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Jul 21, 2020

तुमको भी तो ऐसा ही कुछ-आप आये बहार आई १९७१

आप आये(और वो) बाहर आई फिल्म से एक गीत सुनते हैं.
इसे लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने गाया है. संगीत
तैयार किया है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने.

अब आप पूछिए ये गीत हम आपको क्यूँ सुनवा रहे हैं?
आज २१ जुलाई, आनंद बक्षी का जन्मदिन है.

फ़िल्मी बारिश भी है गीत में. सुहाना मौसम है और
बाकी की इस गाने की केमिस्ट्री, फिज़िक्स, ज्योग्राफी,
जूलोजी, बोटनी, पोलिटिकल साइंस, आर्ट्स, फाइन आर्ट्स
सब उच्च स्टार पर हैं.

राजेंद्र कुमार पर फिल्माया गए और किशोर कुमार द्वारा
गाये गए गीत आप उँगलियों पर गिन सकते हैं.




गीत के बोल:

तुमको भी तो ऐसा ही कुछ होता होगा ओ सजना

कैसा कैसा
तेरी याद सताती है नींद नहीं आती है रातों में
ओ तेरी याद सताती है नींद नहीं आती है रातों में
तुमको भी तो ऐसा ही कुछ होता होगा ओ सजनी
कैसा.
तेरा प्यार सताता है चैन नहीं आता है रातों में
ओ तेरा प्याज सताता है चैन नहीं आता है रातों में
तुमको भी तो ऐसा ही कुछ होता होगा हा हा हा


मेरी हालत जैसी है तेरा हाल भी ऐसा है
मेरी हालत जैसी है तेरा हाल भी ऐसा है
हल्का हल्का सा जिया में जाने दर्द ये कैसा है

तुमको भी तो ऐसा ही कुछ होता होगा ओ सजनी
कैसा कैसा
तारे गिनता मैं रहता हूँ जागता रहता हूँ रातों में
ओ तारे गिनता मैं रहता हूँ जागता रहता हूँ रातों में

इन भीगी फ़िज़ाओं से इन ठंडी हवाओं से
इन भीगी फ़िज़ाओं से इन ठंडी हवाओं से
आग सी लगती है जिया में सावन की घटाओं से ...

तुमको भी तो ऐसा ही कुछ होता होगा ओ सजना
कैसा
इन्तज़ार तेरा करती हूँ आहें मैं भरती हूँ रातों में
ओ इन्तज़ार तेरा करती हूँ आहें मैं भरती हूँ रातों में


ये मस्त नज़र तेरी मेरे होश उड़ाती है
ये मस्त नज़र तेरी मेरे होश उड़ाती है
ये तेरी मस्ती मुझे भी मदहोश बनाती है.

तुमको भी तो ऐसा ही कुछ होता होगा ओ सजना
कैसा
रोज़ ख़्वाब में तू आता है दिल धड़काता है रातों में
रोज़ ख़्वाब में तू आता है दिल धड़काता है रातों में

तुमको भी तो ऐसा ही कुछ होता होगा
डैश डैश डैश अंडरस्टुड
………………………………………………………………
Tumko bhi to aisa hi kuchh-Aap aayr bahar aayi 1971

Artists: Rajendra Kumar, Sadhana

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Aug 20, 2017

कोयल क्यूँ गाये-आप आये बहार आई १९७१

ना जाने क्यूँ जब भी मैं केरी का मुरब्बा खाता हूँ मुझे फिल्म
आप आये बहार आई का प्रसिद्ध युगल गीत याद आ जाता
है. वैसे केरी और मजरूह साहब के गीतों का कोई कनेक्शन
नहीं है. सुल्तानपुर के रहने वाले मजरूह साहब के पडोसी जिले
प्रतापगढ़ में आंवले बहुत होते हैं. बड़े बड़े आंवले के उत्पादन के
लिए प्रतापगढ़ प्रसिद्ध है.

मुरब्बे को हम अंग्रेजी में जैम कहते हैं. अगर आप इस ब्लॉग
के नियमित पाठक हैं तो आपको जैम शब्द के ऊपर हमारी
२-३ पोस्ट ज़रूर मिली होंगी.

आइये सुनें फिल्म का तीसरा गीत कोयल वाली थीम पर. श्रेणी
बनाने के शौक़ीन कुछ ऐसी भी श्रेणियाँ बनाया करते हैं-हीरो
बैठा है-हीरोईन खड़ी है, हीरो खड़ा है-हीरोईन बैठी है. पीला पेंट
पहने हीरो, नीली साडी वाली हीरोईन इत्यादि.



गीत के बोल:

कोयल क्यूँ गाये कोयल क्यूँ गाये कोयल क्यूँ गाये
कोयल क्यूँ गाये कोयल क्यूँ गाये कोयल क्यूँ गाये
कोयल क्यूँ गाये कोयल क्यूँ गाये
बाग से पतझड़ जाए रे बहार चली आये
मन मस्त पवन धडके के अम्बुवा पे कोयल गाये
बादल क्यूँ छाये बादल क्यूँ छाये
बादल क्यूँ छाये बादल क्यूँ छाये
बिरहा के जब गीत कोई गाये रे तो आग लग जाए
रिमझिम पानी बरसे के आकाश पे बादल छाये

हिरनी सी आँख तेरी हिरनी सी आँख तेरी
हिरनी सी आँख तेरी मोरनी सी चाल
आ तुझे मैं पूछूं एक छोटा सा सवाल
बाजे क्यूँ घुँघरू बाजे क्यूँ घुँघरू
पांव में जब काँटा लग जाए माँरे दर्द के हाय
जब रात में नींद ना आये तो
छम छम बाजे घुँघरू

नीले गगन पे आई नीले गगन पे आई
नीले गगन पे आई चाँद की बारात
आ तुझसे मैं पूछूं इक छोटी सी ये बात
मनवा क्यूँ डोले मनवा क्यूँ डोले
नदिया में जब नाव खाए हिचकोले
चोरी चोरी हौले हौले
जब साजन घूंघट खोले तो गोरी का मनवा डोले

इत्ता गुमान देखो देखो इत्ता गुमान देखो देखो
इत्ता गुमान देखो देखो होता है खराब
अब के संभल के देना ओ राजा मुझे देना जवाब
झुमका क्यों झूमे झुमका क्यों झूमे
इत्ती सी बात ना जाने सब तेरे हैं दीवाने
झुमका झूमने के बहाने
तेरा फूल सा मुखडा चूमे
कोयल क्यूँ गाये बादल क्यूँ छाये
कोयल क्यूँ गाये बादल क्यूँ छाये
………………………………………………………………
Koyal kyun gaaye-Aap aaye bahar aayi 1971

Artists: Rajendra Kumar, Sadhana

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Feb 15, 2016

मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा-आप आये बहार आई १९७१

सत्तर के दशक की शुरुआत में बदलाव देखने को मिले फिल्म संगीत
क्षेत्र में. पुराने समय के संगीतकार धीरे धीरे हाशिए पर पहुंचना शुरू
हो गए थे और नयी पीढ़ी अपने पैर लगभग जमा चुकी थी. हालांकि
ये कशमकश सन १९७५ तक चलती रही और ७७ के आते आते काफी
पुराने संगीतकारों को काम मिलना बंद हो गया.

ज्ञानी जनता का मानना है कि लक्ष्मी-प्यारे की जोड़ी ने शंकर जयकिशन
द्वारा रिक्त किया स्थान भर दिया. शंकर जयकिशन के संगीत की बात
अलग थी और उसकी पूर्ती करना किसी नयी पीढ़ी के संगीतकार के बस
में नहीं थी. लक्ष्मी प्यारे ने अपना अलग मुकाम बनाया, अपनी स्वतंत्र
शैली विकसित की और तुलना के दायरे से काफी हद तक वे बाहर हो
गए. वे आम आदमी के संगीतकार कहलाने लगे और ये उन्होंने साबित
भी किया अपनी धुनों द्वारा. 

लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ६० के दशक में उभरते संगीतकार कहलाते थे तो
७० के बाद वे स्थापित और काफी सुने जाने वाले संगीतकार बन गए.
सन १९७१ की फिल्म से एक मधुर युगल गीत आपको आज सुनवा रहे
हैं जो जनता द्वारा काफी पसंद किया गया और आज की पीढ़ी भी इस
गीत की मुरीद है. इस गीत में शब्दों को जो प्रवाह बना है वो इसके
कालजयी होने में महती भूमिका निभाता है. इस हिट गीत की लिखा
है आनंद बक्षी ने. परदे पर हैं साधना और राजेंद्र कुमार.




गीत के बोल:

दिल शाद था के फूल खिलेंगे बहार में
मारा गया गरीब इसी इंतज़ार में

मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता
मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता
अगर तूफ़ान नहीं आता किनारा मिल गया होता

मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता
अगर तूफ़ान नहीं आता किनारा मिल गया होता
मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता

न था मंज़ूर किस्मत को न थी मर्ज़ी बहारों की
नहीं तो इस गुलिस्तां में
नहीं तो इस गुलिस्तां में कमी थी क्या नज़रों की
मेरी नज़रों को भी कोई नज़ारा मिल गया होता
अगर तूफ़ान नहीं आता किनारा मिल गया होता

मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता

खुशी से अपनी आँखों को मैं अश्कों से भिगो लेता
मेरे बदले तू हंस लेती
मेरे बदले तू हंस लेती तेरे बाले में रो लेता
मुझे ए काश तेरा दर्द सारा मिल गया होता
अगर तूफ़ान नहीं आता किनारा मिल गया होता

मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता

मिली है चांदनी दिन को ये उनकी अपनी किस्मत है
मुझे अपने मुकद्दर से
मुझे अपने मुकद्दर से फकत इतनी शिकायत है
मुझे टूटा हुआ कोई सितारा मिल गया होता
अगर तूफ़ान नहीं आता किनारा मिल गया होता

मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता
अगर तूफ़ान नहीं आता किनारा मिल गया होता
मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता
……………………………………………………………………
Mujhe teri mohabbat ka sahara-Aap aaye bbahar aayi 1971

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Oct 20, 2010

सारे ज़माने से-आप आये बाहर आई १९७१

राजेंद्र कुमार जब श्वेत श्याम से रंगीन युग में आये तो कुछ ज्यादा
ही रंगीन नज़र आये फिल्मों में। उनके कपडे देखने लायक होते ।
किसी किसी गीत में लगता जैसे वो देव आनंद से कॉम्पीटीशन
कर रहे हों। ये गीत है फिल्म आप आये बाहर आई से जो कि एक
हिट फिल्म है। इसके गीत खूब बजे और आज हिमेश रेशमिया
के दौर में भी सुनाई दे जाते हैं। राजेंद्र कुमार के साथ साधना हैं जो
द्रश्यवाली के साथ साथ गीत की सुन्दरता बढ़ा रही हैं। ये गीत रफ़ी के
गाये तेज़ गति वाले गीतों में से एक है। इसको गुनगुनाना आसान नहीं है ।
गीत लिखा है आनंद बक्षी ने और धुन है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की

फिल्म के निर्देशक मोहन कुमार हैं जिनकी फ़िल्में संगीतमय हुआ करती हैं।
उनकी अधिकतर फिल्मों में गाने भी थोक के भाव में मिलते हैं।



गीत के बोल:


सारे ज़माने पे, मौसम सुहाने पे
इस दिल दीवाने पे, वीरानी सी थी छाई
आप आये बाहर आई
हो हो हो ओ ओ
सारे ज़माने पे मौसम सुहाने पे
इस दिल दीवाने पे वीरानी सी थी छाई
आप आये बाहर आई
हो हो हो ओ ओ

आपका ही था सबको इंतज़ार
आपका ही था सबको इंतज़ार
आपके लिए सब थे बेकरार
हवाएं घटायें फिजायें
बागों में फूलों ने झूलों ने
ली झूम के अंगडाई
आप आये बाहर आई
हो हो हो ओ ओ

सारे ज़माने पे मौसम सुहाने पे
इस दिल दीवाने पे वीरानी सी थी छाई
हो हो हो ओ ओ

आपने किया आ के एहसान
आपने किया आ के एहसान
था ये वीराना अब है गुलिस्तान
पुकारें नज़ारे ये सारे
गुलशन की गलियों से कलियों से
सुनिए आवाज़ ये आई
आप आये बहार आई
हो हो हो ओ ओ

सारे ज़माने पे मौसम सुहाने पे
इस दिल दीवाने पे वीरानी सी थी छाई
आप आये बाहर आई
हो हो हो ओ ओ

आ आ आ आ आ
हो हो ओ ओ ओ

लीजिये ना बस अब जाने का नाम
लीजिये ना बस अब जाने का नाम
रूठ जायेंगे जलवे ये तमाम
ये बस्ती ये मस्ती ये हस्ती
ऐसा ना हो जाए, बन जाए
ये महफ़िल फिर तन्हाई
आप आये बहार आई
हो हो हो ओ ओ

सारे ज़माने पे मौसम सुहाने पे
इस दिल दीवाने पे वीरानी सी थी छाई
आप आये बाहर आई
हो हो हो ओ ओ

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