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Jan 20, 2011

ये वही गीत है जिसको मैंने-मान जाइये १९७२

अकेले में यादें दोनों तरह की आया करती हैं-खुशनुमा और दुःख भरी।
ये गीत भी कुछ कुछ यादों की एकल प्रस्तुति सा है। देखिये और
पता लगाइए ।

फिल्म का नाम भी दुर्लभ सा है -मान जाइये। गीत किशोर कुमार
के सबसे मधुर और प्रभावी गीतों में से एक है। इसे फिल्माया गया
है जलाल आगा पर। मशहूर आगा के बेटे और फरीदा जलाल के भाई
जलाल आगा अपनी सीमित प्रतिभा के बावजूद लोगों को याद रह गए,
उनके पास बोलने वाली ऑंखें जो थीं। किशोर के ऐसे भारी आवाज़ वाले
गीत कुंदन लाल सहगल की याद दिला जाते हैं।



गीत के बोल:

ये वही गीत है जिसको मैंने धड़कन में बसाया है
ये वही गीत है जिसको मैंने धड़कन में बसाया है

तेरे होंठों से इसको चुरा कर होंठों पे सजाया है

ये वही गीत है जिसको मैंने धड़कन में बसाया है
ये वही गीत है ये वही गीत है

मैं ये गीत जब गुनगुनाया
सज गई है ख्यालों की महफ़िल
मैं ये गीत जब गुनगुनाया
सज गई है ख्यालों की महफ़िल
प्यार के रंग आँखों में छाये
प्यार के रंग आँखों में छाये
मुस्कुरायी उजालों की महफ़िल
मुस्कुरायी उजालों की महफ़िल
प्यार के रंग आँखों में छाये
मुस्कुरायी उजालों की महफ़िल
मुस्कुरायी उजालों की महफ़िल
ये वो नगमा है जो ज़िन्दगी में
रौशनी बन के आया है
तेरे होंठों से इसको चुरा कर होंठों पे सजाया है

ये वही गीत है ये वही गीत है

हो हो हो,
हो हो हो

मेरे दिल ने यही गीत गा कर
जब कभी तुझको आवाज़ दी है
मेरे दिल ने यही गीत गा कर
जब कभी तुझको आवाज़ दी है
फूल जुल्फों मीना पनी सजा कर
फूल जुल्फों मीना पनी सजा कर
तू मेरे सामने आ गई है
फूल जुल्फों मीना पनी सजा कर
तू मेरे सामने आ गई है
तू मेरे सामने आ गई है
तुझको अक्सर मेरी बेखुदी ने
सीने से लगाया है


तेरे होंठों से इसको चुरा कर होंठों पे सजाया है
ये वही गीत है जिसको मैंने धड़कन में बसाया है
तेरे होंठों से इसको चुरा कर होंठों पे सजाया है


ये वही गीत है ये वही गीत है
...........................................
Ye wahi geet hai jisko maine-Maan jaiye 1972

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Dec 20, 2009

जा री पवनिया -दो बूँद पानी १९७१

सिमी ग्रेवाल किसी अंग्रेजी 'फैयरी टेल' के चरित्र सी दिखाई
देती हैं। उन्हें हिंदी फिल्मों में देखना अनूठा अनुभव
है, विशेषकर इस गीत में उनको ग्रामीण वेशभूषा में
देखना। दो बूँद पानी फिल्म से आशा भोंसले का गाया ये गीत
मुझे पसंद है। कैफ़ी आज़मी के खूबसूरत बोलों को उतनी ही
आकर्षक धुन में बाँधा है संगीतकार जयदेव ने। फिल्म बनायीं थी
ख्वाजा अहमद अब्बास ने जो 'नीचा नगर' फिल्म के लिए विख्यात हैं।





गीत के बोल:

जा री पवनिया पिया के देस जा
जा री पवनिया पिया के देस जा
जा री पवनिया पिया के देस जा
इतना संदेसा मोरा कहियो जा
पिया को संदेसा मोरा कहियो जा

जा री पवनिया पिया के देस जा
जा री पवनिया पिया के देस जा
इतना संदेसा मोरा कहियो जा
पिया को संदेसा मोरा कहियो जा

तन मान प्यासा, प्यासी नजरिया
प्यासी प्यासी गागरिया
तन मान प्यासा, प्यासी नजरिया
प्यासी प्यासी गागरिया
अम्बर प्यासा, धरती प्यासी
प्यासी सारी नगरिया
प्यासी सारी नगरिया

प्यास बुझेगी तब जीवन की
प्यास बुझेगी तब जीवन की
जब घर आवे संवरिया
इतना संदेसा मोरा कहियो जा

जा री पवनिया पिया के देस जा
जा री पवनिया पिया के देस जा

मान की अग्नि तन को जलाये
तुम बिन कोई ना जाने
मान की अग्नि तन को जलाये
तुम बिन कोई ना जाने
छोड़ी तुमने जो रणभूमि
सखियाँ मारेंगी ताने मोहे
सखियाँ मारेंगी ताने
लाज के मारे मर जाएगी
लाज के मारे मर जाएगी
अपने पिया की बाँवरिया
बस, इतना संदेसा मोरा कहियो जा

जा री पवनिया पिया के देस जा
जा री पवनिया पिया के देस जा
इतना संदेसा मोरा कहियो जा
पिया को संदेसा मोरा कहियो जा
पिया को संदेसा मोरा कहियो जा
पिया को संदेसा मोरा कहियो जा

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