ओ सुख सारा 
हो, अपना कहीं कोई नहीं 
ला के कहाँ हमें मारा 
 
ऐ जिंदगी हुई कहाँ भूल 
जिसकी हमें मिली ये सजा 
ऐ जिंदगी
 
बीते जो दिल पे हमारे 
जा के कहाँ किसको सुनाएँ 
छलके जो आन्ल्खों से दिल के 
आंसू ये किसको दिखाएँ 
हो, कौन सुने दिल का ये गम 
दुश्मन है जग सारा 
 
ऐ जिंदगी हुई कहाँ भूल 
जिसकी हमें मिली ये सजा 
ऐ जिंदगी
 
जाएँ तो हम कहाँ जाएँ 
सूझे न कोई किनारा 
भर गया जी यहाँ जी के 
छोड़ दे पीछा हमारा 
हो तेरी कसम दुनिया में हम 
आयेंगे न दोबारा 
 
ऐ जिंदगी हुई कहाँ भूल 
जिसकी हमें मिली ये सजा 
कहाँ से कहाँ लायी तू हमें 
हमसे है क्यूँ इतनी खफा 
ऐ जिंदगी हुई कहाँ भूल 
...................................................
Ae zindagi hui kahan bhool-Namumkin 1988

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Aug 6, 2011

चाकू चले तेरे लिए बाजारों में-ज़लज़ला १९८८

पुरानी ज़लज़ला से गीत सुन लिया आपने, अब नए ज़लज़ले से मिलवाते
हैं आपको। बहुसितारा और बिलकुल फ्लॉप फिल्म से एक युगल गीत पेश
है किशोर कुमार और कविता कृष्णमूर्ती की आवाजों में।

इस गीत में आपको राजीव कपूर और विजयेता पंडित। तलवार भांजने वाले
चरित्र अभिनेताओं के नाम हैं-पिंचू कपूर और बीरबल। कुछ कोमेडी कुछ
तोड़ी मरोड़ी के मिश्रण वाला ये गीत पचास टका आनंद देता है और पचास
टका बोरियत। गीत इन्दीवर का लिखा हुआ है और धुन है आर डी बर्मन की ।
इन्दीवर की कलम की धार इस गीत में भी बरकरार है-मुलाहिजा फरमाएं
गीत के पहले और दूसरे अंतरे में कविता की आवाज़ वाले हिस्सों पर।





गीत के बोल:

अरे चाकू चले तेरे लिए बाज़ारों में
जंग छिड़े तेरे लिए दो यारों में

तूफ़ान तेरी जवानी
हुस्न है वो बाला
अरे दिलवालों की दुनिया में
आया है है है ज़लज़ला , ज़लज़ला

हो, चाकू चले मेरे लिए बाज़ारों में
जंग छिड़े मेरे लिए दो यारों में
बदकिस्मत इश्क का ये चल निकला सिलसिला
अरे दिलवालों की दुनिया में
आया है है है ज़लज़ला , ज़लज़ला

दुनिया के तीरों से
चलती शमशीरों से
तुझको बचा के मैं लाया
मेरा जिगर देख
दिल देख मेरा तू
कबसे ये दिल तुझपे आया

हो, दुनिया से मुझको बचा लाया
लेकिन मुझे कौन तुझसे कौन बचाएगा
तूने जो कर दी कोई मेहरबानी
जवानी पे दाग लग जायेगा
घर कैसे जाऊंगी
मैं तो मर जाऊंगी
अरे घरवालों की दुनिया में
आएगा आ आ ज़लज़ला, ज़लज़ला

हो, होंठों को बालों को
कानों को गालों को
दूर से देखा करूंगा
प्यार का परमिट मिलेगा ना जब तक
तब तक ना तुझको छुऊँगा
हो मैं भी हसीं
और तू भी जवान जानी
बज जाये कब तेरी घंटी
मुझको छुएगा ना छेड़ेगा तू
इसकी भी क्या है गारंटी
पहले मैं नाम जोडूंगा
फिर इतना प्यार करूंगा
अरे दुनिया की आबादी में
आएगा गा गा ज़लज़ला, ज़लज़ला

अरे चाकू चले मेरे लिए बाज़ारों में
जंग छिड़े मेरे लिए दो यारों में

अरे तूफ़ान तेरी जवानी
हुस्न है वो बाला
अरे दिलवालों की दुनिया में
आया है है है ज़लज़ला , ज़लज़ला
ज़लज़ला , ज़लज़ला
........................................
Are chaku chale tere liye-Zalzala 1988

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