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Aug 16, 2019

एक गगन का राजा-दर्पण १९७०

नायक एक गाना सुनता है नायिका द्वारा रेडियो पर गाया हुआ.
उस आवाज़ का दीवाना हो जाता है. उसके बाद शुरू होता है
उसकी परीक्षाओं का दौर. ये फिल्म का सारांश है. दर्पण से
तात्पर्य ये है जीवन हमें हमारे सुकृत्यों और कुकृत्यों को एक
बार उजागर अवश्य करता है. हमारे किये हुए कर्म किस रूप
में हमारे सामने और कब आ कर खड़े हो जाएँ, ये रहस्य कोई
ना जान पाया. गर ऐसा ना हुआ तो अंतरात्मा झकझोर कर
रख देगी.

फिल्म का कथानक वाकई अलग-हट-के है. फिल्म का सबसे
उल्लेखनीय गीत भी यही है जो आज आप सुन रहे हैं, लता
का गाया हुआ जिसे फिल्माया गया है वहीदा रहमान पर और
इस गीत के गीतकार/संगीतकार क्रमशः हैं आनंद बक्षी और
लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल.




गीत के बोल:

एक गगन का राजा एक चमन की रानी
इन दोनों के प्यार की सुनाऊँ मैं कहानी
एक गगन का राजा एक चमन की रानी
इन दोनों के प्यार की सुनाऊँ मैं कहानी

एक का नाम चन्दा एक का नाम चकोरी
इन दोनों के प्यार की सुनाऊँ मैं कहानी
एक गगन का राजा

चांदनी रातों में बातों बातों में
चांदनी रातों में
बस ये दोनों समा गए एक दूजे की आँखों में
चांदनी रातों में
वो भी पागल प्रेमी ये भी प्रेम दीवानी
इन दोनों के प्यार की सुनाऊँ मैं कहानी
एक गगन का राजा

फिर वो दिन आया सबने समझाया
फिर वो दिन आया
देखो धरती गगन नहीं मिलते क्यूँ धोखा खाया
फिर वो दिन आया
झूठी आस लगायी सच्ची बात ना मानी
इन दोनों के प्यार की सुनाऊँ मैं कहानी
एक गगन का राजा

आगे सुन हाय नैना भर आये
आगे सुन हाय
एक दिन दोनों बिछड गए आकाश पे बादल छाये
आगे सुन हाय
छम छम बरसे नैना रिमझिम बरसा पानी
इन दोनों के प्यार की सुनाऊँ मैं कहानी

एक का नाम चन्दा एक का नाम चकोरी
इन दोनों के प्यार की सुनाऊँ मैं कहानी
एक गगन का राजा
..................................................................
Ek gagan ka raja-Darpan 1970

Artists::Waheeda Rehman, Sunil Dutt, Ramesh Dev

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May 4, 2018

दर्पण झूठ ना बोले-दर्पण १९७०

ये फिल्म दर्पण का शीर्षक गीत है. मन्ना डे ने इसे गाया है.
आनंद बक्षी की रचना है और लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल का संगीत.
नायक अपनी कार में चला जा रहा है और पार्श्व में ये गीत
बज रहा है.

सत्य कड़वा होता है इस वजह से जनता को इसे सुनना पसंद
नहीं होता. सत्य का मार्ग कंटकाकीर्ण है अतः उस पर कदम
बढाने में हर किसी की सांस फूलती है. बहुत हिम्मत वाले भी
इस पर चल कर दुनिया के रुख की वजह से अपना साहस खोते
नज़र आते हैं. अंत में विजय शूरवीरों की ही होती है. जीवन
में इस प्रकार की जंग का निरंतर सामना करने वाले को हम
शूरवीर नहीं तो और क्या कहेंगे.

सत्य के मार्ग पर मीठी गोलियाँ और चॉकलेट नहीं मिला करती.
इस पर नरम नरम गद्दे और बिछौने बी नहीं होते. धिक्कार और
घृणा अवश्य मुफ्त प्राप्त होती रहती है कदम कदम पर.






गीत के बोल:

दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले
दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले
जो सच था तेरे सामने आया
हंस ले चाहे रो ले
दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले
दर्पण झूठ ना बोले

बंधन तोडा जा सकता है
जग को छोड़ा जा सकता है
बंधन तोडा जा सकता है
जग को छोड़ा जा सकता है
अपने आप से भाग रहे हो
अपने आप से भाग रहे हो
तुम हो कितने भोले हो
दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले

दूर किनारा टूटी नैया
लेकिन पूछे ये पुरवैया
दूर किनारा टूटी नैया
लेकिन पूछे ये पुरवैया
अपने आप बने तुम मांझी
अपने आप बने तुम मांझी
फिर काहे मन डोले
दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले

ऐसी हैं जीवन की बतियाँ
या तो ये मन मींच ले अँखियाँ
ऐसी हैं जीवन की बतियाँ
या तो ये मन मींच ले अँखियाँ
या फिर ना घबराये जब
सच्चाई घूंघट खोले

दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले
जो सच था तेरे सामने आया
हंस ले चाहे रो ले
दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले
दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले
……………………………………………………….
Darpan jhooth na bole-Darpan 1970

Artist: Sunil Dutt

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Feb 23, 2017

बुझा दो दीपक हूँ-दर्पण १९७०

सुनील दत्त और वहीदा रहमान अभिनीत १९७० की फिल्म दर्पण
कुछ अलग हट के कहानी पर बनी फिल्म है. जैसा कि आप जानते
हैं इस जुमले का प्रयोग फ़िल्मी सितारों के खूब किया पत्रिकाओं के
ज़माने में और जब टी वी का चलन बढ़ने लगा. आज इन सब की
ज़रूरत नहीं पढ़ती है. आज प्रोमोज़ ही अलग हट के बनाये जाने लगे
हैं. आज की जनता प्रोमोज़ से अंदाजा लगा लेती है फिल्म में क्या
होगा.

इस फिल्म से किशोर कुमार का गाया उम्दा गीत सुनते हैं. काव्य
में बात को घुमाव दिया जाता है जो चीज़ पद्य में सरल सी लगती है
उसे कविता और गीत में थोडा अलग अंदाज़ में पेश किया जाता है.
इस गीत का मुखडा है बुझा दो, दीपक हूँ, अँधेरा कर दो. गीत में
नायक की खुशनुमा भावनाओं के साथ नायिका के मन में चल रही
कशमकश के सजीव चित्रण है. फ़िल्मी प्रणय गीतों में सबसे बढ़िया
गीत जो हैं उनमें इसे भी शामिल कर लें.

आनंद बक्षी ने लक्ष्मी प्यारे के लिए १०७१ गीत लिखे. ये किसी भी
गीतकार-संगीतकार जोड़ी द्वारा उत्पादित सबसे ज्यादा संख्या है. सूची
में इसके बाद समीर संग आनंद मिलिंद का नंबर है. उत्पादन/हिट के
अनुपात की बात की जाए तो वो आनंद बक्षी और लक्ष्मी प्यारे की
जोड़ी का बेहतर है.



गीत के बोल:

बुझा दो दीपक हूँ अन्धेरा कर दो
बुझा दो दीपक हूँ अन्धेरा कर दो
उठा दो घूँघट हाय सवेरा कर दो
बुझा दो दीपक हूँ अन्धेरा कर दो
उठा दो घूँघट हाय सवेरा कर दो
बुझा दो दीपक

शरम के मारे हाथों से ये चेहरा ढाँप के
शरम के मारे हाथों से ये चेहरा ढाँप के
न दूर दूर जाओ सर से काँप काँप के
कि अब आओ पास मेरी प्यास तो बुझा दो
कोई ग़म है तो हाय वो मेरा कर दो
बुझा दो दीपक

बदल लो रूप अपना आज मेरे प्यार से
बदल लो रूप अपना आज मेरे प्यार से
सजा दो मेरी सूनी सेज को बहार से
खुशी के फूल ग़म की धूल पे बिछा के
इसे खुशियों का हाय बसेरा कर दो
बुझा दो दीपक
………………………………………………………….
Bujha do Deepak-Darpan 1970

Artist: Sunil Dutt, Waheeda Rehman

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