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Mar 18, 2020

ओ जी ओ जी छोडो भी दुपट्टा-चम्पाकली १९५७

ए जी ओ जी हिट्स के अंतर्गत अगला गीत सुनते
हैं सन १९५७ की फिल्म चम्पाकली से.

छेड़ छाड़ हर युग की फिल्मों में दिखलाई देती है.
इसका स्वरुप समय के साथ साथ बदलता चला.
छेड़ छाड़ और छिछोरियाई में अंतर है और इसे भी
हमने फिल्मों के माध्यम से ज्यादा समझा.

सुनते हैं राजेंद्र कृष्ण की रचना जिसका संगीत तैयार
किया है हेमंत कुमार ने और इसे लता मंगेशकर
संग स्वयं संगीतकार ने गाया है. पर्यावरण प्रेमी गीत
है ये इसमें आपको ढेर सारी भेडें भी दिखलाई देंगी
जिन्हें देख के आपको लगेगा नायक नायिका के
हिलने डुलने की गति जयादा है. हर चीज़ कम्पेरेटिव
जो है.



गीत के बोल:

ओ जी ओ जी छोड़ो भी दुपट्टा मेरा जादूगर बालमा
ओ जी ओ जी छोड़ो भी दुपट्टा मेरा जादूगर बालमा
ना जी ना जी हमें मजबूर करें नैना तेरे ज़ालिमा
ओ जी ओ जी छोड़ो भी दुपट्टा मेरा जादूगर बालमा
जादूगर बालमा

देखो मेरे नैनों को न देना इल्ज़ाम
नहीं देना इल्ज़ाम जी
गली गली कहीँ हो न जाऊँ बदनाम
हो न जाऊँ बदनाम जी
देखो मेरे नैनों को न देना इल्ज़ाम
नहीं देना इल्ज़ाम जी
गली गली कहीँ हो न जाऊँ बदनाम
हो न जाऊँ बदनाम जी
हाँ जी हाँ जी तुझे मशहूर करे नैना तेरे ज़ालमा
ओ जी ओ जी छोड़ो भी दुपट्टा मेरा जादूगर बालमा
जादूगर बालमा

बोलो कैसे रखूँ मैं ये मुखड़ा छुपाय के
छुपेगा न चाँद का ये टुकड़ा छुपाये से
बोलो कैसे रखूँ मैं ये मुखड़ा छुपाय के
छुपेगा न चाँद का ये टुकड़ा छुपाये से
ये चाँद का टुकड़ा छुपाये से

लो जी लो जी नित नये छेड़ करे जादूगर बालमा
ना जी ना जी हमें मजबूर करें नैना तेरे ज़ालिमा
ओ जी ओ जी छोड़ो भी दुपट्टा मेरा जादूगर बालमा
जादूगर बालमा
…………………………………………….
O ji chhodo ji-Champakali 1957

Artists: Bharat Bhushan, Suchitra Sen, Shubha Khote

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Jun 24, 2011

जा रे जा रे ओ माखन चोर-चम्पाकली १९५७

सन १९५७ में भारत भूषण की जो उल्लेखनीय फ़िल्में आयीं
वे थीं-चम्पाकली, गेटवे ऑफ़ इंडिया और रानी रूपमती ।

तीनों फिल्मों में ही कर्णप्रिय संगीत है। इन फिल्मों में से एक
ना एक गीत कालजयी निश्चित ही हुआ।

राजेंद्र कृष्ण ने माखन चोर नन्द किशोर के उल्लेख वाले
कुछ बढ़िया गीत लिखे हैं। फिल्म चम्पाकली के इस गीत को
आपने शायद ही सुना हो। हेमंत कुमार के संगीत निर्देशन
वाली फिल्म चम्पाकली के गीत सॉफ्ट किस्म के हैं और सुनने
में कानों में हलकी सी गुदगुदी करते हैं।




गीत के बोल:

जा रे जा रे ओ माखन चोर
चलेगी ना ये चोरी तेरी जोरा-जोरी
ओ छलिया, जा रे ओ माखन चोर
चलेगी ना ये चोरी तेरी जोरा-जोरी
ओ छलिया, जा रे ओ माखन चोर

जा जा काहे मचावत शोर
कभी ना छोड़ूँ तोरी ये बैयाँ गोरी-गोरी
सजनिया काहे मचावत शोर

ऐसी ठिठोली करो हमसे ना रसिया
कौन हो तुम हमारे
ऐसी ठिठोली करो हमसे ना रसिया
कौन हो तुम हमारे
होता है गोरी जो चकोरी का चंदा
हम वही हैं तुम्हारे
देखो जी देखो मेरा भोला सा मनवा
समझे नहीं इशारे ओ छलिया

जा रे ओ माखन चोर
चलेगी ना ये चोरी तेरी जोरा-जोरी
ओ छलिया, जा रे ओ माखन चोर

मैं बन्सी तू तान मेरा तेरा साथ पुराना
ओ मैं बन्सी तू तान मेरा तेरा साथ पुराना
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
रहने दो ये बात चले ना कोई बहाना
मानो ना मानो तुम्हें दिल की क़सम है अपना हमें बनाना

सजनिया काहे मचावत शोर
कभी ना छोड़ूँ तोरी ये बैयाँ गोरी-गोरी
सजनिया काहे मचावत शोर

हटो जी हटो मेरी छोडो डगरिया यूँ हमें ना सताओ
हटो जी हटो मेरी छोडो डगरिया यूँ हमें ना सताओ
जाने से पहले मेरे दिल की नगरिया मुस्करा के बसाओ
जानूँ ना जानूँ कैसा दिल है तुम्हारा
पहले दिल तो दिखाओ रे छलिया

जा रे ओ माखन चोर
चलेगी ना ये चोरी तेरी जोरा-जोरी
ओ छलिया, जा रे ओ माखन चोर
....................................
Ja re o makhanchor-Champakali 1957

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Jun 1, 2011

खुली हवा में डोले रे-चम्पाकली १९५७

फिल्म चम्पाकली में संगीतकार हेमंत कुमार ने अच्छा संगीत
दिया। राजेंद्र कृष्ण के मधुर गीतों को लता और रफ़ी ने बड़ी
तन्मयता के साथ गाया भी। सॉफ्ट किस्म के गीत हैं फिल्म के।

सॉफ्ट गीतों की विशेषता ये होती है उन्हें आप जब चाहे बिना
ना नुकुर, मूड हो ना हो सुन कर जी बहला सकते हैं। आपको पहले
इसी फिल्म से हमने दो गीत सुनवाये हैं-छुप गया कोई रे और

ओ गवालन क्यूँ मेरा मन। गीत में नायिका कुछ विशेष व्यायाम
कर रही है और वो क्या है मुझे समझ नहीं आ रहा है। कृपया
बतलाएं धागे में पत्थर बांध के ऐसा क्या किया जाता है जिससे
बेचारे पक्षी नीचे गिरने लगते हैं।





गीत के बोल:

खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया
खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया

बदरिया जो छाई संदेसा ऐसा लाई
कि सुन-सुन मैं तो शरमाई घबराई
बदरिया जो छाई संदेसा ऐसा लाई
कि सुन-सुन मैं तो शरमाई घबराई
किसी ने चोरी-चोरी मेरे घूँघट के पट खोले रे
लाज की मारी मैं तो हुई रे बावरिया

खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया

मैं अँखियाँ झुकाऊँ या मुखड़ा छुपाऊँ
समझ नहीं आए हाय कित जाऊँ
मैं अँखियाँ झुकाऊँ या मुखड़ा छुपाऊँ
समझ नहीं आए हाय कित जाऊँ
आज किसी ने मुझे पुकारा प्यार से हौले-हौले रे
झुक झुक जाये हाय मेरी नजरिया

खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया

......................................
Khuli hawa mein dole re-Champakali 1957

Artists: Bharat Bhushan, Suchitra Sen

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Jan 11, 2010

छुप गया कोई रे-चम्पाकली १९५७

पिछली एक पोस्ट में आपने फिल्म चम्पाकली का एक कम
सुना हुआ गीत देखा। आइये अब इस फिल्म के सबसे लोकप्रिय
और कर्णप्रिय गीत पर नज़र डाली जाए जो लता मंगेशकर का
गाया हुआ है। इसे फिल्माया गया है सुचित्रा सेन पर। इस गीत को
लता मंगेशकर के गाये सबसे लोकप्रिय गीतों में गिना जाता है।
मर्मभेदी बांसुरी से शुरू होते इस गीत को आप जैसे जैसे सुनते जाते
हैं वैसे वैसे इसका जादू आपके दिमाग पे असर डालने लगता है।



गीत के बोल:

छुप गया कोई रे, दूर से पुकार के
दर्द अनोखे हाय, दे गया प्यार के
छुप गया कोई रे, दूर से पुकार के
दर्द अनोखे हाय, दे गया प्यार के

आज है सूनी सूनी, दिल की ये गलियां
बन गयी कांटे मेरी, खुशियों की कलियाँ
आज है सूनी सूनी, दिल की ये गलियां
बन गयी कांटे मेरी, खुशियों की कलियाँ
प्यार भी खोया मैंने, सब कुछ हार के
दर्द अनोखे हाय, दे गया प्यार के

छुप गया कोई रे, दूर से पुकार के
दर्द अनोखे हाय, दे गया प्यार के


अंखियों से नींद गयी, मनवा से चैन रे
छुप छुप रोए मेरे, खोये खोये नैन रे
अंखियों से नींद गयी, मनवा से चैन रे
छुप छुप रोए मेरे, खोये खोये नैन रे
हाय यही तो मेरे, दिन थे सिंगर के
दर्द अनोखे हाय, दे गया प्यार के

छुप गया कोई रे, दूर से पुकार के
दर्द अनोखे हाय, दे गया प्यार के
छुप गया कोई रे, दूर से पुकार के
दर्द अनोखे हाय, दे गया प्यार के

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Jan 8, 2010

ओ गवालन क्यूँ मेरा मन-चम्पाकली १९५७

ग्वालों पर कई गीत बने होंगे, गोपियों पर भी बहुत से गीत बने होंगे,
मगर क्या आपने कभी ग्वालन के जिक्र वाला गीत सुना है ? ये गीत
अनूठा है और इसमें गवालन का जिक्र है। गीत से अलबत्ता आपको ये
मालूम नहीं पड़ेगा की गवालन असली है या नाम की। फार्मूला यूँ हो
सकता है-कृष्ण बांसुरी बजाते थे, ग्वाले थे(?), मतलब ग्वाले बांसुरी
बजाते हैं। यहाँ ग्रामीण परिवेश है और नायिका बांसुरी के साथ कुश्ती
लड़ रही है या यूँ कहें बजा रही है संभव है वो ग्वालन हो । जनता से
एक बांसुरी ढंग से नहीं बजती वो तो डबल बांसुरी बजा रही है।

ग्वाले गाय, भैंस, बकरी सभी कुछ चरा सकते हैं। आधुनिक ग्वालों
को ही लीजिये, व्यवस्था का दूध निकाल कर वे आम जन को चरा जो
रहे हैं।

खैर, गीत का पहला १ मिनट का हिस्सा किसी खांसी की दवाई के लिए
उपयुक्त विज्ञापन बन सकता है, क्यूँ ये जानने के लिए ही गीत देख-सुन
लीजिये जनाब।

भ्रमित, चकित और अचंभित से नायक नायिका । कभी कभी ऐसे गीत
देखके आनंद आता है। सुचित्रा सेन और भारत भूषण पर गीत फिल्माया
गया है । एक हल्का फुल्का गीत गा रहे हैं रफ़ी फिल्म चम्पाकली के
लिए। राजेंद्र कृष्णके बोलों को धुन में ढाला है हेमंत कुमार ने। नींद नहीं
आ रही हो तो रातके वक़्त इस गीत को देखिये । नायिका की नशीली
ऑंखें देख के शर्तियाआपको झपकी आ जाएगी। भारत भूषण ने भी इस
गीत में खूब दीदे फाड़े हैं। ऐसा लगता है जैसे दोनों के बीच प्रतियोगिता चल
रही हो।



गीत के बोल:

ओ गवालन क्यूँ मेरा मन तेरी चितवन ले गयी
ओ गवालन क्यूँ मेरा मन तेरी चितवन ले गयी

बांसुरी की तान प्यारी बेक़रारी दे गयी
बांसुरी की तान प्यारी बेक़रारी दे गयी

ये अदा ये भोलपन ये गाल पर जुल्फों की घटा
ये अदा ये भोलपन ये गाल पर जुल्फों की घटा
अब किसी को क्या बताऊँ
अब किसी को क्या बताऊँ क्यूँ मेरा दिल खो गया
ये उमरिया ये नजरिया दिल को धड़कन दे गयी

ओ गवालन क्यूँ मेरा मन तेरी चितवन ले गयी

ये गुलाबी होंठ जैसे पांखडी सी है फूल की
ये गुलाबी होंठ जैसे पांखडी सी है फूल की
आप अपना चैन खोया
आप अपना चैन खोया देख कर ये क्या भूल की
दर्द न्यारा प्यारा प्यारा प्रीत पापन दे गयी

ओ गवालन क्यूँ मेरा मन तेरी चितवन ले गयी
बांसुरी की तान प्यारी बेक़रारी दे गयी
....................................
O gawalan kyun mera man-Champakali 1957

Artists: Bharat Bhushan, Suchitra Sen

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