Showing posts with label Do Boond Pani. Show all posts
Showing posts with label Do Boond Pani. Show all posts

Jan 14, 2010

पीतल की मेरी गागरी- दो बूँद पानी १९७१

अभी कुछ दिन पहले जयदेव की पुण्यतिथि निकली। इस अवसर
पर उनका एक गीत याद आया । राजस्थान की जल समस्या पर
निर्मित फिल्म-दो बूँद पानी से। इस फिल्म का एक गीत हम ब्लॉग
पर पहले शामिल कर चुके हैं। प्रस्तुत गीत परवीन सुल्ताना और
मीनू पुरुषोत्तम का गाया हुआ है। परवीन सुल्ताना शास्त्रीय संगीत का
स्थापित नाम है और मीनू पंजाबी की एक प्रसिद्ध गायिका जिन्होंने
हिंदी फिल्मों के लिए भी कुछ गीत गाये हैं। मटके से ताल देना पुराना
ढंग है राजस्थानी लोक संगीत का। जयदेव ने इसका भरपूर इस्तेमाल
किया है इस गीत में । अब आपको ये भी बताता चलूँ कि ये फिल्म एक
फ्लॉप फिल्म थी और इसके गीतों के अलावा आपको ज्यादा जानकारी
नहीं मिलेगी । पीतल की गागरी केवल फिल्म की हिरोइन के सर पर है
बाकी जनता मिटटी के मटके से काम चला रही है।



गीत के बोल:

पीतल की मेरी गागरी
दिल्ड़ी से मोल मंगाई रे
पीतल की मेरी गागरी
दिल्ड़ी से मोल मंगाई रे
पांव में घुँघरू बांध के
अब पनिया भरण हम जाई रे
पांव में घुँघरू बांध के
अब पनिया भरण हम जाई रे

पीतल की मेरी गागरी

पायलिया बोले छुमक छुमक,
बदली है चाल, हाय हाय
बदली है चाल जवानी की
बदली है चाल जवानी की
चुनरी सरके इधर उधर,
बेसर्मी देख, होए होए
बेसर्मी देख दीवानी की
बेसर्मी देख दीवानी की
बदनामी होगी, गाँव में
चुनरी कहीं जो तूने गंवाई रे
बदनामी होगी गाँव में
चुनरी कहीं जो तूने गंवाई रे

पीतल की मेरी गागरी

हा,हा,हा...........

सन सन सन सन जिया करे
जब गगरी डूबे पानी में
जब गगरी डूबे पानी में
अपना मुखड़ा नया लगे,
हम जब जब, ओ हम जब जब
ओ हम जब जब देखें पानी में
हम जब जब देखें पानी में
गलों पे लाली आ गयी,
हाय किस ने ये आग लगायी रे
गलों पे लाली आ गयी,
हाय किस ने ये आग लगायी रे

पीतल की मेरी गागरी

इक दिन ऐसा भी था
पानी था गाँव में
पानी था गाँव में
लाते थे गगरी भर के
तारों की छांव में
तारों की छांव में
कहाँ से पानी लायें
कहाँ ये प्यास बुझायें
कहाँ से पानी लायें
कहाँ ये प्यास बुझायें
जल जल के बैरी धूप में
कम्हलाया रंग दुहाई रे
जल जल के बैरी धूप में
कम्हलाया रंग दुहाई रे

पीतल की मेरी गागरी
दिल्ड़ी से मोल मंगाई रे
पीतल की मेरी गागरी

Read more...

Dec 20, 2009

जा री पवनिया -दो बूँद पानी १९७१

सिमी ग्रेवाल किसी अंग्रेजी 'फैयरी टेल' के चरित्र सी दिखाई
देती हैं। उन्हें हिंदी फिल्मों में देखना अनूठा अनुभव
है, विशेषकर इस गीत में उनको ग्रामीण वेशभूषा में
देखना। दो बूँद पानी फिल्म से आशा भोंसले का गाया ये गीत
मुझे पसंद है। कैफ़ी आज़मी के खूबसूरत बोलों को उतनी ही
आकर्षक धुन में बाँधा है संगीतकार जयदेव ने। फिल्म बनायीं थी
ख्वाजा अहमद अब्बास ने जो 'नीचा नगर' फिल्म के लिए विख्यात हैं।





गीत के बोल:

जा री पवनिया पिया के देस जा
जा री पवनिया पिया के देस जा
जा री पवनिया पिया के देस जा
इतना संदेसा मोरा कहियो जा
पिया को संदेसा मोरा कहियो जा

जा री पवनिया पिया के देस जा
जा री पवनिया पिया के देस जा
इतना संदेसा मोरा कहियो जा
पिया को संदेसा मोरा कहियो जा

तन मान प्यासा, प्यासी नजरिया
प्यासी प्यासी गागरिया
तन मान प्यासा, प्यासी नजरिया
प्यासी प्यासी गागरिया
अम्बर प्यासा, धरती प्यासी
प्यासी सारी नगरिया
प्यासी सारी नगरिया

प्यास बुझेगी तब जीवन की
प्यास बुझेगी तब जीवन की
जब घर आवे संवरिया
इतना संदेसा मोरा कहियो जा

जा री पवनिया पिया के देस जा
जा री पवनिया पिया के देस जा

मान की अग्नि तन को जलाये
तुम बिन कोई ना जाने
मान की अग्नि तन को जलाये
तुम बिन कोई ना जाने
छोड़ी तुमने जो रणभूमि
सखियाँ मारेंगी ताने मोहे
सखियाँ मारेंगी ताने
लाज के मारे मर जाएगी
लाज के मारे मर जाएगी
अपने पिया की बाँवरिया
बस, इतना संदेसा मोरा कहियो जा

जा री पवनिया पिया के देस जा
जा री पवनिया पिया के देस जा
इतना संदेसा मोरा कहियो जा
पिया को संदेसा मोरा कहियो जा
पिया को संदेसा मोरा कहियो जा
पिया को संदेसा मोरा कहियो जा

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP