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Feb 15, 2018

न बोले तुम न मैंने कुछ-बातों बातों में १९७९

फिल्म गोलमाल से सुर्ख़ियों में आये अमोल पालेकर के बारे
में उस समय की पत्रिकाओं में काफी लिखा जाता था जैसे
आज का सुपरस्टार, सभी स्टारों को पीछे छोड़ने वाला इत्यादि.

अमोल पालेकर अच्छे कलाकार तो हैं मगर वे कमर्शियल सिनेमा
के सुपर स्टार ना बन सके. सुपरस्टार बनने के लिए सबसे
पहली शर्त शायद नाक-नक्श लुभावने होने चाहिए. अभिनय से
अपनी धाक ज़माने वाले अमोल पालेकर को बतौर नायक काफी
फिल्मों में मौके मिले.

आज जिस फिल्म से गीत सुनेंगे वो भी अपने समय की एक
सफल और हिट फिल्म है जिसके गीत भी खूब चले और आज
भी बजते हैं. गीत एक पार्टी सोंग है जिसे आशा भोंसले और
आमिर कुमार ने गाया है. योगेश के बोल हैं और इसका संगीत
राजेश रोशन ने तैयार किया है.



गीत के बोल:

न बोले तुम न मैंने कुछ कहा कहा
मगर न जाने ऐसा क्यों लगा लगा
के धूप में खिला है चाँद दिन में रात हो गई
ये प्यार की बिना कहे सुने ही बात हो गई
न बोले तुम न मैंने कुछ कहा कहा
मगर न जाने ऐसा क्यों लगा लगा
के धूप में खिला है चाँद दिन में रात हो गई
ये प्यार की बिना कहे सुने ही बात हो गई

बदल रही है ज़िंदगी बदल रहे हैं हम
हो ओ ओ ओ ओ हो ओ ओ ओ ओ
थिरक रहे हैं जाने आज क्यों मेरे कदम
मेरे कदम मेरे कदम
किसी को हो न हो मगर हमें तो है पता

न बोले तुम न मैंने कुछ कहा कहा
मगर न जाने ऐसा क्यों लगा लगा
के धूप में खिला है चाँद दिन में रात हो गई
ये प्यार की बिना कहे सुने ही बात हो गई

घुली सी आज साँसों में किसी की साँस है
साँस है साँस है
ये कौन आज दिल के मेरे आस-पास है
हो ओ ओ ओ ओ हो ओ ओ ओ ओ
ये धीरे धीरे हो रहा है प्यार का नशा

न बोले तुम न मैंने कुछ कहा कहा कहा कहा
मगर न जाने ऐसा क्यों लगा लगा लगा लगा
के धूप में खिला है चाँद दिन में रात हो गई
ये प्यार की बिना कहे सुने ही बात हो गई
हो ओ ओ ओ ओ हो ओ
हो ओ ओ ओ ओ हो ओ

ये लग रहा है सारी उलझनें सुलझ गईं
सुलझ गईं सुलझ गईं
ये धड़कनों की बात धड़कने समझ गईं
न बोलिये की बोलने को कुछ नहीं रहा

न बोले तुम न मैंने कुछ कहा कहा
मगर न जाने ऐसा क्यों लगा लगा
के धूप में खिला है चाँद दिन में रात हो गई
ये प्यार की बिना कहे सुने ही बात हो गई
न बोले तुम न मैंने कुछ कहा कहा
मगर न जाने ऐसा क्यों लगा लगा
के धूप में खिला है चाँद दिन में रात हो गई
ये प्यार की बिना कहे सुने ही बात हो गई
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Na bole tum na maine kuchh-Baaton baton mein 1979

Artists: Amol Palekar, Tina Munim

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Jun 12, 2015

कहाँ तक ये मन को-बातों बातों में १९७९

गीतकार योगेश ने कुछ अच्छे और संजीदा गीत लिखे हैं फिल्मों
के लिए. ज्यादा मात्रा में उन्हें अवसर नहीं मिले लेकिन जितना
भी काम है उनका सराहनीय है. सलिल चौधरी ने शायद सबसे
ज्यादा उनकी सेवाएं ली हैं. उसके अलावा राहुल देव बर्मन और
राजेश रोशन ने उन्हें याद किया गीतों के लिए. राजेश रोशन
ने अमित खन्ना के साथ भी काफी काम किया और इस फिल्म
के लिए योगेश का गीतकार के रूप में चयन होना निर्देशक या
निर्माता की वजह से हो सकता है.

‘बातों बातों में’ सन ७९ की एक चर्चित फिल्म है और इसके गीत
बहुत बजे हुए हैं. किशोर कुमार के संजीदा गीतों में इसे शुमार
किया जाता है. आज आप भी आनंद उठायें इसका.



गीत के बोल:

कहाँ तक ये मन को अँधेरे छलेंगे
उदासी भरे दिन, कभी तो ढलेंगे

कभी सुख, कभी दुःख, यही ज़िन्दगी है
ये पतझड़ का मौसम, घड़ी दो घड़ी है
नए फूल कल फिर डगर में खिलेंगे
उदासी भरे दिन, कभी तो ढलेंगे

भले तेज़ कितना हवा का हो झोंका
मगर अपने मन में तू रख ये भरोसा
जो बिछड़े सफ़र में तुझे फिर मिलेंगे
उदासी भरे दिन, कभी तो ढलेंगे

कहे कोई कुछ भी, मगर सच यही है
लहर प्यार की जो, कहीं उठ रही है
उसे एक दिन तो, किनारे मिलेंगे
उदासी भरे दिन, कभी तो ढलेंगे

कहाँ तक ये मन को अँधेरे छलेंगे
उदासी भरे दिन, कभी तो ढलेंगे
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Kahan tak ye man ko-Baaton baaton mein 1979

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