Showing posts with label Kagaz ki naav. Show all posts
Showing posts with label Kagaz ki naav. Show all posts

Sep 24, 2018

हर जनम में हमारा मिलन-कागज़ की नाव १९७६

७० के दशक में अगर प्रमुख संगीतकारों के गीत
लोकप्रिय थे तो कुछ अनजाने और कम सुने गए
संगीतकारों के गीत भी लोकप्रिय हुए.

कुछ गीत जैसे जिंदगी और तूफ़ान का-मौसम आवारा
है, जान हाज़िर है का-हम न रहेंगे तुम ना रहोगे
दशक के मध्य में कागज़ की नाव फिल्म का ये
गाना भी लोकप्रिय था. हाँ लोकप्रियता कम ज्यादा
थी, मैं मानता हूँ.

नक्श लायलपुरी की रचना है और सपन जगमोहन
का संगीत. इसे स्वर दिया है आशा भोंसले और
मनहर ने. इसके पहले जो मनहर का युगल गीत
लोकप्रिय हुआ वो है-लूटे कोई मन का नगर फिल्म
अभिमान से.





गीत के बोल:

हर गीत के बोल चाहिए तो कम से कम
कमेन्ट बॉक्स में कुछ लिख तो दिया करें.
.
चिड़िया भी दाना खा के चूं चूं कर के जाती है
या बीट कर जाती है, कुछ तो करो भाई लोग
.
.
…………………………………………………..
Har janam mein hamara Milan-Kagaz ki naav 1976

Artists: Sarika, Raj Kiran

Read more...

Nov 1, 2015

मैं तुम्हारे ख्यालों में खोई रही-कागज की नाव १९७६

कागज की नाव से दूसरा गीत सुना जाए जो मधुर है
ये गीत भी आशा भोंसले ने गाया है. इसे शायद ही
आपने सुना होगा. अगर आप आशा भोंसले के बड़े
फैन हैं तो अलग बात है. ये ऐसा गीत है जिसे सुन
के आपको महसूस होगा कि इसे स्पेशियली आशा के
ही लिए बनाया गया है. इसे भी नक्श लायलपुरी ने
लिखा है और संगीतकार भी वही हैं-सपन जगमोहन.

आज आप सुन रहे हैं आशा भोंसले की आवाज़ वाला
गीत नंबर २५१. हम इसके पहले आपको आशा के
गाये एकल, युगल सब मिला के २५० गीत सुनवा
चुके है. आंकड़ों की बात करें तो नक्श लायलपुरी के
लिखे हुए २० गीत प्रस्तुत को मिला के आप सुन
चुके हैं आज तक,




मैं तुम्हारे ख्यालों में खोयी रही
मैं तुम्हारे ख्यालों में खोयी रही
आइना देख कर मुस्कुराता रहा
जाने क्या सोच कर मैंने अंगडाई ली
जाने क्या सोच कर मैंने अंगडाई ली
आइना देख कर मुस्कुराता रहा

मैं तुम्हारे ख्यालों में खोयी रही

आया जो मेरे महके लबों पर
पहले मिलन का फ़साना
शरमा के मैंने आँचल संभाला
लहर गया दिल दीवाना
तनहाइयों में भी हो गए तुम साथ मेरे

मैं तुम्हारे ख्यालों में खोयी रही
मैं तुम्हारे ख्यालों में खोयी रही
आइना देख कर मुस्कुराता रहा
मैं तुम्हारे ख्यालों में खोयी रही

पास आ के तुमने कानों से मेरे
बिखरी लटों को हटाया
हाथों में ले के फिर हाथ मेरा
धीरे से तुमने दबाया
आई सहेली तो टूटे सभी ख्वाब मेरे

मैं तुम्हारे ख्यालों में खोयी रही
मैं तुम्हारे ख्यालों में खोयी रही
आइना देख कर मुस्कुराता रहा
मैं तुम्हारे ख्यालों में खोयी रही
……………………………………………………………..
Main tumhare khayalon mein khoyi-Kagaz ki naav 1976

Read more...

Oct 28, 2015

न जइयो सौतन के घर-कागज की नाव १९७६

हिंदी फिल्म संगीत के गीत राग-रागिनियों पर आधारित भी
होते हैं. भले ही सुनने में विलायती सा लगे, मगर वो गीत
किसी शास्त्रीय राग पर आधारित हो सकता है. स्वर विशेष
का समूह या उसे गाने का विशेष अंदाज़ राग कहलाता है.

आज आपको राग अभोगी पर आधारित एक गीत सुनवाते
हैं जो फिल्म कागज़ की नाव से है. इस राग की विशेषता
है-इसमें आरोह और अवरोह में “प” और “न” स्वर वर्जित हैं.
इसमें “म” कोमल प्रयुक्त होता है बाकी के स्वर शुद्ध हैं. गंभीर
राग है और इसका विस्तार  तीन सप्तक तक किया जा सकता
है. काफी थाट का ये राग औढव्-औढव् वक्र जाति का राग है.
पकड़ ऐसी है- सा रे ध सा, रे ग म, ग म रे सा. राग के गायन का
समय रात्रि का दूसरा प्रहर है. राग का प्रयोग विरह वेदना
गीतों में या भक्ति संगीत में ज्यादा होता है. प्रस्तुत गीत
थोडा अलग सा है. संगीतकार ने इस सिचुएशन के लिए
ये राग क्यूँ चुनी ये वही बेहतर बतला सकते हैं.

फिल्म कागज की नाव से एक गीत बेहद लोकप्रिय है-हर
जनम में हमारा मिलन-मनहर आशा. इसके अलावा आम श्रोता
को इसका विवरण भी उपलब्ध नहीं है. इस गीत को लिखा
है नक्श लायलपुरी ने और इसकी धुन बनाई है संगीतकार
जोड़ी-सपन जगमोहन ने. गीत गाया है आशा भोंसले ने. गीत
फिल्माया गया है अरुणा ईरानी और प्रदीप कुमार पर.



गीत के बोल:

न जइयो रे सौतन घर सैयां
न जइयो रे सौतन घर सैयां
रुक जा मैं रो रो पडूं तोरे पैयां
रुक जा मैं रो रो पडूं तोरे पैयां
न जइयो रे सौतन घर सैयां
न जइयो रे सौतन घर सैयां

जादू भी जाने वो टोना भी जाने
नजरिया से दिल को पिरोना भी जाने
हंस के मिले दूर होना भी जाने
हंस के मिले दूर होना भी जाने
तू ही ना माने ना माने
न जइयो रे सौतन घर सैयां
रुक जा मैं रो रो पडूं तोरे पैयां
न जइयो रे सौतन घर सैयां
न जइयो रे

तन से लुभाए अदाओं से लूटे
पल में वो माने तो पल में ही रूठे
बैरन के होते हैं सब रूप झूठे
बैरन के होते हैं सब रूप झूठे
तू ही ना जाने ना जाने
न जइयो रे सौतन घर सैयां
न जइयो रे सौतन घर सैयां
रुक जा मैं रो रो पडूं तोरे पैयां
रुक जा मैं रो रो पडूं तोरे पैयां
न जइयो रे सौतन घर सैयां
न जइयो रे सौतन घर सैयां
………………………………………………………………………….
Na jaiyo re sautan ghar saiyan-Kagaz ki naav 1976

Artists: Aruna Irani, Pradeep Kumar

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP