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Apr 23, 2017

तेरे बिना ज़िंदगी से कोई-आंधी १९७५

सन १९७५ की फिल्म आंधी काफी चर्चित फिल्म है. चर्चित होने की
एक बड़ी वजह इस फिल्म पर प्रतिबन्ध लगाया जाना भी रहा. ये सब
कहानियां संगीत प्रेमी दूसरी जगहों पर कई बार पढ़ चुके हैं अतः उन्हें
दोहराने में कोई दम नहीं. उसके अलावा इस गीत पर इतनी कसीदाकारी
की जा चुकी है कि कोई नयी बात बतलाने की गुंजाईश ना के बराबर है.

गीत में बीच में संवाद हैं और जनता द्वारा ये भी बेहद पसंद किये गए.
ऐसे गीत कम बने और बनते हैं क्यूंकि ऐसे गीतों में बोरियत बढ़ने और
कंटिन्यूटी टूटने का खतरा बना रहता है. आजकल के गीतों की बात
छोडिये उसमें तो बहुत कुछ टूटता और फूटता है.


गीत लता और किशोर ने गाया है. गुलज़ार के बोल हैं और पंचम का
संगीत.





गीत के बोल:

तेरे बिना ज़िंदगी से कोई  शिकवा तो नहीं
शिकवा नहीं शिकवा नहीं  शिकवा नहीं
तेरे बिना ज़िंदगी भी लेकिन   ज़िंदगी  तो नहीं
ज़िंदगी नहीं ज़िंदगी नहीं  ज़िंदगी नहीं

काश ऐसा हो तेरे कदमों से   चुन के मंज़िल चलें
और कहीं दूर कहीं
काश ऐसा हो तेरे कदमों से   चुन के मंज़िल चलें
और कहीं दूर कहीं
तुम गर साथ हो   मंज़िलों की कमी तो नहीं
तेरे बिना ज़िंदगी से कोई  शिकवा  तो नहीं 
शिकवा नहीं शिकवा नहीं शिकवा नहीं

जी में आता है तेरे दामन में सर छुपा के हम
रोते रहें  रोते रहें
जी में आता है तेरे दामन में सर छुपा के हम
रोते रहें  रोते रहें
तेरी भी आँखों में   आँसुओं की नमी तो नहीं

तेरे बिना ज़िंदगी से कोई  शिकवा  तो नहीं
शिकवा नहीं शिकवा नहीं शिकवा नहीं
तेरे बिना ज़िंदगी भी लेकिन   ज़िंदगी तो नहीं
ज़िंदगी नहीं ज़िंदगी नहीं ज़िंदगी नहीं

तुम जो कह दो तो आज की रात  चांद डूबेगा नहीं
रात को रोक लो
तुम जो कह दो तो आज की रात  चांद डूबेगा नहीं
रात को रोक लो
रात की बात है और ज़िंदगी बाकी तो नहीं
तेरे बिना ज़िंदगी से कोई  शिकवा  तो नहीं  शिकवा नहीं
तेरे बिना ज़िंदगी भी लेकिन   ज़िंदगी तो नहीं
ज़िंदगी नहीं ज़िंदगी नहीं ज़िंदगी नहीं
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Tere bina zindagi se shikwa-Aandhi 1975

Artists: Sanjeev Kumar, Suchitra Sen

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Oct 31, 2009

इस मोड़ से जाते हैं-आंधी १९७५

यार ये नशेमन किस शहर का नाम है। गाने की धुन बनाते वक़्त
संगीतकार राहुल देव बर्मन ने गीतकार गुलज़ार से यही प्रश्न किया
था। इस वाकये को गुलज़ार अपनी आवाज़ में बयां कर चुके हैं एक
गीतों के संग्रह में जिसमे वो अपने मित्र राहुल देव बर्मन को याद
करते हैं। थोडा लीक से हटकर शब्दों के इस्तेमाल के लिए ही
गुलज़ार जाने जाते हैं । उन्होंने नाम भी अपना लीक से हटकर
ही रखा है । ' सम्पूरण सिंह' से गुलज़ार बन गए वे ।

ये गीत, जिसके बारे में ज्यादा कहने की आवश्यकता नहीं,
फिल्म आंधी से है जो १९७५ में आई थी। इस गीत की तारीफ़ में
आपको इन्टरनेट के ऊपर कमसे कम २०० से अधिक पन्ने मिल
जायेंगे । इस गीत का सबसे श्रवणीय हिस्सा इसके पहले अंतरे के
पहले का संगीत है, जिसकी वजह से ये गाना मीलों दूर से भी
पहचाना जा सकता है। बांसुरी और एक तार- वाद्य के प्रयोग वाला ये
टुकडा खूबसूरत है। उस तार वाद्य को पहचानने में मेरी मदद कीजिये ।



गाने के बोल:

इस मोड़ से जाते हैं
इस मोड़ से जाते हैं
कुछ सुस्त क़दम रस्ते, कुछ तेज़ क़दम राहें
कुछ सुस्त क़दम रस्ते, कुछ तेज़ क़दम राहें
पत्थर की हवेली को, शीशे के घरौंदों में
तिनकों के नशेमन तक, इस मोड़ से जाते हैं

आ, आ, इस मोड़ से जाते हैं

आंधी की तरह उड़कर इक राह गुज़रती है
आंधी की तरह उड़कर इक राह गुज़रती है
शर्माती हवी कोई क़दमों से उतरती है
इन रेशमी राहों में इक राह तो वो होगी
तुम तक जो पहुँचती है इस मोड़ से जाती है

इस मोड़ से जाते हैं ........

इक दूर से आती है पास आ के पलटती है
इक दूर से आती है पास आ के पलटती है
इक राह अकेली सी, रुकती है न चलती है
ये सोच के बैठी हूँ , इक राह तो वो होगी
तुम तक जो पहुँचती है, इस मोड़ से जाती है

इस मोड़ से जाते हैं
इस मोड़ से जाते हैं
कुछ सुस्त क़दम रस्ते कुछ तेज़ क़दम राहे
पत्थर की हवेली को शीशे के घरौंदों में
तिनको के नशेमन तक इस मोड़ से जाते हैं
आ आ, इस मोड़ से जाते हैं
...............................................................
Is mod se jaate hain-Aandhi 1975

Artists: Sanjeev Kumar, Suchitra Sen

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Jul 5, 2009

तुम आ गए हो नूर आ गया-आंधी १९७५

संजीव कुमार और सुचित्रा सेन अभिनीत चर्चित फ़िल्म
आंधी का एक और अच्छा गीत। ये भी युगल गीत है , लता
और किशोर का गाया हुआ। अपने बाकी के दो जोडीदारों की
तरह ये उतना लोकप्रिय नहीं, मगर है सुनने लायक। गीत
गुलज़ार का लिखा हुआ है और संगीतबद्ध किया है आर डी बर्मन ने।
कार्डिगन की स्टाइल का स्वेटर लोकप्रिय करने में संजीव कुमार का
खासा योगदान रहा है। गुलज़ार की बनाई फिल्मों में विशेषकर
उन्होंने ये पहने हैं , इसका दूसरा उदाहरण है फ़िल्म-मौसम।
खैर हम तो संजीव कुमार की अभिनय प्रतिभा के कायल हैं,
स्वेटर से हमें क्या लेना ।



गाने के बोल:

किशोर: तुम आ गए हो नूर आ गया है
तुम आ गए हो नूर आ गया है
नहीं तो चराग़ों से लौ जा रही थी

लता: जीने कि तुमसे वजह मिल गई है
बड़ी बेवजह ज़िंदगी जा रही थी

किशोर: तुम आ गए हो नूर आ गया है

किशोर: कहाँ से चले कहाँ के लिये
ये खबर नहीं थी मगर
कोइ भी सिरा जहाँ जा मिला
वहीं तुम मिलोगे
के हम तक तुम्हारी दुआ आ रही थी
तुम आ गये हो नूर आ गया हैं

लता: नहीं तो चराग़ों से लौ जा रही थी
तुम आ गए हो नूर आ गया हैं
लता: दिन डूबा नहीं रात डूबी नहीं
जाने कैसा है सफ़र
ख़्वाबों के दिये आँखों में लिये
वहीं आ रहे थे
जहाँ से तुम्हारी सदा आ रही थी

तुम आ गये हो नूर आ गया हैं
नहीं तो चरागों से लौ जा रही थी

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