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Jun 3, 2017

मेरी गागर में सागर-जगद्गुरु शंकराचार्य १९५५

आपको अविनाश व्यास के संगीत वाले गीत कुछ गीत
हमें सुनवाए हैं. सोफ्ट किस्म का संगीत देने वाले व्यास
ने सभी प्रकार के गीत रचे हैं मगर उनके संगीत में शोर
नाम का एलिमेन्ट आपको नज़र नहीं आएगा.

सन १९५५ की फिल्म जगद्गुरु शंकराचार्य से एक गीत
आपको सुनवाते हैं जिसे भरत व्यास ने लिखा है और
गीता दत्त ने गाया है. इस फिल्म के प्रमुख सितारे हैं
अभी भट्टाचार्य और सुलोचना चटर्जी.



गीत के बोल:

मेरी गागर में सागर है रूप का
सहा जाए न मौसम ये धूप का
मेरी सासू बड़ी है क्रूर
उम्र है छोटी और पनघट दूर
पांव मेरे थक थक जायें
पांव मेरे थक थक जायें

मेरी गागर में सागर है रूप का
सहा जाए न मौसम ये धूप का
मेरी सासू बड़ी है क्रूर
उम्र है छोटी और पनघट दूर
पांव मेरे थक थक जायें
पांव मेरे थक थक जायें

ओ बलखाये कमर शरमाये नज़र
लहराए री बाली उमरिया
ओ कभी इधर उधर चले हवा फर फर
जाए उड़ उड़ मेरी चुनरिया
जाए उड़ उड़ मेरी चुनरिया

जब बाजी रे छम छम पायल
लोग कहते हैं क्या
कहते हैं हुए हम घायल
देख दुनिया के ये रंग ढंग
दिया रे दिया मैं तो हुई तंग
कलेजा करे धक् धक् धक्
कलेजा करे धक् धक् धक्
..................................................................
Meri gagar mein-Jagadguru Shankaracharya 1955

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May 28, 2016

जय भारती वंदे भारती-जगदगुरु शंकराचार्य १९५५

आपको काफी दुर्लभ गीत सुनवा चुके हैं और सुनवाते
रहेंगे आज बहुत दिनों के बाद फिर से एक अनजान
सा गीत सुनते हैं. इसका बहुत कुछ अनजान सा
नहीं है. फिल्म का नाम है जगदगुरु शंकराचार्य. ये
सन १९५५ की फिल्म है. आजादी के आठ साल बाद
की. फिल्म के निर्देशक शेख फत्तेलाल हैं और इसमें
संगीत है अविनाश व्यास का. गीत लिखे हैं भरत
व्यास ने. व्यास-व्यास का ये कॉम्बीनेशन कुछ गीतों
में है. फिल्म में अभि भट्टाचार्य और सुलोचना चटर्जी
प्रमुख कलाकार हैं. इसे गाया है लता मंगेशकर ने.
भारत की भूमि की इस गीत में भूरि भूरि प्रशंसा की
गई है. पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक फिल्मों के
संगीत क्षेत्र में दो मील के स्तंभ हैं-श्रीनाथ त्रिपाठी और
अविनाश व्यास.



गीत के बोल:

जय भारती वंदे भारती
सर पे हिमालय का छत्र है
चरणों में नदिया एकत्र है
हाथों में वेदों के पत्र हैं
देश नहीं ऐसा अन्यत्र है

सर पे हिमालय का छत्र है
चरणों में नदिया एकत्र है
हाथों में वेदों के पत्र हैं
देश नहीं ऐसा अन्यत्र है
जय भारती वंदे भारती
जय भारती वंदे भारती

धुंए से पवन से व्योम से
घर घर में होता जहाँ होम है
धुंए से पवन से व्योम से
घर घर में होता जहाँ होम है
पुलकित हमारे रोम रोम हैं
पुलकित हमारे रोम रोम हैं
आदि अनादि शब्द ओम है
जय भारती वंदे भारती
वंदे मातरम
जय भारती वंदे भारती
वंदे मातरम

जिस भूमि पे जनम लिया राम ने
गीता सुनाई जहाँ श्याम ने
गीता सुनाई जहाँ श्याम ने
पावन बनाया चारों धाम ने
पावन बनाया चारों धाम ने
स्वर्ग भी न आये जिस के सामने
वंदे मातरम
वंदे मातरम
वंदे मातरम
वंदे मातरम
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Jai Bharti Vande Bharti-Jagadguru Shankaracharya 1955

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Mar 9, 2015

जागो हे महाकाल-जगदगुरु शंकराचार्य १९५५

एक धार्मिक गीत सुना जाये। बहुत दिन हो गये कोई भजन या
भक्ति गीत सुने हुए। प्रस्तुत गीत है फिल्म जगदगुरु शंकराचार्य से
जो सन १९५५ की फिल्म है। फिल्म के गीत भरत व्यास के लिखे
हुए हैं और संगीत है अविनाश व्यास का। गीत गाया है रफ़ी ने जिनकी
आवाज़ में बहुत से लोकप्रिय फ़िल्मी भजन उपलब्ध हैं।

कुदरती तौर पर रफ़ी की आवाज़ में भजन अच्छे लगते हैं। ये भी एक
कम सुना हुआ लेकिन कर्णप्रिय धुन वाला भजन है।

भगवान  आशुतोष दयालु हैं, औघड़दानी हैं, भक्तों पर शीघ्र ही प्रसन्न
हो जाते हैं.  ओम नमः शिवाय




गीत के बोल:

जागो रे, जागो
जागो हे महाकाल, जागो जीवन आधार,
भस्म करो पापी के पाप को,
धरती पुकारे प्रभु आपको ।

जागो हे महाकाल, जागो जीवन आधार,
भस्म करो पापी के पाप को,
धरती पुकारे प्रभु आपको ।
धरती पुकारे प्रभु आपको ।

तुम को जगा रहा नीला गगन ।
नीला नीला गगन ।
तुम को जगाये प्रभु पूरा पवन ॥
प्रभु पूरा पवन ॥
तांडव पे नृत्य करो
तांडव पे नृत्य करो, डमरू पे ताल दो ।
तांडव पे नृत्य करो, डमरू पे ताल दो ।
तीसरे नयन की आज ज्वाला निकाल दो ॥
फूंक दो, फूंक दो
फूंक दो यह कष्टों की कालिमा ।
भर दो कानो में नई लालिमा ॥
नई लालिमा ॥

जागो रे, जागो
जागो रे, जागो

जागो हे महा काल, जागो जीवन आधार,
भस्म करो पापी के पाप को,
धरती पुकारे प्रभु आपको ।
धरती पुकारे प्रभु आपको ।
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Jaago he Mahakal-Jagadguru Shankaracharya 1955

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