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Mar 22, 2010

तुम्हारे बुलाने को जी चाहता है-लाडली १९४९

फिल्म लाडली का ये गीत लता मंगेशकर ने बिलकुल लाडली
वाले अंदाज़ में गाया है। लता मंगेशकर के शुरूआती गीतों में
से एक है ये जिसे लिखा है बेहज़ाद लखनवी ने और धुन बनाई
है अनिल बिश्वास ने । इसे लता के लोकप्रिय गीतों में गिना
जाता है । १९४९ में बना ये गीत आज भी मन को लुभाता है।
गीत का विडियो यू ट्यूब पर उपलब्ध नहीं है। ये ऑडियो क्लिप
है जिसपर संगीत प्रेमी ने स्लाईड शो बनाया है नायिकाओं के
फोटो लगा के।



गीत के बोल:

तुम्हारे बुलाने को जी चाहता है, जी चाहता है
तुम्हारे बुलाने को जी चाहता है, जी चाहता है
मुक़द्दर बनाने को जी चाहता है, जी चाहता है

तुम्हारे बुलाने को

जो तुम आओ, तो साथ खुशियाँ भी आयें, खुशियाँ भी आयें
जो तुम आओ, तो साथ खुशियाँ भी आयें, खुशियाँ भी आयें
मेरा मुस्कुराने को जी चाहता है जी चाहता है

तुम्हारे बुलाने को

तुम्हारी मोहब्बत में, खोयी हुयी हूँ, खोयी हुयी हूँ
तुम्हारी मोहब्बत में, खोयी हुयी हूँ, खोयी हुयी हूँ
तुम्हें ये बुलाने को, जी चाहता है, जी चाहता है

तुम्हारे बुलाने को

ये जी चाहता है के तुम्हारी भी सुन लूं, तुम्हारी भी सुन लूं
ये जी चाहता है के तुम्हारी भी सुन लूं, तुम्हारी भी सुन लूं
खुद अपनी सुनाने को, जी चाहता है, जी चाहता है
मुक़द्दर बनाने को जी चाहता है, जी चाहता है

तुम्हारे बुलाने को
...............................
Tumhare bulane ko jee chahta hai-Laadli 1949

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Mar 8, 2010

रुला के गया सपना मेरा-ज्वेल थीफ १९६७

फिल्म गाईड के सफल संगीत के बाद विजय आनंद गीतकार
शैलेन्द्र से फिल्म 'ज्वेल थीफ' के गाने भी लिखवाना चाहते थे।
फिल्म तीसरी कसम गीतकार शैलेन्द्र के लिए दु:स्वप्न ही
साबित हुई। फिल्म निर्माण के दौरान जो कडवे अनुभव उन्हें
हुए उसकी वजह से उनके भीतर का संवेदनशील गीतकार बुरी
तरह से आहत हुआ। शैलेन्द्र से गीत लिखवाने के लिए विजय
आनंद ने उनके घर के कई चक्कर काटे और वे इस इंतज़ार में
रहते कि शैलेन्द्र से मुलाकात हो। आखिर एक दिन शैलेन्द्र ने
गोल्डी से कह दिया कि उनकी लिखने की इच्छा मर चुकी है। शैलेन्द्र
के सुझाव पर मजरूह सुल्तानपुरी से फिल्म के बाकी गीत
लिखवाए गए।


फिल्म 'ज्वेल थीफ' के लिए गीतकार शैलेन्द्र ने केवल एक ही
गीत लिखा और आप महसूस कर सकते हैं वो पीड़ा जो गीतकार
के दिल के अन्दर थी, इस गीत की पंक्तियों के द्वारा। इस गीत के
लिए सचिन देव बर्मन ने भी एक मर्मस्पर्शी धुन बना के इसको
अमर कर दिया। गायिका हैं लता मंगेशकर जिनके सर्वश्रेष्ठ गीतों
में इसकी गिनती की जाती है। गीत फिल्माया गया है नायिका
वैजयंतीमाला पर। गीत का फिल्मांकन बढ़िया है और आपको
गीत के अंत तक बांधे रखता है। फिल्म के सभी गीत उत्तम कोटि
के हैं और सभी रंगों वाले हैं.




गाने के बोल:

रुला के गया सपना मेरा
रुला के गया सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा,

रुला के गया सपना मेरा

वो ही है ग़म-ए-दिल, वो ही है चंदा, तारे
हाय, वो ही हम बेसहारे
वो ही है ग़म-ए-दिल, वो ही है चंदा, तारे
हाय, वो ही हम बेसहारे
आधी रात वही है, और हर बात वही है
फिर भी न आया लुटेरा,

रुला के गया सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा
रुला के गया सपना मेरा

कैसी ये ज़िंदगी, के साँसों से हम, ऊबे
हाय, के दिल डूबा हम डूबे
कैसी ये ज़िंदगी, के साँसों से हम, ऊबे
हाय, के दिल डूबा हम डूबे
एक दुखिया बेचारी, इस जीवन से हारी
उस पर ये ग़म का अन्धेरा,

रुला के गया सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा
रुला के गया सपना मेरा

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Mar 6, 2010

मेरे मन का बावरा पंछी-अमर दीप १९५८

टी प्रकाश राव एक लम्बी पारी खेलने वाले निर्देशक है बॉलीवुड के।
उन्होंने ८० के दशक तक हिंदी, तमिल और तेलुगु में सफल फ़िल्में
बनायीं।

एक फिल्म है सन १९५८ की -सितमगर जिसमे निसार बज्मी का
संगीत है उसके निर्देशक प्रकाश राव थे। उसमे जैमिनी गणेशन और
पद्मिनी की प्रमुख भूमिकाएं हैं। प्रकाश राव ने अपने फ़िल्मी करियर में
कई संगीतकारों की सेवाएँ ली जिनमें सी. रामचंद्र, शंकर जयकिशन
और चित्रगुप्त के नाम प्रमुख हैं।

१९५८ में ही एक हिंदी फिल्म आई अमर दीप जिसमे देव आनंद और
वैजयान्तिमाला नायक नायिका हैं। पद्मिनी दूसरी नायिका हैं इस
फिल्म की जिनपर इस फिल्म का सबसे कर्णप्रिय गीत फिल्माया गया
है। गीत लता मंगेशकर की आवाज़ में है और इसके संगीतकार
सी. रामचंद्र हैं जिनका जादुई असर सन १९५८ में भी बरकरार है।
राजेंद्र कृष्ण के सरल बोलों को एक आकर्षक धुन पर तैराता ये गीत
गुनगुनाने में आसान है। गीत में नायिका के गीत से नायक कुछ
याद करने की कोशिश कर रहा है।



गीत के बोल:

आ आ आ, आ आ आ, आ आ, आ आ आ

मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले
मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले
अंखियों में आज किसका
राह राह के प्यार डोले
मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले

किस के ख्याल में ये
नज़रें झुकी झुकी हैं
किस के ख्याल में ये
नज़रें झुकी झुकी हैं
देखो इधर भी लब पर
आहें रुकी रुकी हैं
देखो इधर भी लब पर
आहें रुकी रुकी हैं
तुम हो करार जिस दिल का
तुम हो करार जिस दिल का
वही बेक़रार डोले

मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले
मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले

दिल को लगन है उसकी
मीठी नज़र है जिसकी
दिल को लगन है उसकी
मीठी नज़र है जिसकी
हम पास हैं तुम्हारे
फिर दिल में याद है किस की
हम पास हैं तुम्हारे
फिर दिल में याद है किस की
तुम जो नज़र मिलाओ
तुम जो नज़र मिलाओ
दिल में बहार डोले

मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले
मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले

कब से खड़े हुए हैं
कह दो तो लौट जाएँ
कब से खड़े हुए हैं
कह दो तो लौट जाएँ
तुम्हे दूर ही से देखें
हर दिन ना पास आये
तुम्हे दूर ही से देखें
हर दिन ना पास आये
आँखों में ज़िन्दगी भर तक
आँखों में ज़िन्दगी भर तक
तेरा इंतज़ार डोले

मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले
मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले

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Mar 4, 2010

ए मेरे दिल-ए-नादान-टॉवर हाउस १९६२

सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ हिंदी फ़िल्मी गीतों में से एक आज आपके लिए
प्रस्तुत है। संगीतकार रवि की इस अविस्मर्णीय धुन के बहुत
से दीवाने हैं। ठन्डे हवा के झोंके सा असर करता ये गीत आप जब
भी सुनेंगे मन में शांति की अनुभूति होगी। थोडा उपदेश इस गीत
की पंक्तियों में भी आपको मिलेगा। भूटिया प्रष्ठभूमि की फिल्मों से
कुछ ही गीत चर्चित हुए हैं। चर्चित हुए तो ऐसे हुए की हर तरफ छ
गए। याद कीजिये महल का गीत-आएगा आने वाला। महल का गीत
शायद कद में काफी बड़ा है। ये गीत अभिनेत्री शकीला पर फिल्माया
गया है। संगीतकार रवि की यह धुन मानो दैवीय स्पर्श से होके गुजर
रही हो, मालूम पढता है। गीतकार असद भोपाली को शायद ही कोई याद
करता है, सिवा उनके प्रशंसकों के। ये गीत उन्हीं का लिखा हुआ है और
उनका सबसे चर्चित गीत भी है। इस गीत की पंक्तियाँ हैं-"अपना भी घडी
भर में बन जाता है बेगाना" इसका बहुत अच्छा अनुभव मुझे जीवन में
हो चुका है।



गीत के बोल:

ए मेरे दिल-ए-नादाँ तू ग़म से न घबराना
ए मेरे दिल-ए-नादाँ तू ग़म से न घबराना
इक दिन तो समझ लेगी दुनिया तेरा अफसाना
ए मेरे दिल-ए-नादाँ तू ग़म से न घबराना
ए मेरे दिल-ए-नादाँ तू ग़म से न घबराना

अरमान भरे दिल में ज़ख्मों को जगह दे दे
अरमान भरे दिल में ज़ख्मों को जगह दे दे
भड़के हुए शोलों को कुछ और हवा दे दे
बनती है तो बन जाए यह ज़िन्दगी अफसाना
ए मेरे दिल-ए-नादाँ तू ग़म से न घबराना

ए मेरे दिल-ए-नादाँ तू ग़म से न घबराना
इक दिन तो समझ लेगी दुनिया तेरा अफसाना
ए मेरे दिल-ए-नादाँ तू ग़म से न घबराना

फरियाद से क्या हासिल रोने से नतीजा क्या
फरियाद से क्या हासिल रोने से नतीजा क्या
बेकार है यह बातें इन बातों से होगा क्या
अपना भी घडी भर में बन जाता है बेगाना
ए मेरे दिल-ए-नादाँ तू ग़म से न घबराना

ए मेरे दिल-ए-नादाँ तू ग़म से न घबराना
इक दिन तो समझ लेगी दुनिया तेरा अफसाना
ए मेरे दिल-ए-नादाँ तू ग़म से न घबराना
.......................................
Ae mere dil-enadaan-Tower House 1962

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Jan 11, 2010

छुप गया कोई रे-चम्पाकली १९५७

पिछली एक पोस्ट में आपने फिल्म चम्पाकली का एक कम
सुना हुआ गीत देखा। आइये अब इस फिल्म के सबसे लोकप्रिय
और कर्णप्रिय गीत पर नज़र डाली जाए जो लता मंगेशकर का
गाया हुआ है। इसे फिल्माया गया है सुचित्रा सेन पर। इस गीत को
लता मंगेशकर के गाये सबसे लोकप्रिय गीतों में गिना जाता है।
मर्मभेदी बांसुरी से शुरू होते इस गीत को आप जैसे जैसे सुनते जाते
हैं वैसे वैसे इसका जादू आपके दिमाग पे असर डालने लगता है।



गीत के बोल:

छुप गया कोई रे, दूर से पुकार के
दर्द अनोखे हाय, दे गया प्यार के
छुप गया कोई रे, दूर से पुकार के
दर्द अनोखे हाय, दे गया प्यार के

आज है सूनी सूनी, दिल की ये गलियां
बन गयी कांटे मेरी, खुशियों की कलियाँ
आज है सूनी सूनी, दिल की ये गलियां
बन गयी कांटे मेरी, खुशियों की कलियाँ
प्यार भी खोया मैंने, सब कुछ हार के
दर्द अनोखे हाय, दे गया प्यार के

छुप गया कोई रे, दूर से पुकार के
दर्द अनोखे हाय, दे गया प्यार के


अंखियों से नींद गयी, मनवा से चैन रे
छुप छुप रोए मेरे, खोये खोये नैन रे
अंखियों से नींद गयी, मनवा से चैन रे
छुप छुप रोए मेरे, खोये खोये नैन रे
हाय यही तो मेरे, दिन थे सिंगर के
दर्द अनोखे हाय, दे गया प्यार के

छुप गया कोई रे, दूर से पुकार के
दर्द अनोखे हाय, दे गया प्यार के
छुप गया कोई रे, दूर से पुकार के
दर्द अनोखे हाय, दे गया प्यार के

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Dec 28, 2009

मुझपे इलज़ाम-ए-बेवफाई है-यास्मीन १९५५

वैजयंतीमाला ने इस फिल्म की शीर्षक भूमिका निभाई थी। फिल्म
यास्मीन कर्णप्रिय गीतों से भरी फिल्म है। सी. रामचंद्र ने काफी
मेहनत की इसके संगीत पर। जैसा कि होता आया है फिल्म पिटी
तो उसके संगीतकार को भी ख़ास फ़ायदा नहीं होता। बावजूद इस तथ्य
के, इस फिल्म के गीत मधुर संगीत के दीवानों के दिलो-दिमाग में
घर कर गए। इस गीत का विडियो तो मुझे दिखा नहीं यू ट्यूब पर,
मगर इसका वाद्य संस्करण एक संगीतप्रेमी ने ज़रूर डाला है, उसी से
आनंद उठाइए। बोलों और सुरों का आदर्श संगम इसको कहते हैं।
गीत के बोल लिखे हैं जान निसार अख्तर ने और इसको गाया है
लता मंगेशकर ने। इस गीत की गिनती सदाबहार गीतों में की
जाती है।




गीत के बोल:

मुझपे इलज़ाम-ए-बेवफाई है
मुझपे इलज़ाम-ए-बेवफाई है
ए मुहब्बत तेरी दुहाई है
मुझपे इलज़ाम-ए-बेवफाई है

उसने ठानी है ज़ुल्म धाने की
मुझ में हिम्मत है गम उठाने की
खुश हो, ए दिल! तुझे मिटाने की, मिटाने की
आज उसने क़सम तो खाई है
ए मुहब्बत तेरी दुहाई है
मुझपे इलज़ाम-ए-बेवफाई है

तू हुआ दिल से कब जुदा कह दे
मुझसे क्यों हो गया खफा कह दे
तू ही इन्साफ से ज़रा कह दे, ज़रा कह दे
किसने शर्त-ए-वफ़ा भुलाई है
ए मुहब्बत तेरी दुहाई है
मुझपे इलज़ाम-ए-बेवाफाई है

है गवारा तेरा सितम मुझको
हर जफा है तेरी करम मुझको
जान जाए, नहीं है गम मुझको
जब मुहब्बत पे बात आई है
ए मुहब्बत तेरी दुहाई है
मुझपे इलज़ाम-ए-बेवफाई है .

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Dec 20, 2009

बचपन की मोहब्बत को-बैजू बावरा १९५२

ज़ख्म जब हरे होते हैं तो उनमे से टीस उभरती है। अपनी भावनाओं को
कोई कितना भी दबाये वो बाहर आने का ज़रिया ढूंढ निकालती हैं। बात
मुझ पर भी लागू होती है । यादें जब बाहर निकलती हैं तो चायनीज नूडल
की भांति हाथ से फिसलना शुरू कर देती हैं और कुर्सी मेज़ के इर्द गिर्द
जमा हो जाती हैं।

इस गीत के साथ कुछ यादें जुडी हुई हैं। जब जब इसको सुनता हूँ मुझे
अपनी बदकिस्मती पर रंज होने लगता है। मेरी पसंद के गीत मैं इस
ब्लॉग में शामिल करता रहा हूँ उसी कड़ी में ये पेश है बैजू बावरा का गीत।
शकील बदायूनी के अच्छे गीतों में इसको गिना जा सकता है।



गीत के बोल:


हो जी हो, ओ ओ ओ ओ
बचपन की मोहब्बत को, दिल से ना जुदा करना

बचपन की मोहब्बत को, दिल से ना जुदा करना
जब याद मेरी आये, मिलने की दुआ करना

बचपन की मोहब्बत को, दिल से ना जुदा करना
जब याद मेरी आये, मिलने की दुआ करना

घर मेरी उम्मीदों का, सूना किये जाते हो
हो जी हो, ओ ओ ओ ओ
दुनिया ही मुहब्बत की, लूटे लिए जाते हो
जो ग़म दिए जाते हो, उस ग़म की दवा करना

बचपन की मोहब्बत को, दिल से ना जुदा करना
जब याद मेरी आये, मिलने की दुआ करना

सावन में पपीहे का, संगीत चुराऊँगी
हो जी हो, ओ ओ ओ ओ
फ़रियाद तुम्हें अपनी, गा गा के सुनाउंगी
आवाज़ मेरी सुन के, दिल थाम लिया करना

बचपन की मोहब्बत को, दिल से ना जुदा करना
जब याद मेरी आये, मिलने की दुआ करना

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Dec 19, 2009

तेरा ख़त ले के सनम-अर्धांगिनी १९५९

मीना कुमारी के हिस्से में जो लता के सर्वश्रेष्ठ गीत आये उनमे से
एक है फिल्म अर्धांगिनी का -तेरा ख़त ले के सनम.. नायिका इतनी
खुश है पत्र पाकर कि पांव कहीं रखती है, कदम कहीं और पड़ते हैं। 
इसको कहते हैं ख़ुशी के मारे बहकना या लडखडाना। बहकना या
लडखडाना केवल मदिरा का दुष्प्रभाव नहीं है। हवा में उड़ने लगना
भी एक कला है जो मुगालतों के चलते मानव में आ जाया करती है।
मजरूह सुल्तानपुरी ने बहुत हलके से साहित्यिक चपत जमाई है।
लता मंगेशकर ने काफी चिट्ठी /पत्र /डाक पर गीत गाये हैं। एक
मशहूर गीत है जावेद अख्तर का लिखा हुआ फिल्म शक्ति में। बोलों
के लिहाज से मैं अर्धांगिनी के गीत को बेहतर मानता हूँ।


गीत के बोल:

हा हा हा हा, हा हा हा हा हा
हो हो हो हो, हो हो हो हो हो
आ आ आ आ, आ आ आ आ आ
तेरा ख़त ले के सनम
पाँव कहीं रखते हैं हम, हो ओ ओ
कहीं पड़ते हैं कदम, कहीं पड़ते हैं कदम
तेरा ख़त ले के सनम
पाँव कहीं रखते हैं हम, हो ओ ओ
कहीं पड़ते हैं कदम
कहीं पड़ते हैं कदम

राज़ जो इस में छिपा है वो समझता है दिल
हा आ आ आ
राज़ जो इस में छिपा है वो समझता है दिल
कैसे भूलेगी ये ख़त हम से धड़कता है दिल
ये दिल ठहरे ज़रा
नज़र ठहरे ज़रा
होश में आ ले ज़रा हम
तेरा ख़त ले के सनम
पाँव कहीं रखते हैं हम, हो ओ ओ
कहीं पड़ते हैं कदम
कहीं पड़ते हैं कदम

इस में जो बात भी होगी बड़ी कातिल होगी
आ आ आ..................
इस में जो बात भी होगी बड़ी कातिल होगी
तेरी आवाज़ भी इन बातों में शामिल होगी
ये दिल ठहरे ज़रा
नज़र ठहरे ज़रा
सुने फिर तेरी सदा हम
तेरा ख़त ले के सनम
पाँव कहीं रखते हैं हम, हो ओ ओ
कहीं पड़ते हैं कदम
कहीं पड़ते हैं कदम

क्यों ना पा कर इसे तूफ़ान उठे सीने में
आ आ आ..............
क्यों ना पा कर इसे तूफ़ान उठे सीने में
तेरी सूरत नज़र आती है इस आईने में
ये दिल ठहरे ज़रा
नज़र ठहरे ज़रा
ज़रा फिर हो लें फ़िदा हम
तेरा ख़त ले के सनम
पाँव कहीं रखते हैं हम, हो ओ ओ
कहीं पड़ते हैं कदम
कहीं पड़ते हैं कदम

तेरा ख़त ले के सनम
...................................................................
Tera khat le ke sanam-Ardhangini 1959

Artist: Meena Kumari

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Dec 6, 2009

दुआ कर गम-ऐ-दिल -अनारकली १९५३

अविस्मर्णीय फ़िल्म है "अनारकली" । सन १९५३ में आई इस फ़िल्म
ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए । इसका संगीत भी इतना
लोकप्रिय हुआ कि लगभग हर संगीत प्रेमी के मन में इसके गीत सुनने
की ललक रहती। संगीतकार सी रामचंद्र के जीवन में भी फ़िल्म अलबेला
के बाद इतनी धूम किसी फ़िल्म के संगीत ने नहीं मचाई। इसका शुमार
आज तक की बनी १० सबसे सफलसंगीतमय फिल्मों में किया जाता है।
हिन्दी सिनेमा इतिहास की पीरियड फिल्मों में सबसे सफल फिल्मों में से
एक बनाने के लिए इसके निर्देशक नन्दलाल जसवंतलाल लंबे समय तक
याद किए जायेंगे। उन्होंने कई ऐतिहासिक और पौराणिक फ़िल्में बनाई हैं।
इस फ़िल्म ने इसकी अभिनेत्री को भी बहुत लोकप्रिय कराया। बीना राय
की ये शायद सबसे बड़ी फ़िल्म साबित हुई। फ़िल्म एक से बढ़कर एक गीतों
से भरी पड़ी है। ये जो गीत प्रस्तुत है इसके बोल लिखे हैं शैलेन्द्र ने।



गीत के बोल:

दुआ कर गम-ऐ-दिल, खुदा से दुआ कर

वफाओं का मजबूर दामन बिछा कर
दुआ कर गम-ऐ-दिल, खुदा से दुआ कर
जो बिजली चमकती है उनके महल पर
वो कर ले तसल्ली, मेरा घर जला कर
दुआ कर गम-ऐ-दिल, खुदा से दुआ कर
दुआ कर गम-ऐ-दिल, खुदा से दुआ कर

सलामत रहे तू, मेरी जान जाए
सलामत रहे तू, मेरी जान जाए
मुझे इस बहाने से ही मौत आए
करूंगी मैं क्या चंद साँसें बचा कर
दुआ कर गम-ऐ-दिल, खुदा से दुआ कर
दुआ कर गम-ऐ-दिल, खुदा से दुआ कर

मैं क्या दूँ तुझे मेरा सब लुट चुका है
दुआ के सिवा मेरे पास और क्या है
मैं क्या दूँ तुझे मेरा सब लुट चुका है
दुआ के सिवा मेरे पास और क्या है
गरीबों का एक आसरा-ऐ-खुदा है
गरीबों का एक आसरा-ऐ-खुदा है
मगर मेरी तुझसे यही इल्तजा है
न दिल तोड़ना दिल की दुनिया बसा कर

दुआ कर गम-ऐ-दिल, खुदा से दुआ कर
दुआ कर गम-ऐ-दिल, खुदा से दुआ कर
वफाओं का मजबूर दामन बिछा कर
दुआ कर गम-ऐ-दिल, खुदा से दुआ कर
दुआ कर गम-ऐ-दिल, खुदा से दुआ कर

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Nov 26, 2009

दो दिन के लिए मेहमान यहाँ-बादल १९५१

जो गीत मधुबाला पर फिल्माए गए हैं वे अपने आप में
निराले हैं। अप्रतिम सौंदर्य के साथ ही उनका अभिनय भी
तारीफ़ ऐ काबिल था। कोई दर्द भरा उनपर फिल्माया गया
गीत आपको देखने को मिले तो समझिये वो तराशा हुआ
हीरा आप तक पहुँच गया है। ऐसा ही एक गीत है फ़िल्म
बादल से -"दो दिन के लिए मेहमान यहाँ "। सरल शब्दों
से मर्म पर चोट करने में शैलेन्द्र का कोई सानी नहीं था।
लता मंगेशकर द्वारा गाये सर्वश्रेष्ठ दर्द भरे गीतों में इसकी
गिनती होती है। मधुरता की पराकाष्ठा पर हुआ करती थी
लता मंगेशकर की आवाज़ ५० के दशक में । धुन तैयार
की है शंकर जयकिशन ने। इस गीत में आपको भविष्य
की माधुरी दीक्षित की हलकी सी झलक आएगी।



गीत के बोल:

दो दिन के लिए मेहमान यहाँ
मालूम नहीं मंजिल है कहाँ

अरमान भरा दिल तो है मगर
जो दिल से मिले वो दिल है कहाँ

एक फूल जला एक फूल खिला
कुछ अपना लुटा कुछ उनको मिला

एक फूल जला एक फूल खिला
कुछ अपना लुटा कुछ उनको मिला

कैसे करें किस्मत से गिला हम
कैसे करें किस्मत से गिला
रंगीन हर एक महफ़िल है कहाँ

दो दिन के लिए मेहमान यहाँ
मालूम नहीं मंजिल है कहाँ

दुनिया में सवेरा होने लगा
दुनिया में सवेरा होने लगा
इस दिल में अन्धेरा होने लगा

हर ज़ख्म सिसक के रोने लगा
हर ज़ख्म सिसक के रोने लगा
किस मुंह से कहें कातिल है कहाँ

दो दिन के लिए मेहमान यहाँ
मालूम नहीं मंजिल है कहाँ

जलता है जिगर उठता है धुंआ
आंखों से मेरी आंसू हैं रवां

जलता है जिगर उठता है धुंआ
आंखों से मेरी आंसू हैं रवां

मरने से हो जाए अता जो
मरने से हो जाए अता
ऐसी ये मेरी मुश्किल है कहाँ

दो दिन के लिए मेहमान यहाँ
मालूम नहीं मंजिल है कहाँ

दो दिन के लिए.....

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Nov 24, 2009

तुझे बुलायें ये मेरी बाहें-राम तेरी गंगा मैली १९८५

फ़िल्म राम तेरी गंगा मैली ने बहुत सारे रिकॉर्ड कायम किए।
फ़िल्म सन १९८५ की सबसे बड़ी हिट फ़िल्म थी। इसके बाद
अमिताभ बच्चन अभिनीत फ़िल्म 'मर्द' का नम्बर आता है।
एक नई अभिनेत्री मन्दाकिनी जिनका असली नाम यास्मीन रॉय
है , को लेकर बनाई गई यह फ़िल्म काफ़ी चर्चित रही। बहुसितारा फ़िल्म
से कई लोगों को फ़ायदा पहुँचा। कुलभूषण खरबंदा जिनकी गाड़ी
फ़िल्म शान के बाद अटक सी गई थी, आगे बढ़ गई। रज़ा मुराद जो
फिल्मों से गायब से हो गए थे, उनकी भी उपस्थिति इस फ़िल्म के बाद
बढ़ गई। इसके पहले रज़ा मुराद शायद 'एक दूजे के लिए' फ़िल्म में
दिखाई दिए थे। मेरा आशय चर्चित और हिट फिल्मों से है।

राज कपूर केदार शर्मा के असली शिष्य थे। उनकी फिल्मों में
हिरोइन साल दर साल बारिश या झरने में भीगती नज़र आती
रही। इस फ़िल्म में भी एक दृश्य है , यूँ कहिये पूरा गीत ही है।
रवीन्द्र जैन से अच्छी मेहनत करायी गई है इस फ़िल्म के
संगीत के लिए जो हर धुन से स्पष्ट है। इस गीत की दृश्यावली
मनमोहक है।



गाने के बोल:

तुझे बुलायें ये मेरी बाहें
न ऐसी गंगा कहीं मिलेगी

मैं तेरा जीवन
मैं तेरी किस्मत
कि तुझको मुक्ति यहीं मिलेगी

मेरे ही पास तुझे आना है
तेरे ही साथ मुझे जाना है
मेरे ही पास तुझे आना है
तेरे ही साथ मुझे जाना है

गंगा ये तेरी है फ़िर कैसी देरी है

आ जा रे, आ जा रे अब आ भी जा
तू आ भी जा, हो ओ आ भी जा

पहाड़ियों की बुलंदियों से
सभी चनारों के दरमियाँ से
कभी नज़र से कभी जबान से
तुझे पुकारा कहाँ कहाँ से
तू जिसकी खोज में आया है
वो जिसने तुझको बुलाया है
पर्वत के नीचे है
झरने के पीछे है

आ जा रे, आ जा रे अब आ भी जा
तू आ भी जा, हो ओ आ भी जा

कोहरे की चादर लपेटे हूँ
पानी में ख़ुद को समेटे हूँ
कोहरे की चादर लपेटे हूँ
पानी में ख़ुद को समेटे हूँ

बाहों के घेरे में मन के बसेरे में

आ जा रे, आ जा रे अब आ भी जा
तू आ भी जा, हो ओ आ भी जा
......................................................................
Tujhe bulayen ye meri bahen-Ram teri Ganga maili 1985

Artists: Rajeev Kapoor, Mandakini

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Nov 22, 2009

ओ जानेवाले मुडके ज़रा-श्री ४२० १९५५

आज एक उपेक्षित गीत का जिक्र किया जाए। विडम्बनाएं
जीवन में बहुत सी हैं, अपवाद भी बहुत से नज़र आते हैं।
'मेरा जूता है जापानी' और 'प्यार हुआ इकरार हुआ ' के ऊपर किताबें
लिख डालने वालों को एक छोटा सा गीत सुनाई नहीं दिया। या तो इस गीत
की राग वाहियात है, शंकर जयकिशन का संगीत बेकार या लता मंगेशकर
का गायन कमजोर है । हो सकता है हसरत जयपुरी के लिखने में कोई
कसर रह गई हो। शंकर जयकिशन के "Die hard fans" से ये सवाल
मैं जरूर पूछना चाहता हूँ ।

शंकर जयकिशन के सारे संगीत में से अगर मुझे कहा जाए
एक गाना चुनो तो शायद मैं इस गाने को चुनूंगा। लता मंगेशकर के
गाये गानों में दर्द ढूँढने वाले शायद शंकर जयकिशन के बनाये दूसरे
गीतों में दुःख भरी भावनाएं ढूंढ के उनको बेहतर बताने के प्रयास करें,
जैसे ये शाम की तनहाइयाँ -आह, तेरा जाना-अनाड़ी इत्यादि ।

मेरा ऐसा मानना है कि जो आत्मा भेदन इस छोटे से गीत द्वारा होता है
वो ६-८ मिनट के १०-२० लंबे गीतों द्वारा भी नहीं हो पाता । इस गीत
को एल पी रिकॉर्ड पर सुनना एक अलौकिक अनुभव है। लता मंगेशकर
की आवाज़ की खूबियाँ सारी इस अकेले गीत में प्रकट हो जाती हैं। इसी
तरह शंकर जयकिशन के संगीत का सारा निचोड़ इस २.१२ मिनट के
गाने में उपलब्ध हैं। इतना नपा तुला गीत आपको ढूंढें से नहीं मिलेगा।
श्रेष्ठ वस्तुएं ज़िन्दगी में अक्सर छोटी होती हैं। ज़िन्दगी के सबसे सुखद
क्षण हमेशा सूक्ष्म आकार के ही मिलेंगे। एक टीस, अधूरेपन का अहसास
ये गीत छोड़ देता है वही इसकी खासियत है। भावनाओं पर काबू रखे
अभिनेत्री का अंतर्मन क्या कहना चाहता है उसको अनूठे ढंग से फिल्माया
गया है। नर्गिस ने अपनी अभिनय क्षमता का परिचय इन २ मिनटों
में दे दिया है।

नर्गिस कि तकरीबन सभी फ़िल्में मैंने देखी हैं। राज कपूर को उतना ध्यान
से मैंने नहीं देखा जितना कि उनकी फिल्मों की अभिनेत्रियों को। उनकी
फिल्मों का सबसे मजबूत पक्ष उनकी नायिकाएं ही हुआ करती थी।
राज कपूर ने नारी मन पर शायद पी एच डी कर रखी थी।
उसके साथ ही संगीत कि गहरी समझ उनको ईश्वरीय वरदान था।
ये सिलसिला फ़िल्म 'आग' से चालू होके फ़िल्म हिना तक चला।
फ़िल्म आग में राम गांगुली का संगीत था।

शंकर जयकिशन अपने आखिरी दौर में दूसरे संगीतकारों की भांति थोड़ा
लाउड होते चले। ये उनके सबसे मधुर और श्रेष्ठ समय का संगीत है।
श्री ४२० में केमरे के पीछे जो शख्स था उसका नाम राधू करमाकर है।
ये फ़िल्म अपने दृश्य संयोजन और छाया प्रभावों के लिए बहुत सराही
गई। इस गीत के विडियो में एक ही कमी है वो ये- साड़ी पहने नायिका
का मन जो बाहर आता है वो विलायती परिधान पहने हुए है। अगर हम
सूक्ष्म शरीर की बात करें तो वो भी थोड़ा मूल शरीर से छोटे आकार का
होता है। बस यही बात थोड़ी आँखों को खटकती है। राज कपूर कितने
भी देसी नज़र आते रहे हों अपनी फिल्मों में वो विलायतियत के प्रभाव
से मुक्त न हो सके ।

श्री ४२० के गाने बहुत चले और घिसे हुए गाने की श्रेणी में आ गए हैं।
घिसे हुए से मतलब 'बहुत ज्यादा बजे' हुए गाने। आगे इस फ़िल्म के
और गीतों पर चर्चा होगी।



गाने के बोल:

तुम्हे कसम है मेरे दिल को यूँ न तड़पाओ
ये इल्तजा है के मुड मुड के देखते जाओ

ओ जानेवाले मुड के ज़रा देखते जाना
ज़रा देखते जाना

ओ जानेवाले मुड के ज़रा देखते जाना
ज़रा देखते जाना

दिल तोड़ के तो चल दिए
मुझको न भुलाना
ज़रा देखते जाना

फ़रियाद कर रही है खामोश निगाहें
खामोश निगाहें

आंसू की तरह आंख से मुझको न गिराना
ज़रा देखते जाना

ओ जानेवाले मुड के ज़रा देखते जाना
ज़रा देखते जाना

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Nov 21, 2009

चलो सजना-मेरे हमदम मेरे दोस्त १९६८

ये है एक बेहद लकप्रिय और मधुर गीत। इस गीत से सम्बंधित
लोगों पर बातचीत के पहले कुछ और चर्चा की जाए। लक्ष्मीकान्त
प्यारेलाल की तारीफ़ करने वाले संगीत प्रेमियों की कमी है इंटरनेट
की दुनिया में। उनके बनाये अच्छे गीतों को भी कुछ उच्च-कोटि
(ग़लत फ़हमी के शिकार) के संगीत प्रेमी ख़ारिज कर दिया करते हैं और
नुक्स निकालने बैठ जाते हैं। अब इस गाने को मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा
है जो नामचीन शायर थे। इस गीत को लता मंगेशकर ने गाया है । इस गाने की
बुराई करते वक्त ये तथाकथित संगीत विशेषज्ञ न तो मजरूह साहब की बुराई
करने की हिम्मत करेंगे और न ही लता मंगेशकर की। तो साहब बचा
कौन-संगीतकार। उसके अलावा वे ये भी कहेंगे की शर्मिला टेगोर ने केवल
होंठ हिला हिला के इतने साल फिल्मों में जाया कर दिए। ये एक ऐसे महाशय
की टिप्पणी है जो तनूजा को बेहद प्रतिभाशाली और सुंदर अभिनेत्री बताते हैं।
अब शर्मिला और तनूजा दोनों में से कौन प्रतिभाशाली था ये शायद आम दर्शक
भी भली भांति जानता है।

लता मंगेशकर के कैरेअर में ये गाना एक मील का पत्थर है। बोल कितने ही
बढ़िया हो, अगर धुन में दम नहीं है तो वो गीत आम दर्शक का ध्यान आकर्षित
करने में असफल रहता है। एक बात आपको और बता दूँ की इस गीत के शुरू में
थोड़ा सा संगीत ज्यादा है जो आपको इसके कैसेट सी डी में नहीं मिलेगा । ये आनंद
आपको केवल विडियो में ही प्राप्त होगा। अरे, हीरो की बात करना तो हम भूल ही गए।
माफ़ कीजिये उनके लिए इस गाने में कोई गुंजाईश नहीं है। उनके ऊपर हम
चर्चा करेंगे जब इसी फ़िल्म का एक और गीत पेश किया जाएगा।



गाने के बोल:

चल सजना जहाँ तक घटा चले

चल सजना जहाँ तक घटा चले
लगाकर मुझे गले,
चल सजना जहाँ तक घटा चले
चल सजना जहाँ तक घटा चले

सुंदर सपनों की हैं मंजिल कदम के नीचे
सुंदर सपनों की हैं मंजिल कदम के नीचे
फुरसत किस को इतनी, देखे जो मुद के पीछे
तुम चलो, हम चले, हम चले तुम चलो,
सावन की हवा चले

चलो सजना, जहाँ तक घटा चले

धड़कन तुमरे दिल की उलझी हमारी लट में
धड़कन तुमरे दिल की उलझी हमारी लट में
तुमरे तन की छाया, काजल बनी पलक में
एक हैं दो बदन, दो बदन एक हैं, आँचल के तले तले

चलो सजना, जहाँ तक घटा चले

पथरीली राहों में, तुम संग मैं झूम लूंगी
खाओगे जब ठोकर होठों से चूम लूंगी
प्यार का आज से, आज से प्यार का, हम से सिलसिला चले

चलो सजना, जहाँ तक घटा चले
लगाकर मुझे गले,
चलो सजना जहाँ तक,
जहाँ तक घटा चले

चलो सजना, जहाँ तक घटा चले

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Nov 18, 2009

दिल का दिया जला के गया-आकाशदीप १९६५

चित्रगुप्त और लता मंगेशकर द्वारा संगीत जगत को
दिया गया एक नायाब तोहफा है ये गीत। चित्रगुप्त के
एक बढ़िया गीत पर हम चर्चा पहले कर चुके हैं। आइये
इस गीत को सुनकर उनको धन्यवाद् दें। इसके बोल लिखे
हैं मजरूह सुल्तानपुरी ने। निम्मी बहुत खुशकिस्मत थी कि
उनके हिस्से में लता मंगेशकर के कुछ सबसे कर्णप्रिय
गीत आए। इस गाने कि खूबी है इसमें घंटियों की टुनटुनाहट ।
और तो और -"तन पे उजाला फ़ैल गया पहली ही अंगडाई में "।
वाह मजरूह साहब वाह, क्या कल्पना करते थे आप भी :)



गाने के बोल:

दिल का दिया जला के गया,
ये कौन मेरी तन्हाई में
दिल का दिया जला के गया,
ये कौन मेरी तन्हाई में
सोये नग़मे जाग उठे, होंठों की शहनाई में
दिल का दिया ...

प्यार अरमानों का दर खटकाए
ख़्वाब जागी आँखों से मिलने को आये
प्यार अरमानों का दर खटकाए
ख़्वाब जागी आँखों से मिलने को आये
कितने साये डोल पड़े, सूनी सी अंगनाई में
दिल का दिया ...

एक ही नज़र में निखर गई मैं तो,
आइना जो देखा संवर गई मैं तो
एक ही नज़र में निखर गई मैं तो,
आइना जो देखा संवर गई मैं तो
तन पे उजाला फैल गया,
पहली ही अंगड़ाई में
दिल का दिया ...

काँपते लबों को मैं खोल रही हूँ,
बोल वही जैसे के बोल रही हूँ
काँपते लबों को मैं खोल रही हूँ,
बोल वही जैसे के बोल रही हूँ
बोल जो डूबे से हैं कहीं,
इस दिल की गहराई में

दिल का दिया जला के गया,
ये कौन मेरी तन्हाई में
दिल का दिया
......................................................................
Dil ka diya jala ke gaya-Aksha deep 1965

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Oct 31, 2009

तू हमको देख-ज़िन्दगी और हम १९६२

अलौकिक धुनों की श्रेणी में अगला गीत है फ़िल्म 'ज़िन्दगी और हम'
से। इसकी धुन रोशन ने बनाई है। रोशन के ऊपर बहुत कम जिक्र हुआ
है इस ब्लॉग पर अभी तक। बेहद प्रतिभाशाली संगीतकार पर ज़माने ने
क़व्वाली विशेषज्ञ का ठप्पा लगा दिया। इस गीत को सुनिए और ब्लॉग
की आगे की पोस्ट पढ़ते रहिये, इस धारणा को बदलिए। ये निवेदन है
समझदार संगीतप्रेमियों से जो बाप-बेटा संगीतकार और जोड़ी संगीतकारों
के भक्त है। इस गीत के बोल लिखे हैं अनजान से गीतकार-शिव कुमार
ने। इस गीत को मैं लता मंगेशकर के सर्वश्रेष्ठ गीतों में गिनता हूँ। इस
फ़िल्म में दो नायिकाएं हैं-नलिनी जयवंत और चाँद उस्मानी ये गीत इनमे
से किस पर है, मुझे पहचानने में मदद कीजिये। इस गीत के पहले वाक्य
में ही बहुत बड़ा निवेदन है-तू हमको देख और हमारी नज़र से देख। ये
वाक्य बहुत जगह लागू होता है। शायद 'मैनेजमेंट कंसलटेंट' इसको
जल्दी समझ जाएगा। इस गीत को समझने में मुझे काफ़ी वक्त लगा था।
कवियों की कल्पनाएँ देख के कभी कभी मेरे दिमाग के लट्टू फ्यूज़ हो जाते
हैं। बहरहाल गीत का विडियो अपलोड करने वाले को दिल से धन्यवाद्।



गीत के बोल:

तू हमको देख और हमारी नज़र से देख
मीठी अदा से प्यारी नज़र से देख
तू हमको देख

रंगत गुलों से, चाँद से, उजली सी चांदनी
बुलबुल से तराने लिए, कोयल से रागिनी

रंगत गुलों से, चाँद से, उजली सी चांदनी
सब हुस्न-ऐ-दिल फरेब किए, मूर्ती बनी

तू हमको देख

हम वो नहीं के हो न असर जिनकी चाह में
ये याद रख की तू है हमारी निगाह में

हम वो नहीं के हो न असर जिनकी चाह में
लेकिन है एक फर्क मोहब्बत की राह में

तू हमको देख
तू हमको देख

फूलों से खेलना है, बहारों से आके मिल
मिलने की बात है ये ज़रा, मुस्कुरा के मिल

फूलों से खेलना है, बहारों से आके मिल
ऐ होशदार, होश का परदा उठा के मिल

तू हमको देख
तू हमको देख और हमारी नज़र से देख
मीठी अदा से प्यारी नज़र से देख
तू हमको देख
..............................
Too hamko dekh aur hamari nazar se-Zindagi aur hum 1962

Artist: Chand Usmani

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Jun 30, 2009

देवता माना और पूजा तेरी तस्वीर को १-अलबेला १९७१

फ़िल्म अलबेला का ये गीत मुझे सन १९७१ से ही पसंद है, जब ये फ़िल्म
आई थी और इसको पहली बार मैंने रेडियो पे सुना था। ये गीत मुझे हर
तीसरे चौथे दिन सुनने को मिल जाता था। इसमें लता मंगेशकर ने जो
"हाय" शब्द गाया है वो अंदाज़ आज तक वैसे ही याद है। धीरे धीरे जब
मैंने शंकर जयकिशन के संगीत पे थोड़ा दिमाग लगाना शुरू किया तो
पाया कि उनके गीतों में लता मंगेशकर "हाय" शब्द को बड़े ही अलग
अंदाज़ से गाती थीं।

गीत हसरत जयपुरी की कलम से निकला था। जिसका पता मुझे १९७६
में चला जब इसका एल. पी. एक संगीत प्रेमी के घर में देखने को मिला ।
इस गीत का फ़िल्म में बेहतर इस्तेमाल हो सकता था। निर्देशक की
कल्पनाशीलता शायद सीमित थी इसलिए ये फ़िल्म ज्यादा चली नहीं।
महमूद के अभिनय और कुछ गीतों के अलावा इस फ़िल्म में सर खपाने
के लिए कुछ सामान मौजूद नहीं है।



गीत के बोल:

देवता माना और पूजा तेरी तस्वीर को
देवता माना और पूजा तेरी तस्वीर को
तुम न मिल पाये हाय क्या करूं तकदीर को

देवता माना और पूजा तेरी तस्वीर को

तेरे चरणों तक न पहुँची और प्यासी रह गई
तेरे चरणों तक न पहुँची और प्यासी रह गई
चुप हुयी शहनाइयां मन में उदासी रह गई
मिट गई सारी खुशी
मिट गई सारी खुशी, रोना पड़ा तदबीर को

देवता माना और पूजा तेरी तस्वीर को
देवता माना और पूजा तेरी तस्वीर को

गर मेरी डोली गई तो तेरे घर पे जायेगी
गर मेरी डोली गई तो तेरे घर पे जायेगी

कह उठी जिंदगानी वो घड़ी भी आएगी

कौन लूटेगा भला
कौन लूटेगा भला, इस प्यार की जागीर को

देवता माना और पूजा तेरी तस्वीर को
देवता माना और पूजा तेरी तस्वीर को
तुम न मिल पाये हाय क्या करूं तकदीर को

देवता माना और पूजा तेरी तस्वीर को
...........................................................................
Devta maana aur pooja teri tasveer ko 1-Albela

Artist: Namrata

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May 16, 2009

समय के बंधन से मुक्त गाने २ - ए दिल-ए-नादां १९८३

फिल्म रज़िया सुल्तान का लता का गाया गीत नायब रत्न है
फिल्म संगीत खजाने का. कमाल अमरोही के कमाल के साथ
जां निसार अख्तर के बोल, खय्याम का संगीत और लता की
आवाज़ का जादू महसूस करना हो आप भी किसी धोरे पर
पहुँच जाएँ रात को और इस गाने को सुनना शुरू कर दें. गीत
में वो प्रभाव है- जैसे नायिका रेत के धोरों पर अपने अक्स को
निहार रही है वैसे ही आप भी कुछ ढूँढना शुरू कर देंगे. ये अक्स
उसके मन का है जो सारे बंधनों को तोड़ के उन्मुक्त पंछी की
तरह प्रकृति को महसूस करना चाहता है, खुल के चहचहाना
चाहता है.

संतूर और सारंगी ने इस गीत को जो प्लेटफोर्म मुहैया कराया है
वो अनूठा और अलौकिक है. ऐसे गीत दशक में इक्के दुक्के ही
बनते हैं. ऐसी प्रेरणाएँ विशेष अवस्था में ईश्वरीय ही होती है. इसके
फिल्मांकन के लिए भी प्रेरणा विशेष की व्यवस्था की गयी लगती
है. इससे बेहतर फिल्मांकन की कल्पना करना मुश्किल है. सादगी
के साथ वो ठंडक का अहसास कुदरत के हसीं नज़ारे जैसा बन
गया है. सेल्युलोइड के ऐसे टुकड़ों को तो सहेज के रखने का
मन करता है.

दिल-ऐ-नादां को समझ नहीं आ रहा है क्या करे. तख़्त-ओ-ताज
हो या झोपडा, भावनाएं तो इंसानी ही होती हैं. मर्सिडीज में हो या
बैलगाडी में, विचार कमबख्त एक जैसे आते हैं, शब्दों का हेर फेर
हो सकता है. भूख सभी को लगती है, सामान अलग लगा हो सकता
है, पानी की प्यास हो सकती है या कोल्ड ड्रिंक की. तत्व एक ही
रहेगा-तरल पदार्थ की तमन्ना है तो वही चाहिए. चाय की जगह
समोसा नहीं ले सकता. सूखी रोटी की जगह सूखा बर्गर ले सकता
है.

तू मेरा हीरो है-जैसे गीतों के युग में अवतरित हुआ ये गीत आज भी
उतने ही चाव से सुना जाता है जितना सन १९८३ में. लता का एक
गीत फिल्म हीरो में भी है मगर जो ताजगी इस आवाज़ में सुनाई देती
है वो लता के गाये और सन १९८३ में आये बाकी गीतों में नहीं है.




गीत के बोल:

ए दिल-ए-नादां, ए दिल-ए-नादां,
आरज़ू क्या है, जुस्तजू क्या है
ए दिल-ए-नादां, ए दिल-ए-नादां,
आरज़ू क्या है, जुस्तजू क्या है

ए दिल-ए-नादां

हम भटकते हैं, क्यों भटकते हैं,
दश्तो-सेहरा में
ऐसा लगता है, मौज प्यासी है,
अपने दरिया में
कैसी उलझन है, क्यों ये उलझन है
एक साया सा, रू-बरू क्या है

ए दिल-ए-नादां, ए दिल-ए-नादां,
आरज़ू क्या है, जुस्तजू क्या है

क्या क़यामत है, क्या मुसीबत है,
कह नहीं सकते, किसका अरमाँ है
ज़िंदगी जैसे, खोयी-खोयी है, हैरां हैरां है
ये ज़मीं चुप है, आसमां चुप है
फिर ये धड़कन सी, चार सू क्या है

ए दिल-ए-नादां, ए दिल-ए-नादां,

ऐसी राहों में, कितने काँटे हैं,
आरज़ूओं ने, आरज़ूओं ने,
हर किसी दिल को, दर्द बाँटे हैं,
कितने घायल हैं, कितने बिस्मिल हैं,
इस खुदाई में, एक तू क्या है
एक तू क्या है, एक तू क्या है

ए दिल-ए-नादां, ए दिल-ए-नादां
...........................................................
Ae dil-e-nadaan-Razia Sultan 1983

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Mar 20, 2009

ठंडी हवाएं लहरा के आयें-नौजवान १९५१

कुछ पोस्ट पहले हमने फ़िल्म ममता के गीत का जिक्र किया था।
उस पोस्ट में धुनों की समानता पर प्रकाश डाला गया था। अब सुनिए
वो गीत जो बेहद प्रसिद्ध हुआ और जिसने कई संगीतकारों को बाद में
प्रेरित किया । ये है फ़िल्म नौजवान का लता मंगेशकर का गाया गीत
जो नलिनी जयवंत पर फिल्माया गया है। इसके बोल साहिर लुधियानवी ने
लिखे हैं और धुन बनाई है सचिन देव बर्मन ने।

१९५१ से आज तक इस गीत की प्रसिद्धि में कोई कमी नहीं आई है।
साहिर साहब ने नायिका को झेंपाया है जबकि अधिकाँश फ़िल्मी गीतों में
नायिकाएं शरमाया ज्यादा करती हैं।




गीत के बोल:

हा हा हा हा, हा हा हा हा हा हा हा
ला ला ला ला ला, हं हं हं हं हं, कैसे बुलायें

ठंडी हवाएं, लहरा के आए
रुत है जवान, उनको यहाँ, कैसे बुलाये
ठंडी हवाएं, लहरा के आए
रुत है जवान, उनको यहाँ, कैसे बुलाये

ठंडी हवाएं

हा हा हा, हा हा हा हा हा
ला ला ला ला ला, हम हम हम हम हम
कैसे बुलायें

चाँद और तारे, हँसते नज़ारे
मिलके सभी, दिल में सखी, जादू जगाये
ठंडी हवाएं, लहरा के आए
रुत है जवान, उनको यहाँ, कैसे बुलाये
ठंडी हवाएं

(सीटी) ...............कैसे बुलाये

कहा भी न जाए, रहा भी न जाए
तुमसे अगर, मिले भी नज़र, हम झेंप जाए
ठंडी हवाएं, लहरा के आए
रुत है जवान, उनको यहाँ, कैसे बुलाये
ठंडी हवाएं

हा हा हा, हा हा हा हा हा
ला ला ला ला ला, हम हम हम हम हम
कैसे बुलायें

दिल के फ़साने, दिल भी न जाने
तुमको सजन, दिल की लगन, कैसे बताये
ठंडी हवाएं, लहरा के आए
रुत है जवान, उनको यहाँ, कैसे बुलाये
ठंडी हवाएं
हं हं हं हं हं
हं हं हं हं हं, हं हं हं हं हं
कैसे बुलाएं
हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ
.................................................................
Thandi hawayen-Naujawan 1951

Artists: Nalini Jaywant, Premnath

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