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Jan 31, 2017

दीवाना मस्ताना हुआ दिल-बम्बई का बाबू १९६०

सुचित्रा सेन ने कम हिंदी फिल्मों में का मिया मगर उन
गिनती की फिल्मों से ही उनके कई प्रशंसक बन गए जो
हिंदी फ़िल्में देखते हैं. उनकी स्क्रीन प्रेजेंस ज़बरदस्त थी.

बम्बई का बाबू से एक गीत सुनते हैं जिसमें युगल गीत
बनाने के लिए जो भी मसाले लग सकते थे लगाये गए
हैं. संगीत के सुर, बावले से भाव, माधुर्य सभी का घोटा
है इसमें. ऐसे युगल गीत अब कहाँ बना करते हैं?

मजरूह सुल्तानपुरी का गीत है और एस डी बर्मन का
संगीत. आशा और रफ़ी ने इसे गाया है.




गीत के बोल:

प म ग म रे ग प म ग म
सा नि ध प म ग रे सा नी नी नी
दीवाना मस्ताना हुआ दिल
जाने कहाँ हो के बहार आई
दीवाना मस्ताना हुआ दिल
जाने कहाँ हो के बहार आई

हो हो तन को मेरे छुए
छुए घट काली
छेड़े लहर लहर मतवाली
तन को मेरे
हो हो तन को मेरे छुए
छुए घट काली
छेड़े लहर लहर मतवाली
राज़ कोई अनजाना
दीवाना मस्ताना हुआ दिल
जाने कहाँ हो के बहार आई
आ आ आ आ आ
जाने कहाँ हो के बहार आई

हो हो कुछ अनकही कहे मेरी चितवन
बोले जिया लिखे मेरी धड़कन
एक नया अफ़साना
कुछ अनकही
हो हो कुछ अनकही कहे मेरी चितवन
बोले जिया लिखे मेरी धड़कन
एक नया अफ़साना

दीवाना मस्ताना हुआ दिल
जाने कहाँ हो के बहार आई
ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जाने कहाँ हो के बहार आई

प म ग म रे ग प म ग म
प म ग म रे ग प म ग म
सा नि ध प म ग रे सा नी नी नी

दीवाना मस्ताना हुआ दिल
जाने कहाँ हो के बहार आई
ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जाने कहाँ हो के बहार आई

हो हो सावन लगा मचल गए बादल
देखो जिसे हुआ वही पागल
सावन लगा मचल गए बादल
देखो जिसे हुआ वही पागल
कौन हुआ दीवाना

दीवाना मस्ताना हुआ दिल
दीवाना मस्ताना हुआ दिल
जाने कहाँ हो के बहार आई
आ आ आ आ आ
जाने कहाँ हो के बहार आई
हो ओ ओ जाने कहाँ हो के बहार आई
आ आ आ जाने कहाँ हो के बहार आई
……………………………………………
Deewana mastana-Bambai ka baboo 1960

Artists: Dev Anand, Suchitra Sen

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May 31, 2016

ऐसे में कछु कहा नहीं जाए-बम्बई का बाबू १९६०

लोक गीतों का फ्लेवर चाहे संगीत के रूप में हो या बोलों के रूप
में हमें भाता है क्यूंकि हमारे जींस में लोक गीतों के प्रति रूचि
पीढ़ी दर पीढ़ी आई है. हम कितने भी आधुनिक हो जाए मगर
पानी को पनैया बोलने का आनंद नहीं छोड़ पाएंगे. 

मजरूह सुल्तानपुरी के नाम से ही मालूम पढता है वे किस क्षेत्र
से आये थे. उन्होंने फ़िल्मी गीतों में देसी प्रचलित शब्दों का समय
समय पर उपयोग किया और हमारी भाषा और भावों को बनाये
रखने में अतुलनीय योगदान दिया है. इस गीत में केवल एक
शब्द “कछु” से पूरे गीत का अंदाज़ बदल गया है. गीत में लोक
गीतों के आवश्यक तत्व-पीपल, हवा, चंदा भी मौजूद हैं. इसकी
धुन भी संगीतकार ने काफी मेहनत से बनाई है. सन १९६० से
ये गीत आनंदित करता चला आ रहा है निरंतर, संगीत में दम
है, तभी तो.

https://www.youtube.com/watch?v=_7PN5stySeI

गीत के बोल:

ऐसे में कछु कहा नहीं जाए
ऐसे में
ऐसे में कछु कहा नहीं जाए
ऐसे में
कछु कहा नहीं जाए
ऐसे में कछु कहा नहीं जाए

अपना है या बेगाना कौन मोहे समझाए
अनजाने से कोई कैसे रे निभाए
ऐसे में कछु कहा नहीं जाए
ऐसे में कछु कहा नहीं जाए
ऐसे में कछु कहा नहीं जाए
ऐसे में कछु कहा नहीं जाए
पीपल तले तले हवा रे पागल
चंदा हँसे फंसे जब आँचल

पीपल तले तले हवा रे पागल 
चंदा हँसे फंसे जब आँचल
उलझे लट मेरी कंगना से हाय रे
ऐसे में कछु कहा नहीं जाए
ऐसे में कछु कहा नहीं जाए
कहा नहीं जाए रे कहा नहीं जाए
ऐसे में कछु कहा नहीं जाए
ऐसे में

ठहरे कभी कही मन भागे
पीछे चलूँ चलूँ कभी आगे
ठहरे कभी कही मन भागे
पीछे चलूँ चलूँ कभी आगे
इक मन आये और इक मन जाए रे
ऐसे में कछु कहा नहीं जाए
ऐसे में कछु कहा नहीं जाए
ऐसे में कछु कहा नहीं जाए
ऐसे में कछु कहा नहीं जाए
कहा नहीं जाए रे कहा नहीं जाए
ऐसे में कछु कहा नहीं जाए
ऐसे में
...........................................................................
Aise mein kachhu kahan nahin jaaye-Bambai ka baboo 1960

Artists-Suchitra Sen, Dev Anand

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Jun 16, 2009

चल री सजनी अब क्या सोचे-बम्बई का बाबू १९६०

ये है बहुत प्रसिद्ध बिदाई गीत । मुकेश के गाये इस गीत ने
सफलता और प्रसिद्धि के मुकाम हासिल किए। बड़ी बड़ी
आँखों वाली सुचित्रा सेन हिन्दी फिल्मों में कम दिखाई दीं।
मुझे याद है मैंने चार हिन्दी फ़िल्में ही देखी हैं सुचित्रा सेन की
-चम्पाकली, ममता, आंधी और बम्बई का बाबू । एस डी बर्मन
का संगीतबद्ध किया ये गीत शादी ब्याह के अवसर पर नियमित
रूप से बजा करता था । इसके बाद आया फ़िल्म नीलकमल का
गीत बाबुल की दुआएं लेती जा। बहरहाल श्वेत श्याम के युग से
सबसे ज्यादा सुना जाने वाला बिदाई गीत यही है। शुरूआती कोरस
बस थोड़ा हाहाकार सा लगता है। मुकेश की गायकी लाजवाब है इस
गीत में । मजरूह सुल्तानपुरी ने एस डी बर्मन के साथ बढ़िया काम
किया है और कुछ यादगार गीत दिए हैं जिनका जिक्र अभी होना बाकी है।



गाने के बोल:

चल री सजनी अब क्या सोचे
चल री सजनी अब क्या सोचे
कजरा ना बह जाये रोते रोते
चल री सजनी अब क्या सोचे

बाबुल पछताए हाथों को मल के
काहे दिया परदेस टुकड़े को दिल के
बाबुल पछताए हाथों को मल के
काहे दिया परदेस टुकड़े को दिल के
आँसू लिये, सोच रहा, दूर खड़ा रे

चल री सजनी अब क्या सोचे
कजरा ना बह जाये रोते रोते
चल री सजनी अब क्या सोचे

ममता का आँगन, गुड़ियों का कंगना
छोटी बड़ी सखियाँ, घर गली अंगना
ममता का आँगन, गुड़ियों का कंगना
छोटी बड़ी सखियाँ, घर गली अंगना
छूट गया, छूट गया, छूट गया रे

चल री सजनी अब क्या सोचे
कजरा ना बह जाये रोते रोते
चल री सजनी अब क्या सोचे

दुल्हन बनके गोरी खड़ी है
कोई नही अपना कैसी घड़ी है
दुल्हन बनके गोरी खड़ी है
कोई नही अपना कैसी घड़ी है
कोई यहाँ, कोई वहाँ, कोई कहाँ रे

चल री सजनी अब क्या सोचे
कजरा ना बह जाये रोते रोते
चल री सजनी अब क्या सोचे

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