रुपहले परदे का माया यही है जब आप चमक रहे होते हैं तो सब
वाह वाह करते हैं और आपको दिल-ओ-जान से याद किया करते
हैं. एक बार आप हाशिये पर पहुंचे तो कोई पूछने वाला नहीं बचता
नवम्बर के इस महीने में कुछ दिल्मी कलाकार इस दुनिया को फानी
कह गए उनमें से एक हैं अपने ज़माने की खूबसूरत और प्रतिभा
संपन्न अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित.
अभिनेता संजीव कुमार से वो विवाह करना चाहती थीं. नियति
को कुछ और मंजूर था. संजीव कुमार असमय संसार छोड़ चले
उसके बाद सुलक्षणा पंडित आजीवन अविवाहित रहीं.
दर्शकों और सिने प्रेमियों से पूछा जाये तो अधिकांश यही बात
कहेंगे कि इन दोनों का विवाह हो जाना था.
सुलक्षणा पंडित की आवाज़ में एक गीत सुनते हैं फिल्म
संकोच का. इसे लिखा है एम् जी हशमत ने और धुना बनायींई
है कल्यानजी आनंदजी ने. अपने समय का ये एक बेहद चर्चित
गीत है.
गीत के बोल:
बांधी रे काहे प्रीत पिया के संग अंजानी रीत
बांधी रे काहे प्रीत पिया के संग अंजानी रीत
बाली उमर में मैं ना समझी बाली उमर में मैं ना समझी क्या है प्रीत की रीत
बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत पिया के संग अंजानी रीत
पास रही तो मैं ना समझी दूर हुई तो जाना
दूर हुई तो जाना प्यार में कैसे अपना बन के कोई बने बेगाना
कैसे बचेगा अब जीवन कैसे बचेगा अब जीवन बिन साथी बिन मिलो
बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत पिया के संग अंजानी रीत
अंग लगी है पेड़ की बेला लहर को मिले किनारा लहर को मिले किनारा बिन साजन के मैं हूँ अकेली मेरा कौन सहारा ऐसा सूना लागे जीवन ऐसा सूना लागे जीवन जैसे सुर बिन गीत
बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत पिया के संग अंजानी रीत बाली उमर में मैं ना समझी बाली उमर में मैं ना समझी क्या है प्रीत की रीत
बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत पिया के संग अंजानी रीत.
फ़िल्मी कथानक भगवान सर्वशक्तिमान के उल्लेख और
वंदना के बिना नहीं बनते हैं. किसी ना किसी रूप में
फिल्म में उल्लेख हो ही जाता है. चाहे वो टाइटल्स के
शुरू में ही क्यूँ ना हो. चलिए मान लिया जाये किसी
नास्तिक ने फिल्म बनाई तो ना मानने में भी तो वो
मान ही रहा है.
सुनते हैं एक फ़िल्मी भजन १९७६ की फिल्म खलीफ़ा
से जिसे मन्ना डे ने गाया है. गुलशन बावरा की रचना
है और पंचम का संगीत.
गीत के बोल:
हरिओम तत्सत्
हरिओम तत्सत्
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
मेरी अरज सुनो बनवारी
मेरी अरज सुनो बनवारी
पूरी कर दो मनोकामना
पूरी कर दो मनोकामना
आये शरण तिहारी
मेरी अरज सुनो बनवारी
हाँ तेरे द्वारे जो भी आये
खाली हाथ ना जाए ना जाए
जितनी जिसकी भक्ति होगी
उतना वो फल पाए
ओ प्रभु जी
सदा रहूँ चरणों में तेरे
बन के तेरा पुजारी
मेरी अरज सुनो बनवारी
अरज सुनो बनवारी
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
बनवारी बनवारी
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
दाता के तो भरे खजाने
फिर क्यूँ तू घबराये
गणग से एक लोटा भर लो
गंगा का क्या जाये
ओ बंधुआ
पलकें मूँद के मन में प्रभु का
ध्यान धरो नर नारी
मेरी अरज सुनो बनवारी
मेरी अरज सुनो बनवारी
पूरी कर दो मनोकामना
पूरी कर दो मनोकामना
आये शरण तिहारी
मेरी अरज सुनो बनवारी
अरज सुनो बनवारी
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
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Meri araj suno banwari-Khalifa 1976
किशोर कुमार के गाये गीत युवा पीढ़ी को बेहद पसंद
आते हैं. ऐसा नहीं है कि उनके मुरीदों में अधेढ़ उम्र
और ज्यादा उम्र वाले लोग नहीं हैं मगर युवा वर्ग कुछ
ज्यादा सुनता हैं उनके गानों को.
सुनते हैं किशोर कुमार का एक बेहद लोकप्रिय गीत
जिसे देव आनंद पर फिल्माया गया है. देव आनंद इसमें
टैक्सी चलाते हुए गाने पर होंठ हिला रहे हैं. एक टैक्सी
ड्राइवर कितने लोगों की पप्पी-झप्पी, तू तू मैं मैं का
राजदार होता है
आनंद बक्षी की रचना है और लक्ष्मी प्यारे का संगीत.
हमारे मित्र की याद अक्सर ऐसे गीतों में आती है जब
उनका Zaaneman zaaneman याद आता है.
गीत के बोल:
जानेमन जानेमन जानेमन जानेमन
हूँ हूँ हूँ जानेमन जानेमन
जानेमन किसी का नाम नहीं
फिर भी ये नाम होंठों पे न हो
ऐसी कोई सुबह नहीं शाम नहीं
जानेमन जानेमन जानेमन जानेमन
मैंने सिर्फ़ ख़यालों से ख़्वाबों की सेज सजाई है
दिल के खाली दीवारों पर इक तस्वीर बनाई है
मैंने सिर्फ़ ख़यालों से ख़्वाबों की सेज सजाई है
दिल के खाली दीवारों पर इक तस्वीर बनाई है
तस्वीरों पे मरता हूँ वक़्त गुज़ारा करता हूँ
मैं महबूब की गलियों का कोई आशिक़ बदनाम नहीं
जानेमन जानेमन जानेमन जानेमन
कल की बात ख़ुदा जाने पर आज तलक़ ये बात नहीं
दिल पे बादल छाये हैं पर आँखों में बरसात नहीं
कल की बात ख़ुदा जाने पर आज तलक़ ये बात नहीं
दिल पे बादल छाये हैं पर आँखों में बरसात नहीं
कैसा मैं दीवाना हूँ ऐसा मैं मस्ताना हूँ
प्यास तो है इन होंठों पर लेकिन हाथों में जाम नहीं
जानेमन जानेमन जानेमन जानेमन
जानेमन किसी का नाम नहीं
फिर भी ये नाम होंठों पे न हो
ऐसी कोई सुबह नहीं शाम नहीं
जानेमन जानेमन जानेमन जानेमन
………………………………………………..
Jaaneman jaaneman-Title song 1976
७० के दशक की लोकप्रिय फिल्मों में से एक है
जानेमन. इसमें हेमा मालिनी की दोहरी भूमिका
है. फिल्म रोचक कहानी, लोकप्रिय गीत, अखाड़ा
और भैंसों के तबेले के लिए जानी जाती है.
गीत में दोनों भूमिकाओं के दर्शन हो जाते हैं.
गीत के बोल:
इलाहाबाद में पैदा हुई
इलाहाबाद में पैदा हुई मैं जबलपुर में पली
अब बम्बई है अड्डा मेरा ये बदनाम सी गली
के मेरा नाम हाय राम हाय रामकली
मेरा नाम हाय राम हाय रामकली
इलाहाबाद में पैदा हुई मैं जबलपुर में पली
अब बम्बई है अड्डा मेरा ये बदनाम सी गली
के मेरा नाम हाय राम हाय रामकली
मेरा नाम हाय राम हाय रामकली
कैसे आई कहाँ आई ये जवानी मत पूछो
कैसे आई
हाँ कैसे आई कहाँ आई ये जवानी मत पूछो
शर्म आती है तौबा रे कहानी मत पूछो
के हाँ शालीमार के बाग में से बनी फूल ये कली
अब बम्बई है अड्डा मेरा ये बदनाम सी गली
के मेरा नाम हाय राम हाय रामकली
मेरा नाम हाय राम हाय रामकली
रब झूठ ना बुलाये कदरदान हर जगह हैं
रब झूठ ना बुलाये कदरदान हर जगह हैं
मेहरबान मेरे मेहरबान हर जगह हैं
रब झूठ ना बुलाये कदरदान हर जगह हैं
के हाँ लखनऊ के रंगीन शहर में सबा मैं बन के ढली
अब बम्बई है अड्डा मेरा ये बदनाम सी गली
के मेरा नाम हाय राम हाय रामकली
मेरा नाम हाय राम हाय रामकली
इलाहाबाद में पैदा हुई मैं जबलपुर में पली
अब बम्बई है अड्डा मेरा ये बदनाम सी गली
के मेरा नाम हाय राम हाय रामकली
मेरा नाम हाय राम हाय रामकली
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Mera naam haaye Ram-Jaaneman
खेत खलिहान हिट्स की ओर लौटते हैं एक बार फिर.
मस्ती भरा गीत है ये जिसमें छेड़ छाड़ भी है. १९७६
की हिट फिल्म बैराग का यह गीत है.
कैटेगरी बनाने वाले सयाने ऐसे गीतों को मियां-बीबी
हिट्स भी कहते हैं. ऐसे गीत जिसमें मियां बीबी हों.
दिलीप कुमार, सायरा बानो और ढेर सारे सहायक
कलाकारों पर फिल्माया गया गीत रफ़ी और लता ने
गाया है. आनंद बक्षी इसके रचनाकार हैं और इसका
संगीत कल्याणजी आनंदजी की देन है.
गीत के बोल:
अरे सुनो रे सुनो एक बात सुनाऊँ
ओए सुनो रे सुनो एक बात सुनाऊँ
झूठ है या सच है ये तुम जानो
अरे झूठ है या सच है ये तुम जानो
मैं बैरागी मैं बैरागी नाचूँ गाऊँ
मैं बैरागी नाचूँ गाऊँ
सुनो रे सुनो एक बात सुनाऊँ
अरे सुनो रे सुनो एक बात सुनाऊँ
झूठ है या सच है ये तुम जानो
झूठ है या सच है ये तुम जानो
मैं बैरागन मैं बैरागन नाचूँ गाऊँ
मैं बैरागन नाचूँ गाऊँ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ ओ ओ देखो इन बेदर्दों को छोड़ के लाज के पर्दों को
इन बेदर्दों को छोड़ के लाज के पर्दों को
गली-गली में औरतें छेड़ती फिरती हैं इन मर्दों को
आपने सच फ़रमाया है सच्चा शोर मचाया है
आपने सच फ़रमाया है सच्चा शोर मचाया है
मर्दों के दिन बीत गए औरत का ज़माना आया है
औरत का ज़माना आया है
मैं ना मानूं
तुम ना मानो
मैं क्या जानूँ
तुम क्या जानो
मैं तो सबका दिल बहलाऊँ
मैं बैरागी मैं बैरागी नाचूँ गाऊँ
मैं बैरागी नाचूँ गाऊँ
हो ओ ओ ओ लिखने वाला लिखता है इक ऐसा चश्मा बिकता है
लिखने वाला लिखता है इक ऐसा चश्मा बिकता है
जिस चश्मे के अन्दर से भई अंधों को भी दिखता है
अंधों को भी दिखता है
जग में ऐसे बंदे हैं बंदों के ऐसे धंधे हैं
जग में ऐसे बंदे हैं बंदों के ऐसे धंधे हैं
क्या करना है देख के जग को अच्छे हैं जो अंधे हैं
तू अनजाना
तू अनजानी
तू दीवाना
तू दीवानी
दीवाने को क्या समझाऊँ
मैं बैरागन मैं बैरागन नाचूँ गाऊँ
मैं बैरागन नाचूँ गाऊँ
………………………………………………………
Suno re suno ek baat sunaoon-Bairaag 1976
सृष्टि एक सराय ही तो है. भांति भांति यात्री अपने
चोले में जीवन यात्रा व्यतीत करने हेतु यहाँ आते हैं.
कोई मनुष्य के चोले में तो कोई पेड़-पौधे या जानवर
के चोले में आता है. सबकी एक्सपायरी डेट है. किसी
की कुछ क्षण तो किसी की हज़ारों साल.
सुनते हैं एक फिलोसोफ़िक गीत फिल्म बालिका वधु
से. आनंद बक्षी की रचना है जिसे भूपेंद्र ने स्वर दिया
है आर डी बर्मन के संगीत निर्देशन में.
गीत के बोल:
जगत मुसाफ़िरखाना
लगा है आना जाना
जगत मुसाफ़िरखाना
लगा है आना जाना
चाँद छुपे तो सूरज निकले
सूरज डूबे हो जाये शाम
चाँद छुपे तो सूरज निकले
सूरज डूबे हो जाये शाम
रुत आये रुत जाये मौसम
आने जाने का है नाम
हो जोगी किसका ठौर ठिकाना
लगा है आना जाना
देखे पहुँचे कौन कहाँ पर
राही निकला गाता हँसता
देखे पहुँचे कौन कहाँ पर
राही निकला गाता हँसता
सबकी अपनी अपनी मंज़िल
अपना अपना रस्ता
हो जोगी जीवन पथ अनजाना
लगा है आना जाना
चार दिनों का मेल है भैया
जिसने सारे खेल रचाये
चार दिनों का मेल है भैया
जिसने सारे खेल रचाये
माँ बच्चों से मिलने आये
फिर वापस घर जाये
हो जोगी ये दस्तूर पुराना
लगा है आना जाना
जगत मुसाफ़िरखाना
लगा है आना जाना
…………………………………………………..
Jagat musafirkhana-Balika Vadhu 1976
बाल गीतों में अगला पेश है फिल्म बारूद से. वो
गीत जिनका सम्बन्ध बच्चों से होता है उन्हें हम
बाल गीत कहते हैं.
फिल्म बारूद के लिए इस गीत को आनंद बक्षी ने
लिखा है. मुकेश और शिवांगी कोल्हापुरे की आवाजें
हैं, एस डी बर्मन का संगीत.
गीत के बोल:
तू शैतानों का सरदार है
सच है
हरदम लड़ने को तैयार है
सच है
ओ तेरे हाथों मेरा जीना दुश्वार है
डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
हो डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
शैतानों का सरदार है
सच है
हरदम लड़ने को तैयार है
सच है
ओ तेरे हाथों मेरा जीना दुश्वार है
डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
हो डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
मार के ठोकर मेज का कोना तोड़ दिया है
मेरा तो हर सपन सलोना तोड़ दिया है
मार के ठोकर मेज का कोना तोड़ दिया है
मेरा तो हर सपन सलोना तोड़ दिया है
और अपना भी हर एक खिलौना तोड़ दिया है
और अब जाने क्या तोड़े कोई एतबार है
डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
हो डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
सोचा था तू मेरे कितने काम करेगा
पढ़ लिख कर दुनिया में रोशन नाम करेगा
सोचा था तू मेरे कितने काम करेगा
पढ़ लिख कर दुनिया में रोशन नाम करेगा
तू तो मेरा नाम भी बदनाम करेगा
तुझको समझाने की हर कोशिश बेकार है
डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
ओ डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
क्या जंगल का राजा कभी मोर बनेगा
शेर का बेटा क्या इतना कमज़ोर बनेगा
अरे क्या जंगल का राजा कभी मोर बनेगा
शेर का बेटा क्या इतना कमज़ोर बनेगा
मैं सिपाही बना तू शायद चोर बनेगा
क्या कहूँ तू फूल है या काँटों का हार है
डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
…………………………………………………
Too shaitanon ka sardar hai-Barood 1976
रवींद्र जैन ने हिंदी फिल्म संगीत के दो फेमस तोता-मैना गीत रचे हैं. एक आप सुन चुके हैं जो चोर मचाये शोर फिल्म में है. दूसरा आज सुनते हैं जो सन १९७६ की फिल्म फ़कीरा में है. दोनों के गीतकार-संगीतकार रवींद्र जैन हैं.
दोनों फिल्मों के नायक शशि कपूर हैं, बस नायिकाएं बदल गयी है. चोर मचाये शोर में मुमताज़ हैं तो इस फिल्म में शबाना आज़मी. रवींद्र जैन ने गायक कलाकार भी बदला है इस गीत के लिए. गायिका वही हैं-लता मंगेशकर. दोनों ही गीत अपने अपने समय के बड़े हिट गाने रहे हैं. आज भी इन्हें बड़े चाव से सुना जाता है.
गीत के बोल:
तोता मैना की कहानी तोता मैना की कहानी तो पुरानी पुरानी हो गई हो तोता मैना की कहानी तो पुरानी पुरानी हो गई अब है सबके लबों पर ये ताज़ा ख़बर एक लड़की दीवानी हो गई तुझसे मिल के ज़िंदगानी तुझसे मिल के ज़िंदगानी हाय कितनी सुहानी हो गई मिलते ही नज़र हुआ ऐसा असर मैं फ़कीरे की रानी हो गई तोता मैना की कहानी तो पुरानी पुरानी हो गई
कहीं कोई न था दूर दूर तक हम जिसको हमारा कहते हम जिसको हमारा कहते तू न मिलता अगर सूनी राह पर पिया हम बेसहारा रहते पिया हम बेसहारा रहते ए मेरे हमसफ़र चाहने वालों पर ए मेरे हमसफ़र चाहने वालों पर वक़्त की मेहरबानी हो गई
तोता मैना की कहानी तो पुरानी पुरानी हो गई
तू रंग है मैं हूँ ख़ुशबू गुल खिलते हैं अपने मिलन से गुल खिलते हैं अपने मिलन से तेरा मुखड़ा है सामने मेरे मुझे मतलब नहीं है चमन से मुझे मतलब नहीं है चमन से एक अपनी डगर एक अपना नगर एक अपनी डगर एक अपना नगर एक अपनी कहानी हो गई
तुझसे मिल के ज़िंदगानी हाय कितनी सुहानी हो गई तुझसे मिल के ज़िंदगानी हाय कितनी सुहानी हो गई मिलते ही नज़र हुआ ऐसा असर मैं फ़कीरे की रानी हो गई
तोता मैना की कहानी तो पुरानी पुरानी हो गई हो तोता मैना की कहानी तो पुरानी पुरानी हो गई ……………………………………………….. Tota maina ki kahani-Fakira 1976
रोचकता और भौंचकता जीवन को रंगीन बनाती हैं. अपने जीवन में इनका होना बहुत ज़रूरी है. बिना इनके जीवन नीरस और करेले का रस हो जायेगा. आज सुनते हैं एक रोचक गीत नायिका के लंबे बालों को समर्पित. ये किसी केश तेल का विज्ञापन नहीं बल्कि हिंदी फिल्म का गीत है.
सुनते हैं सन १९७६ की फिल्म सलाखें से यह गीत जिसे लिखा है हसरत जयपुरी ने और इसकी धुन तैयार की है रवींद्र जैन ने. गायिका हैं आशा भोंसले. स्टेज के कार्यक्रम में ये गीत गाया जा रहा है. शशि कपूर दर्शक दीर्घा में बैठे आनंद ले रहे हैं और नायिका स्टेज पर नाच रही है.
गीत के बोल:
मेरे देख के लंबे बाल मुझपे मरता है बंगाल मेरे देख के लंबे बाल मुझपे मरता है बंगाल ओ तेरे दिल में भी कुछ होता है तो जवाब दे मेरे देख के लंबे बाल
फूल जैसी है मेरी जवानी लोग कहें कश्मीर की रानी चेहरा मेरा सुबह बनारस जुल्फें अवध की शाम सुहानी रे शाम सुहानी मेरा देख के मस्त शबाब हुआ दीवाना पंजाब मेरा देख के मस्त शबाब हुआ रे हुआ हुआ दीवाना पंजाब ओ तेरे दिल में भी कुछ होता है तो जवाब दे मेरे देख के लंबे बाल
जब मैं ओढूं धानी चुनरिया लागूं जैसे बिजली गुजरिया पनिया भरने पनघट पे जाऊं के रास्ता रोके बांका संवरिया ओ बांका संवरिया नहीं झूठी मेरी शान मेरा प्यासा राजस्थान नहीं झूठी मेरी शान हाय रे मेरा प्यासा राजस्थान ओ तेरे दिल में भी कुछ होता है तो जवाब दे मेरे देख के लंबे बाल
सारी देश की शोभा लायी तेरे लिए मैं तो सज के आई रूप ने मेरे धूम मचाई दिल में सबके मैं ही समायी अरे मैं ही समायी अरे देख के मेरी चाल सारी दुनिया है बेहाल अजी देख के मेरी चाल सारी की सारी दुनिया है बेहाल ओ तेरे दिल में भी कुछ होता है होता है तो जवाब दे मेरे देख के लंबे बाल ........................................................................... Mere dekh le lambe baal-Salaakhen 1976
७० के दशक में अगर प्रमुख संगीतकारों के गीत
लोकप्रिय थे तो कुछ अनजाने और कम सुने गए
संगीतकारों के गीत भी लोकप्रिय हुए.
कुछ गीत जैसे जिंदगी और तूफ़ान का-मौसम आवारा
है, जान हाज़िर है का-हम न रहेंगे तुम ना रहोगे
दशक के मध्य में कागज़ की नाव फिल्म का ये
गाना भी लोकप्रिय था. हाँ लोकप्रियता कम ज्यादा
थी, मैं मानता हूँ.
नक्श लायलपुरी की रचना है और सपन जगमोहन
का संगीत. इसे स्वर दिया है आशा भोंसले और
मनहर ने. इसके पहले जो मनहर का युगल गीत
लोकप्रिय हुआ वो है-लूटे कोई मन का नगर फिल्म
अभिमान से.
गीत के बोल:
हर गीत के बोल चाहिए तो कम से कम
कमेन्ट बॉक्स में कुछ लिख तो दिया करें.
.
चिड़िया भी दाना खा के चूं चूं कर के जाती है
या बीट कर जाती है, कुछ तो करो भाई लोग
.
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Har janam mein hamara Milan-Kagaz ki naav 1976
जवानी जब आती है तब हर जगह से फूट फूट कर बाहर
टपकने को बेक़रार रहती है. इसे संभालना बड़ा ही मुश्किल
काम है. चेहरे पर ये मुहांसे की शक्ल में बाहर आती है.
आप किसी प्राकृतिक प्रक्रिया को रोक सकते हैं भला. इस
मानव जीवन की यही तो अवस्था है जिसपर हजारों कसीदे
काढे जा सकते हैं. किसी गीतकार को बुढापे की तारीफ
करते सुना है आपने?
सुनते हैं फिल्म दीवानगी से एक गाना आशा भोंसले की
आवाज़ में. नक्श लायलपुरी के बोल हैं और रवींद्र जैन का
संगीत.
गाना ऐसा है जैसे नायिका सिनेमा हॉल के फ्रंट बेंचर्स से
कुछ पूछ रही हो. हरे रंग की पोशाक में नायिका बढ़िया
किस्म का पन्ना नज़र आ रही है. मेज पर जो सेब रखा
है वो भी हरे रंग का है. कांच के गिलास जो रंगीन द्रव्य
है बस उसे भी हरे रंग का होना था.
गीत के बोल:
ला ला ला ला ला ला ला ला
रू रू रू रू रू रू रू
मेरी जवानी करे इशारे
तुझे बुलाये तुझे पुकारे
तू ऊपर नीचे आगे पीछे
क्या देख रहा है सुन सुन सुन
मेरी जवानी करे इशारे
तुझे बुलाये तुझे पुकारे
ये तो अच्छी अदा नहीं जाना
पीने वाला ही तोड़े पैमाना
हो ये तो अच्छी अदा नहीं जाना
पीने वाला ही तोड़े पैमाना
हो ओ ओ ओ जाने भी दे अब जो हुआ सो हुआ
हो ओ ओ मैं पास हूँ तो रहे जाने जान
तू ऊपर नीचे आगे पीछे
क्या देख रहा है रुक रुक रुक
गैर कोई नहीं है कमरे में
सारी बातें रहेंगी परदे में
गैर कोई नहीं है कमरे में
सारी बातें रहेंगी परदे में
हो ओ ओ माने बुरा क्यों मेरी बात का
रे क्या फायदा इस मुलाकात का
तू ऊपर नीचे आगे पीछे
क्या देख रहा है सुन सुन सुन
मेरी जवानी करे इशारे
तुझे बुलाये तुझे पुकारे
………………………………………….
Meri jawani kare ishare-Deewangi 1976
विडम्बना है कि कभी कभी महान दिखाई सुनाई देने वालों की कलई
खुलती है तो वो जनता को महा-चोर नज़र आते हैं. जीवन में जो
उजागर है ज़रूरी नहीं वो सही हो और जो छुपा हुआ हो वो झूठ होना
ज़रूरी नहीं.
सन १९७६ की फिल्म है महाचोर जिसमें काका और नीतू सिंह प्रमुख
कलाकार हैं. नरेन्द्र बेदी निर्देशित इस फिल्म में कलाकारों की अगली
पिछली दो पीढ़ी के ढेर सारे कलाकार मौजूद हैं-मनोरमा, प्रेम चोपड़ा,
कामिनी कौशल, अनवर हुसैन, प्रतिमा देवी, पिंचू कपूर, नर्बदा शंकर,
जगदीश राज, विजू खोटे, बीरबल, सोनिया साहनी इत्यादि. फिल्म के
अवयय सारे मौजूद हों तो भी ज़रूरी नहीं फिल्म बड़ी हिट हो जाए.
कहीं ना कहीं ऐसा कुछ रह जाता है जिसे जनता ढूंढती रह जाती है.
एक तो समय भी फेक्टर है जैसे आपकी आज मटर आलू की सब्जी
खाने का मन हो और आप उसे तीन दिन बाद खाएं. वो एनथूसीयाज्म
नहीं होता ३ दिन के बाद. दर्शकों का मन पकड़ना वैसा ही है जैसे
१०० किलोमीटर की रफ़्तार से चलती हवा में ये ढूँढना कि उसमें धूल
उड़ रही है या पराग कण.
गीत सुन्ब्ते हैं जिसे आनंद बक्षी ने लिखा है और इसका संगीत तैयार
किया है आर डी बर्मन ने. किशोर और आशा इसके गायक हैं. गीत की
पञ्च लाइन है-राम तेरा भला करे.
गीत के बोल:
मीठी मीठी अंखियों से मन भर दे मीठी मीठी अंखियों से मन भर दे किसी दिन मेरा दिल खुश कर दे राम तेरा भला करे आहे मीठी मीठी अंखियों से मन भर दे किसी दिन मेरा दिल खुश कर दे राम तेरा भला करे
छोटी सी उम्र में ये रोग ले लिया तेरे लिए जग छोड़ा जोग ले लिया छोटी सी उम्र में ये रोग ले लिया तेरे लिए जग छोड़ा जोग ले लिया बन के मैं जोगी कहूँ जोगन से किसी दिन मेरा दिल खुश कर दे राम तेरा राम तेरा भला करे मीठी मीठी अंखियों से मन भर दे ऐ किसी दिन मेरा दिल खुश कर दे राम तेरा के राम तेरा भला करे
तेरी तस्वीर ऐसे मन में बसी जैसे मंदिर में कोई मूर्ति हो तेरी तस्वीर ऐसे मन में बसी जैसे मंदिर में कोई मूर्ति अ देवी कभी भक्तों को दर्शन दे किसी दिन मेरा दिल खुश कर दे राम तेरा राम तेरा भला करे
हाय हाय कर राम राम मत कर भक्तों का नाम बदनाम मत कर हाय हाय कर राम राम मत कर भक्तों का नाम बदनाम मत कर रूप ना बदल जा रे बहरूपिये किसी दिन मेरा दिल खुश कर दे राम तेरा राम तेरा भला करे प्यारी प्यारी बतियों से मन भर दे किसी दिन मेरा दिल खुश कर दे राम तेरा राम तेरा भला करे ………………………………………………………..
Meethi meethi ankhiyon se-Maha chor 1976
प्रेमी प्रेमिकाओं के ऐतिहासिक किस्से रोचक हैं तो दु:खद भी.
लैला मजनू की कहानी काफी प्रसिद्ध है और इसपर कई फिल्मों
का निर्माण हो चुका है.
आज सुनते हैं फिल्म का एक कम सुना गया गीत जिसे रफ़ी ने
गाया है. बोल साहिर के हैं और संगीत जयदेव का. मदन मोहन
के निधन के बाद जयदेव ने फिल्म के २-३ गीत कम्पोज किये
थे, ये शायद उन्हीं में से एक है.
गीत के बोल:
क़ज़ा ज़ालिम सही
ये ज़ुल्म वो भी कर नहीं सकती
जहाँ में क़ैस ज़िंदा है
तो लैला मर नहीं सकती
ये दावा आज ये दावा आज
ये दावा आज दुनिया भर से मनवाने की ख़ातिर आ
ये दावा आज दुनिया भर से मनवाने की ख़ातिर आ
ये दावा आज दुनिया भर से मनवाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है ज़िद
ये दीवाने की ज़िद
हाँ ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ
तेरे दर से मैं खाली लौट जाऊँ क्या क़यामत है
तेरे दर से
तेरे दर से मैं खाली लौट जाऊँ क्या क़यामत है
तू मेरी रूह का काबा
तू मेरी रूह का काबा मेरी जान-ए-इबादत है
मेरी जान-ए-इबादत है
ज़बीन-ए-शौक ज़बीन-ए-शौक
ज़बीन-ए-शौक के सजदों को अपनाने की ख़ातिर आ
ज़बीन-ए-शौक के सजदों को अपनाने की ख़ातिर आ
ज़बीन-ए-शौक के सजदों को अपनाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ
मेरी दीवानगी
मेरी दीवानगी की मेरी वहशत की क़सम तुझको
मेरी दीवानगी की मेरी वहशत की क़सम तुझको
मेरी दीवानगी
ग़ुरूर-ए-इश्क़ की नाज़-ए-मोहब्बत की क़सम तुझको
ग़ुरूर-ए-इश्क़ की नाज़-ए-मोहब्बत की क़सम तुझको
ज़माने को ज़माने को
ज़माने को वफ़ा की शान दिखलाने की ख़ातिर आ
ज़माने को वफ़ा की शान दिखलाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है ज़िद
ये दीवाने की ज़िद है ज़िद है ज़िद है ज़िद
ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ
मैं तेरे हुस्न का सदका उतारूँ सामने आ जा
मैं तेरे हुस्न का सदका उतारूँ सामने आ जा
तू मेरे सामने आ जा तू मेरे सामने आ जा
गिरेबाँ धज्जियाँ कर कर के वारूँ सामने आ जा
गिरेबाँ धज्जियाँ कर कर के वारूँ सामने आ जा
शिकस्तापर शिकस्तापर
शिकस्तापर परेशाँ-हाल परवाने की ख़ातिर आ
शिकस्तापर परेशाँ-हाल परवाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ
ज़बीन-ए-शौक के सजदों को अपनाने की ख़ातिर आ
ज़माने को वफ़ा की शान दिखलाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ
तू बस एक बार आ अपने दीवाने की ख़ातिर आ
तू बस एक बार आ अपने दीवाने की ख़ातिर आ
तू बस एक बार
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Ye daava hai aaj-Laila Majnu 1976
हिंदी फिल्म सिनेमा इतिहास में ऐसी फ़िल्में कम हैं जिनमें किसी
नायक का ट्रिपल रोल हो. सबसे पहले मुझे बैराग फिल्म ही ध्यान
आती है जिसमें दिलीप कुमार का ट्रिपल रोल है. उसके अलावा एक
और फिल्म याद आती है अमिताभ की महान जिसमें अमिताभ ने
तीन किरदार निभाए थे.
बैराग फिल्म अपने ज़माने की सुपरहिट फिल्म है और इसके गाने
भी खूब बजे. फिल्म से आपको एक रफ़ी का गीत सुनवाते हैं जिसे
आनंद बक्षी ने लिखा है. कल्याणजी आनंदजी ने इसका संगीत तैयार
किया है.
गीत के बोल:
पीते-पीते कभी-कभी यूं जाम बदल जाते हैं पीते-पीते कभी-कभी यूं जाम बदल जाते हैं जाम बदल जाते हैं जाम बदल जाते हैं अरे काम बदल जाते हैं लोगों के नाम बदल जाते हैं लोगों के नाम बदल जाते हैं पीते-पीते कभी-कभी यूं जाम बदल जाते हैं
ये परवाना ए शमा मेहमां है इक रात का ये परवाना ए शमा मेहमां है इक रात का दिल की बातें छेड़ दूं डर है बस इस बात का यहाँ से वहाँ तक जाने में वहाँ से यहाँ तक आने में लोग ये कहते हैं जी लोग ये कहते हैं जी बंद लिफ़ाफ़े में भी दिल के पैग़ाम बदल जाते हैं
पीते पीते पीते-पीते कभी-कभी यूं जाम बदल जाते हैं
दो रुख हर तस्वीर के हैरां हूँ मैं देख के हैरां हूँ मैं देख के है इक चेहरा और भी चेहरे पे हर एक के चेहरे पे हर एक के नजर को नजर जो आता है फ़रेबी नज़र कहलाता है नींद के इक झोंके से आँख के इस धोखे से आँख के इस धोखे से राम और श्याम बदल जाते हैं
पीते पीते पीते-पीते कभी-कभी यूं जाम बदल जाते हैं पीते-पीते कभी-कभी यूं जाम बदल जाते हैं पीते-पीते कभी-कभी यूं जाम बदल जाते हैं पीते-पीते कभी-कभी यूं जाम बदल जाते हैं .........................................................................
Peete peete kabhi kabhi yun jaam-Bairaag 1976
Artists: Dilip Kumar, Leena Chandavarkar, Saira Bano
अनजान फिल्मों से गीतों की श्रृखंला में आज पप्रस्तुत है फिल्म
आरम्भ से एक युगल गीत मुकेश और आरती मुखर्जी का गाया
हुआ. शकील अहमद के लिखे बोलों की तर्ज़ बनाई है संगीतकार
आनंद शंकर ने.
ऑफ बीट फिल्म आरम्भ का निर्देशन ज्ञान कुमार ने किया है
और इसमें किशोर नामित कपूर, राकेश पांडे और रमा विज़ जैसे
कलाकारों ने काम किया है.
आरती मुखर्जी बंगाल में एक बेहद लोकप्रिय नाम है और उन्होंने
कई हिंदी फिल्मों के लिए गीत गाये हैं. उनके प्रमुख लोकप्रिय गीतों
में तपस्या का दो पंछी, मासूम का दो नैना एक कहानी हैं.
गीत के बोल:
वादियों में खो जाएं हम तुम
आओ इन वादियों में खो जाएं हम तुम
हम तुम
ये समा है सुहाना
हाँ जी हाँ सुहाना
हो जाएं गुमसुम
हो हो हो हो वादियों में खो जाएं हम तुम
आओ इन वादियों में खो जाएं हम तुम
हम तुम
ये समा है सुहाना
हाँ जी हाँ सुहाना
हो जाएं गुमसुम
मुझे दोनों जहाँ की मिल गई हैं ख़ुशियाँ
तुम जो मिले हमराही मिले
दिल का ये चमन फिर लगा मुस्कुराने
अरमानों के हैं फूल खिले
सहारा तुम ही तो हो सहारा
हाँ जी हाँ सहारा
चलते जाएं हम
प्यारा ये समा है मौसम भी जवाँ है
चारों तरफ़ हुस्न की दास्ताँ है
मुझे लगता है जैसे हमें देख कर ये
लगा मुस्कराने ज़मीं आसमां है
दीवाना प्यार में हो के दीवाना
जैसे ये सारा ज़माना
अपनी धुन में ग़ुम
आ हाँ हाँ हाँ वादियों में खो जाएं हम तुम
आओ इन वादियों में खो जाएं हम तुम
हम तुम
ये समा है सुहाना
हाँ जी हाँ सुहाना
हो जाएं गुमसुम
ओ हो हो हो वादियों में खो जाएं हम तुम
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Wadiyon mein kho jayen-Aarambh 1976
एक और लोकप्रिय गीत सुनते हैं आज. ये एक बड़ा हिट गीत है
और रीना रॉय इसे परदे पर गा रही हैं. कल्याणजी आनंदजी के
लिए इन्दीवर ने काफी गीत लिखे हैं. इस फिल्म में इन्दीवर का
लिखा एक भी गीत नहीं है. कालीचरण फिल्म के लिए दो गीतकारों
से गाने लिखवाये गए-इन्द्रजीत सिंह तुलसी और रवींद्र जैन.
पंजाबी फ्लेवर वाला गीत है और गीत में भांगडा नाच हो रहा है.
कॉलेज की लड़कियां पिकनिक मनाने के लिए पहाड़ी क्षेत्र में गयी
हैं, वहीं उनके द्वारा एक कार्यक्रम हो रहा है.
गीत के बोल:
हो ओ ओ ओ ओ
जा रे जा
जा रे जा ओ हरजाई देखी तेरी दिलदारी
दिल दे कर मैं कर बैठी दिल के दुश्मन से यारी
तुझको आँखों में भर के
तुझको आँखों में भर के
मर गई मैं तुझपे मर के
पत्थर की पूजा कर के हारी मैं हारी
जा रे जा
जा रे जा ओ हरजाई देखी तेरी दिलदारी
दिल दे कर मैं कर बैठी दिल के दुश्मन से यारी
हो ओ ओ ओ ओ ओ तेरे पीछे आँखें मींचे चल दी मैं दीवानी
हाय छोड़ के दुनिया सारी हो ओ ओ ओ
लोगों ने कितना समझाया मैंने एक न मानी
मेरी मति गई थी मारी
यूँ न कोई मरे
यूँ न कोई मरे रब्बा ख़ैर करे हो ओ ओ ओ
हँसी हँसी में फँस गई मैं तो बेचारी
जा रे जा
जा रे जा ओ हरजाई देखी तेरी दिलदारी
दिल दे कर मैं कर बैठी दिल के दुश्मन से यारी
हो ओ ओ ओ ओ ओ बिन सोचे बिन जाने मैंने ओ रे ओ बेगाने
तुझे सौँप दिया जीवन को ओ ओ ओ ओ
जैसे ख़ुश्बू नज़र ना आये रंग छुआ ना जाये
वैसे जान सकी ना तेरे मन को
फिर भी चाहा तुझे
फिर भी चाहा तुझे तू न समझा मुझे हो ओ ओ ओ
बन के पहेली रह गई प्रीत हमारी
जा रे जा
जा रे जा ओ हरजाई देखी तेरी दिलदारी
दिल दे कर मैं कर बैठी दिल के दुश्मन से यारी
तुझको आँखों में भर के
तुझको आँखों में भर के
मर गई मैं तुझपे मर के
पत्थर की पूजा कर के हारी मैं हारी
जा रे जा
जा रे जा ओ हरजाई देखी तेरी दिलदारी
दिल दे कर मैं कर बैठी दिल के दुश्मन से यारी
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Ja re ja o harjai-Kalicharan 1976
हिंदी फिल्मों के नाम में सभी प्रकार के शब्दो का प्रयोग हो चुका
है. शब्दकोष के सारे शब्दों का प्रयोग तो संभव नहीं मगर वैराईटी
की बात की जाए तो काफी अनूठे किस्म के नाम भी हमें देखने
को मिले-राजा रानी को चाहिए पसीना जैसे.
सुनते हैं तपस्या फिल्म से एक गीत. गौरतलब है त्याग, बैराग
सन्यासी, ब्रह्मचारी, पुजारी, पुजारिन जैसे नामों वाली फ़िल्में मौजूद
हैं.
प्रस्तुत गीत किशोर कुमार ने गाया है. एम जी हशमत गीतकार हैं
और रवीन्द्र जैन संगीतकार. आम तौर पर रवीन्द्र जैन ने अपने गीत
खुद लिखा मगर कुछ फिल्मों में आपको दूसरे गीतकारों के लिखे
गीत भी मिल जायेंगे.
गीत के बोल:
जो राह चुनी तूने अरे जो राह चुनी तूने
उसी राह पे राही चलते जाना रे
हो कितनी भी लम्बी रात अरे हो ओ ओ ओ
हो कितनी भी लम्बी रात दिया बन जलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
जो राह चुनी तूने उसी राह पे राही चलते जाना रे
कभी पेड़ का साया पेड़ के काम न आया हो ओ ओ
कभी पेड़ का साया पेड़ के काम न आया
अरे सेवा में सभी की उसने जनम बिताया हो ओ ओ
कोई कितने भी फल तोड़े अरे हो ओ ओ
कोई कितने भी फल तोड़े उसे तो है फलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
तेरी अपनी कहानी ये दर्पण बोल रहा है हो ओ ओ ओ
तेरी अपनी कहानी ये दर्पण बोल रहा है
भीगी आँख का पानी हक़ीकत खोल रहा है हो ओ ओ ओ
जिस रंग में ढाले अरे हो ओ ओ
जिस रंग में ढाले वक़्त मुसाफ़िर ढलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
जीवन के सफ़र में ऐसे भी मोड़ हैं आते हो ओ ओ ओ
जीवन के सफ़र में ऐसे भी मोड़ हैं आते
जहाँ चल देते हैं अपने भी तोड़ के नाते ऐ ऐ ऐ
कहीं धीरज छूट न जाये अरे हो ओ ओ ओ
कहीं धीरज छूट न जाये तू देख सम्भलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
तेरे प्यार की माला कहीं जो टूट भी जाये हो ओ ओ
तेरे प्यार की माला कहीं जो टूट भी जाये
जनमों का साथी कभी जो छूट भी जाये ऐ ऐ ऐ
दे दे कर झूठी आस अरे हो ओ ओ ओ
दे दे कर झूठी आस तू खुद को छलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
हो कितनी भी लम्बी रात अरे हो ओ ओ ओ
हो कितनी भी लम्बी रात दिया बन जलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
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Jo raah chuni tone-Tapasya 1976
एक गीत सुनते हैं बालिका वधु से. सचिन और रजनी शर्मा अभिनीत
इस फिल्म में कुछ अच्छे गीत हैं. ये गीत अमित कुमार के शुरू के
कुछ गीतों में से एक है.
गीत आनंद बक्षी का है जिन्होंने इस फिल्म का एक गीत स्वयं गाया
भी है. संगीतकार हैं आर डी बर्मन. इस गीत में उनकी आवाज़ भी है.
कुछ एक्स्ट्रा दर्द वाली वायलिन की आवाज़ के साथ गीत शुरू होता है.
इसका एक हलवाई वर्ज़न भी मैंने कई साल पहले सुना था-बड़े अच्छे
लगते हैं ये बर्फी, ये पेड़ा, ये लड्डू और तुम.
गीत के बोल:
बड़े अच्छे लगते हैं
बड़े अच्छे लगते हैं के ये धरती ये नदिया ये रैना
और और तुम
बड़े अच्छे लगते हैं ये धरती ये नदिया ये रैना
और और तुम
ओ माझी रे जईयो पिया के देस
हम तुम कितने पास हैं कितने दूर हैं चाँद सितारे
सच पूछो तो मन को झूठे लगते हैं ये सारे
हम तुम कितने पास हैं कितने दूर हैं चाँद सितारे
सच पूछो तो मन को झूठे लगते हैं ये सारे
मगर सच्चे लगते हैं ये धरती ये नदिया ये रैना
और और तुम
तुम इन सबको छोड़ के कैसे कल सुबह जाओगी
मेरे साथ इन्हें भी तो तुम याद बहुत आओगी
तुम इन सबको छोड़ के कैसे कल सुबह जाओगी
मेरे साथ इन्हें भी तो तुम याद बहुत आओगी
बड़े अच्छे लगते हैं ये धरती ये नदिया ये रैना
और और तुम
बड़े अच्छे लगते हैं
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Bade achchhe lagte hain-Balika vadhu 1976
सुनील दत्त और रेखा पर फिल्माया गया एक गीत आपने सुना. एक
और गीत सुनते हैं इसी जोड़ी पर फिल्माया गया जो सन १९७६ की
फिल्म नागिन से है. ३ साल के अंतराल में अभिनेत्री रेखा के चेहरे
में काफी परिवर्तन आया जबकि सुनील दत्त के चहरे में ज्यादा बदलाव
नहीं है. रेखा के चेहरे पर परिपक्वता के भाव उभरने शुरू हो गए और
जो मासूमियत सावन भादों वाली थी वो धीरे धीरे कम होती चली.
अभिनय में पहले से ज्यादा निखार है.
वर्मा मालिक के लिखे गीत को गाया है रफ़ी और आशा ने लक्ष्मी प्यारे
की धुन पर.
गीत के बोल:
तेरे इश्क़ का मुझपे हुआ ये असर है
तेरे इश्क़ का मुझपे हुआ ये असर है
न अपनी ख़बर है न दिल की ख़बर है
तेरे इश्क़ का मुझपे हुआ ये असर है
तेरे इश्क़ का मुझपे हुआ ये असर है
जिधर देखती हूँ तू आता नज़र है
तेरे इश्क़ का मुझपे हुआ ये असर है
तेरे इश्क़ का मुझपे हुआ ये असर है
मुझे प्यार ऐसे तुम्हारा मिला है
के कलियों को जैसे नज़ारा मिला है
यूँ शीशे में मुझको इशारा मिला है
के तूफ़ाँ को जैसे किनारा मिला है
तेरी ही नज़र पे ये मेरी नज़र है
तेरे इश्क़ का मुझपे हुआ ये असर है
तेरे इश्क़ का मुझपे हुआ ये असर है
ये जी चाहता है ओ मेरे सनम
के दो की जगह एक हो जाएँ हम
तेरे हाथ है मौत और ज़िन्दगी
लो अब आ गई फ़ैसले की घड़ी
होता नहीं अब तो मुझसे सबर है
तेरे इश्क़ का मुझपे हुआ ये असर है
तेरे इश्क़ का मुझपे हुआ ये असर है
न अपनी ख़बर है न दिल की ख़बर है
तेरे इश्क़ का मुझपे हुआ ये असर है
तेरे इश्क़ का मुझपे हुआ ये असर है
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Tere ishq ka mujhpe hua ye asar-Nagin 1976
फिल्म बैराग का ये गीत काफी एनर्जी वाला है. उसके अलावा ये
मनोरंजक भी है. २३ अगस्त १९४४ को जन्मी सायरा बानो ने
दिलीप कुमार से शादी की सन १९६६ में.
आज सायरा बानो के जन्मदिन पर सुनते हैं लता मंगेशकर का
गाया ये गीत. गीत के बोल हैं आनंद बक्षी के और इसका संगीत
तैयार किया कल्याणजी आनंदजी की जोड़ी ने.
गीत के बोल:
छोटी सी उमर में लग गया रोग
छोटी सी उमर में लग गया रोग
कहते हैं लोग मैं मर जाउँगी
हो ओ ओ मैं मर जाउँगी
छोटी सी उमर में लग गया रोग
कहते हैं लोग मैं मर जाउँगी
हो मैं मर जाउँगी
पर मरने से पहले कुछ करने से पहले
ले के तेरा नाम तुझे बदनाम
मैं कर जाऊँगी हो मैं मर जाऊँगी
हो ओ ओ ओ ओ ओ
ये किसी सहरी छोरी की
प्रीत नहीं है बाबू
ये किसी सहरी छोरी की
प्रीत नहीं है बाबू
एक बंजारन के मतवारे
नैनों का है जादू
तू न जा मेरी मुसकान पे
खेल जाऊँगी मैं जी जान पे
छोड़ूँगी ना साथ
ऐसी क्या है बात के मैं डर जाऊँगी
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
कब तलक रोकेगा मेरा
रस्ता लाज का पहरा
कब तलक रोकेगा मेरा
रस्ता लाज का पहरा
याद ये रखना तू सजना
ये मेरा वादा ठहरा
बाबुल की गलियाँ छोड़ के
आऊँगी चुनरिया ओढ़ के
लइके उमंग लइके उमंग
सैंयाँ तेरे संग तेरे घर जाऊँगी
हो मैं मर जाऊँगी
छोटी सी उमर में लग गया रोग
कहते हैं लोग मैं मर जाउँगी
हो मैं मर जाउँगी
……………………………………………………….
Chhoti si umar mein-Bairag 1976